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17 Jun 2010
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रांझा रांझा : बुल्ले शाह के अद्वैत से गुलजार के द्वैत तक

पहुँचे हुये संतो, सिद्धों और सूफियों ने हमेशा अपने और प्रभु के बीच अद्वैत की कल्पना की है या बात की है या दुनिया को बताया है कि आत्मा परमात्मा के साथ एकाकार हो गयी है। वे लगातार स्तुति से, लगातार ध्यान से एक दशा ऐसी आ जाने का बखान करते रहे हैं जब दूसरा
 
cinemanthan
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किशोर कुमार : यादों पे बसर करते हैं

किशोर कुमार एक विलक्षण शख्सियत रहे हैं हिन्दी सिनेमा की और उनका बहुत बड़ा योगदान है हिन्दी सिनेमा के प्रति, न केवल एक गायक के तौर पर बल्कि एक अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और संगीतकार, लेखक और गीतकार के रुप में भी। किशोर कुमार के जीवन काल में ही उनके बारे
 
cinemanthan
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3-Iron (2004): यथार्थ और कल्पना के मध्य रचा जीवन

फिल्म का नायक अगर पूरी फिल्म में एक भी संवाद न बोले और नायिका भी केवल दो बार मुँह से आवाज निकाले, एक बार चीखने के लिये और दूसरी बार नायक को I Love You बोलने के लिये, तो जिन्होने अभी तक फिल्म न देखी हो, उन्हे लगेगा कि कैसी अजीब फिल्म होगी और इसे [...]
 
cinemanthan
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Offside (2006) : सिनेमा और स्वतंत्रता की विजय

धरती पर मनुष्य की आबादी का आधा हिस्सा, स्त्रियाँ, भी पुरुषों की तरह जीवन जीने का अधिकार रखती हैं या नहीं। या सारी लोक लाज, सारी नैतिकता, सारे नियम कायदे स्त्री वर्ग के ऊपर ही मढ़ दिये गये हैं और उनके जीवन वृक्ष को बोन्साई बना दिया गया है? जफर पनाही की
 
cinemanthan
Jun 10 2010 11:53 AM
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Tickets(2005): एक ट्रेन यात्रा तीन कहानियाँ तीन निर्देशक

टिकेटस की एक खूबी है कि पूरी फिल्म ट्रेन के अंदर फिल्मायी गयी है और इसमें तीन कहानियों का समावेश है जो क्रमशः तीन अलग अलग निर्देशकों, Ermanno Olmi, Abbas Kiarostami और Ken Loach द्वारा निर्देशित की गयी हैं और तीनों कहानियों को अलग अलग टीम ने लिखा,
 
cinemanthan
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नव कल्पना नव रुप : नारी सौन्दर्य की भारतीय परिकल्पना

उर्वशी और मेनका जैसी अप्सराओं के मिथकों, सिंधु घाटी की सभ्यता से मिले अवशेषों में पायी गयी यक्षिणी की मूर्ति और अजंता एलोरा की गुफाओं में सदियों से अपने विलक्षण सौन्दर्य की झलक दिखाती यक्षिणी तक ढेरों उदाहरण पाये जाते हैं भारत में, जबकि नारी सौन्दर्य की
 
cinemanthan
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A serious man (2009) : जाने भी दो यारो

[सिनेमंथन के लिये Coen Bros. की A serious man के बहाने भारत के समान्तर सिनेमा के महत्व पर प्रकाश डाल रहे हैं कार्तिक
 
cinemanthan
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Raj Kapoor : राजू तारा कहीं नहीं खोया है

श्री 420 के एक गीत की एक पंक्ति है ” एक तारा न जाने कहाँ खो गया “। राज कपूर की भौतिक शरीर रुपी उपस्थिति तो जरुर 2 जून 1988 को धरा से विलीन हो गयी पर उनकी सिनेमायी छवि तो कालजयी है और वह तो सिनेमा के आकाश में अपनी झलक दिखलाती ही रहेगी। राज
 
cinemanthan
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Road to Sangam (2010) : गाँधी कलश छलके

महात्मा गाँधी की अस्थियों से भरा एक कलश उड़ीसा के एक बैंक के लॉकर में रखा रह जाता है और इकसठ बासठ सालों तक कोई उसकी सुध नहीं लेता और अंत में गाँधी जी के परपौत्र तुषार गाँधी कलश को वहाँ से लाते हैं और उन्हे अस्थियों का विसर्जन इलाहाबाद में संगम पर करना है।
 
cinemanthan
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Mr Singh Mrs Mehta (2010)

विवाहेत्तर संबंधों के कैनवास पर उभरते, बनते, बिगड़ते और फिर से कोई नया आकार लेते चित्रों की गाथा कह सकते हैं निर्देशक प्रवेश भारद्वाज की पहली फिल्म को। कभी सधे हुये ढ़ंग से भरे हुये रंग दिखायी देते हैं इस पेन्टिंग में और कभी यह बदरंग लगती है। एक पुरुष (मि.
 
