Kavya Therapy's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
25 May 2010
कुल प्रविष्टियां
60
पाठक भेजे
621
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
10.35
पसंद करें
3
नापसंद करें

चंदू मेरा बन्धु

ऑफिस में मेरा एक साथी है चन्द्र प्रकाश. हरियाणवी यादव. खेत-खलियान भरपूर, ढोर-डांगर भी घी-दूध में डूबे रहने के लिए अच्छी-खासी संख्या में है. चाहता तो ता पुलिस की नौकरी. पर हर बार इंटरव्यू में अच्छी सिफारिश ना होने के कारण मायूस होना पड़ता है. कमरदर्द की
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरे सपने की दूधिया गाय

मेरे बचपन का एक सच्चा सपना और २२ वर्ष वहले २१-१२-१९८८ को लिखी गयी कविता. इस कविता में मैंने एक क्षण-विशेष को मानस में कैद किया हुआ है जो आज भी मुझे बचपन जीने में मदद करता है. आप के सामने एक किस्से के रूप में...बात पुरानी वर्षा में भरा घुटनों तक
 
PRATUL
May 24 2010 10:40 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रेम औषधि से चिकित्सा करवाने वाले कृपया आगे जाएँ.

मित्र विनय से मुलाक़ात मोबाइल पर हो ही गयी. आगे जानने के लिए दर्शन प्राशन दवाखाने पर जाएँ. मरीज वहीँ मिलेगा. रास्ता है: http://darshanprashan-pratul.blogspot.com/2010/05/blog-post_19.html
 
PRATUL
पसंद करें
3
नापसंद करें

हम कहीं योग को समर्पित एक गेरुआ संत ना खो बैठें!

एक समाचार ...मैं 150 साल तक जिऊँगा-बाबा रामदेव हैदराबाद , मंगलवार, 18 मई 2010( 08:37 IST )NDयोग गुरु बाबा रामदेव का दावा है कि योग के बलबूते वे कम से कम 150 साल तक जिएँगे।रामदेव ने कहा कि वे योग की मदद से ‘150 से 200’ साल जिएँगे और अगर वायु और जल प्रदूषण
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरा उत्तर [मेरे मित्र विनय कुमार की कविता]

अपेक्षाएँ हैं मुझसे कितनी,पूरी कर न सकूँ जितनी. लाभ इसका होगा क्या, मेरी बस बात है इतनी. लिखूँ गद्य लिखूँ पद्य, न सेवन करूँ कभी मद्य. विचारूँ छंद उतारूँ निबंध, बुरी हर बात पे प्रतिबन्ध. 'उनका' विचार अब त्याग दूँ, सीमाएँ अपनी बाँध लूँ. दिखाया है आपने
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

परशुराम-स्तुति

अक्षय तृतीया पर विशेष प्रस्तुती  [१]नयन करुणा समम दृष्टि सौम्यता मुख प्रेम वृष्टि ब्रह्म तेजस निःसृती इव ....................... गंधित कमले [यययी..ययी]....................... परशुराम नमे [यययी..ययी]....................... परशुराम नमे
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

वाह विधाता

देखी तेरी लीला सबने लिया देख सब डाटा. ................................. वाह विधाता!फ़ैल रही रही है कहीं बीमारी कहीं संकुचित 'त्राता'. ................................. वाह विधाता!कहीं कंप होती है धरती कहीं भूधर फट जाता. .................................
 
