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मेरी दुनिया मेरा जहां....

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17 Jun 2010
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आज का सफ़र: स्लीपर में मुम्बई से बनारस :- देव

ममता जी, आपकी रेल ने तो भैया अजीब उलझन में डाल दिया है । शादी करने जा रहे देव बाबा की ही टिकट कन्फर्म नहीं करी.... एक दिन का डिले | यार गजब ही ढा दिया, अब आज रात में देव बाबा को स्लीपर में जाना पड़ेगा । कल रात को जो कन्फर्म नहीं हो पायी वह ए सी में थी।
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एक कवि सम्मेलन का अनुभव..... :-देव

यार आपको मालूम है की इस दुनियां में कवियों के भी प्रकार होते हैं.... जैसे भांति भांति प्रकार के मनुष्य वैसे ही भांति भांति प्रकार के कवि.... आप यह पूछ सकते हैं की कवियो को मनुष्यों की केटेगरी से अलग क्यों किया देव बाबा नें... तो भैया जो लोग कवि हैं वह तो
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तेरा भैया है ना.... :-देव

पिछले कुछ दिनों से मन बहुत व्याकुल सा है,एक नन्ही सी परी, मेरी बहन... छोटी सी... गुडिया सी.... और बहुत नटखट सी... शरारती और हमेशा मेरे पीछे हाथ धोकर पड़ी रहने वाली...... इत्ती बड़ी हो गयी.... की अब उसकी विदाई का वक्त आ गया.... बस १२ दिन और.... यार आज ना
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तुझसे मिलने की फरियाद करते हैं....:- देव

बंधुओ, आज संध्या की बारिश और ट्राफिक से सम्बंधित कुंठाओ को दरकिनार करते हुए कुछ सार्थक बातचीत की जाए.... कुछ सृजनात्मकता की बात की जाए... कुछ ऐसी बातें हो जो मन को राहत पहुचाये.... और सुकून का एहसास करा जाए...कुछ शब्द... यहाँ वहां जोड़ दिए हैं... कविता
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महाराष्ट्र की सरकार कृपया ज़वाब दे.....

अगर मुम्बई, महाराष्ट्र में सरकार नाम की कोई चीज है तो मेरी इन प्रश्नों का उत्तर दे..... आज का किस्सा सुनिए.... आज पवई स्थित अपने ऑफिस से साढ़े ६ बजे निकले.... यकीन मानिए उस समय ज़रा भी अंदाजा नहीं था की पवई हीरानंदानी में भी ट्राफिक इस प्रकार का तांडव कर
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मुम्बई ब्लागर्स मिलन:- जून १३, २०१०

मुम्बई ब्लागर्स मिलन:- जून १३, २०१०स्थान:- जावा केफे, गोरेगांव पूर्व, मुम्बई समय: प्रातः:९:३० बजे देव बाबा सुबह सुबह अपनी आल्टो में सवार और फिर नौ बजे के ठीक पांच मिनट पहले स्थान पर प्रस्तुत.... तो भैया देव बाबु की पहली ब्लागर्स मीट थी और रविवार के दिन
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साठ रुपैया के आठ गोल गप्पे.....

अबे पानी पूरी का का भाव है बे..... आज शाम को गोल गप्पे खाने का मन हुआ तो भाई दो प्लेट गोल गप्पे का ऑर्डर दे दिया गया..... रेट सुन के दिमाग ख़राब..... लो आप भी रेट देख लो और फिर बताओ....अबे हमको याद है बरेली और बनारस का दिन जब एक रुपैया के बारह गोल गप्पे
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बातें.... नागार्जुन

===========================बातें.... नागार्जुन ===========================बातें–हँसी में धुली हुईंसौजन्य चंदन में बसी हुईबातें–चितवन में घुली हुईंव्यंग्य-बंधन में कसी हुईंबातें–उसाँस में झुलसींरोष की आँच में तली हुईंबातें–चुहल में हुलसींनेह–साँचे में ढली
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अबे फ़ुटबाल वर्ल्ड कप शुरु हो गया.... :-देव

