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सद्भावना दर्पण

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12 Jun 2010
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छत्तीसगढ़ के डायरी

सेना के हवाले नहीं होगा बस्तरबस्तर और अन्य राज्यों के लिए सेना के इस्तेमाल को लेकर आखिर दिल्ली में सहमति नहीं बन पाई। यह निर्णय किया गया, कि पुलिस और अर्ध सैनिक बलों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस निर्णय की सराहना ही की जानी चाहिए, क्योंकि सेना को बस्तर
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अरुंधती राय द्वारा खुलेआम हिंसा का समर्थन...?

मैं नक्सलियों और उनकी पैरोकार अरुंधती राय को अब क्या कहूं. दोनो की हरकतों पर रोना ही आता है. पहले नक्सलियों कि बात. इनके कारण पिछले दिनों ज्ञानेश्वरी रेल हादसा हुआ। इस हादसे में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के अनेक लोग मारे गए। नक्सलियों ने ट्रेन उड़ाई दी
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छ्त्तीसगढ़ की डायरी

यह गुंडई तो न करे पुलिस...बिलासपुर जिले के मस्तूरी में पुलिस के दो सिपाहियों ने जो गुंडागर्दी की है, उसे देख कर राजधानी में लोगों को उस उपन्यास की याद ताजा हो आई जिसक नाम था वर्दीवाला गुंडा। वर्दी का मतलब गुंडागर्दी तो न हो। भगवानदास नामक एक खेतिहर मजदूर
May 29 2010 09:35 PM
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''हिन्द स्वराज'' के बहाने इस नए बनते समाज पर चर्चा

कुंवारियों के माँ बनने की रफ्तार बढ़ी है, अगर यही नयी सभ्यता है तो मुझे कुछ भी नहीं कहना''हिन्द स्वराज'' का हर पाठ हमें नित नए अर्थ-लोक तक ले जाता है। ''हिंद स्वराज'' की शताब्दी केवल एक पुस्तक की शताब्दी (२००९) ख़त्म होने के बाद भी उस पर चर्चा होती
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May 24 2010 06:58 PM
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ये नक्सलवाद नहीं, ना-अक्लवाद है....

बस्तर में नक्सलवाद का खूनी विस्तार हदें पार कर रहा है। विचारधारा अब हिंसाधारा बनती जा रही है। अब लोग नक्सलवाद को ना-अक्लवाद भी कहने लगे हैं। मासूमों के खून बहाना अक्लमंदी नहीं हो सकती। अपने ही लोगों की हत्याएँ करके हम किसी मुकाम तक नहीं पहुँच सकते। बस्तर
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नक्सली हिंसा और ये बुद्धिजीवी(?)

(किसी एक ब्लॉग पर किसी का लेख पढ़ रहा था. प्रतिक्रिया देते-देते छोटा-सा लेख ही बन गया तो लगा अपने ब्लॉग पर इसे पोस्ट कर दूं, सो प्रस्तुत है)नक्सली हिंसा को लेकर अनेक बुद्धिजीवी(?) समर्थन की मुद्रा में ही नज़र आते है. वैचारिक लड़ाई या सामाजिक परिवर्तन के
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छत्तीसगढ़ की डायरी

विकास के रास्ते की ओर सरकार...सरकार बस्तर के विकास को ले कर अब ज्यादा चिंतित नजर आ रही है। ये अच्छे संकेत हैं। राजधानी रायपुर से लेकर दिल्ली तक अब नेता बस्तर के बारे में सोच रहे हैं। सोनिया गाँधी ने भी स्वीकार किया कि नक्सलवाद के पीछे कारण यही है, कि
May 17 2010 12:53 PM
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जब्बार ढाकवाला को याद करते हुए...

मौत ने हमसे एक सार्थक लेखक छीन लिया...नहीं...नहीं....यह खबर सच न हो....लेकिन खबर सच है. दुखी का देने वाली है. व्यंग्यकार और कवि जब्बार ढाकवाला नहीं रहे. सात मई को ऋषिकेश के पास सड़क हादसे में उनका निधन हो गया. उनके साथ उनकी धर्मपत्नी तरन्नुम भी चल
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May 08 2010 10:00 AM
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अब शांति की बात खबर नहीं बनती,...खबर बनती है अशांति. हिंसा, तोड़फोड़..