PRATUL
May 15 2010 11:44 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

साहित्यकार

पानबीड़ी तम्बाकू सिगरिट का धुआँ.थोड़ी शराब, थोड़ा जुआँ— हो जाए.बनो 'मेरे यार'. मैं इस युग का साहित्यकार.
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरे हाल चाल

आज गुप्पा हो गया ................ मैं फूलकर इतना ............................लगने लगा भय .......................................नोक से. आसमान में उठा ................ मैं ऊलकर इतना .......................... भगने लगा हय*
 
PRATUL
पसंद करें
1
नापसंद करें

धनिया माँगते हैं

तीज त्योहारों पर ........................ जमादार.शादी-ब्याह और बच्चा होने पर ....................... हिंजड़े. ज़रा-सा कंस्ट्रक्शन शुरू करने पर ................. ठुल्ले........................हक़, न्योत, चाय-पानी माँगते हैं. पब्लिक स्कूल में एडमिशन पर
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

बौनी पीढ़ी

 गमलों में उग आये हैं नीम बेल अनार इमली के पेड़.गमलों में पेड़ों को उगा देख बसे-बसाए 'फूल से' किराएदारों को मैंने विदा किया. माँ ने समझाया गमलों में पेड़ नहीं लगते.पेड़ों को चाहिए होती है ज़मीन अधिक क्षेत्रफल/ खुलापन बेटा, पौधों को गमलों से मत निकालो
 
PRATUL
May 10 2010 12:19 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बचत

जेब में मेरे 'अठन्नी 'हाथ फैलाता ...........................................................................भिखारी दूर दिखता.काटता हूँ मैं इधर चुपचाप कन्नी.
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

असल बिहारी

हर शब्द का होता है अपना एक इतिहास. भाषा वैज्ञानिक खोद निकालता है शब्द का आदिम रूप प्रयोग में लिए जा रहे प्रचलित शब्दों के आस-पास.इस खुदाई में 'मूल शब्द'किस समय – कितना गला, कितना चला कितना घिसा, कितना पिसा.किस शब्द ने कितनी साँसें लीं. किस शब्द ने कब दम
 
PRATUL
पसंद करें
1
नापसंद करें

आतंक को पहचानो

मैंने देखा हैआतंकियों को हुआ हूँ गद्दारों से रू-ब-रू.मैंने थाली में छेद करने वाले देखे हैं देखी हैं हरकतें देश-विरोधी.मैंने देखे हैं देश के शहीदों के प्रति घृणित भाव. मैंने उन सरकारी दामादों को देखा है जिनकी आवभगत हर इलेक्शन में होती है जो ज़हर उगलते हैं,
 
PRATUL
पसंद करें
1
नापसंद करें

प्रचारतंत्र की जय [आज के नेता का स्वगत कथन]

मुझमें ना है कोई योग्यता फिर भी मैं हीरो हूँ.ना ही मुझमें रंग-रूप का कोई आकर्षण है.प्रबुद्ध जनों को शीघ्र प्रभावित कर लूँ — असंभव है.जिज्ञासु बालक की जिज्ञासा को शमन करन का मुझपर नहीं मंत्र-वंत्र है ना ही कुछ अध्ययन है.मैं केवल छपता रहता हूँ
 
PRATUL
May 02 2010 11:07 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बंधुआ मजदूरी नए ज़माने की [मज़दूर दिवस पर विशेष]

आज काप्रत्येक व्यक्तिहो चुका है जागरूकशिक्षा ने उसमें चेतना घुसाई है.प्रशासन भी दे रहा है भरपूर सहयोग शिक्षा को.— आँखें खोलने के लिए अंधी रूढ़ियों की —कर रहा है स्थापित विश्वविद्यालय.व्यक्ति पा सके रोजगार ऐसे-ऐसे पाठ्यक्रमों को चलाता है जनता के
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

चिंतन का विषय

पिछले दिनों अमित जी से बातचीत हुई मैंने कहा कि — आप अपने धार्मिक लेखों की वजह से चर्चित हो गए हैं. आप एक सुलझे विचार के व्यक्ति सिद्ध हुए हैं.अमित जी ने पूरी विनम्रता के साथ कहा — अरे! धन्यवाद के असली हकदार तो जमाल साहब हैं. उन्हीं के सवालों के जवाब
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

उधार-गाथा

कुछ समय के वास्ते चाहिए मुझको तुम्हारी 'जमा पूँजी'जो तुम्हे देती रही नेपथ्य से — संकल्प दृढ़ता.मन में उठी एक चाह को 'पक्का इरादा में बदलने की सनक.प्राप्त करके जमा राशि तुम्हारी मिल ना पाती मन को तुम्हारी भाँति 'दृढ़ता'.ज़रुरत भी एक होती पूर्ण दिखती दूसरी
 
PRATUL
पसंद करें
1
नापसंद करें

भई! उन्हें संत रहने दो ...

