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13 Jun 2010
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बात अभी बाकी है ....

कुछ दिन की अस्वस्थता  की वजह से ब्लॉग जगत से दूर रहा. इस भयंकर व्यस्त युग में बिमारी आपको कुछ ख़ुशी के लम्हे भी दे जाती है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते.वो सभी लोग जिनसे आप बरसो बरस नहीं मिल पाते, मुबारक बीमारी  के मौके पर आपका दीदार कर ही
 
DR. PAWAN K MISHRA
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प्री-टेक्निक युग की खुदाई

नीम का पेड़छोटे -छोटे शालिग्रामकुए का ठंडा पानीऔर  पीपल की नरम छांहसुबह का कलेवा'अग्गा राजा दुग्गा दरोगा'गन्ने का रस और दहीसाथ में आलू की सलोनीगेरू और चूने सेलिपे पुते   घर मेंआँगन और तुलसीदरवाजे की देहरीताख में रखा दियाउजास का पहरियाबाबा
 
DR. PAWAN K MISHRA
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मेरी धरती

तुम जलती हो ,जो धूप मै देता हूँ.तुम भीगती हो,जो पानी मै उडेलता हूँ.तुम कांपती हो,जो शीत मै फैलता हूँ.सबकुछ समेटती हो,जो मै बिखेरता हूँ.तुम सहती होबिना किसी शिकायत केमेरी धरती,तुम रचती हो,सृष्टि  गढ़ती होऔर मै तुम्हारा आकाशतुम्हे बाहों में भरे
 
DR. PAWAN K MISHRA
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दोगलापन

दर्शन और व्यवहार का दोगलापन ही वह सहज चीज़ है जो इस जमाने को हर गुजरे जमाने से अलग करता है. हो सकता है किसी जमाने में आदमी ज्यादा बर्बर हिंसक या आक्रामक रहा हो लेकिन यह तय है की उस पशुत्व में भी कम से कम धोखाधड़ी न थी. हो सकता है की चंगेज़ो या नादिरशाहो
 
DR. PAWAN K MISHRA
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......आओगी तुम मुस्कराकर

बीता रात का तीसरा पहरतुम नहीं आयेआधा हुआ चंदा पिघलकरतुम नहीं आयेमै अकेला हूँ यहाँ परयादो की चादर ओढ़कररात भर पीता रहा ह ओस में चांदनी घोलकरफूल खिले है ताजे या तुमअपने होठ  भिगोये होहवा हुयी है गीली सी क्योंशायद तुम भी रोये होअब सही जाती
 
DR. PAWAN K MISHRA
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तुम्हारी याद ...............

अकेले में तुम्हारी याद आना अच्छा लगता है,तुम्ही से रूठना तुमको मनाना अच्छा लगता है।धुन्धलकी शाम जब मुंडेर से पर्दा गिराती है,सुहानी रात अपनी लत बिखेरे,पास आती है,तुम्हारा चाँद सा यूँ छत पे आना, अच्छा लगता है।फिजाओं में घुली रेशम नशीला हो रहा मौसम,ओढ़कर
 
DR. PAWAN K MISHRA
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हिन्दुस्तान बदल रहा है.......

महबूब-ए-मुल्क की हवा बदल रही है,ताजीरात-ए-हिंद की दफा बदल रही है.अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,और अफज़लो की सजा बदल रही है.बारूदी बू आ रही है नर्म हवाओ में,कोयल की भी मीठी ज़बा बदल रही है.सुबह की हवाखोरी भी हुई
 
DR. PAWAN K MISHRA
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ऋषि कलाम

आप मिसाइल मैन है याएक मिसाल ,जो हम जैसो के लिए बन गए है।लेकिन,आपको सटीक परिभाषित किया जा सकता है एक मशाल के रूप में । आपने ता-उम्र जलकररोशनी दी हैसौ करोड़ से अधिक आत्माओं के लिए आप बनगए है अक्षय ऊर्जा स्रोत। आपकी रहस्यमयी मुसकान मुझे चुनौती देती हैऔर
 
