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Shoonyakonn's Blog... ।शून्यकोण।

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15 Jun 2010
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इस बारिश में बूँदें कुछ कम गिरेंगी

दिल के दायरे की हद नहीं होती जज़्बात कोई हो, ग़म या खुशी ना करने की ज़िद नहीं होती
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होठों पर उफ़्फ़ है ये मदिरा साँच बराबर तप है ये मदिरा
Jun 10 2010 01:51 PM
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चलो श्मशान पर एक मचान बनायें

तो जीवन क्या ये श्मशान नहीं जलती चिता की पहचान नहीं ये जी जीवन सुलगता है और सुख दुख की आग होती है
Jun 08 2010 12:16 PM
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हम भी जियेंगे कभी खाक से निकलकर

बना उन्ही पत्थरों को निशाना हम फिर से गिर गिर जायेंगे हर हार के सीने से लिपट गल्तियाँ फिर वहीं दोहरायेंगे
Jun 06 2010 05:17 PM
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विलम्ब न करना तुरंत आना

विलम्ब न करना तुरंत आना छूटा साथ अधीर रहेगा होंठों पर कुछ चन्दन बाकी है अभी तो सांस महक रही है बहकी सांस अधीर रहेगी विलम्ब न करना तुरंत आना अभी तो आँखें बंद हैं सांझे स्वप्न बह रहे हैं बंद आँखें खुल न पाएंगी विलम्ब न करना तुरंत आना अभी तो हाथ भरे थे [...]
Jun 06 2010 04:32 AM
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चिट्ठी-1. प्रभू जी आपने T-20 क्यों बनाया?

प्रभू जी आपने T 20 क्यों बनाया? आपने Bradman, Gavaskar बनाये, आपने medium pacer कुंबले को और फिरकी Warne बनाया, आप स्वयं सचिन के रुप में साक्षात हुए, कितनी अच्छी बात है। आपने श्वेत कपड़ों को रंगा और लाल गेंद को श्वेत कर one day बनाया, आपने sledging और
Jun 05 2010 03:56 PM
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लिख-प्रदेश। An Ideal State.

एक प्रदेश सिर्फ़ लेखकों के लिये. जब धर्म, जाती, और भाषा के नाम पर नया प्रदेश माँगा जा सकता है तो पेशे के नाम पर क्यों नहीं, लेखन. माना की पेशा गिरा हुआ माना जाता है, बुरा समझा जाता है, आप कहते हैं की ये नीच से भी निम्न कोटि का है, लेखक को लगता है की ये
Jun 04 2010 02:27 PM
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हस्ती

बात बेबात कभी रुत है पलटती मस्ती कभी नशे सी है उतरती बनते बिगड़ते दायरों में टूटती-चढ़ती लहरों सी हस्ती
Jun 04 2010 01:58 PM