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ठाले बैठे... बस यूं ही...

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17 Jun 2010
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यार, यहां पर बड़ी Politics हो रही है।

मुझे नफ़रत हैं ऐसे लोगों से। लेकिन क्या करें, कुछ लोगों की दुकानदारी ही ऐसे चलती है। वो उस मछली के किरदार में होते हैं जो पूरे तालाब को सड़ा देती है। जिनका स्वार्थ ही दूसरों को छोटा साबित करके ख़ुद को बड़ा बनाना है। और आख़िर में अपनी आदत से मजबूर होकर वो
 
अनुराग मुस्कान
Jun 17 2010 10:31 PM
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इमोश्नल अत्याचार....!

अभी-अभी एक हवाईजहाज़ सिर के ऊपर से उड़ कर निकला है। साल भर पहले जब पहली बार सचमुच हवाईजहाज़ में बैठा तो एहसास हुआ कि बचपन में इस हवाईजहाज़ ने भी कितना इमोश्नल अत्याचार किया है हम पर। मन में, पापा से मिलने की कितनी बड़ी उम्मीद जगाई थी इसने, जो आगे चलकर
 
अनुराग मुस्कान
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मानो या ना मानो... रावण भी एक ब्लॉगर था।

Facebook पर रवीश कुमार जी का स्टेटस था- रावण के चरित्र में महानता के कोई लक्षण थे? क्यों लोग रावण से भी सहानुभूति रख लेते हैं? क्या किसी खलनायक के महान होने के लिए ज़रूरी है वो मारा भी जाए तो लोग आंसू बहाये।इस पर मेरा कमेंट था-... रावण शायद इसलिए महान
 
अनुराग मुस्कान
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दूसरों की पोस्ट पर गाली कौन बकता है..?

मेरे एक मित्र आजकल परेशान हैं। सामाजिक सरोकारों के चलते नाम का ख़ुलासा नहीं कर सकूंगा। अपने ब्लॉग पर अक्सर क्रांतिकारी विचार परोसते हैं। व्यवस्था पर चोट करता लेखन होता है उनका। लेकिन आजकल बड़े आहत हैं। आहत हैं, ऊल-जलूल टिप्पणियों से। उनकी पोस्ट पढ़कर
 
अनुराग मुस्कान
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आप ज़िदा हैं या मर गए...? हो जाए एक छोटा सा टेस्ट...

बहुत मुश्किल काम नहीं है ये जानना कि हम ज़िदा हैं या मर चुके हैं। नहीं...नहीं...ये पुनर्जन्म पर किसी अति महत्वाकांशी टीवी चैनल का टोने-टोटके वाला शो नहीं है, बल्कि ख़ुद अपने आप से आपका साक्षात्कार है। तो हो जाए एक छोटा सा टेस्ट- 1- क्या कभी बिलकुल अकेले
 
अनुराग मुस्कान
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थैंक यू...! दयाराम...!

पत्थरदिल शहर में किसी की आत्मियता पाना, मनचाहा दूसरा जीवन पाने से कम नहीं है। दयाराम जैसे लोग कहां मिलते हैं आसानी से। संवेदनाएं, भावनाएं, आत्मियता, स्नेह, आत्मसम्मान और उम्मीद, हम टीवी वाले सिर्फ़ ख़बरों में ही ढ़ूंढ पाते हैं। आपस में इन मूल्यों के साथ
 
अनुराग मुस्कान
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15,274 लोगों की मौत, 2 साल की सज़ा?

भोपाल गैस त्रासदी, 15,274 लोगों की मौत, पीड़ित परिवारों ने लड़ी 25 साल तक लड़ाई, 25 साल बाद फैसला आता है, याद रहे फैसला अभी ज़िला अदालत का है। इस मामले के आठों आरोपियों को धारा 304(A) के तहत दोषी ठहराया गया है, जिसमें अधिकतम 2 साल की सज़ा अथवा पांच हज़ार
 
अनुराग मुस्कान
टैग: bhopal-genocide
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ब्लॉगरों की भी डी-कंपनी... ये हो क्या रिया है?

अरे-अरे भाई लोग ये क्या कर रिए हो...? ब्लॉगिंग में भी गुंडागर्दी कर रिए हैं कुछ खुराफ़ाती। क्यूं भाई... कौन हो आप लोग... नहीं, मेरा मतलब है, क्या चाहते क्या हो आप लोग..? सीनियर ब्लॉगर, जूनियर ब्लॉगर, ये सब क्या सुन रिया हूं भाई? ये क्या तरीक़ा है? भाई
 
अनुराग मुस्कान
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क्या सीता को रावण से प्रेम हो सकता है?

