prayaas's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
16 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
17
पाठक भेजे
142
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
08.35
पसंद करें
2
नापसंद करें

आकांक्षाए और जीवन

आदमी के लिएजरुरी है;खाने को दाल रोटी,पहनने को कपडा,रहने को मकान और जीने  के लिए प्रेम, पर कष्टमय  है जीवन क्योंकि प्रेम विहीन  हैऔर भी सब कुछ पाने कीलालसा में और जानने को  यह  सच अपने अनुभव
 
पवन धीमान
पसंद करें
0
नापसंद करें

जीवन .. जिम्मेदारियों के बोझ तले

                                          
 
pawan dhiman
पसंद करें
2
नापसंद करें

......बचपन (माँ की गोद में)

खट्टी मीठी जिंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर, मीठे मीठे सपनो की बात ही न्यारी है/जिंदगी के साथ साथ जनम लेते हैं सपने,सपनो के साथ चलती जिंदगी हमारी है/जीवन का पहला साल, सपनो से मालामाल, माँ की गोद मीठी मीठी लोरिया सुनाती है/बच्चे के साथ, बच्चा बन जाती है
 
pawan dhiman
पसंद करें
0
नापसंद करें

आदमी भला सा लगता है.

जिसके चारों तरफ एक जलजला सा लगता है/वक़्त बुरा है मगर आदमी भला सा लगता है/हँसते हँसते उड़ा देता है दुनिया भर के गम,देखने में यूँ बड़ा वह मनचला सा लगता है/जिन्दगी किस मोड़ पर क्या रंग बदले कौन कहे,पत्थर भी कभी कभी गुड का डला सा लगता है/गम से
 
pawan dhiman
Jun 01 2010 05:20 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

कमीज

उड़ने लगा है रंग,दिखने लगे हैं रेशे,और रंगत खोने लगी है/मेरी यह कमीजअब पुरानी होने लगी है/वह दूसरी  जो मेरे मिजाज सेकम मेल खाती थी/इसलिए यदा कदा हीमेरे साथ बाहर जाती थी/अब मेरे मन को भाने लगी है/इस कमीज से
 
pawan dhiman
पसंद करें
0
नापसंद करें

दिल से बहुत दूर है.

यह  कैसी सजा यह कैसा दस्तूर है/दिल है उसके पास जो दिल से बहुत दूर है/मैंने ना देखा उसे, उसने ना देखा मुझे,उसके मेरे चर्चे इस शहर में मशहूर हैं/उसकी तस्वीर से पूछा मैंने एक दिन,मैंने चाहा तुझे, क्या
 
pawan dhiman
May 28 2010 05:17 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शहरी ग्रामीण

दिल्ली-हरिद्वार राजमार्ग कोपार करने से पहले  वह बच्चाइंतज़ार करता था/सिर पर गठरी रखे हुएजैसे ही सड़क पार करता था/वह बुदबुदाता था कि यह शहर वाले भोर में क्यों जाग जाते हैं?मौका मिलते हीअपना शहर छोड़कर भाग आते हैं/उस शहरी आदमी का
 
pawan dhiman
पसंद करें
0
नापसंद करें

अवकाश

सबसे मिलकर एक बार फिर से जाना है/अपनी जिज्ञासा का उदगम मुझमे, समाधान भी मुझमे, और मुझमे ही ठिकाना है/जीवन की राह पर ऐडा टेढ़ा चलना रोमांच बढ़ाता  है/पर कोल्हू का बैल आगे कब बढ़ता है? बस चलता जाता है/पाँव
 
pawan dhiman
May 26 2010 07:58 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

'फ़ुर्र'

शुक्रवार की देर रात मै दिल्ली से घर लौटा । सुबह बरामदे मे इधर उधर पड़े तिनको और रोशनदान मे निर्माणाधीन घोंसले ने बरबस ही ध्यान खींचा । दूसरे कोने पर बैठी एक चिड़िया माहोल का जायजा ले रही थी। संभवत: हमारी प्रतिक्रिया के प्रति वह आशंकित थी। मैंने तिनके
 
pawan dhiman
पसंद करें
0
नापसंद करें

"रक्त सम्बन्ध''

