''आप इनसे कोई भी निजी सवाल नहीं पूछ सकते, परिवार, बच्चे किसी के भी बारे में नहीं""अगर ये खुद कुछ बताएं तो?""तो इनकी बातें बहुत ध्यान पूर्वक सुने और उनका ध्यान बांटने की कोशिश करें क्यूंकि आपलोग तो थोड़े देर में यहाँ से चले जायेंगे और इनकी यादें इन्हें
बचपन में टी वी पे जो भी देखती थी, वो बनना चाहती थी. पाइलट से लेकर जासूस तक! कई बार तो मैं खुद ही मम्मी की चीज़ें छुपा कर जासूस बन के उन्हें खोजा करती थी. खेल कूद में बचपन से बहुत रूचि रही है. नानाजी और मामा, दोनों ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का
डेबी मेरे साथ आई बी एम् में काम करती थीं. वो पिछले १३ साल से आई बी एम् से जुडी हुई थीं, कल उनका विदाई समारोह था. दो वर्ष पहले वो फ्लोरिडा से कोलोराडो ऑन-साईट काम करने के लिए स्थान्तरित हुई थीं. फ्लोरिडा वाला घर बेचा, बच्चों से दूर हुयीं, पोते-पोती और
आजकल मेरे पिताजी बहुत परेशान हैं! घर में बिजली के मीटर का कुछ तो झमेला है, जिसके चक्कर में कई बार बिजली ऑफिस के चक्कर काट चुके हैं. कहते हैं - 'इ ससुरा सब खाली लूटने खसोटने का काम लगवले है' बिजली ऑफिस से पिछले ही हफ्ते कोई घर पे मीटर का लोड निरिक्षण करने
क्या आप भी मेरी तरह फ़ालतू ब्लोगर हैं? अपने ब्लॉग पे ट्राफिक कम रहने से परेशान हैं? फालोवर की संख्या बढ़ाना चाहते हैं? ब्लॉग जगत में नाम कमाना चाहते हैं? तो घबराईये नहीं...हमारी परचार गाडी के निकट आ जाईये और आप भी लिख डालिए समीर लाल और अनूप शुक्ल का नाम
माइकल और मैं!आज एक बड़ी मजेदार बात हुई ऑफिस में! मेरे मित्र, माइकल टॉय, अपनी धर्मपत्नी, नीसीस, के जन्मदिन के उपलक्ष में मुझे न्योता दे रहे थे, उस सम्बन्ध में हमारे बीचहुई ये वार्तालाप पढ़िए -माइकल - स्तुति, क्या तुम्हे ईमेल पे न्योता मिल गया?स्तुति - हाँ,
शनिवार को ऐसे ही टी.वी का चैनल बदल रही थी, देखा की न्यू योर्क शहर के टाईम्स स्कवैर पे एक कार में कुछ विस्फोटक सामग्री पायी गयी और देखते देखते पुरे इलाके को खाली करवा दिया गया! यहाँ के बम-स्क्वाड को देखा तो अपने इंडिया के बम-स्क्वाड की याद आ गयी! अभी हाल
मेरे बड़े मामा और मामी जो विगत कई वर्षों से विदेश में रह रहे हैं, पिछले वर्ष एक विवाह में सम्मिलित होने आरा (आरा भोजपुर जिला का एक छोटा सा शहर हैं)आये! मई का महीना था और बिजली की दुर्दशा तो आप सब जानते ही हैं! किसी ने आईडिया दिया की दुपहरिया सिनेमा हॉल
दो दिन पहले मैंने घर पे तुलसी जी का पौधा लगाया! बहुत दिन से इच्छा थी, लेकिन कोलोराडो के क्रूर जलवायु के कारन लगाने से डरती थी!देखिये... आज तो प्रसन्न दिख रही हैं!तुलसी जी के पौधे से बचपन से एक लगाव सा रहा है! नानी का घर बहुत बड़ा था, बड़ा सा आँगन और आँगन
मेरे पिताजी सदैव किसी की भी मदद के लिए हाजिर रहते हैं, चाहे वो अखबार देने वाला हो, या घर पे गैस सिलिंडर पहुचाने वाला! पिताजी साल में दो-तीन बार गाँव का चक्कर जरुर लगते हैं...खेत-खलिहान, बगइचा, मालगुजारी इत्यादी के सिलसिले में! और जब भी वो घर जाते हैं,
अब जब बात एअरपोर्ट की निकली है और आईये आपको अपनि पहले हवाई यात्रा का अनुभव सुनाती हूँ!बात २००२ की है. मुझे किसी साक्षात्कार के लिए दिल्ली जाना था. पिताजी ने ट्रेन के टिकट के लिए बहुत प्रयास किये लेकिन विफल रहे! बड़ी मुश्किल से कोई मेरा साक्षात्कार लेने
पहला ब्लॉग लिख रही हूँ...प्रोत्साहन के लिए अडवांस में धन्यवाद!पिछले कुछ दिनों पहले मैं पटना गई! एअरपोर्ट से बहार निकलते ही देखा की कुछ लोग फूल-माला लेकर अपने "प्रिय" नेता का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं और इस से पहले की मैं कुछ और सोच पाती, अचानक मेरे