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15 Jun 2010
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अमित तेज दिगंत माही पसर्यो, महाराणा थारी करणी को ----- अमित शर्मा

 धन तिथि तीज सुक्ल जेठा पन्द्रसै सोल्हा पावनी धन-धन परतापी भौम मेवाड़ी, प्रताप जन्म दायनी  बाप्पा कीरत पताका थाम्ही,थाम्ही टेक सांगा की शौर्य धार्यो सूर्य सो अटल , निर्मलता धारी गंगा की निज धरम की धारणा राखी, मान राख्यो वीर  धरणी को अमित
 
अमित शर्मा
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आने वाले भयानक संकट की पूर्वाभासी घटनाएँ घटने लगी है.---- अमित शर्मा

कहा जाता है कि ''पानी ही जीवन है'', लेकिन विडंबना देखिये कि पानी के कारण जीवन की हानि होना भी शुरू हो गया है, किसी ने सही ही कहा हैं कि तीसरा महायुद्ध पानी को लेकर ही होगा. हाल कि बनती हुयी परिस्थिति में हम देख सकते हैं कि इस महायुद्ध की पूर्व तैयारिया
 
अमित शर्मा
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ओ पथिक संभलकर जइयो उस देश ------------ अमित शर्मा

ओ पथिक संभलकर जइयो उस देशमहा ठग बैठ्यो है धार ग्वाल को भेषटेढ़ी टेढ़ी चाल चले,अरु चितवन है टेढ़ी बाँकी टेढ़ी हाथ धारी टेढ़ी तान सुनावे बांसुरी बाँकीतन कारो धार्यो अम्बर पीत,अरु गावे मधुर गीतबातन बतरावे मधुर मधुर क्षण माहि बने मन मीतसारो भेद खोल्यो मैं
 
अमित शर्मा
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कैसे बताये कैसे लुटे हम--------- अमित शर्मा

आप सभी ने वह कहानी तो पढ़ी होगी ना जिसमें ठग राजा से ऐसा कपडा बुनने कि बात कहता है कि यह कपडा मुर्ख  को दिखाई नहीं देगा और उसे ठग ले जाता है........................ शातिर ठग ने राजा से आकर कहा कि वह ऎसा कपडा बुन सकता है, जो सिर्फ समझदार  को
 
अमित शर्मा
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आपको बच्चों का कौन सा रूप पसंद है. ---------------- अमित शर्मा

बच्चे ईश्वर का दिया खुबसूरत उपहार है.  संसार में ऐसा कौन निष्ठुर होगा जिसका मन बच्चों को देखकर ना खिल उठता होगा. बच्चे जब इस दुनिया में आते है तो सारी दुश्चिंताओं से दूर अपने माता-पिता के सामर्थ्य के आसरे निश्चिन्त रहते है.लेकिन कुछ माता पिता
 
अमित शर्मा
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"अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभं"

हमें कभी कभी अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. ऐसी परिस्थितियाँ जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते सामने कड़ी हो जाती है. क्या कारण है ??सबसे पहले तो समझने वाली बात यह है कि ईश्वरीय विधान में हमें ऐसा कुछ भी प्राप्त नहीं होता जिसके अधिकारी हम
 
अमित शर्मा
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"कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति" --------- अमित शर्मा

बच्चों ने माँ को गुलदस्ता देते हुए, मदर्स डे की शुभकामनाये दी.माँ ने मुस्कुराते हुए गुलदस्ता ले तो लिया, पर चेहरा कुछ और ही बयान कर रहा था. माँ अपने कामों में व्यस्त हो गयी; बच्चे समझ नहीं पाए क्या हुआ!!!!!!!!!!!!!!तभी  अचानक  बच्चो  के
 
Amit Sharma
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चलिए कुछ ऐसी तरन्नुम गुनगुनायी जाये ----- अमित शर्मा

चलिए  कुछ  ऐसी  तरन्नुम गुनगुनायी जायेदीवारे  भरम  की सारी  जड़ों से गिराई जायेउकताहट  बहुत होती है  ज़माने  की गर्मी सेठंडाई  मुहब्बत की  ज़माने को पिलाई  जायेजगमगाते मस्जिद -ओ- मंदिर क्या रोशन
 