cinemanthan
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Dastak (1970): मीना बाजार की सीमाओं पर रहते हामिद सलमा

दस्तक उन फिल्मों में से है जिन्हे (जिनकी कहानी को) चाहे पढ़ा जाये या देखा जाये वे एक गहरा असर पाठक और दर्शक पर छोड़ ही जाती हैं। उर्दू कथाकारों की मशहूर तिकड़ी (मंटो, कृष्ण चंदर और राजेन्द्र सिंह बेदी) के राजेन्द्र सिंह बेदी ने इस फिल्म को लिखा भी था और
 
cinemanthan
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Achanak (1973): गुलजार थ्रिलरलैंड में

गुलजार साब की अपनी बनायी फिल्मों में “लेकिन” और “अचानक” दो ही थ्रिलर हैं। अचानक में गुलजार समाज में साधारणतया बसने वाली बेवफाई, कत्ल, नैतिकता और मौत की सजा आदि की परिभाषाओं को खंगालते हैं। “सैंकड़ों को वहाँ जंग में मारने पर
 
cinemanthan
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Shashi Kapoor : हिन्दी सिनेमा के रॉबिनहुड

शीर्षक में शशि कपूर जैसे खूबसूरत कलाकार, जिनकी परदे पर छवि, कम से कम हिन्दी सिनेमा के संदर्भ में, एक रोमांटिक नायक की रही है, के साथ रॉबिनहुड जैसे नाम का जुड़ना थोड़ा अजीब सा तो लगता ही है परन्तु जरा सा रॉबिनहुड के चरित्र के साथ जुड़े मिथकों पर ध्यान दिया
 
cinemanthan
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The White Balloon (1995): जफर पनाही का सफेद गुब्बारा

ज्यादातर समाज कई सारे धरातलों पर जीते हैं और कोई एक परिभाषा उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। बच्चे भी अक्सर समाज में व्याप्त धारणाओं से ही सीखते हैं। समाज में बड़े जैसा कर रहे होते हैं बच्चे भी जाने अन्जाने उन्ही विचारधारओं को अपनाने लगते हैं। नैतिक शिक्षा
 
cinemanthan
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Crash(2004): भेदभाव पर आधारित एक सशक्त्त फिल्म

ऑस्कर विजेता फिल्म क्रैश रेसिज्म का दंश झेलते अमेरिकी समाज में, जहाँ पात्र गोरे, काले और प्रवासियों के खानों में बँटे हुये हैं, पनप रही कहानियाँ दिखाती है। अपने तनावग्रस्त जीवन में सारे चरित्र कहीं न कहीं किसी न किसी तरह की सामाजिक बुराई को सहने को विवश
 
Rakesh
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सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

शायर नज़ीर अकबराबादी (1735-1830) ने बंजारानामा के गीत “सब ठाठ पड़ा रह जावेगा” में मानव जीवन का सच उढ़ेल कर रख दिया। “लाद चलेगा बंजारा” भारत के आध्यात्मिक परिवेश का एक प्रतिनिधि भी है। टुक हिर्सो-हवा (लालच) को छोड़ मियां, मत देस-बिदेस
 
Rakesh
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Khela(2008): ऋतुपर्णो घोष का खेलना एक नये अंदाज में

सपनों के पीछे दीवानगी की हद तक भागना जरुरी नहीं कि अच्छे कर्म ही कराये और कई बार “पैशन” ऐसे काम करने के लिये विवश कर देता है जो कम से कम किसी देश के कानून को तो तोड़ते ही हैं। लेखक और कलाकार हमेशा कानून के दायरे में रह कर ही काम नहीं करते [...]
 
Rakesh
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MacMohan: और सांभा नहीं रहे

किसी भी देश की किसी भी भाषा में बनने वाली फिल्मों का इतिहास सिर्फ और सिर्फ नायक नायिका की मुख्य भूमिकायें निभाने वाले कलाकारों के योगदान से ही नहीं लिखा जा सकता बल्कि इतिहास को ढ़ंग से लिखने के लिये उन कलाकारों के योगदान का जिक्र करना भी जरुरी होता है
 
Rakesh
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Paani : चेतन आनन्द से शेखर कपूर तक

निकट भविष्य में दुनिया के बहुत सारे शहरों का सामना पानी की भयानक समस्या से होने वाला है। आज के भारत के सामने भी जल का संकट और सारे संकटों से बड़ा है। अगर देश और इसकी विशाल आबादी अभी भी नहीं चेते तो पेय जल की तो बात ही छोड़ दीजिये आने वाले समय [...]
 
