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कुछ इधर से ,कुछ उधर से

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18 Jun 2010
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बूढ़ा जीवन रीता रीता -पर न जाने कब मैं मुक्ति पाऊंगा

अब जब सब की बहुत जरुरत है किसी के पास भी समय नहीं है हर समय आकाश को तकताबूढी माँ को देखा करता आँखों में वो अकेलापन कोई नहीं शायद देख पाया पर चूकिंमैं उसके कोख से जन्मा था उसका दर्द मेरे दर्द से अलग ना हो पाया अब जब मैं भी बूढ़ा हो चला हूँ घुटने बोल चुके
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मेरी उम्र के लोगों और आज के युवा वर्ग में सोच का अंतर

पुराने यानि मेरी उम्र के लोगों और आज के युवा वर्ग में सोच का अंतर हमेशा बना ही रहता हैं.कार्य शैली का फर्क,अनुभव का फर्क,शिक्षा का फर्क,आदि इस अंतर का कारण हो सकते हैं,दोनोँ की पूरी कोशिशो के बाबजूद यह अंतर समाप्त होने का नाम नहीं लेता.ऐसा नहीं है कि
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मैं क्या करूँ, कैसे जियूं--एक प्रणय गुहार

मेरे सीने में ये आग जो तू ने ही तो लगाई थी    वो अब भी यूँ ही सुलग रहीमैं क्या करूँ, कैसे जियूं कैसे जियूं ,मैं क्यूँ जियूं जब तू नहीं मेरे पास हैबिन तेरे जिया हुआ हर लम्हा अब भी उदास है कभी तेरे साथ जो गुजरे थेनहीं भूल पाया मैं वो पल मैं
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नाम वालों,को,खबर क्या,बेनामी, क्या चीज़ है -पेरोडी--होश वालों को खबर क्या--जगजीत सिंह

नाम वालों,को,खबर क्या बेनामी, क्या चीज़ है पहले पढ़िए,फिर समझिए वो,कितना,बदतमीज़ है उसने,ऐसा,क्या लिखा ब्लोगों में,शोर सा,मच गयाकमेंटों से,वो अपने,सबकोलाल,पीला कर गया करना,कमेंट्स को मोडरेट ही,बस एक तरकीब हैपहले पढ़िए,फिर समझिए वो कितना बदतमीज़ है मन में
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मैं और मेरी व्यथा

मैं अहंकार वाला 'मैं' नहीं   मैं, मेरा मतलब मैं अपने आप को ढोता हुआथका हुआ डरा हुआ जब से जिम्मेवारियों ओढ़ी या उढ़ गयी खुद को भूल गया उनको पूरा करने के संस्कार जो पाए थेपूरा करता रहा उम्र की इस दहलीज़ पर आकर थक गया क्यूँ कीइस पड़ाव पर आकर मैं घर को
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जो पशु बनावें,तो तेरी इच्छा cute सा,मुझे doggie बनईयो

रईस बनावे,तो मेरे भगवानबनईयो मुझे मुकेश अम्बानी ऐरो-गैरो की,तो बात ही छोडो सरकार तक भरे मेरे आँगन पानीबनावे जो मुझे,कोई फ़िल्मी हीरो अभिषेक बच्चन ही,मुझे बनईयोऔर नहीं प्रभु, मेरी कुछ इच्छा बस ऐश्वर्या से, शादी करईयोंजो बनूँ मैं,कोई फ़िल्मी हीरोइन तो हेमा
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रोटी गरीबी और इन शब्दों के अर्थ और भावार्थ

रोटी शब्द का जोड़ तोड़ भाषा विज्ञानी अपनी अपनी खोज के अनुसार बता सकते हैंयह शब्द पुर्तगाल से आया या बंगाल से   बुध्दिजीवी घंटो तकइसके ऊपर  व्याखान दे सकते हैं परइस शब्द का अर्थ या भावार्थ वो ही जानता है जिसकी आंते कुलबला रही हैं भूख से इसके
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टिप्पणियों का पिटारा---जरा संभल कर खोलना

यह बड़ी अजीब सी बात है कि 'शब्दों का सफर' ब्लॉग में अजित जी ने ना जाने कितने शब्दों के सफर के बारे में जानकारी दी,पर शायद एक बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द के उद्गम के बारे में उन्होंने कभी कुछ बताया नहीं.जिस शब्द के बिना चिठ्ठाजगत की कल्पना भी मुश्किल है.इस
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कल ,आज और कल के विषय में कुछ .........