क्या सीता को रावण से प्रेम हो सकता है? क्या रावण के साथ सीता की प्रेमलीला का कल्पना की जा सकती है। क्या कोई सोच भी सकता है कि सीता, रावण के प्रेमपाश में जकड़ सकती हैं या फिर रावण को अपने प्रेमपाश में बांध सकती हैं? फ़िल्म ‘रावण’ अभी रिलीज़ नहीं हुई है
 
अनुराग मुस्कान
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माफ़ करना बिहारी भाईयों...

देखो भाई लोग, सबसे पहले तो आपको वादा करना होगा कि इस पोस्ट में की गई मज़ाक को Chill Pill की तरह लोगे, सीरियसली कतई नहीं लोगे... और लेना ही है तो लेलो... मेरा काम था वैधानिक चेतावनी जारी करना सो मैंने कर दी, अब मेरी बला से। तो हाज़रीन, वो क्या है ना कि
 
अनुराग मुस्कान
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ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के लोगों को तो मरना ही था...

पश्चिमी मिदनापुर के पास हावडा-कुर्ला ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस माओवादियों के बदले की भावना की भेंट चढ़ गई। तमाम लोग मारे गए। आम आदमी से लेकर प्रधानमंत्री तक सबको बेहद अफसोस हुआ होगा। अफसोस से ज्यादा और हो भी क्या सकता था और विश्वास रखिए अफसोस से ज्यादा कुछ
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कुंए के मेंढ़क

एक कुआं था साहब। पानी कम कीचड़ ज्यादा वाला। कुएं में करोड़ों मेंढ़क रहा करते थे। मेंढ़कों को कुएं का सभ्य एवं सम्मानित नागरिक होने पर बड़ा गर्व था। छाती फुलाए-फुलाए इतराकर यहां-वहां गाते फिरते थे, 'ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का, मस्तानों का.....इस
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मैं ‘मुस्कान’ कैसे हुआ..

लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि भईए, ये ‘मुस्कान’ क्या है? आज बता ही देता हूं।द्वारिका प्रसाद माहेश्रवरी जी का नाम तो सुना ही होगा आपने। उनकी कविताएं ‘उठो लाल अब आंखे खोलो, भोर भई अब मुख को धो लो...’और 'वीर तुम बढ़े चलो..', शायद ही किसी ने अपने छुटपन में ना
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भगवान के नाम पे...

नौ साल का करियर हो गया होता अपना बाबागीरी में।भाई साहब, बालाजी मंदिर वालों ने 1070 किलो सोना बैंक में जमा कराया है पिछले दिनों। भक्तों ने चढ़ावे में चढ़ाया था सोना। मैं तो ख़बर सुनकर ही मालामाल हो गया। यही तो कलयुग है। इधर भक्तों का इन्क्रीमेंट तक अटका
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रूचिका आज कहीं 19 साल की होगी...

न्याय हमारी पहुंच से कितनी उम्र दूर है...?रूचिका आज अगर इस दुनिया में होती तो 32 साल के आसपास होती और अगर आप आत्मा के शरीर बदलने में यक़ीन करते हैं तो आपको ये भी मानना पड़ेगा की रुचिका ने अगर दूसरा जन्म लिया होगा तो वो आज किसी रूप में 19 साल की हो चुकी
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मॉरल ऑफ़ द स्टोरी

'तथास्तु'एक सूखा ग्रस्त गांव था। ये उस गांव के दो बेचारे किसानों की कहानी है, रामलाल और श्यामलाल। दोनों अभागे सूखे की मार से त्रस्त थे। तीन सालों से आसमान एक बूंद नहीं टपका था। जी हां, बिलकुल फ़िल्म लगान के चंपारन गांव की सी कहानी थी। कहीं से उम्मीद की
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काश...!

काश! मेरा भी कोई रिमोट कंट्रोल या ऑन-ऑफ बटन होता...रात के डेढ़ बज रहे हैं। सोने की नाकाम कोशिश कर रहा हूं। कमरे में सिर्फ नाइट बल्ब जल रहा है। नाइट बल्ब की रोशनी में उसके चारों तरफ की दीवार के सिवाए तीन नंबर पर चलता हुआ सीलिंग फैन दिखाई दे रहा है। सोच
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संस्मरण

बद्री विशाल ने मुझे नहीं, रविकांत को बुलाया था....(ये एक दुखःद संस्मरण है। भगवान के द्वार पर ले जाने वाले रास्ते से बीच में लौट आना निश्चित ही निराश करने वाला रहा। गला ख़राब है इसलिए हर किसी के पूछने पर पूरा वाक्या नहीं बता सकता... सोचा डॉक्टर की हिदायत
May 18 2010 10:48 PM
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मेरी एक अप्रकाशित कविता, आप भी पढ़ें...

