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अमर 'आकाश'

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27 May 2010
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अमर 'आकाश': कवि संगम रिपोर्ट

अमर 'आकाश': कवि संगम रिपोर्ट
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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कभी तो तुम्हारे साथ

कभी तो तुम्हारे साथ, अपनी शाम गुजरेगी,वर्ना ये ज़िन्दगी, किस काम गुजरेगी. आँखों में लेकर सपने, यूँ चले जा रहे हैं,कभी तो इस राह से, मुकाम गुजरेगी.
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Apr 23 2010 06:26 PM
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और क्या बताएं

और क्या बताएं, ज़माना ख़राब है .पीते हैं जैसे पानी, होती शराब है.देखी थी इश्के उल्फत, नफ़रत में जी रहे हैं.वो भी ख़राब थी, ये भी ख़राब है.
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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डेंगू का मच्छर

कटलेट की तरह, प्लेटलेट्स खा जाता है,पूछता हूँ -ई ससुरा डेंगू का मच्छर !कहाँ से आता है ?पहले मच्छर रात में काटता था,तो शुक्र था !इंसान, कभी मच्छरदानी, कभी गुडनाईट,तो कभी क्वाइल से काम चलाता था,फिर भी बिचारा मच्छर,मौका मिलते ही,कान में गीत सुनाता था।लेकीन
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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सीने में सुलगती चिंगारी

सीने में सुलगती चिंगारी, कल सोला बनकर महकेगी.सच्चाई की खुशबू इक दिन, सारे जग में महकेगी.चाहे जितना जोर लगालो, खुशियों से जलने वालों.सतरंगी आकाश धनुष को देख के धरती चहकेगी.नफ़रत के
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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दिल की बात

कितनी बातें करता हूँ उससे, पर बात अधूरी सी लगती है।बहुत करीं पता हूँ उसको, फिर भी दूरी सी लगती है।कैसे दिल की बात कहूँ, यारों कैसे तुमको बतलाऊँ,इक पल दूर होना उससे, मेरी मज़बूरी सी लगती है।
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Apr 09 2010 11:20 AM
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मैं तो ठहरा बावरा

मैं तो ठहरा बावरा, ना समझू व्यापार ।तुम ही मेरी जीत हो, तुम ही मेरी हार ॥
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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कवि संगम रिपोर्ट

राष्टीय कवि संगम की ओर से दिल्ली हरियाणा प्रांत सम्मेलन टेक्निया इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित किया गया..। कार्यक्रम में दिल्ली और हरियाणा के एक सौ पचास कवियों ने हिस्सा लिया । कार्यक्रम के उदघाटन सत्र का विषय था- वर्तमान चुनौतियां और कविधर्म। सत्र के
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Feb 08 2009 03:47 PM
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सुशिल कुमार के साथ

दिनांक 13.11.2008 को METRO NOW इंग्लिश न्यूज़ पेपर में प्रकाशित
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Nov 15 2008 12:22 PM
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सुशील कुमार के साथ

कास्य पदक विजेता सुशील कुमार के साथ मैं दिनांक १२ नवम्बर २००८ को दिन के बारह बजे PETA के प्रोग्राम में इंडिया गेट पर था। मैं एक भेड़ के वेष में था और सुशील कुमार भेड़ को सहारा दे कर खड़े थे। मीडिया के लोगों की काफी भीड़ लगी हुई थी। मझे एक मजाक सूझा और शुशील
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Nov 13 2008 08:18 PM
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सोने की चिड़िया

एक दिन भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलायेगा,अपनी खोई गरिमा को, फिर से वापस पा जायेगा।ना होगा कोई भूखा - नंगा, नाही कोई भिखारी,नर से मिलाके कन्धा, जिसदिन आगे बढ़ेगी नारी,कृषि प्रधान अपना भारत, जब कर्म प्रधान बन जायेगा,एक दिन भारत फिर से, सोने की चिड़िया
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Aug 11 2008 11:32 AM
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अमर 'आकाश'

अमर नाथ गिरी 'आकाश'
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Aug 10 2008 07:43 PM
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एक ख़त उनके नाम

ऐ ख़त उनसे, मेरा सलाम कहना,ख़त उनका मिला था, पैगाम कहना। बहुत रास आयी है, उनकी मुहब्बत,मेरी मुहब्बत, उनके नाम कहना । नाम से उनके, होती है हर शुबह,मेरी हर शाम, उनके नाम कहना । गर जिन्दगी रही, तो मिलेंगे कभी,बस यही उनको, मेरा कलाम कहना।जिन्दगी में उनको,
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Aug 09 2008 12:18 PM
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कुछ लम्हें जिंदगी के

कभी तो तुम्हारे साथ, इक शाम गुजरेगीवरना ये जिंदगी, किस काम गुजरेगीआँखों मैं लेकर सपने, यूँ चले जा रहे हैंकभी तो इस राह से, मुकाम गुजरेगीइक बार इन आँखों से, मुझको पिला दे साकीजिंदगी तो जिंदगी, मौत भी आराम गुजरेगी
 
AMAR NATH GIRI 'AKASH'
Aug 08 2008 10:17 AM