आज---- बीते हुए कल का भविष्य आने वाले कल का अतीत बीता हुआ कल-- जो आज की प्रतीक्षा में अतीत बन गया आने वाला कल--जो कभी आया है ना आएगा आने से पहले ही अतीत बन जायेगा समय---कल आज और कल के बीच ना खत्म होने वाली दौड पल----कल का जिया हुआ आज जीने को आतुर
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दो विचरने इनको उन्मुक्त आसमां में, इनको करो ना कैद अपने मन के जहाँ में

एक मन के बंद कमरे में ना खिडकी थी ना रोशन दान था दरवाजा था ना जाने कब सेबंद पड़ा हुआ   विचार थे घुटे घुटे उन्निंदे सेसोये पड़ेगए थक वो  खड़े खड़े सांकल खुलीमची खलबली  सब रौशनी से नहा गएवो रौशनी जो कभी देखी ना थी सुनी ना थीभगदड़ मची बाहर
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जयकारा कुमार जलजला का- बोल कुमार जलजले की जय

जयकारा कुमार जलजला का बोल कुमार जलजले की जय भोली है हर बात तुम्हारी  जय जय भोले भंडारी नज़र कंहीनहीं आते हो पर हर ब्लॉगपे छवि तुम्हारी जय जय .......जिस पर पड़ी तुम्हारी छायावो ही ब्लॉग चर्चा में आया तुमरी महिमा अति भारी जय जय ......जिस -किसी  पर
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इतने आयेंगे कि गिन भी ना पाएंगे--ब्लोगेर्स के सम्बन्ध में कुछ .........

इतने आयेंगे कि गिन भी ना पाएंगे--ब्लोगेर्स के सम्बन्ध में कुछ ......... पा पा के टिप्पणियाँफूल गए हैं  असलियत में हम क्या हैं ये भूल गए हैं'हम' जिनको कोईपूछता तक ना थाब्लॉगजगत में आकरमुखिया ही बन गए   ऐसी वैसी टिप्पणीअव्वल तो आती नहीं आ
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जी हाँ! मैं टिप्पणियाँ बेचता हूँ,मैं तरह-तरह की,हर किस्म की टिप्पणियाँ बेचता हूँ.

जी हाँ!मैं टिप्पणियाँ बेचता हूँ मैं तरह-तरह कीहर रंग कीटिप्पणियाँ बेचता हूँ.कुछ ज्वलनशील हैं जला के रख देंगी थोड़े दिनों की नींद उड़ा के रख देंगी ज्यादा नींद आती हो तो दिखला दूंनहीं तो अगली के बारे में बतला दूं कुछ सुनामी हैं दिखने में सादी हैं पर मिल जाए
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खेल का मैदान,कुछ खिलाडी,कुछ दर्शक और बिना नियमों का खेल

खेल का मैदान,कुछ खिलाडी,कुछ दर्शक और बिना नियमों का खेल एक खेल के मैदान में गिने चुने २५-३० दर्शक, दर्शक दीर्घा में बैठे हुए,उनमे से ही कुछ दर्शक खिलाडी भी बन जाते हैं.शर्त सिर्फ यह है कि जो दर्शक खिलाड़ी बन गए हैं,उनको छोड़ कर बाकी दर्शकों को ताली बजाना व
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अच्छी हो या बुरी,खोटी हो या खरी-टिप्पणी तो आखिर टिप्पणी है-मुल्हैज़ा फरमाएं

अच्छी हो या बुरी,खोटी हो या खरी-टिप्पणी तो आखिर टिप्पणी है-मुल्हैज़ा फरमाएं    मैं इंग्लैंड जा रहा हूँ ,सोचता हूँ कैसे मन लगेगा बिना ब्लोगिंग करे.-----एक पोस्ट और उस पर ......टिप्पणी....जो आम तौर पर की जाती हैं......   १.तुसी ना
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बीनाका गीतमाला के पादान VS. ब्लॉगजगत के पादान

