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Rosa Centrifolia :) :) :)

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03 May 2010
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मेरा वेतन ऐसे रानी जैसे गरम तवे पे पानी

रघु अपने बच्चो के लिए फल खरीदने के लिए आया |वैसे तो उसका नाम रघुनाथ था पर सरकारी कार्यालय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने के कारण रघुनाथ कब रघु हो गया पता ही नहीं चला| हरेक फल को बहुत अच्छे से तोलमोल के देख रहा था और मन में एक उलझन
 
Bhanu choudhary
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बेटियां

जो बोया, सो काट रहे हैं। पहले बेटियां कत्ल कीं, अब बहुएं तलाश रहे हैं।‘तुम्हारे तो दो-दो बेटे हैं, इनका ब्याह करोगी, तो पूरा घर दहेज के सामान से भर जाएगा। मालती, तेरे तो ठाठ हैं ठाठ!’ ये जुमने सुनकर मालती का सिर घमंड से तन जाता था।धीरे-धीरे मालती के
 
Bhanu choudhary
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बहने

छोटी स्कूल से लोटी तो अपनी बड़ी बहिन को आज के दिन का पूरा घटनाक्रम विस्तार में सुनाने लगी वैसे तो बड़ी छोटी की हर बात सुनती है पर आज अखबार में माधुरी गुप्ता के देशद्रोह की खबर पढने में कुछ ज्यादा ही मगन थी सो छोटी पे झल्ला के बोली ‘तुम्हारी
 
Bhanu choudhary
Apr 30 2010 11:31 PM
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थपकी वाली रोटी

घर में मेहमान आया। घर के सदस्यों द्वारा आदर-सत्कार हुआ। एक ने आकर राम-राम की। दूसरे ने पानी पिलाया। तीसरे ने कुशलक्षेम पूछी। दिन अस्त होने को आया। अंधेरा घिर आया। रात पड़ने लगी। खाने की तैयारियां शुरू हो गईं। घर में छह प्राणी थे। कमाने वाला एक ही था।
 
Bhanu choudhary
Apr 13 2010 10:55 PM
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सच्ची-मुच्ची

नई-नई आई वह रोगिणी मेरे परामर्श कक्ष से जाने लगी, तो उसने मुड़कर मुझे अजीब सी नजरों से देखा।‘क्या हुआ..?’ मैंने पूछा।‘कह नहीं सकती!’ वह बोली- ‘मैं निर्धारित समय से पांच मिनट पहले चली आई थी पर आपने मुझे तुरंत भीतर बुला लिया और ढेर-सा वक्त भी दिया। आपने
 
Bhanu choudhary
Apr 11 2010 12:42 PM
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जिंदगी के रंग

महीनो से जिस दिन का इंतज़ार था आखिर वो दिन आ ही गया| आज घर के आगे काले रंग कि चमचमाती कार खड़ी है| मैं और सुधीर पिछले 8-9 महीनो से ना जाने कितने तरीको से पैसे जोड़ तोड़ के आज इसे किस्तों पे खरीद पाए है| सही ही है आज के महगाई के ज़माने में जहा हर चीज
 
Bhanu choudhary
Apr 11 2010 12:41 PM
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" आज बड़ी हिम्मत से रखा है ब्लॉग्गिंग की दुनिया में, ये पहला कदम ये मेरा पहला कदम "

ब्लॉग नाम की चीज से मैं खुद को बिलकुल अनजान नहीं कहूँगी क्युकी इसकी विविध खूबियों के बारे में मैं कई जगह पढ़ चुकी थी फिर जून 09 को हिम्मत करके मैं भी इस तरन ताल में उतर गई आखिर देखे की ये बाला है क्या ? जैसे की मानव की स्वाभाविक प्रवृति होती है की जिसे
 
Bhanu choudhary
Nov 25 2009 08:10 AM