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9th Dimension's Base

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05 Jun 2010
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बड़ी भूख लगी है माता जी

बड़ी भूख लगी है माता जी, दो टूक खिला दो माता जी;नाम बड़ा तेरा मैं गाऊंगा, हो सका तो काम भी आऊंगा.भूखी आंत मेरा हृदय मरोड़ती है, अन्न नहीं, तो रक्त ही निचोड़ती है क्यूँ मैं ही मिला, उसे एक दंड पायी था   इस, निष्ठुर समाज के व्यंगों का उत्तरदायी था
 
विशाल कश्यप
Jun 06 2010 05:04 AM
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एक आग्रह

 प्रिय मित्रों,मैंने कुछ दिनों से एक भी कविता पोस्ट नहीं की है और मुझे ऐसा लगता है कि कहीं आप मेरे इस वर्ताव से नाराज होंगे? इसीलिए मैं आप सबको ये सूचित करना चाहता हूँ कि ना ही मैंने कविता लिखना बंद किया है और ना ही मैं लिख पाने में असमर्थ हूँ. चुकि
 
विशाल कश्यप
May 29 2010 08:16 AM
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भाग्य ध्वनी का बैरी मानव

भाग्य ध्वनी का बैरी मानव, वैचारिकता क्या समझाएगालकीरों कि है आंख मिचौली, तो राजयोग कहाँ से पाएगा उगता सूरज नहीं चमकता, तो क्या; चमके बिना ही डूब जाएगा इसी द्वन्द गरल का पान करता, पल-पल कौन जीवित रह पाएगा ना ही लकीरों का मोह मुझे है, ना भाग्यवाद कि चिंता
 
विशाल कश्यप
May 19 2010 05:34 AM
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अपनी बात

|| श्री गणेशाय नमो नमः || प्रिय मित्रों,नमस्कार !आज मैंने एक नए ब्लॉग का उद्घाटन किया है; जिसका शीर्षक मैंने "अपनी चौपाल" रखा है. इसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं http://vkashyap.blogspot.com . जैसा की आप सब जानते हैं; हमारे गॉव में एक चौपाल होती है और लोग
 
विशाल कश्यप
May 16 2010 01:35 PM
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हृदय मित्र : मन

अक्सर, आप सब के साथ कभी ऐसा होता ही होगा ; जैसा आज मेरे साथ हुआ है. आज मेरे मन[दिमाग] और हृदय[दिल] में संवेदनाओं की एक जंग हुई. पहले तो, दिल की बात जुबान तक नहीं आ पा रही थी. और फिर, मन कुछ कहता था और हृदय कुछ और. दोनों, एक दुसरे को समझा रहे थे पर बीच
 
विशाल कश्यप
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मृत्युस्वप्न

मैं प्यार करूँ, इस जीवन को जो चुपके से आ जाता है,मदुराई सी आंख मिचौली हमसे ये खेल जाता है.मैंने देखा था, एक प्यारा सपना; जो पल भर भी न रहा अपना रो रहे थे सारे आपने, पर मैं गुमसुम था यूँ ही अपना मैंने चाहा, मैंने सोचा, ये हो क्या रहा है यहाँ?सारे
 
विशाल कश्यप
May 11 2010 06:03 AM
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हे! माता

ह्रदय हिमालय नाम है, माता कण-कण में स्थान है, माँ का स्नेह छत्र में प्रेम बरसता धरती पर भगवान है, माता बोली कि शुरुआत है, माता मुश्किलों में आराम है, माता अदि तू ही है, अंत भी तू ही ममता का संसार है, माता चरणों में स्वर्गधाम है, माँ का खुशियों का
 
विशाल कश्यप
May 09 2010 06:27 AM
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मैं साधू

मैं साधू था चला साधने, जीवन के गलियारों को मंजीरा हथियार बना, केसरिया ध्वज फहराने को जटा सुशोभित मस्तक पर है, प्रकाश पुंज फैलाने को  मैं साधू था चला मापने, इश्वर के पैमाने को विलासिता का सर्प भगा वैराग्य ध्वनि गुंजाने को मैं साधू था चला बंधने,
 