मेरी उम्र वालों को शायद बीनाका गीतमाला अच्छी तरह याद होगी.रेडियो सीलोन पर अमीन सयानी का बोलने का खास अंदाज़ और उस समय के मशहूर गीत और गीतों का पादान हर नए कार्यक्रम में ऊपर-नीचे होना.लीजिए भाईयों बहनों अब कल जो गीत पांचवे पादान पर था,आज कूद कर जा पहंचा है
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बंदर ,मकड़ी और चूजे का खेल-बच्चों के लिए

बंदर भूखा है,केला खायेगा adopt your own virtual pet!मकड़ी जाल ऐसे बुनती है adopt your own virtual pet!चूजा कुछ ढूढ रहा है ,दाना खायेगा adopt your own virtual pet!
May 08 2010 10:41 AM
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जादू !ना ना भई सीधा सादा विज्ञान का सिद्धांत

Cool Experiments: How To Make A Coin Spin Inside A Balloonगुब्बारे में सिक्के को कैसे चकरी दिलाएं ---गुब्बारे में सिक्के को घुमाना बहुत आसान है.जैक मार्टिन वीडियो में सिक्के को घुमाते हैं-देखिये कैसे---१.हमें यह सब चाहिए-*एक गुब्बारा--अगर आर-पार दिखने
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हिंदी ब्लोगों में महिलाओं व युवाओं का योगदान बढ़ना चाहिए

कल  जब बच्चों के लिए YOU TUBE में विडियो के लिए छानबीन कर रहा था,तो एक बात दिमाग में आयी.इन विडियो को आखिर कौन देखेगा? बच्चे लोग तो ब्लॉग पढते नहीं.युवा वर्ग की भी "हिंदी"ब्लॉगजगत में कोई खास दिलचस्पी नजर नहीं आती.कभी किसी ने कोई डाटा तो दिया नहीं
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यू ट्यूब (You Tube) में चाचा चौधरी,मुल्ला नसुरुद्दीन जैसे कॉमिक्स-बच्चों के लिए

चाचा चौधरी और साबूमुल्ला नसुरुद्दीन राज कॉमिक्सध्रुव  WWF मेंपंचतंत्र -एकता में शक्ति  विक्रम  और बेतालअकबर  और बीरबलअलादीन  की कहानियाँ जंगल  बुक
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बड़े कि महिमा

'बड़े' का प्रयोग भी ना जाने कंहा कंहा होता है.चलो आज उनमे से कुछ को देखते हैं.  कुछ खरीदारी के लिए बाज़ार जाना हुआ.बच्चे साथ में थे.सामान लेने के बाद सबका मन कुछ चाट पकोड़ी खाने का था.चीकू बोला,पापा दही 'बड़े' खाने हैं.हाँ! मेरा मन भी कर रहा है, पत्नी
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जुआ या सट्टा खेलना या दावं लगाना (GAMBLING) क्यों गलत है!

बहुत से इसमें कोई बुराई नहीं देखते पर ज्यादातर इसके सख्त खिलाफ हैं.आओ करीब जाकर इसको जानते हैं--१.लोभ ही गेम्ब्लिंग का मुख्य कारण है.जुआरी इसी लोभ में रहते हैं-- 'और आने दो,थोड़ा और आने दो'यह लालच सब कुछ खोने पर ही समाप्त होता है.परन्तु लालच फिर भी खत्म
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कौन बड़ा उदार -मैं या मेरा मित्र -एक प्रेरक प्रसंग

लियो टोलोस्तोय ( leo tolostoy) से भला कौन परिचित ना होगा.लियो का जन्म रूस में हुआ था.वे प्रसिद्ध समाज सुधारक व उपन्यासकार थे.War and Peace (863-69), Anna Karenina (1875-77) जैसे प्रसिद्ध उपन्यास लियो के ही लिखे हुए थे.उन्होंने ढेर सारी कहानियां भी लिखी
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उम्र खप जाती है छोटी-सी किसी ईजाद में!