सालों बाद कोई कविता लिख रहा हूं... यही कोई दस साल बाद... मन के दर्द सहते विचार उद्धेलित होकर जमा हो गए थे, उन्ही के बिखराव को शायद कविता कहने की यह भूल भी हो सकती है... जो भी है, प्रस्तुत है-मैं भी तो कविता कहता था।जब पांव धरा पर रहता था।।जब शीत पवन
Aug 15 2009 02:20 PM
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आओ, लड़ाई-लड़ाई खेलें

आओ, लड़ाई-लड़ाई खेलेंलड़ना हमारी संस्कृति और सभ्यता का एक अटूट हिस्सा है। लड़ने का हमारा एक गौरवशाली इतिहास रहा है। अपनी झगड़कला की इस प्राचीन परंपरा से हम इमोश्नली अटैच हैं। हम अनादि काल से लड़-लड़ कर टूट चुके हैं किन्तु हमारा हौंसला देखिए, हम आज भी टूट
Apr 25 2007 08:22 AM
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2020 की दिल्ली और 2050 का बिहार

किसी ने यह तस्वीरें मुझे भेजी हैं... सो आपको भी दिखा रहा हूं...यह है 2020 का बैंगलोरयह है 2020 का मुंबईयह है 2020 की नई दिल्लीयह वह काल्पनिक शहर है जिसे 2020 तक कहीं बसाया जाना है... और यह है 2020, 2030, 2040, 2050... का बिहार मुझे इस तस्वीर में पहले तो
Apr 24 2007 12:09 AM
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लो, कहानी में ट्विस्ट आ ही गया...

लो, कहानी में ट्विस्ट आ ही गया...लो, कहानी में ट्विस्ट आ ही गया। वैसे भी छोटे मिंया की शादी में कानफोड़ू संगीत पर ट्विस्ट का इंतजाम तो था नहीं। सो, ट्विस्ट इसी बहाने आ गया। वैसे शादी-विवाहों के अवसर पर ट्विस्ट तो होना ही चाहिए, वैसा नहीं तो ऐसा ही सही।
Apr 21 2007 09:58 AM
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इस फ़ोटोग्राफ़ ने मुझे हिलाकर रख दिया, आप भी देखिए...

इस फ़ोटोग्राफ़ ने मुझे हिलाकर रख दिया...यह फ़ोटो विख्यात फ़ोटोग्राफर कैल्विन कार्टर ने खींचा है। इसके लिए उन्हे वर्ष 1994 में फ़ीचर फ़ोटोग्राफी के लिए पुल्तिज़र अवार्ड भी मिल चुका है। इस फ़ोटो में दिखाया गया है कि भूख से व्याकुल एक अबोध बच्ची रैस्क्यू
Apr 19 2007 12:49 PM
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राहुल बाबा के नाम एक गुप्त चिट्ठा

राहुल बाबा के नाम गुप्त चिट्ठी विडंबना देखिए की इस देश में कुछ भी गुप्त नहीं रहता। मैंने यह चिट्ठी अपने राहुल बाबा के नाम गुप्त रूप से लिख कर सामान्य डाक से भेजी थी लेकिन यह भी सार्वजनिक हो गई। चौंकिए मत, आजकल गुप्त चिट्ठियां सामान्य डाक से भेजना ही
Apr 19 2007 08:33 AM
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अबदुल्ला दीवाने का चिट्ठा

अबदुल्ला दीवाने का चिट्ठा...लख-लख बधाइयां। चिरंजीव अभिषेक और सौभाग्यकांशिनी ऐश्वर्या की शादी के निमंत्रण बंटने की खबर से रोमांचित हुआ जा रहा हूं। स्वाभाविक भी है, भारतवासी हूं, जरा-जरा सी बात पर रोमांचित हो जाया करता हूं। बिग बी से लेकर केबिल टीवी की
Apr 18 2007 12:23 AM
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आप किसी की आवाज़ को ऐसे न दबाईएगा...

आप किसी की आवाज़ को ऐसे न दबाईएगा...http://img.tapuz.co.il/forums/8572800.swf
Apr 17 2007 08:32 AM