वे श्री १०८ थे. वे तम्बू दर तम्बू प्रवचन देते चले गए तो वर्ष भर में श्री श्री १००८ हो गए. और अब वे हैं उससे भी बढ़कर परमपूज्य आचार्य स्वामी श्री देवादिदेव महाराज, जो हिमालय की कंदराओं से कठोर साधना कर आ पहुँचे हैं धरातल पर, समाज के विलासिता में डूबे
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

अंत की सीमा

अंत की सीमा निर्धारित नहीं.आरम्भ का उद्गम किस बिंदु को स्वीकार लें.अभिव्यक्ति का आरम्भ मेरे मौन का है अंत.व्यक्त का अलम मेरे मौन का प्रारम्भ.
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

अंत - सूक्ष्मता का

दुष्ट विचारों को पहचान उनसे नज़र बचाकर निकल जाना चाहता हूँ.पर, कैसे हो संभव जब जानता हूँ मैं — "परिचितों से नज़र चुराना अच्छा नहीं अच्छा या बुरा भाव व्यक्त करना ज़रूरी है." करता हूँ कभी व्यक्त — 'घृणा' अपनी भी उन विचारों से, जो हितकर नहीं लिप्तता का
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

चुपचाप देखो मेरा दूसरा जन्म

प्रिय अमित जी ने प्रकृति के एक नज़ारे को मेरी नज़र से जानना चाहा ... उनका लिंक है:  http://27amit.blogspot.com/2010/04/blog-post_23.html/"आज आपके पासआश्चर्य करने के अलावा कुछ नहीं."देखो! शुरू हो गया है मेरा — स्थूल से सूक्ष्म की ओर बढना.—
 
PRATUL
पसंद करें
2
नापसंद करें

गोबर का कमाल

आधा गाँव — आधा शहर घूमें ढोर — आठों पहर.डाले बाँह — हो निडर.बाँहों में — बेखबर.सुबह शाम — सड़कों पर.घूमें हैं — वधु-वर.निकला बाजू — ट्रक होकर.उछला "छप्प्प"— से गोबर. [उड़न तश्तरी पर सवार श्रीमान समीर लाल जी को समर्पित]समीर सर से एक प्रश्न: यदि कहीं
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

अटपटे शौकों की प्रतिस्पर्धा से क्या लाभ?

प्रतिस्पर्धा प्रतिभा विकास के लिए आवश्यक समझी जाती है. बुद्धी या स्वास्थ्य वर्धन के लिए किशोर छात्रों में ऎसी प्रतियोगिताएँ सम्बंधित विषय को रुचिकर भी बनाती हैं. आज की दुनिया में रिकोर्ड बनाने की धुन ने बेतुकी प्रतिस्पर्धायें शुरू की हुयी हैं.
 
PRATUL
पसंद करें
2
नापसंद करें

मिस्टर पेटूराम की चिकित्सा

मिले एक दिन बाबा राम बोले — कर लो प्राणायाम पूरे दिन में बस दो बारी खाना खाओ शाकाहारी तीन समय लो प्रभु का नाम सुबह, दोपहर और शाम जागो चार बजे तुम रोज आलस छोडो, भर लो ओज पाँच जगह की करो सफाई नोज़, इयर, टंग, स्किन, आई लंच और डिनर के बीच छह घंटे का अंतर
 
