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16 Jun 2010
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खुद को धोखे देने की बीमारी, तुम्हारी याद और जिम मोरिसन

दो यातना भरे दिन सुलगते रहे. रात को कड़कती बिजली की चीख पुकार के बावजूद रोने को आतुर आसमान के तले नशे में आराम से सोया रहा. स्मृतियों का जो बचा हुआ समान है, उस पर कमबख्त समय नाम की दीमक भी नाकाम है. कोई हल नहीं होता कोई याद नहीं जाती. सत्रह साल पहले कभी
 
hathkadh
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कुछ बीती हुई शामों हिसाब और एक अफ़सोस ?

दीवारों पर उनके पते लिखे होते हैं अक्सर जिनके मिलने की आस बाकी नहीं होती. महीनों और सालों तक मुड़ा-तुड़ा, बदरंग पता लिखा पन्ना किसी उम्मीद की तरह जेब में छुपाये घूमते रहते हैं मगर एक दिन कहीं खो जाया करता है. मेरी उलझनें तुमसे हुई मुहोब्बत जैसी हो जाती है.
 
hathkadh
Jun 12 2010 03:16 PM
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तोन्या, चाईल्ड मोलेस्टेशन और मेरा विचलित विश्वास

तोन्या, अब तुम हर आरोप से बरी हो मगर तुम्हारे मुकदमे की राख से उड़ते हुए कई सवाल मेरी पेशानी कीसलवटों को मैला कर जाते हैं. चाइल्ड मोलेस्टेशन और सेक्स अब्यूज के बाईस आरोपों से संभव था कि तुम्हें चारसौ साल कि कैद की सजा सुना दी जाती. दुनिया के कई विचित्र
 
hathkadh
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खूबसूरत लड़की का चेहरा, तीस डिग्री पर खिला चाँद और कुछ यादें

सुबह आठ बजे उठा था. उसके बाद दिन जाने किन ख़यालों में बीता, याद नहीं. आँधियाँ मेरे यहाँ तुम्हारी मुहब्बत की राहत की तरह बरसती है. विरह का तापमान कुछ एक डिग्री गिर जाया करता है फिर मैं मुहब्बत की सौगात फाइन डस्ट को पौंछता फिरता हूँ. वह हर जगह उतर आती है
 
hathkadh
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आओ पी के सो जाएँ, महंगाई गयी तेल लेने

कहिये ! प्रधानमंत्री जी आपको एक सवाल पूछने की अनुमति दें तो आप क्या पूछेंगे ? सवाल सुन कर कभी कोई खुश नहीं होता क्योंकि सवाल हमेशा असहज हुआ करते हैं। वे कहीं से बराबरी का अहसास कराते हैं और सवाल पूछने वाले को कभी - कभी लगता है कि उसका होना जायज है. आज
 
hathkadh
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दोस्त ज़ोर्ज, एक मास्टर कवि ने तुम्हारी याद दिला दी

अमेरिकी प्रशासन ने पिछले साल सब नियोक्ताओं से आग्रह किया था कि वे अपने अधिकारियों को निर्देश दें कि फेसबुक पर कम से कम जानकारी सार्वजनिक करें, मुझे लगा कि अमेरिकी प्रशासन की फट रही थी लेकिन दो दिन पहले एक मास्टर कवि मेरे फेसबुक एकाउंट पर आकर मुझे अपना
 
hathkadh
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टिटहरी इस बार ऊंची जगह पर देना अंडे

गाँव बहुत दूर नहीं है बस हाथ और दिल जितनी ही दूरी है. पापा होते तो वे कल गाँव जाने के लिए अभी से ही तैयार हो चुके होते क्योंकि कल आखा तीज है. दुनिया भर में किसानों के त्यौहार फसल की बुवाई से ठीक पहले और और कटाई के बाद आते हैं. हमारे यहाँ भी आखातीज बहुत
 
hathkadh
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भाजपा का हमला नहीं, ज्यादा खा चुकी बकरी के आफरे के बाद की मिंगणियां है

मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनके सिपहसालार विधायक रमेश मेन्दौला के कथित घोटालों के बारे में प्रकाशित खबरों के बाद राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार 'पत्रिका' पर हमले किये जा रहे हैं. संसद में जयपुर के सांसद महेश जोशी ने इसे भाजपाई
 
hathkadh
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स्त्री विमर्श की किंवदंती पाकिस्तान चली गयी, तनहा कवि अब दीवारों से सर फोड़ता होगा

