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महामानव

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13 Jun 2010
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दैनन्दिनी, संलेख और साहित्य

अभी-अभी चिट्टाचर्चा पर एक आलेख देखा 'कौन है सर्वश्रेष्ठ ब्लोगेर?' यह देखकर आश्चर्य हुआ कि किसी एक ने कह डाला कि ब्लॉग (संलेख) तो लेखक की डायरी (दैनन्दिनी) होता है, बस अनेक टिप्पणीकारों ने भी इसे ही स्वीकार कर लिया, मैं समझता हूँ, बिना सोचे-विचारे.
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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स्वतन्त्रता और अनुशासन

स्वतन्त्रता और अनुशासन का गहनतम सम्बन्ध यह है कि केवल अनुशासित व्यक्ति ही स्वतन्त्रता पाने का अधिकारी होता है. स्वतन्त्रता का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी इच्छानुसार कार्य करने या न करने के लिए किसी के बंधन में ना रहे. व्यक्तिगत स्तर पर इस प्रकार की
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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पूर्वाग्रह और दृष्टिकोण संतुलन

मनुष्य का सर्वाधिक घातक पूर्वाग्रह यह होता है कि उसे सभी सामान्य विषयों का ज्ञान है जबकि यथार्थ यह होता है कि हम सभी अल्पज्ञानी होते हैं किन्तु सार्वजनिक स्तर पर इसे स्वीकार नहीं करते. इस पूर्वाग्रह के कारण हम प्रत्येक विषय पर अपने पूर्वाग्रह का पोषण
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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समरथ को नहीं दोष गुसाईं

तुलसीदास ने अपने महाकाव्य 'रामायण' में लिखा है 'समरथ को नहीं दोष गुसाईं' जिसका अर्थ यह लिया जा रहा है कि समर्थ व्यक्ति पर दोषारोपण नहीं किया जा सकता. देखने-सुनने में यह कुछ अटपटा सा लगता है किन्तु यदि इसे इस प्रकार समझा जाये कि 'समर्थ व्यक्ति में दोष
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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प्राकृत बुद्धि का अध्ययन

प्रकृति के सिद्धांत एवं नियम अटल, सर्वव्यापी और सार्वकालिक हैं, इन्हीं को एल्बर्ट आइन्स्टीन ने ईश्वर की बुद्धि कहा है. इन्हीं के अध्ययन को प्राचीन काल में फिलोसोफी और अब भौतिक विज्ञानं कहा जाता है. विश्व की प्रत्येक गतिविधि का संचालन इन्हीं के अनुसार
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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आदर्शवादिता और व्यावहारिकता

जन साधारण की मान्यता है कि आदर्शवादिता और व्यावहारिकता में ध्रुवीय अंतराल होता है और दोनों का समन्वय संभव नहीं हो सकता. महामानवीय दृष्टिकोण इससे भिन्न है जिसके अनुसार आदर्शवादिता व्यावहारिकता की कोटि का मानदंड होता है. जिसका तात्पर्य यह है कि व्यक्ति का
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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यथार्थ चिन्तन और कल्पना

पहले चिंतन के बारे में कुछ चिंतन. प्रत्येक मनुष्य अपनी प्राकृत अंतर्चेतना के अधीन अपने अनुभवों से प्राप्त सूचनाओं को अपनी स्मृति में संग्रहीत करता है. ये सूचनाएं व्यक्ति की पारिस्थितिकी से पांच संग्राहकों - आँखें, कान, नासिका, जिह्वा और त्वचा, द्वारा
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 11 2010 05:53 PM
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साहस एवं आत्म-विश्वास की अपरिहार्यता

असामान्य स्थिति में भी अपने मार्ग पर डटे रहना साहस है. ऐसा हम तभी करते हैं जब हमें अपनी सुयोग्यता पर विश्वास हो कि हम असामान्य स्थिति से सफलतापूर्वक निपट लेंगे. इसी विश्वास को आत्म-विश्वास कहा जाता है. अतः साहस के लिए आत्म-विश्वास परम आवश्यक है. 
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 09 2010 04:21 PM
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व्यक्तित्त्व और आदर्शवादिता