आज रायपुर के टाउन हाल में देश के विभिन्न हिस्सों से आये बुद्धिजीवियों की एक सभा हुई. प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. यशपाल, बुजुर्ग गांधीवादी नारायणभाई देसाई, सर्वोदयी अमरनाथजी, गाँधी शांति प्रतिष्ठान की राधा बहन, पूर्व सांसद-चिन्तक रामजी सिंह और छत्तीसगढ़ में
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May 05 2010 09:58 PM
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छत्तीसगढ़ की डायरी

हो रही है दो सिंहों की टक्करजी, हाँ, इन दिनों दो सिंहों की भिडंत जारी है। यह नूरा कुश्ती है, जिसका कोई खास अर्थ नही निकलता, लेकिन चलती रहती है। यह अखबारी कुश्ती है, जिसका मजा हम सब लेते हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री
May 02 2010 08:03 PM
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व्यंग्य / मूर्ति की 'एडवांस बुकिंग

मित्रो, ''सद्भावना दर्पण'' नामक इस चिट्ठे को मैंने बहुत पहले ही बना लिया, था, लेकिन मेरी लापरवाही के कारण ''चिट्ठाजगत'' में इसका विधिवत ''पंजीकरण'' नहीं हो पाया था. संयोगवश कल ही हुआ. आप कह सकते हैं, कि एक चिट्ठी मैंने बहुत पहले ही लिख ली थी,मगर उसे
Apr 27 2010 10:28 PM
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मुख्यधारा का सवाल

राजधानी में 24-25 अप्रैल को ''अनुसूसिच जनजातियाँ ,कल आज और कल'' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। इसमें देश भर से वे लोग पधारे जिन्होंने जनजातियों पर गहन अध्ययन किया है। कुछ तथाकथित विद्वानों ने जब यह बात उठाई कि अनुसूचित जनजातियों को
Apr 26 2010 07:59 PM
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राजधानी के रंग

डीजीपी का नक्सलवाद....छत्तीसगढ़ के डीजीपी कवि भी हैं। कभी-कभार बोलते हैं और फँस जाते हैं। पिछले दिनों राँची गए और पत्रकारों से बात कहते हुए कह दिया कि नक्सलवाद कोई समस्या नहीं, यह एक विचारधारा है। अब जो कुछ छपा है, उसे लेकर काँग्रेसी हंगामा मचा रहे हैं।
Apr 04 2010 11:28 PM
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छ्त्तीसगढ़ की डायरी

  राज्यपाल-मुख्यमंत्री भी आदिवासी मांग उठी..... आदिवासी जब एक होते हैं तो क्या होता है?क्या होता है, तो गैर आदिवासी नेताओं के मन में एक आशंका बलवती होने लगती है, कि कहीं वे सत्ता हथियाना तो नहीं चाहते। जी हाँ, पिछले दिनों जब राजधानी में आदिवासियों
Mar 02 2010 05:12 PM
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छत्तीसगढ़ के मीडिया का स्याह चेहरा....:

छत्तीसगढ़ में मीडिया का जो चेहरा बनाता जा रहा है, उसे देख कर रोना आता है.अब सच को सच लिखना ही कठिन है, बाकी आप कंडोम के विज्ञापन छापे, लिंगवर्धक यंत्र के विज्ञापन भी छाप सकते है, अंधविश्वास फैलने वाली खबरे, हो या फ़िल्मी दुनिया कि नंगी सब चलेगा, लेकिन
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Feb 11 2010 08:06 AM
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छत्तीसगढ़ की डायरी-3

छत्तीसगढ़ के घाट पर, भई अफसरन की भीररोज़ यहाँ रूपया घिसैं,घर सब खाए खीर..अभी पिछले दिनों रायपुर में एक आईएएस बाबूलाल अग्रवाल के यहाँ छापा मारा गया तो अरबों की संपत्ति का पता चला। इससे पता चलता है, कि हमारे अफसर कितने समृद्ध हैं। देश में एक अच्छा संदेश
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Feb 06 2010 05:28 PM
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छत्तीसगढ़ की डायरी