Vishal Kashyap
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पिता

चिरसहिष्णुता की वेदी पर, पुष्प बन कर चढ़ जाने को आज जीवित हूँ मैं, पिता की धूमिल छवि सुनाने कोशांत ह्रदय के दीप्त भाल का, फिर से मंद-मंद मुस्काने को प्रयत्न मात्र है,पित्री भाव की बलिहारी का; इस तुक्ष मुख से, आज कह जाने को अनुशासन, तेज है मुख
 
Vishal Kashyap
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हमारी बात-चित

प्रिय मित्रों,मैं आपका बहुत ही आभारी हूँ. जो अपने, मेरी कविताओं का मान रखते हुए मेरी मेहनत को एक नया रंग दिया. और मुझे ये हौसला दिया कि मैं आपके लिए और आगे भी इसी तरह लिख सकूँ. आपकी टिप्पणियां, तो जैसे मेरे कविताओं की श्रृंखलाओं में एक और कदम उठाने को
 
Vishal Kashyap
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आज दिल को मेरे, फिर वही प्यास है

 आज दिल को मेरे, फिर वही प्यास हैजिसके लिए बरसों से ये मन उदास हैअब इस सोंच की प्रत्यंचा खिंच जाना है  बाणों को, धनुष सीमा से निकल जाना है जब सोंच को, इरादों की शक्ल लेनी थीआगे बढ़ा के कदम, धूलि रौंद देनी थी  तब रुख, हवाएं भी अपना बदलने
 
Vishal Kashyap
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एक रस्ता .....

ऊँचे दरख्तों की छाँव से, ढका एक रस्ता मंजिल तक पहुचने का, गवाह एक रस्ता पथिक आते हैं और छोड़ जाते इसे मगर, उनकी तक में है, जगा एक रस्ता   गर्मी, बरसात हो या सेहर शाम की बाँट जोहे पथिक की बीछा एक रस्ता रात आती है हमें सुला जाती;
 
Vishal Kashyap
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मेरे मन को मैं शब्दों कि भाषा दे दूँ

 मेरे मन को मैं शब्दों कि भाषा दे दूँइस नन्हे से चित्त में एक अभिलाषा दे दूँसमझ ना सका किसी बुद्धिजीवी ने जिसेउन इरादों को पखों कि परिभाषा दे दूँ ललक सिखाने कि यूँ तो बड़ी है मेरीसोंच में सबकी है इतनी गन्दगी भारीसोंच ना सका किसी शक्तिशाली ने
 
Vishal Kashyap
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आयी आवाज कानों को छूती हुई .....

शुष्क हवा का झोंका चेहरा सहला गया .............तभी आयी आवाज कानों को छूती हुई; उठ जा बेटा, तेरी सुबह हुई .........हवा ठंढी सी है, सुबह भींगी हुई; घंटी पूजा की कानों में कुछ कहती हुई ........कहाँ हो-किधर हो; अब कैसी शरम; उफ़! बड़ी दुविधा!! था, ये सारा भरम
 
Vishal Kashyap
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ये नया संसार है, तू मेरे साथ है

नयी सुबह हुई और दिन ये है नया; तेरी मुस्कान चेहरे पे ख़ुशी करती बयां ............ये नया संसार है, तू मेरे साथ है; कभी सोचा था जो मैंने, ये वो यही यार है ...........भाभी-भाभी बुलातीं हैं ननदें तेरी; बहु बोल-बोल अम्मा हैं घेरे मेरी ...........क्या, निभाएगी
 
Vishal Kashyap
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ले आया हूँ डोली अब मैं तेरे ससुराल में .....