प्रत्येक व्यक्ति के अन्तः में उसके दो स्वरुप उपस्थित होते हैं - एक वह जो वह वास्तव में होता है, तथा दूसरा वह जो वह होना चाहता है. प्रथम स्वरुप उसकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है जबकि दूसरा उसके आदर्शों पर. इन दोनों स्वरूपों में अंतराल हो सकता है क्योंकि
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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स्वचेतना और प्रयोगधर्मिता

अपने बारे में जानने की उत्सुकता तो सभी मनुष्यों में होगी ही - ऐसी व्यापक धारणा है. किन्तु सत्य इसके विपरीत है. मनुष्य प्रायः दूसरों के बारे में जानने के लिए अपने बारे में जानने से अधिक उत्सुक रहते हैं, विशेषकर दूसरों के छिद्रान्वेषण में उन्हें अतीव
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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व्यक्तिपरक एवं लक्ष्यपरक विचार

किसी भी विषय पर कोई व्यक्ति दो प्रकार से विचार कर सकता है - स्वयं के सापेक्ष अथवा लक्ष्य के सापेक्ष. उदाहरण के लिए मान लीजिये कि आपको निर्णय लेना है कि आगामी चुनाव में किस प्रत्याशी को अपना मत देना है. इसका निर्णय आप दो आधारों पर कर सकते हैं - स्वयं के
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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संवेदनशीलता एवं सार्थकता

बहुधा ऐसा होता है कि जब मैं किसी गंभीर विषय पर लिखने बैठता हूँ तो हिंदी में उपयुक्त शब्दों का अभाव पाता हूँ. भावुक हिन्दीभाषी इसे मेरी भाषाई निर्बलता कहेंगे अथवा मुझसे रुष्ट होंगे. किन्तु सत्य यही है कि हिंदी में अभी भी शब्दों का नितांत अभाव है. अभी मैं
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Apr 26 2010 12:52 PM
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लोक नेतृत्व की पात्रता

राम और कृष्ण के दो उदाहरण हमारे समक्ष हैं जिनमें से प्रथम ने यह कदापि नहीं कहा कि वह परमेश्वर है और लोक नेतृत्व हेतु सुयोग्य है जब कि दूसरे ने ऐसा कोई अवसर नहीं छोड़ा जब उसने न कहा हो कि वही सर्व जगत का संचालक है और उसी को सभी कुछ समर्पित किया जाना चाहिए
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Apr 16 2010 02:32 PM
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संवाद की विलक्षणता

भाषा विकास द्वारा मनुष्य जाति ने अपना मंतव्य स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की विशिष्टता पायी है. इसके लिए दो माध्यम विशेष हैं - वाणी और लेखन. चित्रांकन और भाव प्रदर्शन भी इसके सशक्त माध्यम हैं. प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी रूप में इन चारों माध्यमों का उपयोग
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Apr 12 2010 01:39 PM
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भाग्य और लक्ष्य

अंग्रेज़ी के दो शब्द हैं 'फेट' और 'डेस्टिनी' जिन्हें प्रायः पर्याय के रूप में उपयोग किया जाता है. किन्तु इन दोनों में उतना ही विशाल अंतर है जितना एक साधारण मानव और महामानव में होता है. ये दोनों भी एक जैसे ही दिखते हैं. फेट शब्द लैटिन भाषा के शब्द fatum से
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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Apr 05 2010 05:05 AM
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शोषण और प्रतिस्पर्द्धा का विलोप

प्रत्येक व्यक्ति प्राकृत रूप में भी अपनी आवश्यकता से बहुत अधिक उत्पादित करने की क्षमता रखता है  सभ्यता और वैज्ञानिक विकास कार्यों ने इस उत्पादन क्षमता को और भी अधिक संवर्धित किया है. इसलिए मानब जाति सही दिशा में चलने पर कभी अभावग्रस्त नहीं हो सकती.
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 26 2010 11:50 AM
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व्यक्तिगत एवं सामाजिक दृष्टिकोण