हमरा एक दोस्त आज हमको बोला, "अबे सुने की नहीं, फुटबाल का वर्ल्ड-कप शुरू हो गया" हम कहें तुम काहे कूद रहे हो बे, कऊन हिन्दुस्तानी के टीम खेले जाए रही है ओमें... ना मालूम हिन्दुस्तानी कहे खुश हो रहे हैं, अबे कौन तीर मार रहे हो फ़ुटबाल वर्ल्ड कप में ।
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सूट.... और फ़िर जय भोजपुरिया रिक्सा

जून ९, २०१०-----------थोडा आज सुस्ती में दिन निकल रहा था और फिर उसी सुस्ती के आज ऑफिस से गोला मार दिया था| सुबह एक गोली क्रोसिन से हुई और फिर अभी शाम तक कुछ ठीक ठाक सा हो गया हूँ | अभी थोड़ी देर पहले वाशी से आया, एक सूट सियाने दिया था बिग बाजार में सो
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पनवाड़ी या इंजिनियर या वकील... काबिल कौन

एक बार एक रिटायर्ड मास्टर जी अपनी टूटी सायकिल को बनवाने के लिए दूकान पर व्यस्त थे, तभी उनका एक शुभचिंतक उनको देख कर मिलने चला आया और उनके बीच का वार्तालाप सुनिए.शुभचिंतक :- मास्टर जी कहं सायकिल के पीछे लगे हो, आपके बेटे तो सुना काफी तरक्की कर चुके
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श्रेष्ठ कौन: राम, रावण या बालि... :-देव

राम राम जय जय राम, श्री राम श्री राम जय जय राम.... राम... आखिर इन दो अक्षरों की महत्ता आखिर क्या है.... आज शाम मित्रों के साथ होने वाली ऐसे ही बकर बकर में भगवान राम का ज़िक्र हो आया और हमारे मित्र दीपक जी ने बिन सोचे और बिन जाने हुए ही राम पर बालि और
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हबीब तनवीर... श्रद्धांजलि

८ जून.... आखिर आज का दिन याद किसके नाम पर रखा जाए यकीनन हबीब तनवीर के नाम पर. एक ऐसा व्यक्ति, जिसने हिंदी और उर्दू नाटक को अंतर-राष्ट्रीय पहचान दी... और दुनिया को यह दिखाया की थियेटर जगत में हिन्दुस्तानी भी किसी गोरे मुल्क से पीछे नहीं... मुझे याद आता है
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बरखा रानी ज़रा जम के बरसो.... :-देव

आज रपट जाए तो हमें ना उठइयो.... .... आज इन लाइनों को सुनकर बहुत कुछ याद आ गया.... खी खी... मजाक नहीं कर रहा हूँ भाई.... देव बाबा आज कुछ विशेष मूड में हैं और इस बरसाती रंग में कुछ शरारत करने का तो अपना ही मजा है भाई.... आज पवई के ट्राफिक ने समझिए जान ही
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रविवार की सुबह..... जागो मोहन प्यारे..... -देव

बोलो जय राम जी की....मालिक आज सुबह सुबह फड्डा हो गया.... या यूँ कहें की फड्डे पे फड्डा हो गया.... यार बहु राष्ट्रीय कम्पनिओं की मार तो पहले ही पड़ी थी.... ससुरा रात में सोने में लेट हो गया और फिर सुबह सुबह जो घंटी बजाई वाच मैन ने की क्या कहूँ.... बोलता है
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हाँ वह परमेश्वर का प्रतीक थी....-देव

एक छोटी बच्ची....अठखेलियाँ कर रही थी...खेल रही थीएक गुब्बारे सेकभी ऊपर उछाल देतीकभी उसे उठाने दौड़ पड़तीकभी पापा को खींचतीकभी चाचू को खींचती....कभी जोर जोर से चिल्लातीतो कभी एकदम चुप हो जाती....उसके खेल में कितनी सजीवता थी...उसके प्रेम में कितनी आत्मीयता
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यस सर हो गया..... -देव