कवि के लिए दो ख़िलाफ़त भरे शब्द कोई कह दे तो उसके चमचे कांव - कांव करते हुए सर पर मंडराने लगते हैं, यही एक कवि के सफल और महान होने की पुष्टि का एक मात्र तरीका भी है. मेरी एक परिचित ने जब दूज वर चुना तो मुझे पहले हेमा मालिनी से लेकर करिश्मा और फिर सानिया
 
hathkadh
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स्फिंक्स, कई मौसम बीत गए हैं ढंग से पीये हुए.

जिन चीजों को आप सीधा रखना चाहते हैं वे अक्सर उल्टी गिरती हैं । आईने हमेशा खूबसूरत अक्स की जगहसिलवटों से भरा सदियों पुराना चेहरा दिखाया करते हैं। किस्मत को चमकाने वाले पत्थरों के रंग अँगुलियों में पहनेपहने धुंधले हो गए हैं तो मैंने उन्हें ताक पर टांग दिया
 
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1411 बाघ और 11 हिंदी चिट्ठा चिन्तक

कल रात को पीने के लिए वोदका का एक पैग ही बचा था। रूस की इस देशी शराब को मैं ज्यादा पसंद नहीं करता हूँआधी रात होते ही उतर जाया करती है फिर भांत - भांत के बेहूदा सपने देखते हुए सुबह हुआ करती है। आज विस्की के बारे में सोच रहा हूँ । सोचने का क्रम अभी टूटा
 
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जियें तो जहाँ में दिमित्रोफ़ होकर

कल का दिन बहुत उमस भरा था. मौसम में आर्द्रता बढ़ रही होगी वरना नम भीगी आँखों की नमी महसूस करने के दिन अब कहाँ है. ऐसे दिनों में ये बहुत पहले की बात नहीं है जब किसी राह से गुजरते हुए इंसान को उदास देख कर ही लोग उदास हो जाया करते थे. मन उन दिनों गीले थे.
 
hathkadh
May 02 2010 10:01 AM
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कितने साये याद करूँ

दसों दिशाओं में आग बरसती है.रेत के सहरा में उठते हैं धूल और स्मृतियों के बवंडर. सन्नाटा पसर जाता है धुली हुई चादरों की तरह. घड़ी भर की छाँव में याद की पोटली से निकली कुछ हरे रंग की चूड़ियाँ, लू को थोडा सा विराम देती है. एक पीले रंग का ततैया पानी की
 
hathkadh
Apr 24 2010 11:40 AM
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मैं माओवादी नहीं हूँ

गरमियां फिर से लौट आई है दो दशक पहले ये दिन मौसम की तपन के नहीं हुआ करते थे. सबसे बड़े दिन के इंतजार में रातें सड़कों को नापने और हलवाईयों के बड़े कडाह में उबल रहे दूध को पीने की हुआ करती थी. वे कड़ाह इतने चपटे होते थे कि मुझे हमेशा लोमड़ी की दावत याद आ
 
hathkadh
Apr 18 2010 08:57 PM
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म्हें होग्यो फोफलियो

मिनिट मेड न्यूट्री लेमन की बोतल ख़त्म होने को थी तो सोचा कि थोडा सा ज़िन कल के लिए बचा लिया जाये. इसी उधेड़बुन में एक नीट पैग गले उतर गया. धुआं सा कुछ मुंह से उठा और आह बन कर हवा में खो गया. मेरी वाईफी आज मेरे लिए रेशनल कारपोरेशन के स्टोर से कुछ ख़ास
 
hathkadh
Apr 05 2010 09:14 AM
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एक लम्हे के बाद

कुम्हार के चाक सी नहीं होती है ज़िन्दगी कि सब कुछ उपयोगी और सुन्दर बनाते हुए ठीक वहीं आकर चक्का रुक जाये जहाँ से शुरू हुआ था. इससे से तो हर पल कुछ छीजता जाता है, किसी अल्पव्यय हानि की तरह जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होती. मैं सुबह घर से निकला हुआ शाम होते
 
hathkadh
Apr 01 2010 11:45 AM
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ना-खुदा मैं शायद तेरा न था

