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एहसास प्यार का..

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17 Jun 2010
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रात के अंधरे में एक सन्नाटा है..

इस रात के बेपनाह अँधेरे में,एक सन्नाटा है...हवा एक सरगोशी सी कर रही...पूछ रही है ये हवा आज,इस गहरे सन्नाटे में तू आज चुप क्यों है..कोई गीत क्यूँ नहीं सुनाता...कोई नज़्म क्यूँ नहीं पेश करता...कौन  सी पुरानी बातों को मुट्ठी में बंद करूँ,कौन सा गीत पेश
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Jun 17 2010 10:00 PM
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उस दिन के बाद वैसी बारिश फिर नहीं हुई..

उस दिन तेज बारिश हो रही थी, आधी रात से ही..सुबह भी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी..बरामदे में एक स्कूटर लगी रहती थी, उसपे बैठा सोच रहा था, इतनी तेज बारिश हो रही है..वो आएगी क्या??उसने तो कहा था कल की वो आएगी...लेकिन  बारिश भी तो कम्ब्कख्त इतनी
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बारिश

आज की बरसात,बिलकुल वैसी ही है, जैसा पहले हुआ करती थी..एक ज़माने बाद बारिश में भीगने का मजा आया..एक ज़माने बाद फिर से वही मौसम लौटा..सब कुछ तो वैसा ही है, पर तुम नहीं हो..ये बूंदे जो चेहरे को छु के जा रही हैं,बार बार सवाल कर रही हैं मुझसे,तुम्हारे बारे में
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उस दिन..

कुछ  बात हुई थी उस दिन, कुछ ऐसे पल थे...वो पल वो दिन, अब फिर नहीं आयेंगे....ये कुछ लाइन मैंने उन्ही दिनों लिखी थी...जो मेरे साथ रहे उस पल वो जरूर समझ जायेंगे पूरी बात इन पंक्तियों को पढकर.. :)उसके चेहरे की उस वक्त हालत कुछ यूँ थी,होठों पे दबी सी
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एक नयी दुनिया बसाएं..

हम भी काश इन परिंदों की तरह,आकाश में कहीं दूर चल चलें..एक नया आसमान तलाशने..एक नयी दुनिया बसाने..जहाँ हर तरफ खुशी हो.. एक ऐसा जहाँ बनाये जहाँ,नफरत  की कोई जगह न हो..और प्यार कभी कम न हो..
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एक ट्रेन का सफर..कुछ खास यादें...शिखा और दिव्या...

ये  कोई कहानी नहीं, बल्कि मेरे कुछ अनमोल पलों में से एक हैं, अभी बस लिखने को दिल चाहा तो लिख दिया, ये कोई कहानी या रचना नहीं, इसलिए ये नहीं कह सकता की कितनो को अच्छा लगे ये पढ़ना और कितनो को बोर करेगी..लेकिन ये मेरे दिल के बहुत ही करीब है और कुछ एक
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खामोश रात

ये रात कितनी खामोश हैये रात कितनी तनहा..इस  सर्द रात में,कुछ लम्हे आते,जाते हैं आँखों में...दिल की धड़कने भी,इस रात के सन्नाटे में..एक अजीब आवाज़ कर रही हो जैसे...तुम्हारा नाम ले रही हो जैसे...तुम्हे पुकार रही हो जैसे...नींद तो रूठी हुई है आज..आज वो
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तुम बहुत याद आती हो

आज फिर उस पन्ने के तरफ धयान गया,लिखा था तुमने जिसपे,फिर मिलेंगे....सहेज के रखा है अब तक मैंने उस पन्ने को...की बस एक वही तो है जिसके वजह से,उम्मीद अब भी है मुझे, तुम वापस आओगे....उसी पन्ने के एक कोने पे ये भी लिखा था तुमने..हमेशा मुस्कुराते रहना,हर पल
May 15 2010 08:58 AM
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एहसास प्यार का..

माना की बहुत गम हैं तेरे फ़साने मेंमाना की दिल टूटा है तेरा भी ज़माने मेंपर एक बार नज़रें उठा के देख तो लो ऐ दोस्त..खुशियाँ फिर से आयीं हैं तेरे पास किसी बहाने से. 
Mar 08 2010 08:01 PM
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एहसास प्यार का..

"मैं अकेला रहता हूँ.."मैं अकेला रहता हूँ.. आते हैं लोग जाते हैं... मैं अकेला रहता हूँ..साथ कोई चलने वाला नहीं... जो साथी है वो साथ नहीं........है दूर कहीं अकेला ही इस भीड़ से झूझता हूँ ...मैं अकेला रहता हूँ...कहने को महफिल सजी रहती है आसपास... सामिल होके
Mar 05 2010 06:39 PM
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एहसास प्यार का..

कुछ बातें मेरी...नमस्ते दोस्तों.. साल 2008 मेरे लिए बड़ा ही दुखद रहा....इसलिए अपने दिल की कुछ बातें कविता के जरिये कहने की कोशिश कर रहा हूँ... आशा करता हूँ आप लोगों को पसंद आएगी....हंसी खोयी...खुसी खोयी.. जाने कहाँ जिंदगी खोयी... इस वर्ष में पूछो न कैसे
Mar 05 2010 06:38 PM
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जब हम छोटे थे

  कितनी मासूम थी जिंदगी, जब हम छोटे थेना दिल में मैल, न चेहरे पे मुखौटे थे...कितनी मासूम थी जिंदगी जब हम छोटे थेसुन ले कोई मेरे दिल की थोड़ी सी दास्तान...वक़्त किसी के पास इतना भी कहाँ आज,सीने पे लगा लेते थे दौड़ के लोग सभी,पहले कभी जब हम छोटी सी
Mar 05 2010 06:38 PM
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बिगड़ा मेरा नसीब

बिगड़ा मेरा नसीब तो सब कुछ संवर गयाकाँटों पे मैं गिरा और ज़माना गुज़र गयातूफान से थक गया, मैंने पतवार छोर दी जब मैं डूब चुका, समंदर ठहर गयाटुकड़े तेरे वजूद के,फैले थे मेरे पासउनको समटने में, मेरा वजूद बिखर गया मंजिल को ठुंठता रहा, मुसाफिर ये क्या
Feb 25 2010 05:59 PM
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कुछ बातें याद आती हैं...

कितनी बातें याद आती हैं...तस्वीरों सी बन जाती हैं...मैं कैसे इन्हें भूलूं..दिल को क्या समझाओंकितनी बातें कहने की हैं...होठों पे जो सहमी सी हैं...एक रोज़ इन्हें सुन लो..क्यूँ ऐसे गम सुम हो...क्यूँ पूरी हो न पायी दास्ताँ...कैसे आई हई ऐसी दूरियां ..
Jan 19 2009 10:16 AM