DR. PAWAN K MISHRA
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मेरे राम

मुल्क की उम्मीद-ओ -अरमान मेरे राम,इंसान की मुकम्मिल पहचान मेरे राम। शिवाला की आरती के प्रान मेरे राम,रमजान की अज़ान के भगवान् मेरे राम।काशी काबा और चारो धाम मेरे राम,ज़मीन पे अल्लाह का इक नाम मेरे राम।दर्द खुद लिया दिया मुसकान मेरे राम,ज़हान में मुहब्बते
 
DR. PAWAN K MISHRA
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किरण की सुधि

भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये,तुम आ जाओ पास में जो तो रुत रूमानी हो जाये।मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से ,रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।रेशम होती हुई हवाए तन से लिपटी जाती है,पुरवाई में बस जाओ तो प्रीत सयानी हो जाये।मन बधने सा
 
DR. PAWAN K MISHRA
May 31 2010 10:08 AM
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राम कहानी

इस दुनिया में सबकी अपनी राम कहानी है,कही छलकते पैमाने है कही आँख का पानी है।चौथेपन में सत्ता का रस छक कर मतवाले पीते है,गिरती पड़ती ठोकर खाती घायल नयी जवानी है। पढ़े लिखो की दुनिया में अनपढ़ का गुजारा कैसे हो,गले लगा कर गला दबाना आदत बहुत पुरानी है।रातो को
 
DR. PAWAN K MISHRA
May 30 2010 01:10 PM
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हराम का खाना

एक मेढ़ा और एक गाय दोनों साथ - साथ रहते थे। मेढ़े को खाने के लिए खूब हरी घास अनाज और ढेर सारी पौष्टिक चीजे मिलती जबकि गाय और उसके बछड़े को रूखा सूखा भूसा मिलता मेढा अपने भाग्य पर खूब घमंड करता। गाय का बछड़ा इस बात से परेशान होकर अपनी माँ से इसका कारण
 
DR. PAWAN K MISHRA
May 29 2010 04:46 PM
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पछुआ पवन

लो भइया हम भी ब्लाग की दुनिया में बहते - बहते आ गये आपको पछुआ पवन का मतलब बताते चले,यह तीव्र गतिशील हवा है जिसको लोग अलग अलग नाम से जानते है। कही यह वेस्टर्न विंड के नाम से जानी जाती है कही पछुआ । आप भी इसका आनंद उठाये (कुछ लोगो के लिए झेलना शब्द उपयुक्त
 
DR. PAWAN K MISHRA
May 17 2010 11:55 AM
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गुरुघंटाल

गुरूजी बन गए गुरुघंटाल देखिये,झऊआ भर काट रहे माल देखिये।हपते में आठ दिन व्रत रहते है,टमाटर से लाल हुए गाल देखिये।दिन में करे भजन-पूजन और बको ध्यान,रतिया मे ठोक रहे ताल देखिये।लीलाधारी कलाधारी जाने क्या क्या धारी है,अपटूडेट मदारी का कमाल देखिये। स्वर्ग
 
DR. PAWAN K MISHRA
May 17 2010 10:16 AM
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test

I think that success without hounor is like food without salt, it satisfied your hunger but you can't get a good test.Here TEST refers the pleasure of life.Everybody is in search of pleasure in every activity.In broad way overhelming plaeasure leads to
 
DR. PAWAN K MISHRA
May 15 2010 01:15 PM
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Vande Mataram

वंदे मातरम का विरोध करने वाले लोग या तो बावले हो गए हैं, या अपनी राजनितिक रोटी माताओं के शवो पर सेकना चाहते है। मुझे तो ये चतुर सुजान लोग दीखते है। हिंदुस्तान की नीति अब क्या पागल और मानसिक दिवालिया लोग निर्धारित करेगे या माता का अपमान करने वाले ? ये लोग
 
DR. PAWAN K MISHRA
Nov 09 2009 08:25 PM