Rakesh
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The Bald, the Bad and The Dangerous

उपरोक्त शीर्षक का भावार्थ किया जाये तो ” खतरनाक गंजा ” एकदम उपयुक्त लगेगा। यह शीर्षक किसी जासूसी (बाल, किशोर या वयस्क) उपन्यास से उठाया गया लगता है। पर ये समझ लेना जरुरी है कि इन गंजे महोदय से खतरनाक कोई और गंजा कभी भी हिन्दी सिनेमा के परदे
 
Rakesh
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The Bald, the Bad and The Dangerous

उपरोक्त शीर्षक का भावार्थ किया जाये तो ” खतरनाक गंजा ” एकदम उपयुक्त लगेगा। यह शीर्षक किसी जासूसी (बाल, किशोर या वयस्क) उपन्यास से उठाया गया लगता है। पर ये समझ लेना जरुरी है कि इन गंजे महोदय से खतरनाक कोई और गंजा कभी भी हिन्दी सिनेमा के परदे
 
Rakesh
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Khamoshi (1969): तुम्हारा इंतजार है तुम पुकार लो

जरुरी नहीं कि एक सलीके से फैला हुआ निबंध वह असर छोड़ जाये जो एक कविता, जो कि पूरी तरह से अतार्किक लगती है, छोड़ जाती है। यूँ ही नहीं कहा जाता कि भावना दिल का मामला है दिमाग का नहीं। क्वालिटी के मामले में खामोशी विषमता से ग्रसित है पर फिर भी यह एक
 
Rakesh
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City of Gold (2010) : अमीरी गरीबी की राजनीति

महेश मांजरेकर की नयी फिल्म City of Gold अमीरी गरीबी के बीच संघर्ष की राजनीति को दिखाती है। उदारीकरण के बाद से हिन्दी सिनेमा ने गरीब और अमीर के बीच के अन्तर को दर्शाती हुयी फिल्में बनाना बंद कर दिया था और गरीब मेन स्ट्रीम हिन्दी सिनेमा की कहानियों से
 
Rakesh
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Road Movie (2009):ज़िन्दगी एक सफर है

प्रेम को जानने के लिये प्रेम को अपने जीवन में महसूस करना जरुरी है और केवल पढ़ कर या सुनकर इसके बारे में ढ़ंग से नहीं जाना जा सकता। प्रेम को जीकर ही जाना जा सकता है। ज्यादातर मानवीय भावनायें ऐसी ही हैं कि जब तक उनसे खुद साक्षात्कार न कर लिया जाये तब तक
 
Rakesh
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Prince (2010) : बेहद कमजोर थ्रिलर

आज के दौर में करोड़ों की लागत से प्रिंस जैसी हिन्दी फिल्म बनाना रिस्की है और अर्थशास्त्र से सम्बंधित ये रिस्क और भी बढ़ जाता है जबकि फिल्म उन विदेशी फिल्मों के मुकाबले में कहीं ठहरती ही नहीं जिनसे प्रेरित होकर इसका और ऐसी फिल्मों का निर्माण हिन्दी फिल्म
 
Rakesh
May 06 2010 08:16 AM
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Phhoonk 2 (2010) : डर कर दिखाओ

किसी भी अच्छी हारर फिल्म का मूल मंत्र होता है कि कथानक में ऐसे दृष्य होते हैं कि फिल्म के पात्र प्राकृतिक रुप से कुछ घटनाओं के कारण डरते हैं और उनके साथ होने वाली घटनाओं को निर्देशक इस तरह से पेश करता है कि चरित्रों के साथ साथ दर्शक भी डरता है या कम [...]
 
Rakesh
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Paathshaala (2010) : अच्छे विषय पर औसत फिल्म

पाठशाला (2010): अच्छे विषय पर एक औसत फिल्म पिछले लगभग 25 सालों में भारत का शिक्षातंत्र गिरावट की ओर तेजी से अग्रसर होता रहा है। जैसे जैसे प्राइवेट सैक्टर की भागीदारी शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ी है उसमें भ्रष्टाचार भी बढ़ा है। स्कूल, कालेज अपनी मनमानी करते
 
Rakesh
May 06 2010 08:13 AM
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Apartment (2010) : रोमांचरहित थ्रिलर

अपार्टमेंट एक ऐसी थ्रिलर है जिसे देखते हुये दर्शक रोमांचित नहीं हो पाता। इसे एक कमजोर और कामचलाऊ थ्रिलर ही माना जा सकता है। फिल्म का एक पात्र (रोहित रॉय) अपने अधीनस्तों से कहता है कि शाहरुख खान भी नहीं बल्कि सिर्फ सैक्स बिकता है। पर अपार्टमेंट के सम्बन्ध
 
Rakesh
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Rebellious Gulzar : Thok de Killi (Raavan)

Once Gulzar Saab accepts a project then that project is bound to be affected by the special touch of Gulzarian creation. One can not hire a talent like him but can ask him to collaborate in the project. It does not matter if he is collaborating with big
 
Rakesh
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विद्रोही गुलजार : ठोक दे किल्ली (रावण)

गुलजार साब ज्यादातर शांत, धीर गम्भीर और कभी कभी विनोदी मूड में भी पाये जाते हैं। उनके लिखे ज्यादातर गीतों से उनके रोमांस की समझ का पता चलता है। उनकी कल्पना तो कहीं से कहीं पहुँच ही जाती है और कई बार तो सुनने और पढ़ने वाले को उनकी लिखी पंक्तियों का अर्थ
 
Rakesh