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ओम और कमला

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13 Jun 2010
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रामकृष्ण अवस्थी और कश्यप भार्गव

कुछ घँटों के बाद तुम्हें गये तेईस वर्ष पूरे हो जायेंगे. अब तो ऐसा लगता है कि मैं सुनहरी धूप में झरने के नीचे मुँह खोले लेटी थी और जीवन का अमृत स्वयं ही मेरे मुँह में गिर रहा था कि सहसा वह झरना सूख गया और मेरा मुँह खुला ही रह गया. क्या मनुष्य को गहरा
Jun 13 2010 02:01 PM
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आधुनिक इतिहास और पाराम्परिक समूहों का भविष्य (1)

"मैं और मेरा वक्त" आलेख संग्रह के लिए लिखा गया ओम  प्रकाश दीपक का यह विश्व की संस्कृति और सभ्यताओं के बीच होड़ तथा प्रभुत्व की आकाक्षाओं के विकास से उन्नीस सौ सत्तर के दशक तक के इतिहास का विषलेषण करते, आलेख का पहला हिस्सा प्रस्तुत है, जिसमें वह
May 27 2010 08:38 PM
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सखियाँ

पापा के कागज़ों में कुछ तस्वीरें भी थीं, जिसमें भारत की प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी की यह तस्वीर भी थी. शायद कोई लेख लिखा होगा उसके साथ इसका उपयोग किया होगा, मालूम नहीं किस पत्रिका या अखबार के लिए. इसमें उनके साथ हैं उनकी दो सखियाँ, तेजी बच्चन (प्रसिद्ध
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दिल जलता है की प्रेम कथा

ओम १९४७-४८ में सोशलिस्ट पार्टी में आचार्य नरेंद्र देव, डा लोहिया और जयप्रकाश जी के साथ जुटे. १९५२ से १९५५ तक लखनऊ में सोशलिस्ट सप्ताहिक "संघर्ष" के सम्पादक के रूप में काम किया.लाहोर में पुराने सोशलिस्ट चौधरी सुलतान अहमदी के यहां ठहरा करते थे, जिनका
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स्नेहलता और पट्टाभि रेड्डी

पट्टाभि दम्पत्ति से ओम और कमला की जानपहचान हैदराबाद में हुई थी, पट्टाभि तब तेलुगू फ़िल्में बनाते थे. १९७० में जब उनकी पहली कन्नड़ फ़िल्म "संस्कार" निकली तो जातिवाद के विरुद्ध बनी इस फ़िल्म पर बहुत विवाद उठे थे, पहले तो यह फ़िल्म बैन कर दी गयी थी. बाद में
May 03 2010 10:29 AM
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मैं कब मरा?

बँगलादेश युद्ध में उन औरतों के बारे में, जिनके गर्भ में बलात्कार के बच्चे पल रहे थे, ओम का एक विचारोतेजक लेख प्रस्तुत है. तब बलात्कार करने वाले पाकिस्तानी सिपाहियों की बात तो की गयी थी, लेकिन ओम प्रश्न उठाते हैं इन औरतों को शिविरों में बन्दी बना कर कैद
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डा. राम मनोहर लोहिया

2008 में भारतीय पत्रिका "तहलका" में भारतीय नेता तथा भारतीय सोशलिस्ट पार्टी को बनाने वाले डा. राम मनोहर लोहिया पर एक लेख छपा था जिसमें डा. लोहिया की तस्वीर की जगह पर गलती से श्री ओम प्रकाश दीपक की तस्वीर छपी थी. इसका कारण शायद यह भी हो कि आज डा. लोहिया की
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स्वार्थों में जीवन

पिछले दो माह से मन बहुत ही अस्थिर है. कुछ विषेश कारण तो नहीं है, शायद समझने में कुछ कमी है.लगता है सम्बंध स्वार्थों से जुड़ गये हैं. इसलिऐ इनकी गहनता और पवित्रता नहीं रही. सम्बंध केवल सुविधा और स्वार्थ से बनते बिगड़ते हैं इसलिऐ जीवन अशांत रहता है.
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पीड़ा

13 नवंबर 1997, इमोला, इटलीकल 14 नवंबर को अमेरिका जाना है. नादिया को देख कर बहुत संतोष हुआ. बड़ी प्यारी बच्ची है. पिछले जन्म का ही कोई सम्बंध लगता है. दिन भर घर और बाहर के काम में लगी रहती है. आराम उसे मिलता नहीं. उसके स्वास्थ्य की चिंता रहती है.इधर बहुत