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जज़्बात, ज़िन्दगी और मै

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26 May 2010
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अब चलो नींद के घर

सोयी रात के सिरहाने पर जग रहा था चाँद ।चिंता के हाथों को कसके नींद रखी थी बाँध ।ओढ़ ली है थकी आँखों ने  पलकों की चादर ।दफ्तर छोड़ा होश का अब चलो नींद के घर ।अँधेरे ने बेहोशी मेंछेड़ा मन का तार ।दूर सपनों के वादी में बज उठा गिटार ।चित्र साभार गूगल सर्च
 
Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
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भालू भाग रहा था, उसके पीछे मैं

चलिए आज आप सबको एक घटना के बारे में बताता हूँ । ये घटना तब घटी जब मैं अपने काम के सिलसिले में मध्य प्रदेश के सीधी जिले के एक गाँव में कुछ महीनों के लिए ठहरा हुआ था ।  एक भू-वैज्ञानिक होने के नाते मध्य भारत के कई स्थानों में रहना भी हुआ और काम
 
Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
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ताकि तस्वीर, साफ़ दिखती रहे

शिवम मिश्र जी के ब्लॉग "बुरा भला" से एक अच्छी जानकारी मिली कि कल, यानि की १५ मई, शहीद सुखदेव का जन्मदिन है । इत्तफाकन ये दिन मेरा और शिवम मिश्र जी का भी जन्मदिन है ! मुझे यह जानकर बड़ा अच्छा लगा कि मैं अपना जन्मदिन भारत माता के इस सच्चे सपूत सुखदेव के साथ
 
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जाती प्रथा

यह कुतर्क हमेशा दिया जाता है कि जातिप्रथा की शुरुआत इसलिए की गयी थी कि हमारा समाज कर्म के अनुसार सुव्यवस्थित हो सके । इन जातिप्रथा के समर्थकों से ये पूछिए कि दुनिया के दुसरे देशों में यह व्यवस्था नहीं है तो क्या वहां का समाज व्यवस्थित नहीं है? बल्कि
 
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तब, माँ, तेरी याद आती है

वैसे तो माँ को याद करने के लिए कोई खास दिन की ज़रूरत नहीं होती है । माँ हर पल दिल में होती है । फिर भी आज जब घर से बहुत दूर हूँ, माँ को देखे बहुत दिन हो गया, तब, बहुत जी करता है की बस सब कुछ छोड कर  माँ के पास जाऊं और उनके गोद में सर रखकर सो जाऊं ।
 
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दुनिया की अलग-अलग भाषाओँ में “माँ” को किस तरह पुकारा जाता है

‘माँ” – ये शब्द दुनिया का सबसे सुन्दर, सबसे मीठा और सबसे प्यारा शब्द है ! आइये देखते हैं की दुनिया की विभिन्न भाषाओँ में माँ को क्या कहा जाता है ... Language Mother Afrikaans Moeder, Ma Albanian Nënë, Mëmë Arabic Ahm Aragones Mai Asturian Ma Aymara Taica
 
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इसलिए उनका नाम बहुत है

सर पे उनका इलज़ाम बहुत है ।इसलिए उनका नाम बहुत है  ॥ जाते हैं वो विदेश मुफ्त में ।देश में उनका दाम बहुत है ॥ अगला चुनाव से पहले बिजली ।गाँव गाँव में काम बहुत है ॥ करनी है ना शायरी अबके ।शायरी में ताम झाम बहुत है ॥ अब जागो बहुत कठिन डगर है ।कर लिया
 
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एक चित्र - मेरा भारत महान !

इस बार कविता की जगह एक तस्वीर पेश है । वैसे मेरा मानना है की एक अच्छी तस्वीर किसी कविता से कम नहीं होती है । आप जब कविता पढते हैं, तो आपके जेहन में कुछ बातें आती हैं जो शायद आपको सोचने पर मजबूर करती है, या फिर एक ऐसी तस्वीर आपको दिखाती है जो आपको अच्छी
 
Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
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कागज की कश्ती

चलिए हंसी मजाक हो गया, अब फिर से संजीदा कुछ हो जाये - कर लो चाहे कुछ भी पर ये यार नहीं कर पाओगे ।कागज की कश्ती से सागर पार नहीं कर पाओगे ॥पी कर आंसुओं को मैंने, छाती पर पत्थर रखकर ।किया है जिस तरह इंतज़ार नहीं कर पाओगे ॥लेकर नाम उनका तुमने पुकारा है
 
