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शांति का सन्देश

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10 May 2010
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सुरेश चिपलूनकर जी, मैं मानता हूँ कि इस्लाम में संगीत हराम है

अपने ब्लॉग महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar) जी ने एक लेख लिखा जो कि गुजरात के भरूच जिले में चल रहे एक रहत शिविर पर आधारित था. "अरे?!!!… मोदी के गुजरात में ऐसा भी होता है? ...... Gujrat Riots, Relief Camp and NGOs in India"जिस पर मेरा कमेंट्स
टैग: संगीत
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फौज़िया जी को मेंरा सलाम!

फौज़िया जी को मेंरा सलाम! आपने जिस तरह मर्दो की बुराईयों के खिलाफ आवाज़ उठाई, वह वाकई में काबिले-तारीफ है। और मर्दो में अक्सर होने वाली इन बुराईयों का विरोध अवश्य ही होना चाहिए। अब तक औरतें निरक्षरता की वजह से बेवकूफ बनती आई हैं और अक्सर मर्द अपने अहम के
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प्रवीण जी, धर्म वही है जिसकी बातें हर युग में प्रासंगिक हों वर्ना वह साधारण ज्ञान है

प्रवीण जी ने कहा:सभी धर्मों के धर्मग्रंथों में बहुत सी ऐसी बातें लिखी गई या बताई गई हैं जो उस युग के मनुष्य की अवैज्ञानिक धारणाओं, सीमित सोच, सीमित ज्ञान (या अज्ञान), तत्कालीन देश-काल की परिस्थितियों व लेखक के अपने अनुभवों या मजबूरियों पर आधारित हैं, आज
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ब्लॉग निरस्त करवाने की धमकियाँ! - शाहनवाज़ सिद्दीकी

ब्लॉग "प्रेम रस" के लेख "एक-दूसरे के धर्म, आस्था अथवा लेखों की आलोचनाओं में व्यतीत होता समय" पर कुछ लोगों ने मुझे मेरा ब्लॉग निरस्त होने की धमकी दी!उन लोगो को तो मैंने जवाब दे दिया. पर मैं आप लोगो से मालूम करना चाहता हूँ कि क्या गलतियाँ केवल एक
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डॉ. अनवर जमाल साहब अब बहुत हो गया - शाहनवाज़ सिद्दीकी

आखिर कब तक उकसावे में आकर अपनी उर्जा को बर्बाद करते रहोगे! जैसे लेखन का प्रयोग आपने अपनी पुस्तक "दयानंद जी ने क्या खोया क्या पाया" में किया था, अपनी प्रतिभा को वैसे ही प्रयोग करिए, ताकि लोगो ने जो इस्लाम के बारे में मिथ्या प्रचार फैला रखा है, उसका अंत
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शांति का सन्देश

एक ज्ञान है जो मनुष्य की आवश्यकताओं से सम्बंधित होता है, जिसे दुनिया का ज्ञान कहते हैं. इसके लिए ईश्वर ने कोई संदेशवाहक नहीं भेजा, बल्कि वह ज्ञान ईश्वर ने मस्तिष्क में पहले से सुरक्षित कर दिया है. जब किसी चीज़ की आवश्यकता होती है तो मनुष्य मेहनत करता है,
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गैर-मुसलमानों के साथ संबंधों के लिए इस्लाम के अनुसार दिशानिर्देश

हमें विस्तार से पता होना चाहिए कि इस्लाम के अनुसार मुसलमानों को गैर-मुसलमानों के साथ कैसे संबंध रखने चाहिए और कैसे उनके साथ इस्लामी शरी'अह के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिए?सब तारीफें अल्लाह के ही लिए हैं.पहली बात तो यह कि इस्लाम दया और न्याय का धर्म है.
टैग: kafir
Apr 14 2010 03:31 PM
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ग़ैर मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न: जिस व्यक्ति ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया किन्तु कभी कोई पाप व्यभिचार भी नहीं किया उसकी क्या गति है इस्लाम के अनुसार?उत्तर: दुनिया में तो सब बराबर हैं, जो भी पुन्य करेगा वह उसका अच्छा बदला पायेगा. क्योंकि ईश्वर ने सभी को अपने हिसाब से जीवन को यापन
Apr 11 2010 02:08 PM
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क्या धरती पहाडो की वजह से टिकी है?

वैज्ञानिक पर्वतों के महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि यह पृथ्वी को स्थिर रखने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं:'पर्वतों में अंतर्निहित जड़ें होती है. यह जड़ें गहरी मैदान में घुसी हुई होती हैं, अर्थात, पर्वतों का आकार खूंटो अथवा कीलों की तरह होता है. पृथ्वी की पपड़ी
Apr 09 2010 05:57 AM
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शोभायमान आँखों वाली हूर!

हूर शब्द की अधिकतर गलत व्याख्या की गई है. हूर की धारणा समझना मुश्किल नहीं है.शब्द हूर, अहवार (एक आदमी के लिए) और हौरा (एक औरत के लिए) का बहुवचन है. इसका मतलब ऐसे इंसान से हैं जिसकी आँखों को "हवार" शब्द से संज्ञा दी गयी है. जिसका मतलब है ऐसी आंखे जिसकी
Apr 08 2010 10:15 AM
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इस्लाम अनुसार बच्चा गोद लेना सही नहीं है?

प्रश्न: क्या इस्लाम अनुसार बच्चा गोद लेना सही नहीं है? क्या किसी को बेटा अथवा बेटी माना जा सकता है?उत्तर: इस्लामिक अनुसार, बच्चे को गोद तो लिया जा सकता है, परन्तु सिर्फ पालन-पोषण इत्यादि के लिए. आप उसको अपना नाम नहीं दे सकते है, और बालिग़ होने पर
Apr 08 2010 10:09 AM
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कुरआन कहता है कि पृथ्वी गोल नहीं अपितु समतल है?

कुछ लोगो को लगता है कि कुरआन के अनुसार पृथ्वी समतल है जबकि  कुरआन की एक भी आयत यह नहीं कहती है कि पृथ्वी समतल (फ्लैट) है. कुरआन केवल एक कालीन के साथ पृथ्वी की पपड़ी की तुलना करती है. कुछ लोगों को लगता है की कालीन केवल एक निरपेक्ष समतल
टैग: inside the earth
Apr 07 2010 10:48 AM
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इंसाफ का दिन

ईश्वर इंसाफ के दिन (क़यामत) का इंतजार क्यों करता है, आदमी इधर हलाक हुआ उधर उसका हिसाब करे, किसी सरकारी बाबु की तरह एक ही दिन सारे कम निपटने की क्यों सोचता है? उत्तर: इसमें एक तो यह बात है कि ईश्वर ने इन्साफ का दिन तय किया है ताकि इन्साफ सबके सामने हो और
Apr 01 2010 10:23 AM
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काफिर किसे कहते हैं?

उत्तर: काफिर शब्द का मतलब है "इन्कार करने वाला". अर्थात 'काफिर' उसे कहते हैं जो ईश्वर को पहचान कर भी अपने अहम् या दुष्टों की बातों में आकर या किसी और कारणवश उसके होने का या उसके किसी आदेश का इन्कार करे. अर्थात जिस तक ईश्वर का सन्देश पहुँच गया और वह उसका
Mar 24 2010 11:38 AM
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Status of Slaves: According to Islam

Question: A man can have sex with prisoners of war?Example: O Prophet! We have made lawful to thee thy wives to whom thou hast paid their dowers; and those whom thy right hand possesses out of the prisoners of war whom Allah has assigned to thee; and
Dec 14 2009 01:31 PM