भाई, तुम अगर होतेतो शायद झगड़ कर घुन्ना बने बैठे होते हम एक दुसरे सेलेकिन तुम मर चुके हो बरसों पहलेऔर मेरे लिए तुम अब बस एक विषय रह गए होक्या कुछ और भी संभव थाजबकि न मैं तुमसे कभी मिलान देखा तुम्हें ?महेन की ये पंक्तियाँ मन को आलोड़ित कर देती है. बचपन
 
hathkadh
Mar 22 2010 09:52 AM
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इंसान करीने के

मेरा ये हाल था कि दरसी किताबों में जो नज़्में थी. उनमे मुझे कोई कशिश नहीं मिलती थी. लेकिन अगर किसी शेर या नज़्म का ऐसा टुकड़ा हाथ आ जाता था जिसमे बचपन के शऊर के मुताबिक मुझे रस, तरन्नुम और रंगीनी मिले, तो ये चीज़ें मेरे दिल में ख़ामोशी से उतर जाती
 
hathkadh
Mar 19 2010 10:35 AM
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बाराती पीकर झूमें तो अच्छा है या सांसद को फोन करे तो ?

मेंबर पार्लियामेंट को रात बारह बजे के बाद एक पिया हुआ मतदाता फोन करके यह कहे कि आपकी याद आ रही थी. उसको कैसा फील हुआ होगा ?मौसम में ख़ास तब्दीली नहीं थी ठंडी हवा चल रही थी। अहमदाबाद जाने वाले हाईवे के पास नयी आबादी में चहल पहल थी. १६ फरवरी को शादी का
 
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Mar 19 2010 10:35 AM
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दोस्त, उस पार भी कोई हसीन सूरज नहीं खिला हुआ है...

मुझे विस्की प्रिय है और रम मेरी आखिरी पसंद. इनके बीच हर उस तरह की शराब समा सकती है, जो पीने लायक है भी और नहीं भी. मैंने पहली धार की देसी शराब पी और लुढ़क गया. मैंने रात भर सड़क के किनारे बैठ कर आला अंग्रेजी शराब पी और सुबह उससे निराश हो कर सो गया. मैंने
 
hathkadh
Mar 19 2010 10:35 AM
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कमबख्त नशीली गालियां

मौसम की ठण्ड को होली के रंग उडा ले गए तो एडिडास की गंजी भी कुछ चुभने लगी है. घर के बैकयार्ड से लगते कमरे में नाश्ता करके बिस्तर तोड़ रहा हूँ. तीन दिन से पीने को नहीं मिली इसलिए कुछ करने का मन नहीं है. पर्वों और त्योहारों में जाने क्यों पीना सुहाता ही
 
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Mar 19 2010 10:35 AM
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किसी तरह तो जमे बज़्म

ख़ुशी और उदासी के लिए कितनी छोटी - छोटी सी बातें पर्याप्त होती है. कल शाम को डॉ. विजय माल्या मुझे बहुत उदास दीखे, चार घंटे बाद वही उदासी ख़ुशी में बदल गयी. वे आईपीएल में खेल रही अपनी टीम रोयल चेलेंजर बेंगलोर के लिए चीयर अप करने आये थे.पहली सीजन के आगाज़
 
hathkadh
Mar 19 2010 10:35 AM
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गौशाला का सांड और फूटा अद्धा

मेरे सब दोस्तों में बाबू लाल एक मात्र सच्चा शराबी था उसने ब्रांड, स्थान और शराबियों में किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बिना मयकशी को सुन्दरता प्रदान की। उसका दिल प्यार से भरा था और वह एक पैग से ही छलकने लग जाए इतना हल्का भी नहीं था। मैं हमेशा अपनी शाम उसके
 
hathkadh@gmail.com
Mar 19 2010 10:21 AM
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मौज लेण की टेम मतबल आदमी के साथ आदमी फ्री

रे लंगङों थम बैठे हो यहाँ इब तो मौज लेण की टेम आई है ल्या रे बाबू मेरे भी ढक्कन भर पूरी तो.... सहायक अभियंता साब टांग चढाये मुर्गे से हो के आराम की मुद्रा में आ गए पीण आले सब बोतल ने देखते से आण आले टेम में कित्ते बजट की और जरूरत का हिसाब करण लगे जद के
 
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Mar 19 2010 10:20 AM