PRATUL
पसंद करें
1
नापसंद करें

मिस्टर पेटूराम

एक थे मिस्टर पेटूराम  उनका पेट भरा गोदाम दो थे उनके मोटे हाथ घूम नहीं पाते एक साथतीन बार ना खाते थे हर दम चरते रहते थे चार बार खाते थे चाट बर्गर, भल्ले, टिक्की हाट पाँच बार पीते थे चाय दरवाजे पर रोती गाय छह बार तम्बाकू पान इधर-उधर हर तरफ निशान सात
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

कबाड़ीवाला

घर के एक कोने में कर दी हैं इकट्ठीघर के सभी सदस्यों ने — अपनी-अपनी रद्दी.माँ महीनों से जोड़ रही थी जिस कबाड़े को वह कबाड़ा बिक गया — पिता की बिना मर्जी.लास्ट सन्डे न्यूज़पेपर में छपा जो एडवरटायिज़ — "फ्लेट एमआईजी बनेंगे".— खोजते हैं अब उसी को
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

दिवा-स्वप्न

एँ! क्या मैं सो रहा था?जो मैंने देखा, समझा — झूठ था?इंडिया टीवी की खबर था?क्या सच नहीं?अजमल कसाब को फाँसी हो चुकी है!सीरियल बम-ब्लास्टों के के गुनाहगार — जेल के अन्य कैदियों के द्वारा मार दिए गए! अजी! मैंने लाइव टेलीकास्ट देखा! भारत ने जो-जो सबूत
 
PRATUL
Apr 14 2010 09:24 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

सविता

पिये! तुम गरमी में ना आओ. जहाँ पर रहती हो, रह जाओ.ताप से मैं आकुल-व्याकुल ह्रदय-खग करता है कुल-कुल पिकानद साथ रहो मिलजुल आपका रूप बड़ा मंजुल उसी को मेरे लिए सजाओ.जहाँ पर रहती हो, रह जाओ.आपके मौन शब्द मुझसे न जाने कितने ही अतिशय बात कह जाते थे रसमय पिये!
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

जाड़ा चला हिमालय से

जाड़ा चला हिमालय सेलेकर अपनी फौज।मिल-जुलकर सब बैठ गएअपने मन की मौज।जाड़े ने हमला बोलाजो ग़रीब था भाई।पर ग़रीब ने जाड़े कोआंच की ढाल दिखाई।सुबह चार घंटे हुईजमकर खूब लड़ाई।सूरज जी आ गए तभीदोनों की रार* मिटाई।(गौरी, आभू, गोविन्द, अर्णव के लिए )
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

उर द्वंद्व

दो उरों के द्वंद्व मेंलुप्त बाण चल रहेस्नेह-रक्त बह रहाघाव भी हैं लापता।नयन बाण दोनों केआजमा वे बल रहेबाणों की भिडंत मेंस्वतः चार हो रहे।बाणों की वर्षा सेहार जब दोनों गएमात्र एक बाण छोड़ संधि हेतु बढ़ गए। नाग पाश बाहों का छोड़ दिया दोनों ने स्नेह घाव दोनों
 
PRATUL
Apr 12 2010 12:42 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजा आम

एक रसीला पीला आम दो केलों ने किया सलाम।तीन संतरे पकड़ के लाये चार चीकू का गला दबाये पाँच पपीते मिलकर बोले —छह लीची के छिलके खोले सात सेब को चाकू मारा आठ अनारों का हत्यारा नौ नारियल पटक के फोड़े दस तरबूजों पर बम छोड़े सज़ा दो इनको राजा आम पिचका कर दो काम
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

धर्म की सरल व्याख्या

धर्म की सरल व्याख्या है —"जो धारण किया जा सके।" वही धर्म है। बाह्य धर्म हैं जलवायु अनुकूल पहनावा, ऐसा शिष्ट पहनावा जो बिना वजह स्वयं और अन्यों के भावों का उद्रेक ना करता हो। अपने उत्तेजक भावों का प्रदर्शन और अन्यों के भावों की परीक्षा लेने की कोशिश तो
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