मै डेढ़ बजे तक आपके पास पहुँच जाऊंगा, चिंता मत करो। इश्वर सब ठीक करेंगे। मोबाइल कान से हटाते ही अशोक ने हिसाब लगाया। 'अनुपम बस स्टॉप' तक दस मिनट , बस में एक घंटा और आगे पंद्रह मिनट। कुल मिलकर डेढ़ घंटा। अभी साधे ग्यारह बजे हैं। आधे घंटे में चार लोगों का
 
pawan dhiman
May 18 2010 02:08 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बारिश

कहीं टूटे पत्ते ,कहीं बिखरे पुष्प, कहीं कलियों का स्नान है .यह बारिश भी,किसी के लिए जीवन,किसी के लिए अंत का फरमान है.
 
pawan dhiman
May 18 2010 02:05 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

''प्रेम प्रस्ताव''

दिल  से  लिखी गई और उम्मीद से भेजी  गई कविता पर, नाकाम प्रेमी ने प्रशंसा पाई," शब्द संयोजन अच्छा है,लिखते रहो भाई."
 
pawan dhiman
टैग: halki fulki
May 18 2010 02:03 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

चलो किसी का दर्द बाँट लें....

रिश्ते नातों के जंगल मे,भटके हैं,लेकिन क्या पाये?चलो किसी का दर्द बाँट लें , चलो किसी को गले लगाएं ,बचपन का था खूब जमाना,कच्ची छत और बैल पुराना,मट्ठा,गुड और मकई की रोटी,और पैदल स्कूल को जाना,छूटे सारे संगी साथी,अपने थे जो हुए पराये,चलो किसी का दर्द
 
pawan dhiman
May 18 2010 01:56 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

तन्हाईयाँ

तुमसे अब दर्दे सुखन आबाद है,तुम नहीं हो तो तुम्हारी याद है। रात की तन्हाईयाँ कुछ इस तरहएक परिंदा और सौ  सय्याद हैं।तुम्हारे बिन दुनिया अधूरी है मेरी,तुम अगर हो, ख़ुशी है हर आह्लाद है।हाँ मुझे मालूम है रस्मो- रिवाज रब का दर पर, तेरे घर के बाद
 
pawan dhiman
May 18 2010 01:53 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

...महसूस किया है मैंने.

संजीदगी से जिन्दगी को जब जिया है मैंने,खुद को बेबस बड़ा, महसूस किया है मैंने. ताश के पत्तों सा देखा है ढहते महलों को,बस्तियों को मरघट होते देख लिया है मैंने. होश में चुभते हैं, दुनिया के कई तौर तरीके,चैन का जाम मदहोशी में ही पिया है मैंने.रौशनी
 
pawan dhiman
May 17 2010 10:16 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हैती में भूकंप के बाद

चंद पलों का जलजला , और फिर ठहरावअनथक चीखेंउजड़े हुए गाँव। जीवन के लिए याचनारतआधी दबी देहकहीं शिशु की क्षत देह परक्रंदन रत नेह। कहीं घर से गृहणी छिनीकहीं बच्चो से बाप प्रभु यह कैसी लीलायह कैसा संताप?जीवन तुम्हारे लिए रंगमंच है परिहास है,पर हम कठपुतलियों
 
pawan dhiman
May 10 2010 08:09 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

काश!

काफिला मेरा भी होता, आज तब मंजिल के पास,भोर होते चला होता, मंजिल की जानिब मै काश!जज्बातों से क्या मिला, मंजिल मिली न रास्ता,आँखों ने नींदे खोई और हर पल रहा दिल उदास,एक परिंदा, एक दरिंदा उड़ रहे हैं, साथ साथ,एक को जीने की ख्वाहिश एक को लहू की प्यासहिम्मत
 
pawan dhiman
May 09 2010 02:10 AM