आज की पोस्ट डेडीकेट कर रहा हूँ यस सर यस सर करने वालों को..... वैसे पुराना किस्सा है शायद आपमें से कईयों ने सुना भी होगा..... बोले तो यस सर..... या नो सर..... यस सर तो भी कोई नहीं और नो सर तो फिर सुन लो भैया..... फ़ौज के एक ऊँचे अफसर की पत्नी ने घुड-सवारी
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बारिश में भीगे... मैं और मेरी आवारगी.... -देव

यार आज कुछ मन ठीक नहीं लग रहा है.... कुछ सुस्ती सी आ रही है...हल्का बुखार सा लग रहा था सुबह सुबह... देव बाबु पहली बारिश में जरा छपका मारने निकल गए थे.... भूल गए थे की अब मुम्बई का पानी पीते हैं... बनारस का नहीं... सो भैया सर्दी तो लगनी ही थी.... वैसे शाम
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यार पुलिस वाले कभी हड़ताल पे क्यों नहीं जाते.....

डाकुओं ने घने जंगल में बस लूटी..... और बन्दूक की नोक पर सभी से जो निकल सकता था निकलवाया.... ले तेरी कान की बालियाँ... घडी.... चेन.... चूड़ी.... पर्स से सारे पैसे..... और हाँ उसके बाद फिर बस को जाने नहीं दिया, पहले लुटे गए सामान का आंकलन किया... उसके बाद
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मेरे एकांतवास का परिणाम.... लीजिए देव बाबा की कुछ कविताएं

आज कुछ कवितायें प्रस्तुत कर रहा हूँ..... कुछ ऐसी कुछ वैसी.... कुछ इधर की कुछ उधर की..... बस मन हुआ की आज कुछ मिली जुली बातें की जाएँ..... वैसे अकेले रहनें और अकेले ज़िन्दगी बसर करना, आत्म चिंतन के लिये बहुत आवश्यक है... मन के भाव अजीब अजीब मोड लेते
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आज शाम गली में बच्चे खेल रहे थे....

आज शाम गली में बच्चे खेल रहे थे.... एक छोटी सी गेंद... और बारह बच्चे... गेंद एक एक हाथों से होती हुई... किसी एक के हाथ में जा रूकतीफिर वह उसे उछाल देता... फिर सारे बच्चे उसे लपकने को दौड़ते..... कोई एक गेंद को झपट लेताऔर बाकी फिर से नीचे बैठ जाते.... फिर
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हिन्दु मुसल्मां गिन लो..... इंसान मत गिनना....

हिन्दू कितने...मुसल्मा कितने... गिनो और पूरी कर लो देश की जनगणना एक एक गाँव में जाओ एक एक इन्सान को हिलाओऔर पूछो क्या जात है तेरीतभी तो पूरी होगी नामेरे देश की ताजा जनगणनासब गिन डालो.. ताकि अंदाज़ा हो जाये वोट की गुणा गणित काऔर हो जाये बढ़िया तयारी अगले
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देव बाबा का एक दिन.....

आज सुबह सुबह ही देव बाबा अपनें भक्तों के साथ मुम्बई से कुछ दूर.... कर्नाला पक्षी विहार की यात्रा पर निकले थे... कोई बीस किलोमीटर की दूरी पर है यह हमारे घर से और फ़िर देव बाबा की गड्डी ज़िन्दाबाद.... बस लीजिए कुछ चित्र हमारी यात्रा के....यह तो हुई आज की
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फ़ोटो ग्राफ़र के मन की पीडा फ़ोटोग्राफ़र ही जानें

तो मित्रों फ़ाईनली देव बाबा की धमकी का असर हुआ और तय टाईमलाईन के अन्दर ही इन्टर्नेटवा चालू हो गया। अबहीं ठीक लग रहा है... बोले तो आज़ादी की फ़ीलींग आ रही है यार। बिना इंटरनेट तो ज़िन्दगी अजीब अजीब लग रही थी । वैसे आज का दिन काफ़ी अच्छा रहा और अजीब अजीब
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जय हो यू ब्रोडबैंड के अकर्मण्य इंजीनियर लोगों की

दुनियां में एक से एक नमूनें भरे हुए हैं यार... एक ढूंढो हज़ार मिलेंगे... कोई कोई तो ऐसे नमूनें होंगे जिनके बारे में जो कहा जाए कम है। दर-असल आज देव बाबा थोडे खराब मूड में हैं और अभी अभी कस्टमर केयर वाले को खूब गरिया आए हैं। दर-असल हुआ यह है की कोपर
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तवे पे आस्ट्रेलिया और अमेरिका... खानी हो तो आ जाओ भैया...