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ये ब्लॉग जगत है

कुछ स्वाद बदलने के लिए और कुछ इस ब्लॉग जगत के बारे में कहने के लिए लीजिये ये रचना प्रस्तुत है; उम्मीद है ठेठ ब्लॉगर भाई लोग बुरा नहीं मानेंगे:किसने कहा जो लिखी है मैंने वो ग़ज़ल है ।चलता है सबकुछ नया फैशन आजकल है ॥मैं भी लिखूं, तुम भी लिखो, कथा-हास्य-काव्य
 
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सीधी बात है कहने दो !

सीधी बात है कहने दो !जो जैसा है रहने दो !!ज़ब्त हम में है बहुत !हर सितम को सहने दो !!बेरहम जज़्बात के !अब शहर को ढहने दो !!हाथ-पैर जकड़े हुए !कुछ जुबां से कहने दो !!मोहलत से आये बड़ी !अश्कों को अब बहने दो !!दिल में मुहब्बत नहीं !‘सैल’ तकल्लुफ रहने दो !!
 
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काम रखो बस काम से

मेरे इस ग़ज़ल पर डॉ. डंडा लखनवी जी कुछ सुधार किये हैं ! इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ ! उनके द्वारा बताये हुए संसोधन को मैं इसमें शामिल कर रहा हूँ ... मुझे यकीन है कि इससे इस ग़ज़ल में और निखार आ गया है .... सभी बड़ों एवं बुजुर्गों से निवेदन है कि जब भी मौका
 
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कैसे …

आज के समाज में निरंतर निरर्थक होते जाते रिश्तों पर यह मतला पढ़िए ....बिखर चुके टूटकर जो, अब उनको जोड़े कैसे !निकल आए इतना आगे, राहों को मोड़े कैसे !!बचपन में साथ खेलने वाले भाईयों के बीच उठती दीवार पर ये शेर अर्ज़ है ....बंटवारा किस तरह होगा बचपन की यादों
 
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तुम एक दिन हो

आजकल यहाँ जुदाई का मौसम चल रहा है ! इसलिए मन उदास ! इस उदासी में कहीं किसी दरार से रिसने लगे कुछ भावों को कविता में ढाल दिया जो आपके समक्ष प्रस्तुत है ! इस कविता को समर्पित करता हूँ अपनी अर्धांगिनी को जो इस वक़्त मुझसे काफी दूर है ! कहा न ... आजकल जुदाई
 
Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
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Apr 14 2010 06:14 AM
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रुला गया मौसम ये हँसी का

ज़िन्दगी तू करले कितना भी सितम हंसके सारी बातें अब सहेंगे हम गैरों से कैसा गिला किसीसे भी क्या मिलामिला है तो बस केवल ही रंजो ग़म हंसके सारी बातें अब सहेंगे हम तरीका ना जाना मै ज़माने का नाम मुझको मिला दीवाने का करता रहा नादानी होशियारी ना जानीशौक था यूँ
 
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Apr 14 2010 06:14 AM
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काफिर हूँ, पर …..

मैं एक बहता दरिया हूँ, ठहर नहीं सकता हूँ मैं !मैं हूँ शायर का एहसास, कि मर नहीं सकता हूँ मैं !!जलता रहता है आंधियों में भी जो वो चराग हूँ  !इन ज़रा सी हवाओं से अब डर नहीं सकता हूँ मैं !!मैं आया था जिन राहों को ज़िन्दगी में पीछे छोड़ !उन राहों से अब
 
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Apr 09 2010 08:52 PM
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यहाँ न कोई ठौर होगा

आज यहाँ मुकाम है, कल कहीं और होगा !आने जाने का ज़माने में यूँ ही दौर होगा  !!कौन रुका है हमेशा के लिए मेरे दोस्त !न हुआ था यहाँ कभी न कोई ठौर होगा !!
 