काश की,ले आया हूँ डोली अब मैं तेरे ससुराल में;नए रिश्तों की बोली भारी प्यार में ......नजरें होतीं नहीं हैं सबकी तुझसे अलग; अब तू ही कहे क्यों हैं ऐसे ये सब ...........देहलीज ससुराल की और पहला कदम; करे के पुरे यहाँ तू, तेरे सारे रसम ......कलश गिरा कर, तू
 
Vishal Kashyap
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विदा तुझको मैं घर से करा जाऊंगा.....

काश की,विदा तुझको मैं घर से करा जाऊंगा; जान-बुझकर इस खाता को दोहराऊंगा...बाबुल तेरे, हैं बिलखते तुझे चूम कर;  तेरे बचपन के खिलौनों को सोच-सोच कर ... अम्मा, आयीं हैं रोती हुई अब इधर; सारी मर्यादा और ममता को साथ लेकर ... भैया कहते हैं बेहना, संभालना
 
Vishal Kashyap
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मेंहदी सजती तेरी, अब मेरे नाम की .....

 काश की,मेंहदी सजती तेरी, अब मेरे नाम की ...........धड़कने झूमतीं तेरी, अब मेरे नाम की ............पलकें झपकती तेरी, तो ख्याल आपका .......कहकर शर्माया करती तू अब, मेरे नाम की ........वो हया, वो खुबसूरत शर्माना तेरा .........मेरा नाम लेकर यूँ, डूब
 
Vishal Kashyap
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तेरी यादों का झरोखा, मेरा दिल .....

जिंदगी जीना सिखलाया तुने, मुझे  ....गम-ए-जुदाई पीना सिखलाया तुने, मुझे ........अब तू ही बता.......जीयूं भी कैसे मैं, सिर्फ तेरी यादों के साये में ..........क्योकि, अब तो तेरी यादें ही बची हैं जीने के सिवाए में ............इन्हें तो, अब तू मुझसे जुदा
 
Vishal Kashyap
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खुली जुल्फों के हसीं साये में ...

 खुली जुल्फों के हसीं साये में .......ऐ काश की ये दिल खामोश हो जाये आपकी निगाहों में .........कुछ ख्याल थे, इस दिल के; जो जेहेन तक ही रह जाते .........कुछ ख्वाब थे मेरे जो, मुझमे ही सिमट कर रह जाते ...........ना तो तेरी यादों का खुमार ही मुझपे होता
 
Vishal Kashyap
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तेरे चेहरे से नजरें खफा होती नहीं

तेरे चेहरे से, नजरें खफा होती नहीं........तेरे एक दीद की ख्वाहिश दिल से जुदा होती नहीं....नजरें तरस गयीं हैं अब सुकूं पाने को.........पलकों की भी ख्वाहिश है अब झपक जाने को .......... शायद ये अफसाना मेरा, कोई फ़साना न बन जाये......इसीलिए क्योकि तेरी
 
Vishal Kashyap
Apr 16 2010 06:39 AM
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खामोश लव्ज

खामोश लव्जों की तन्हाई से दो बात हो गई......आँखों ही आँखों में हल-ए-दिल के साथ हो गई......सूरत-ए-सादगी पे कुछ इस तरह मर मिटे हम.........मौत ऐसी आइ की जिंदगी बेहाल हो गई...........अब तो जिंदगी के लम्हे कटते  हैं, यादों में...........खुली आँखों से
 
Vishal Kashyap
Apr 15 2010 02:11 PM
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क्यों एक हलकी सी मुश्किल भी भारी सी लगती है ?