वैसे कुछ भी हो और कैसे भी हो... मां को बच्चे की हर हरकत का अंदाज़ा हो ही जाता है। ना जानें आज भी मेरी हर हरकत का अंदाजा मेरी अम्मा को कैसे हो जाता है। मां तो मां है ना... अभी समझ नहीं आता... शायद कुछ और दिनों के बाद समझ आएगा। छोटे से बच्चे की हर हरकत को
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डेढ तियां साढे तीन..?

अबे ई कौन सा केलकुलेशन हुआ? आज ज़ेरोक्स करानें एक दुकान पर गया था और तीन कापी ज़ेरोक्स के लिये दिया। सामनें वाला बन्दा बोला तीन कापी आगे पीछे दोनो साईड साढे तीन रुपए... हम बोले भैया पर पेज कित्ते पैसे? बोला पचत्तर पैसे... हम बोले तो भैया साढे तीन कौने
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मैं और मेरी तनहाई...

कुछ पल फ़ुरसत के...आज फ़िर से मिले कुछ पल फ़ुरसत केकुछ पल अपनें लिएकुछ अपनी कलम के लिएकुछ पुरानी यादों से दो चार होती हुईकुछ पुरानें दोस्तों सेगप्पे लडाती अपनें बचपन सेकुछ पल चुरातीवाह क्या खूब गुज़रीयह सुबहवाह क्या खूब मिलीमैं और मेरी तनहाई...मैं और
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मुम्बई से पुणे.... और फिर पुणे से मुम्बई... भाई वाह

भाई लोगों,यार मुम्बई से पुणे और फिर पुणे से मुम्बई.... क्या बढ़िया रास्ता और क्या मजे की ड्राइव.... समझ में नहीं आता की कितनी स्पीड पे गड्डी भगाओ.... देव बाबा के पास तो मारुती अल्टो है और वह कोई एक सौ बीस.... पच्चीस तक जाती है और मैं कोशिश यही करता हूँ
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पीछे पडी है यार....

आज ओफ़िस से घर आते समय मेरे एक मित्र नें मुझसे लिफ़्ट मांगी, अब साहब घर तक का साथ था सो मेरे मित्र मेरी गाडी में आ गये। गाडी चली और थोडी ही देर में हमारे मित्र के मोबाईल पर उनकी महिला मित्र का फ़ोन आ गया... अब भई क्या बताएं बन्धू के चेहरे की रंगत... खिली
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अचार पराठा..... भाई वाह

दो दिन की दूरी ब्लोगिंग से और हाँ इन्टरनेट से... ससुरा बहुत भारी था यार... दिन भर की मेहनत ऑफिस से घर और हाँ घर से ओफ्फिस.... देव बाबा की बत्ती गुल हो गयी थी... आज शाम घर आया और इंटरनेट पर आया तो फिर जान में जान आई... अब ससुरा ब्लोगिंग ज़रूरत बन गया
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ओफ़िस से घर और घर से ओफ़िस... यही ज़िन्दगी है हमारी...