सच्चा पंचायती राज कब आएगा..?छत्तीसगढ़ में पंचायत के चुनाव भी हो गए। अब जनता के लोग गाँव-गाँव में नए भारत के निर्माण के लिए अपना योगदान करेंगे। गाँधीजी यही चाहते थे। लेकिन पंचायती राज की जो असलियत है, वह किसी से छिपी नहीं है। राजधानी में पिछले दिनों कुछ
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Feb 01 2010 08:33 PM
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श्लीलता और अश्लीलता

श्लीलता और अश्लीलता पर समाज में सदियों से बहसें चलती रही है, उस वक़्त भी जब किसी महिला की नग्न मूर्ती बनाई गयी और उसे कला का नाम दिया गया था. मतलब यह कि हर काल में दो धराये बहती रहती है. आज भी यही हो रहा है. हम प्रगतिशीलता की, खुलेपन की बाते करते है, और
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Jan 31 2010 10:58 PM
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छत्तीसगढ़ की डायरी-1

नक्सलियों से निपटने सेना की जरूरत नहींबस्तर में नक्सलियों से निपटने के लिए सेना की जरूरत नहीं है। यह बात एक बार फिर सामने आई है। और बात कही है केंद्रीय गृह मंत्री ने। पिछले दिनों वे राजधानी में थे। एक बैठक में उन्होंने कहा कि हमारी पुलिस और अर्धसैनिक बल
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Jan 28 2010 11:24 AM
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बेताल कथा-1

बेताल कथासुयोग्य वित्तमंत्री-गिरीश पंकजविक्रमार्क ने वेताल को कंधे पर लाद कर इस बार मजबूती से जकड़ लिया।उसकी हरकत को देख कर वेताल हँस पड़ा और बोला-'' हे  राजन, मनुष्य अपना धन-वैभव, नाते-रिश्तेदार किसी को भी कस कर पकड़ कर ले। इससे कोई फर्क नहीं
Nov 19 2009 10:52 PM
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सद्भावना दर्पण

सम्मान फिक्सिंग एसोसिएशन...?  ज़माना फिक्सिंग का है। वैसे तो री-मिक्सिंग का भी है। क्रिकेट की कोख से निकला फिक्सिंग नामक यह ख़तरनाक  'वायरस' चौतरफा वार कर रहा है। हर कोई शिकार हो रहे हैं इसका। मुझ पर भी इसका असर हुआ है। मैंने भी इस फिक्सिंग से
Oct 21 2009 12:23 PM
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सद्भावना दर्पण

इन्वेस्ट कम और पुण्य ज्यादा..?समाजसेवी सेठों को देखता हूँ, तो अकसर बड़ी प्रेरणा मिलती है: चालाकी सीखने की। कुछ धनवान बड़े चालाक होते हैं। इतने चालाक, कि ऊपरवाले को भी गच्चा दे कर अपने लिए स्वर्ग बुक कर लेते हैं।उस दिन एक धनवान मिल गए। घर के बाहर मिट्टी
Oct 11 2009 10:15 PM
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सद्भावना दर्पण

चार निलंबितों की वार्तागिरीश पंकजचार निलंबित जन सिर पर हाथ धरे गंभीर मुद्रा में बैटे हुए थे। बाद में प्राणायाम में रत हो गए।एक बेचारा मर्मभेदी स्वर में पुराना फिल्मी गीत गाए जा रहा था, 'इस भरी दुनिया में कोई भी हमारा न हुआ। गैर तो गैर थे अपनो का सहारा न
Sep 23 2009 06:40 PM
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सद्भावना दर्पण

पद्मश्री इन वेटिंगगिरीश पंकजसमाचार देखा तो अपन की वो खिल गई। वो यानी बाँझें। समाचार मनोरंजक था कि जिनको पद्म पुरस्कार चाहिए, वे दफ्तर आकर आवेदन पत्र ले जाएँ। वाह, क्या बात है। एक आवेदन पत्र ही तो जमा करना है। 'आँख का अंधा नाम नयन सुख '' का कोई बैठा होगा
Sep 23 2009 06:01 PM
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सद्भावना दर्पण

हिन्दी दिवस. ।हिंदी दिवस । मै सोचता हूँ कि ऐसा कैसे हो गया कि किसी देश राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर हमारे उस काल के नेता उदार हो गए और वे यह सोचने लगे कि अगर हिन्दी को राष्ट्र भाषा बना दिया जाएगा तो देश में अराजकता आ जायेगी। खाई इतना तो किया कि हिन्दी को
Sep 22 2009 10:30 PM