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खून बेचो या किडनी-धंधा चाहिए. तारकेश्वर गिरी.
चाहे कुछ भी हो, धंधा चाहिए तो चाहिए। चाहे खून बेचो या चाहे किडनी, इस से क्या मतलब । ये शब्द है प्राइवेट बीमा कंपनी में काम करने वाले मैनेजेर साहेब लोगो के। उनके अधीन काम करने वाले लोगो की नीद खुली नहीं की डर सा छा जाता है दीमाग के उपर। की अभी बॉस का फ़ोन
Jun 11 2010 09:36 PM


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