यार आज और कल दोनों दिन बहुत व्यस्त रहा.... ससुरा ब्लोगिंग करने का मौका ही नहीं मिला... थोडा टाइम के लिए बज बजा लिया (गूगल बज्ज़ पर) और फिर सुतने चला गया... आज कल ऑफिस की दिहाड़ी में हालत ख़राब हो जा रही है यार. कल देव बाबा पुणे जा रहे हैं सो कल भी
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जंक फ़ूड खाओ और फास्ट लाइफ जिओ

भाई दाल रोटी खाने वाले इंसान को अगर बर्गर पिज्जा खिलाओगे तो फिर क्या होगा... होना क्या है डिपेंड करेगा ... खैर हमें और हमारे मित्र गौरव भाई को किसी काम से वाशी जाना था सो हम दोनों ही लोग ऑफिस से सीधा वाशी ही निकल गए... वैसे वाशी का काम निपटने में बहुत
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देव बाबा की एक कविता.... यह छोटी सी दुनिया

तेरी और मेरीयह छोटी सी दुनियातेरी हंसी मेरी हंसीतेरी ख़ुशी से मेरी ख़ुशीसतरंगी इंद्र-धनुष सीप्यारी यह दुनियाहाँ यही तो हैतेरी और मेरीयह छोटी सी दुनियासुख और दुःखका आभासनिर्मल और मुक्तकंठो के स्वरकितना आह्लादितकितना आनंदितहोता मनएक तेरा साथफैलाता सतरंगी
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हॉकी बल्ले बल्ले और क्रिकेट के बज गए बारह....

बंधुओ क्रिकेट टीम की फिर से बैंड बज गयी है... धोनी की सेना ढेर... घर के शेर बाहर बुरी तरह से ढेर हो चुके हैं.... नहीं आप लोग मत सोचिए की आज देव बाबा क्रिकेट पर प्रवचन देने वाले हैं... आज यार मेरा मन हुआ की कुछ बोला जाए हमारे आज़ाद देश के सभी खेलों और
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कतरा कतरा ज़िन्दगी बीन लो... देव बाबा की एक कविता

कतरा कतरा ज़िन्दगी बीन लो...गम से ज़िन्दगी की दावेदारी छीन लो...राह में अगर मिले कोई गम हंसो, मुस्कुराओ.. गीत गाओ... मगर गम की दावेदारी मत स्वीकारो ज़िन्दगी बीन लो वापस अपनी ज़िन्दगी छीन लो -देव
May 09 2010 01:07 AM
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मैनेजर पुराण: भाग-१

विवेक भाई और उड़नतश्तरी जी को सादर प्रणाम करके मैनेजर पुराण-१ पोस्ट कर रहा हूँ.... वैसे घबराने की जरुरत नहीं है क्योंकि मैनेजरवा भी यह टिप्स अपने मैनेजर पर इस्तेमाल कर लेगा.... मैनेजर पुराण: भाग-१ परिभाषा१. मैनेजर दुनिया का वह प्राणी है, जो सोचता है की
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मैनेजरवा पटेगा बे... थोडा मेहनत करो और का

बहुत थकान के बाद आज घर पहुंचे... डाउन अमेरिका का मार्केट हुआ और हालत अपनी पतली हो गयी... ससुरा अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में काम करोगे तो और क्या मिलेगा.... वैसे कोई बात नहीं... आज की दिहाड़ी थोड़ी थकावट से भरी रही और शनिवार और रविवार आने का एहसास किसी मौज से
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मैनेजर पटेगा.... टेंशन घटेगा और मैनेजर उखडेगा.. लाईफ़ का नक्शा बिगडेगा.

लीजिये भाई लोगों, देव बाबू घर वापस आ गए... आज की दिहाडी भी खत्म हुई । आज एक प्रश्न पूछ रहा हूं.... उत्तर एकदम ठीक ठीक तरीके से देना... अगर मैं कहूं की मैं फ़लां फ़लां कम्पनी में काम करता हूं... तो कितने प्रतिशत सत्य होगा? और कितने प्रतिशत झूठ ? मेरे
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मिल गयी आज देव बाबा को चाय और वाय दोनो....

सो देव बाबू को चाय की तलब थी... पिछली पोस्ट (एक बढ़िया सी अदरक वाली चाय पिलाओ) में चाय की तलब और हमारी एक अकेली कमज़ोरी चाय... के बारे में आप लोगों को बताया...क्या बताऊं साहब.... आप लोगों ने बहुत प्रेम से मुझे चाय पर बुलाया, मन बहुत प्रसन्न हुआ और देव