मैं थोड़ी देर जिससे सर टिकाकर बैठ लेता हूंवो पत्थर की नहीं, उम्मीद की दीवार है कोई।न इसकी थाह है कोई, न इसका पार है कोईये दुनिया है अजब इसका न पारावार है कोई।मैं चाहूँ तो भी मुझको चैन से रहने नहीं देगामेरे भीतर अगर ज़िंदा कहीं फ़नकार है कोई।यहाँ पर आत्मा
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पसंद, नापसंद का चटका------एक यह भी सोच

हमारे बुजुर्ग कहा करते थे-- बेटे! एक बात सुन लो,लड़की देखने तो जा रहे हो, पर कान खोल कर सुन लो की लड़की पसंद करके ही आना,नापसंद ना करना.चाचा जी,अगर सिर्फ पसंद ही करनी है, पसंद ना आने पर भी नापसंद नहीं कर सकते,तो फिर देखने की जरुरत ही क्या है.नहीं बेटे,ज़रा
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कुछ और मजेदार अनदेखे विडियो क्लिप्स

कब आएगा तुम्हारा बाप-मनोरंजन का बाप-DLF LEAGEपेप्सी का एक और विज्ञापन- लालू जी बोले इंग्लिश में-आओ जरा देखें-मुकाबला मुकाबला लैला लैलाघर पर कैसे नाचते हैं-आओ देखते हैं परन्तु नाचने मत लग जाना भारतीय संगीत वाह वाह और आखिर में विज्ञापनों का बेताज
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विज्ञापनों की दुनिया-TV विज्ञापन-कुछ विडियो क्लिप्स

कोका कोला,स्प्राईट के विज्ञापन मारुती के विज्ञापन सर्व शिक्षा अभियान व कैडबरी आदि के विज्ञापन राष्ट्रीय गान ,बजाज पल्सर के विज्ञापन एशियन पेंट्स--एक नज़र और आखिर में विज्ञापनों की दुनिया का राजा-फेविकोल
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सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा-अपने अपने अंदाज़- कुछ विडीओ क्लिप्स

बच्चों का जोश और उमंग संगीत रचना-तीन अंतरे --तीनो के अलग अलग स्वरअन्नू मालिक की भी एक पेशकशINCREDIBLE INDIAऔर एक यह भी-बच्चों द्वारा पेश किया हुआ सामूहिक गानसारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तानहम बुलबुले हैं इसकेये गुलसितां हमारा 
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अपनी पत्नी,अपने प्यार के जन्मदिन पर बधाई सन्देश

मेरी पत्नी-मेरा प्यार आज तुम्हारा ५४ वां जन्मदिन है,मेरा प्यार से भरा"प्यार"स्वीकार करो.मेरी कामना है बरसों तक तुम्हारा प्यार मेरे प्रति ऐसा ही बना रहे,जिसके सहारे के कारण ही आज-तक मेरी नैया प्रेम सिंधु में कभी डगमगाई नहीं .मैं तुम्हारी दीर्घ आयु की
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झींगा लाल जी और उनसे ब्लॉग चर्चा -एक नज़र

सुबह की  सैर को निकला तो रास्ते में झींगालाल जी टकरा गए .अरे गर्ग साहब,भई कंहा रहते हो आजकल नज़र ही नहीं आते ,सब कुशल-मंगल तो है,सुना है बेटी की शादी भी कर दी है ,मतलब यह कि जिम्मेवारियों से फारिक हो गए हो ,सुनाओ अब गंगा नहाने कब जा रहे हो
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कहीं भी तो लहर की बानगी हमको नहीं मिलती

नदी के तीर पर ठहरेनदी के बीच से गुज़रेकहीं भी तोलहर की बानगीहमको नहीं मिलतीहवा को हो गया है क्यानहीं पत्ते खड़कते हैं'घरों में गूँजते खंडहरबहुत सीने धड़कते हैंधुएँ के शीर्ष पर ठहरेधुएँ के बीच से गुज़रेकहीं भी तोनज़र की बानगीहमको नहीं मिलतीनक़ाबें पहनते
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न्याय की कब तक उम्मीद रखें

देश की अदालतों में इस समय 3.13 करोड़ मुकदमे लंबित हैं, जिन्हें निपटाने में न्यायपालिका को 320 वर्ष लगेंगे। आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस वीवी राव ने यह बात ‘न्यायपालिका में ई-गर्वनेंस विषय’ पर व्याख्यान देते हुए कही.  ......  उन्होंने कहा
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मसला यह भी हल हो जायेगा।