पर्दा-पर्दा

बुर्केवाली माताओं बहनों! पर्दा तब करो जब धूल भरी आंधी चले।पर्दा तब करो जब सर्द हवा के झोंके चलें। पर्दा तब करो जब किसी की बुरी नज़र से बचना भर हो।पर्दा तब करो जब लज्जा शरीर में संभाले न संभले। पर्दा तब करो जब कुकर्म किया हो कोई।पर्दा तब करो जब संक्रामक
 
PRATUL
Apr 10 2010 10:35 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

उन्हें इस देश से केवल "खाने हगने और जेहाद करने" के अलावा कोई सरोकार नहीं

मित्रों, शुभ-प्रभात पिछले दिनों मैंने मिस्टर जमाल से गुफ़्तगु की थी. जिसकी एक नक़ल आपके पास भेजी थी। मिंयाँ जमाल ने तो पूछे गए सवालों का एक घबराए चालाक बच्चे की तरह जवाब दिया। पूछे गए तमाम सवालों पर उन्होंने केवल उतना ही मुँह खोला जितना एक ट्रेंड तालिबानी
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

करूँ विश्वास कैसे मैं

नवजात बच्चेलगते अच्छेनिर्विवादित सत्य है यह।पूछते — 'अंतर'— दिखाकर जाति, उनका धर्म क्या है?नहीं उत्तर पास मेरे आपकी नज़रों में कट्टर जातिवादी मैं रहूँगा।चाहे चूमूँ गाल उनके या ह्रदय वात्सल्य भर लूँनयन पर कुछ चमक लाये।प्रश्न पूछूँ प्रश्न बदले :'बीज' से बन
 
PRATUL
Apr 08 2010 03:20 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

संस्कार क्या? और एक संस्कारी पुरुष कैसा?

साथियों !ब्लॉगजगत में एक नया ब्लॉग आया "युवा पहल" जिसका लिंक है : http://blondmedia.blogspot.com/2010/04/blog-post_06.htmlउसमें संस्कार क्या? और संस्कारी पुरुष कैसा? — पर कुछ प्रश्नात्मक लहजे में नासमझी भरी राय थी। आप भी पढ़ें और अपना दृष्टिकोण दें।
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

उलटबांसी

यहाँ से वहाँ तक जामा मस्जिद के पास एक से अधिक मीट की हैं दुकानमुर्गे जैसे छोटे जीवों के शव-शरीर टंगते — ललचाते मुल्लाजी।भैंसों गायों बकरों का सर सजने के लिए दुकानों पर अल्लाह मियाँ ने खुद कुरआन में लिखवाया।अब तो पण्डे भी देवी-देव पर, पशु-पक्षी की बलि चढ़ा
 
PRATUL
पसंद करें
0
नापसंद करें

आखिरी जिद

मेरे ह्रदय मेंपुण्य भी है पाप भीवरदान भी है शाप भीबिलकुल अवध के एक ढाँचे सा।सोचतासब नष्ट कर दूँ।फिर से बनाऊं 'एक मंदिर'शुद्ध, सुन्दर, पुण्य-संचितयही बालक मन की मेरीआखिरी जिद।एक राखूँएक अर्पित।हाथ मेरे है खिलौना 'श्री राम भूमि बाबरी मस्जिद'। (वैसे तो इस
 
PRATUL
Apr 06 2010 09:02 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पुलिस-पीड़ित

वाह रे आज का प्रजातंत्र / घूमते सब गुंडे स्वतंत्र / हाय, फैला कैसा आतंक / लगे हैं रक्षक-भक्षक अंक / पुलिस पर एक बड़ा है मंत्र / किसी को पीट करें परतंत्र / घोर है उनका अत्याचार / रोयें सब जन-जन हो लाचार / बनाया था जिनको सरताज / वही सर चढ़े हुए हैं आज /
 
PRATUL
Apr 05 2010 10:44 AM