हम में से प्रत्येक व्यक्ति दो प्रकार के उद्देश्यों के लिए कार्य करता है - व्यक्तिगत हितों के लिए तथा सामाजिक व्यवस्था के लिए. इन दो उद्देश्यों के लिए हमारे दायित्व भिन्न होते हैं इसलिए हमारी भूमिकाएं भी भिन्न होनी चाहिए. इसलिए प्रत्येक सभ्य नागरिक को दो
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 18 2010 09:28 AM
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अवतार और लेखक

हिंदी भाषा का दुर्भाग्य है कि इसमें सभी भावों के लिए प्रथक शब्दों का विकास नहीं किया गया है, जबकि भाषा के आदि पुरुषों ने वैदिक संस्कृत में शब्द विकास के अभूतपूर्व प्रयास किये थे. आधुनिक संस्कृत में वैदिक शब्दों के अर्थ विकृत किये जाने और हिंदी विकास का
 
देवसूफी राम कु० बंसल
टैग: लेखक
Mar 16 2010 01:03 PM
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मानव भाव अभिव्यक्ति

मनुष्यता की दो पहचानें मानवता को पशुता से प्रथक करती हैं - समाजीकरण एवं भाषा विकास. समाजीकरण का मूल मन्त्र कार्य विभाजन के साथ परस्पर सहयोग है, जबकि भाषा विकास का मूल भाव और शब्द का सम्बन्ध है. इन्ही दो माध्यमों से मानव समाज से महामानावोदय की संभावना है.
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 13 2010 12:27 AM
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महामानव का अनिवार्य लक्षण और लक्ष्य

तीन विशेषण शब्द - ठीक, सामान्य और साधारण, प्रायः एक दूसरे के पर्याय के रूप में उपयोग किये जाते हैं. इन के अंग्रेजी समतुल्य शब्द - normal , common और ordinary, भी लगभग पर्याय मने जाते हैं. किन्तु इन तीन शब्दों के विलोम शब्द - बेठीक  (abnormal),
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 09 2010 12:37 AM
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सहयोग और प्रतिस्पर्द्धा

जीवन और अधिकारों के लिए प्रतिस्पर्द्धा करना आदिमानव का अन्य जीव-जंतुओं की तरह जन्मजात गुण था. व्यक्तिगत और वर्ग संघर्ष उनके घुमक्कड़ जीवन के अभिन्न अंग थे. इस अवस्था में चिंतनपरक विकास करना उसके लिए संभव नहीं था जबकि उसकी क्षमता विकास हेतु
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 06 2010 08:52 AM
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मानावोदय का विज्ञानं - मनोविज्ञान

मानावोदय का विज्ञानं - मनोविज्ञान पृथ्वी पर जीवन के उदय के साथ ही क्रियान्वित हो गया था, यद्यपि इसका भान मानवों को बहुत बाद में हुआ. मनुष्य, चाहे एकाकी चिंतन मग्न हो, चाहे भीड़ के कोलाहल में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर रहा हो, वह सभी समय मनोवैज्ञानिक खेलों
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 06 2010 08:51 AM
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मस्तिष्क और मन का अंतर

सामान्यतः शब्द मस्तिष्क और मन एक दूसरे के पर्याय के रूप में उपयुक्त कर लिए जाते हैं, किन्तु वास्तव में ये पर्याय नहीं हैं. मस्तिष्क मन का एक अंग होता है ठीक उसी प्रकार हैसे मन शरीर का एक अंग होता है अथवा व्यक्ति समाज का एक अंग होता है.मनुष्य की खोपड़ी के
 
देवसूफी राम कु० बंसल
टैग: मानव
Feb 24 2010 11:07 PM