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ऐसा देश है मेरा

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02 Jun 2010
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मां तूझे सलाम

सुरमाओं की धरा हिंदुस्तान के सैनिक जहां सरहदों पर दुश्मन के छक्के छुड़वाते हैं, वहीं उनके होनहार नन्हे-मुन्ने सपूत भी किसी से कम नहीं  है। वे यदा-कदा मौका मिलने पर खुद की काबलियत को पेश कर ही देते हैं। ऐसा ही एक सुनहरा व रंगारंग मौका उन्हें राजस्थान
 
विनोद बिश्नोई
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देखा है भीड़ को

देखा है भीड़ को ढोते हुए अनुशासन का बोझा,उछालते हुए अर्थहीन नारे, लड़ते हुए दूसरों का युद्ध।खोदते हुए अपनी कब्रें, पर .....नहीं सुना .....तोड़ लिया हो कभी किसी भीड़ ने व्यक्ति की अंत:स्चेतना में खिलाअनुभूति का आम्लान पारिजात.....
 
विनोद बिश्नोई
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विकासशील नहीं, आज हम विकसित होते

                      -पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष आलेखभारत के सबसे युवा व नौवें प्रधानमंत्री राजीव गांधी के न होने का खामियाजा आज हम इस रूप में भुगत रहे हैं कि हमारा
 
विनोद बिश्नोई
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ऐसा देश है मेरा

मजहबी कागजो पे नया शोध देखिये।वन्दे मातरम का होता विरोध देखिये।देखिये जरा ये नई भाषाओ का व्याकरण।भारती के अपने ही बेटो का ये आचरण।वन्दे-मातरम नही विषय है विवाद का।मजहबी द्वेष का न ओछे उन्माद का।वन्दे-मातरम पे ये कैसा प्रश्न-चिन्ह है।माँ को मान देने मे
 
विनोद बिश्नोई
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शिव मंदिर 'तेजो महालय' या मुमताज का मकबरा 'ताजमहल'

श्रीगंगानगर। बचपन से ही सुनते आए हैं कि देश की सबसे खूबसूरत इमारत 'ताजमहल' को शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया है। स्कूल किताबें हों या समाचार-पत्रों के पन्ने हर जगह यही तथ्य सामने आया है। प्रो.पीएन ओक को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को
 
विनोद बिश्नोई
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तो फिर मरना क्या हैं ?

शहर की इस दौड में दौड के करना क्या है ? ? ? ? ? ? अगर यही जीना हैं दोस्तों........ तो फिर मरना क्या हैं ?पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िकर हैं......भूल गये भींगते हुए टहलना क्या हैं ? ? ? ? ? ? सीरियल के सारे किरदारो के हाल हैं मालुम...... पर माँ का
 
विनोद बिश्नोई
May 06 2010 03:14 PM
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दौर ...

जो बीत गया है वो, अब दौर न आएगा,इस दिल में सिवा तेरे कोई और न आएगा।तू साथ न दे मेरा चलना मुझे आता है,हर आग से वाकिफ हूं जलना मुझे आता है।ये जीवन का पुतला जल जाए भी तो क्या,मरने के लिए ऐसा कोई दौर न आएगा। 
 
विनोद बिश्नोई
Apr 22 2010 10:25 AM
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शवों के सौदागर!

श्रीगंगानगर। एक हम हैं कि देश को फिर से सोने की चिडिय़ा बनता देखना चाहते हैं और एक ये सरकारी कारिंदे जो देश को बार-बार कलंकित कर रहे हैं। फर्क बस इतना है कि हर बार चेहरा बदला होता है लेकिन हरकतें वही होती हैं। बेहद अफसोस होता है कि मेरे ऐसे देश में 'ऐसे'
 
विनोद बिश्नोई
Mar 30 2010 10:04 PM
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वतन बेच देगें।

कली बेच देगें चमन बेच देगें,धरा बेच देगें गगन बेच देगें,कलम के पुजारी अगर सो गये तोये धन के पुजारीवतन बेच देगें।जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" }http://www.janokti.com/
 
विनोद बिश्नोई
Feb 19 2010 08:56 AM
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कहीं खून पानी तो नहीं बन गया?

सत्याग्रहों की नौटंकी के बीच सत्याग्रह पर अटल हकीकत की इरोमदेशवासी महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध और महावीर जैसे अहिंसावादियों की छवि को धूमिल करने को आतुर हैं और वे जाने-अनजाने उन सफेदपोश कुकरमुतों का साथ दे रहे हैं, जो देश को दीमग की तरह खोखला कर रहे हैं।
 
विनोद बिश्नोई
Feb 15 2010 09:38 PM
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कौन लड़ेगा सिस्टम के खिलाफ जंग ?

टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिल्होत्रा मामले के आरोपी पर चाकू से हमला करने वाले उत्सव को लेकर घरों से लेकर गलियारों तक चर्चा चल पड़ी है कि, क्या यह सिस्टम के खिलाफ जंग है? इस प्रकरण के आरोपी हरियाणा के पूर्व डीजीपी राठौड़ पर हमला होना निश्चित तौर पर एक युवा मन
 
विनोद बिश्नोई
Feb 11 2010 04:45 PM
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मौन का सागर

मौन का सागर बना अपार, मैं इस पार - तू उस पारकहीं तो रोके अहं का कोहरा, कहीं दर्प की खड़ी दीवारशब्दों की नैया को बाँधे, खड़े रहे मंझधार।शाख मान की झुकी नहीं, बहती धारा रुकी नहींकुंठाओं के गहन भंवर में, छूट गई पतवारसुनो पवन का
 
विनोद बिश्नोई
Jan 30 2010 05:49 PM
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अंतिम पल तक तरसी अखियां

अंतिम पल तक तरसी अखियां
 
विनोद बिश्नोई
Jan 30 2010 05:14 PM
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मां तुझे सलाम...

     इंडिया गेट से लेकर कस्बों तक गणतंत्र-गणतंत्रदेश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्नेह लिए 26 जनवरी का दिन प्रत्येक भारतीय के लिए अहम है। इस दिन हर भारतीय अपनी निजी जिंदगी की मुसीबतों को तिलांजलि देते हुए देश के प्रति भाव-विभोर
 
विनोद बिश्नोई
Jan 25 2010 09:35 PM
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वो भारत देश है मेरा ...........

जहां डाल डाल पर, सोने की चिडिय़ां करती है बसेरा, वो भारत देश है मेरा। जहां सत्य अहिंसा और धर्म का, पग-पग लगता डेरा, वो भारत देश है मेरा। ये धरती वो जहां ऋषि मुनि, जपते प्रभु नाम की माला, जहाँ हर बालक एक मोहन है, और राधा हर एक बाला, जहां सूरज
 
विनोद बिश्नोई
Jan 22 2010 07:42 PM
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देश की धरती

मन समर्पित, तन समर्पित और यह जीवन समर्पितचाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूंमाँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन, किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदनथाल में लाऊं सजा कर भाल जब भी, कर दया स्वीकार लेना वह समर्पणगान अर्पित, प्राण अर्पित, रक्त का कण कण
 
विनोद बिश्नोई
Jan 22 2010 07:20 PM
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खबर...

**सुबह से लेकर रात तक.. भागती रहती है ये जिंदगी ..कभी इस खबर.. कभी उस खबर.. मैं .. बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ..बदबूदार लाशें... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ... तो बेटो के जन्मोत्सव..चौराहे पर एक कट चाय पीकर... मुई फिर भी कविता लिख लेता हूँ...**
 
विनोद बिश्नोई
Jan 22 2010 07:20 PM
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खबरों की खबर

खबरों की खबर वह रखते हैं, अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं,दुनियां भर के दर्द को अपनी, खबर बनाने वाले,अपने वास्ते बेदर्द होते हैं,आंखों पर चश्मा चढ़ाये, कमीज की जेब पर पेन लटकाये, कभी कभी हाथों में माइक थमायेचहूं ओर देखते हैं अपने लिये खबर, स्वयं से होते बेखबर,
 
विनोद बिश्नोई
Jan 22 2010 07:02 PM
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यात्रा और यात्री

सांस चलती है तुझे, चलना पड़ेगा ही मुसाफिर!चल रहा है तारकों का दल गगन में गीत गाता, चल रहा आकाश भी है, शून्य में भ्रमता-भ्रमाता,पांव के नीचे पड़ी, अचला नहीं, यह चंचला है, एक कण भी, एक क्षण भी, एक थल पर टिक न पाता,शक्तियां गति की तुझे, सब ओर से घेरे हुए
 
विनोद बिश्नोई
Jan 22 2010 07:00 PM
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ऐसा देश है मेरा

धरती सुनहरी अंबर नीला, हर मौसम रंगीलाऐसा देस है मेरा, हां....... ऐसा देस है मेराबोले पपीहा कोयल गाये, सावन घिर घिर आयेऐसा देस है मेरा.......गेंहू के खेतों में कंघी जो करे हवाएंरंग बिरंगी कितनी चुनरियाँ उड़ उड़ जाएंपनघट पर पनहारन जब गगरी भरने आयेमधुर मधुर
 
विनोद बिश्नोई
टैग: we love my india
Jan 11 2010 07:46 PM
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7 अनजाने 'प्रथम' तथ्य हिन्दी फिल्मों के पहली हिन्दी फिल्म कौन सी थी? राजा हरिश्चन्द्र। पहली बोलती फिल्म ? आलमआरा... ये तथ्य तो लगभग सभी जानते हैं।

     पहली स्वदेशी रंगीन फिल्म - किसान कन्या                                किसान कन्या भारत की पहली रंगीन फिल्म नहीं थी। किसान कन्या से पहले आलमआरा रिलीज
 
विनोद बिश्नोई
Jan 11 2010 07:21 PM
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देखा है भीड़ को

देखा है भीड़ को ढोते हुए अनुशासन का बोझा,उछालते हुए अर्थहीन नारे, लड़ते हुए दूसरों का युद्ध।खोदते हुए अपनी कब्रें, पर .....नहीं सुना .....तोड़ लिया हो कभी किसी भीड़ ने व्यक्ति की अंत:स्चेतना में खिलाअनुभूति का आम्लान पारिजात.....
 
विनोद बिश्नोई
Jan 10 2010 05:26 PM