ठोस भी कभी तरल हो जायेगा मसला यह भी हल हो जायेगा।फ़ागुन का रंग जो चढा कभीचैती बैरागी विकल हो जायेगा।सच एक था और रहेगा एक परअमृत तो कभी गरल हो जायेगा।पहले से जो तुमने की तैयारियांजीवन का पर्चा सरल हो जायेगा।पाकर संग फूलों का एक दिनकांटा भी कोमल हो जायेगा
Apr 24 2010 03:04 PM
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अरी,जरा लल्ला के पावं तो देख

सब तरफ खुशी का माहौल था .खास तौर में मेरी माँ कि खुशी तो देखते ही बनती थी.पालने में लिटा दिया गया मुझे .कृष्ण कन्हैया की तरह मैं भी पावं के अंगूठे को चूसने लगा.दादी मुझे देखने आयी,और मुझे देखते ही माँ को आवाज़ दी बहू ,जरा इधर तो आ . माँ आयी और बोली क्या
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होनहार विद्वान के, होत चीकने गाल

होनहार विद्वान के, होत चीकने गाल जब छोटे बच्चे थे ,तो इस मुहावरे को यह ही मानते थे .प्रभु का दिया हुआ गोरा रंग था गालों का रंग भी सुर्ख लाल था.माँ हमारे रंग रूप पर इठलाती थी.जब भी आईने में चेहरा देखते,लाल-लाल गालों को देख कर बाल मन के अंदर यह बात भर गयी
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यह डाटाबेस कल २२अप्रैल को रात ११.३५ बजे ब्लोगवाणी से उठाया गया है .

# मजहबी विवाद, संप्रदायिकता और ब्लॉग जगत!! 178/14/0/25# डरो मत शास्त्री जी लौन्डे का मुकाबला करो 191/8/5/21# कल ब्लॉग वाणी से लगभग एक घंटे मेरी बात-चीत हुई है... 128/10/3/25# ब्लॉग निरस्त करवाने की धमकियाँ! - शाहनवाज़ सिद्दीकी 87/9/1/11# मुस्लिम समाज को
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अलविदा ब्लॉगिंग अलविदा

अलविदा ब्लॉगिंग अलविदा न जाने कितने लोग ब्लॉगिंग को अलविदा करते हैं,क्यों करते हैं,सच में करते हैं या नहीं करते हैं,ये तो करने वाले ही जाने.ये भी समझ नहीं आता कि उनके जाने सेब्लोग्स के संसार को क्या नुकसान होगा और उनके आने से किसको क्या फ़ायदाहुआ था, ये
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आजा भई जम्हूरे - तमाशा दिखायेंगे तो कुछ मिल सकता है

आजा भई जम्हूरे तमाशा दिखायेंगे तो कुछ मिल सकता है गुजारा कुछ दिन और चल सकता है अच्छा जो पूछेगा बतलायेगा हाँ उस्ताद बता- अफगानिस्तान में जब दो पठानों को जब दो बम मिले तो उन्होंने क्या किया? उस्ताद बताता हूँ पहला बोला कि चलो इसको पुलिस थाने में दे आते हैं
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उम्र बीती, गुत्थियाँ सुलझी नहीं

झर गए वे पातजो पीले हुएव्यर्थ ही फिरपलक क्यों गीले हुए।साँस तो,जो आ गई है, जाएगीप्यास मरु कीकब तलक भरमाएगीएक कतरामिट गया बादल बनासर बना सरिता बनासागर बनापर मिली पाती गगन सेनेह की,ह्रदय उमड़ापंख सपनीले हुए।फिर,नया आँचललरजती लोरियाँहाथ तारेपाँव रेशम
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गप सुनो भाई गप, कुछ ब्लोगरों में लिखा-सुनी हो गयी है

गप सुनो भाई गप कुछ ब्लोगरों में लिखा-सुनी हो गयी हैबीच बचाव का कार्य जारी है बहुत से ब्लोगेर्स आग में से घी निकालने के काम में जुटे हुए हैं और बहुत से ब्लोगर्स जो घटना से अनजान हैं,लिखा सुनी के बारे में जानकारी विभिन्न सूत्रों से जानने में लगे हुए