                     इंसान एक ऐसा प्राणी, जिसकी सोच और कल्पनाशैली काफी विक्सित है. ऐसा तो खुद इन्सान का ही मनना है. मगर , क्यों ऐसा होता है की आपकी जिंदगी
 
Vishal Kashyap
Apr 14 2010 09:46 PM
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SBI : NOT ALWAYS WITH CUSTOMER SATISFACTION

                         भारतीय स्टेट बैंक के साथ मेरा ये तीसरा अनुभव है जो मैं आपके साथ बाँटना चाहूँगा. जैसा कि आप सभी जानते हैं कि
 
Vishal Kashyap
Apr 11 2010 08:35 AM
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BIHAR COACHING ACT 2010

                 बिहार एक ऐसा प्रदेश है जो शुरू से ही पुरे देश में अपनी एक अलग पहचान लिए हुए है. चाहे वो जमाना मौर्य शाशन कल का हो या लालू शाशन काल का हो या नितीश शाशन काल
 
Vishal Kashyap
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|| विद्या विनयम ददाति ||

                  विद्या और विनय लगभग एक ही हैं. संस्कृत के एक श्लोक "विद्या विनयम ददाति" के अनुसार विद्या, विनय देती है. अर्थात विद्या से आपके अन्दर विनय का संचार होता
 
Vishal Kashyap
Apr 01 2010 09:07 PM
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आपकी बोली कैसी ? : कर्णप्रिय या कर्कश

                 बोलने की कला या वाक-पटुता, हर इन्सान के लिए बहुत जरूरी होती है. इन्सान एक ऐसा सामाजिक प्राणी है जिसका समाज में उठाना-बठना एक दिन के 24 घंटों में से कम-से-कम
 
Vishal Kashyap
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आप कितने आधुनिक हैं ?

आधुनिक, मतलब? आधुनिक या आधुनिकता क्या है? कुछ लोगों का मानना है कि भारत कि आजादी को 60 वर्ष हो गए, इस लम्बे समय में आर्थिक,सामाजिक,वैचारिक,तकनिकी या रहन-सहन में जो बदलाव देखा जा रहा है उसे हम आधुनिकता से जोड़ सकते हैं. और इससे ज्यादा तो कुछ भी नहीं है.
 
Vishal Kashyap
Mar 26 2010 07:55 AM
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विद्योपार्जन का सही मतलब क्या ?

                    पढाई एक तपस्या है, ऐसा केवल मेरा नहीं कई बुद्धिजीवियों का मानना है. बात में सच्चाई है. क्योकि विद्या का उपार्जन आराम से नहीं हो सकता; ये तो
 
Vishal Kashyap
Mar 25 2010 07:12 AM
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सफलता का मापदंड पैसा ही क्यों ?

सफलता और पैसा लगता है जैसे एक ही चीज़ के दो नाम हैं. ऐसा हमारा समाज मानता है. हमारे समाज में पैसे और रसूख वाले लोगों कि कदर सफल व्यक्तित्व के लोगों में कि जाती है. क्योंकि पैसे को हमारा समाज एक मानक मात्रक(SI UNIT) मानता है जिस से समाज कुछ वर्गों(जाती
 
Vishal Kashyap
Mar 24 2010 07:55 AM
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LOVE AT FIRST SIGHT OR THINKING FOR, LUST AT FIRST SIGHT ?

                         LOVE AT FIRST SIGHT, एक बड़ा ही अजीब वाक्य; जो ज्यादातर हार लड़का या लड़की अपने जवानी के दिनों में कम से कम एक
 
Vishal Kashyap
Mar 19 2010 08:25 PM
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हिन्दू धर्मं, हिन्दू धार्मिक गुरु और उनका आश्रम

  धर्मं ने शुरू से ही इंसानों को बांटा है; मैं हिन्दू, तू इसाई. और इसके अन्दर भी जाती; मैं फ़लाने जात का और तू तो फ़लाने जात का. इसकी शुरुआत उत्तरवैदिक काल में हुई थी. जात-पात और धर्म उत्तरवैदिक काल कि ही दें हैं. इसीने समाज को कुछ इस तरह से बांटा
 
Vishal Kashyap
Mar 12 2010 06:16 AM
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महिला आरक्षण विधेयक : क्या बदल पायेगा कुंठित सोच ?