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उलझन में हूँ

खिजां भी देखी है मैंने तो, देखी है बहार भी !मैदाने जंग में देखी है जीत भी है हार भी !!रूक रूक के आँखों से कैसे टपकता है अश्के ग़म !पानी देखा है ठहरा हुआ, देखी है धार भी !!कहीं ईद-होली है तो कहीं गोधरा-बाबरी !कहीं नफरत पनपते देखा, कहीं दिल में प्यार भी
 
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Apr 07 2010 02:06 PM
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बड़ी देर तक

काफिला गुज़र गया, उडती रही धूल बड़ी देर तक !राह में उनके फिर भी पड़े रहे फूल बड़ी देर तक !!हमभी तडपे थे बहुत उनकी गफलतो बेवफाई पर !पछताए होंगे वो भी देख अपनी भूल बड़ी देर तक !!(Copyright reserved by: Indranil Bhattacharjee)
 
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Mar 13 2010 11:40 AM
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ये खबर गर्म है

ये खबर पढ़ लो, ये खबर गर्म है !हादसों से अभी ये शहर गर्म है !!नादान सही पर इतनी तो है समझ!इस दिल में ठंडक है, ये नज़र गर्म है !!रह गए जमकर ये लम्हात वहीँ पर !तन्हाई की जो ये दोपहर गर्म है !!अभी से तो न मुझ पर लिखो मर्सिया !अभी तो रगों में ये ज़हर गर्म है
 
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Mar 13 2010 07:10 AM
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चाहत हंसने की

कहते हैं, कि ग़म से ही होता है ख़ुशी का एहसास !पर करो बंद मुट्ठी तो रेत की तरहफिसल जाता है !!लेकर चाहत हंसने की,रोते रोते आये,ज़िन्दगी के आँगन में;हंसा हंसा कर,रुलाती है !अब, डर लगने लगा है,ख़ुशी की आहट से !न जाने कितने ग़म छिपे होंगे उसके आँचल में
 
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Mar 12 2010 04:48 AM
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आजकल

आजकल वो यूँ ही जानकर गाफिल1 रहते हैं !ज़माने के साजिश में वो भी शामिल रहते हैं !!किसको काटे किसे रखे ये तो पानी पर है !दोनों बाज़ू वरना एक से साहिल2 रहते हैं !!अजब हालत है ज़माने की अब तो हर कोई !अधूरापन में भी अक्सर वो कामिल3 रहते हैं !!आज यहाँ पर ज़माने की
 
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Mar 10 2010 01:56 PM
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अब भी वक़्त है जनाब

अब भी वक़्त है जनाब, कुछ तो सुधर जाइये !अब तो छोडिये शराब, कुछ तो सुधर जाइये !!पैसे कमाते रहे पर रिश्ते खर्च हो गए !अब तो कीजिये हिसाब कुछ तो सुधर जाईये !!काफी उम्र हो गयी है अब तो पता चल गया !क्या भला है क्या ख़राब, कुछ तो सुधर जाईये !!शौक लगा रखे हैं इस
 
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Mar 01 2010 06:48 PM
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किनारा

लग ना जाए किसी और किनारे से !बाँध ले तू किश्ती को इस किनारे से !!आया होगा तोड़कर कोई किनारा !आ टिका है इसलिए इस किनारे से !!पार होना है तो पानी में आ जाओ !क्यूँ चलता है डर डर के तू किनारे से !!था जो शहर बह गया वो सैलाब में !अब मिलेगा क्या तुझको इस किनारे
 
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Mar 01 2010 06:48 PM
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ভালো লাগে

ভালো লাগে আমার নতুন বছর এলেকিম্বা খোলা নীল আকাশে শরত এলেশীতের দুপুর রোদে বসে গল্প হলেকাটিয়ে দেয়া ছেলেবেলা হেঁসে খেলেভালো লাগে আমার যখন মনে পরেভাইয়ের সাথে খুনসুটি মাযের কোলেস্কুল -কলেজের মাতাল করা দিনগুলি সবকত স্মৃতি এসেছি পেছনে ফেলেসবার চেয়ে ভালো লাগে
 
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Mar 01 2010 06:47 PM
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शहर की इमारतें

छुं रही है आसमां को शहर की इमारतें !और ऊँची होने को बेताब सी इमारतें !!घर कहाँ है, रिश्ते कहाँ, रह गई बस दीवारें !इमारतों के साये मे सिमटती इमारतें !!छुप गए हैं चाँद तारे, आफताब ढक गया !अब तो बस खिडकियों से झांकती इमारतें !!अब जगह नहीं है शहर में इंसानों
 
Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
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Mar 01 2010 06:47 PM