महिला आरक्षण की होड़ तो कब से सुनाई दे रही थी. मगर, अब तो बिल पास भी हो गया और महिला समूहों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. जैसा मेरा मन न है की इस बिल के आने का एक मात्र कारण ये है की महिलाओं के प्रति जो सामाजिक विचारधारा है उसे बदला जा सके. बहुत
 
Vishal Kashyap
Mar 10 2010 05:25 AM
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क्या इस्थिति में सुधार के लिए आरक्षण जरूरी ?

                    आजकल आरक्षण कि काफी धूम है. जहाँ देखिये बस इसी बात कि चर्चा हो रही है. आरक्षण देने का एक मात्र कारण ये बताया जाता है कि आरक्षण से अरक्षित
 
Vishal Kashyap
Mar 09 2010 06:49 AM
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आरक्षण : क्यों भई ?

आरक्षण कि शुरुआत करने में हमारे बापू का बहुत बड़ा योगदान है. पता नहीं इन्हें ऐसा क्या सुझा था, जो इस शब्द कि उत्पत्ति कर डाली. शुरुआत हरिजनों और अल्पसंख्यकों से हुई और अब तो मुस्लिम आरक्षण और महिला आरक्षण सर उठा चुके हैं. बड़ा ही अनोखा है हमारा भारत देश.
 
Vishal Kashyap
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बालश्रम : शोषण या जिंदगी जीने कि कवायद ?

बालश्रम क्या है ?, जब कम और पढने लिखने कि उम्र में बच्चो से जबरन मजदूरी कराई जाए; चाहे वो शोषण के ख्याल से हो या लोभ के ख्याल से. तब इसे बालश्रम कहेंगे. और इसके रोक थाम में हमें सरकार का  पूरा सहयोग देना चाहिए. क्योकि बच्चे हमरे देश का भविष्य है और
 
Vishal Kashyap
Mar 06 2010 04:22 PM
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भारत में गरीबी और भिखारी : कारण क्या और जिम्मेवार कौन ?

भारत, गरीबी और भिखारी; लगता है जैसे की मैंने तीन पर्यायवाची शब्दों के नाम लिए हों. सुन ने में अच्छा तो नहीं लगता, मगर सच्चाई तो यही है की हमारा देश गरीब देशों की श्रेणी में काफी ऊपर है (आंकड़ों के अधर पर). आखिर ऐसा क्यों? की लाख चाहते हुए और कोशिशों के
 
Vishal Kashyap
Mar 05 2010 06:51 AM
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सुन्दरता किसकी : चेहरे की या दिल की ?

चेहरा : मान का दर्पण; बात कितनी सच है और कितनी झूठ? ये तो पता लगा पाना काफी कठिन होता है. जब तक की कुछ समय आप किसी इंसान के साथ न बिताएं. जब तक की आप किसी को समझ नहीं लेते आप ये कभी पूरी तरह नहीं कह सकते की चेहरा क्या कहता है? चेहरा दिल की जुबान है या
 
Vishal Kashyap
Mar 04 2010 09:03 AM
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होली के रंग, यार दोस्तों के संग..... जोगीरा सारा रा रा....

 भई, सबसे पहले तो बहुत बहुत मुबारक हो आपको ये होली का रंगों भरा त्यौहार ....... काफी हर्षो उल्हास के साथ हम मानते हैं होली. लेकिन सच कहूँ तो होली जितनी अच्छी खेलते हुए देखने में मुझे लगती है उतनी खुद खेलने में नहीं लगती. कारन ये भी है की पहले मजे ले
 
Vishal Kashyap
Feb 28 2010 05:00 AM
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बिहार : धुंधली आँखों का एक काल्पनिक यथार्थ

बिहार : धुंधली आँखों का एक काल्पनिक यथार्थस्वागत  है आपका उस बदलते हुए बिहार में जहाँ कुछ वर्ष पहले कभी ये कामना भी नहीं की गयी थी और न ही किसी के सोच में ऐसा भाव ही दीखता था जैसा आज दिखता या महसूस होता है. आज हम में से कोई भी बिहारी कहलाना अपना
 
Vishal Kashyap
Feb 27 2010 05:43 AM