Amit Sharma
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आज फिर से रात भर आपकी याद आई ---- अमित शर्मा

आज  फिर से रात भर आपकी  याद आईआज फिर से  रात भर हुई  नींद से रुसवाई  तस्वीर जो देखी आपकी चली फिर से पुरवाई गुजरी हर एक बात  दौड़ी आँखों में भर आई  जिन्दगी की धूप से जब कभी परेशां हुआ थाआप का ही  साया
 
Amit Sharma
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पता नहीं क्या क्या कह जाते है लोग

पता नहीं क्या क्या  कह जाते है लोगपता नहीं किस रौ में बह जाते है लोग कोई आंखन देखी ना कोई कानन सुनीज्यादा बहुत देखा देखी ही कहते है लोग मनचीती रबरबी,मनचाहा कहते है लोग एक कहे तोड़ो बुतों को,कोई मस्जिद को  कहता कोई असल हमारा  इल्म
 
Amit Sharma
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ओ माँ क्या तुम झूंठ बोलती थी

ओ माँ क्या तुम झूंठ बोलती थी तुमने  कहा था दुनिया बड़ी प्यारी है कहा था यहाँ खिली प्रेम की क्यारी है पर मुझे तो हर बात दिखती न्यारी है हर और फैली नफरत और गद्दारी है ओ माँ क्या तुम झूठ बोलती थी तुमने कहा था प्रेम की नदी
 
Amit Sharma
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ईश्वर प्रदत्त जीवन पद्दति सिर्फ और सिर्फ एक ही है प्राणिमात्र का कल्याण करते हुए उस परमात्मा का ध्यान करना

किसी चीज को समझने के लिए काफी अन्दर जाना पड़ता है.  और ना समझना हो तो अपने खोखले दिमाग से कुछ भी कहा जा सकता है किसी भी धर्मग्रन्थ की,उपासना पद्दति की बुराई  की जा सकती है. क्योंकि बुद्धि तो हमारी है ना.  कुछ लोग वेद और उनके विस्तार रूप
 
Amit Sharma
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मासूम परिंदों की प्यासी पुकार सुनिए, एक बर्तन पानी का भरकर रखिये ---- अमित शर्मा

इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही है, और  इस गर्मी में अगर सबसे ज्यादा शामत किसी की आ रही है तो वे है बेजुबान पक्षी. पेड़-पौधे, नदी-पर्वत की तरह  पशु-पक्षी भी पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं।बेजुबान पक्षियों की रक्षा हमारा कत्र्तव्य है, धर्म है।बदलते
 
Amit Sharma
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आज का भौतिक विकास क्या धूप-छाँव की तरह नहीं है ? ---- अमित शर्मा

क्या वास्तव में हम विकसित हो रहें है, या हकीकत में विनाश के गर्त में डूबते जा रहे है ?इस विषय पे खूब माथा-पच्ची की है, किसी एक बात पे मन ठहर ने को राजी नहीं हो पाता. लेकिन जब एक कहानी पढ़ी तो दिमाग की बत्ती जल उठी और एक झटके से दिमाग ने निर्णय सुना दिया
 
Amit Sharma
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नई पीढ़ी का पीड़ा-पत्र बुजुर्गों के नाम

आखिर क्या कारण है कि हमारे समाज के कुछ बुजुर्ग नई पीढ़ी के किसी भी काम को सहजता से नहीं स्वीकार कर पाते है. हमारे कुछ बुजुर्ग  (सभी नहीं ) हमेशा से नौजवानों को कोसते  नज़र आते है कि जवान अपनी संस्कृति के बारे में कुछ भी नहीं जानते ,अपने
 
Amit Sharma
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अमित शर्मा, कुंवरजी, शाह नवाज़ और इन्ही जैसे नई पीढ़ी के और दूसरे बच्चो की पीड़ा बुजुर्गों के नाम

आखिर क्या कारण है कि हमारे समाज के कुछ बुजुर्ग नई पीढ़ी के किसी भी काम को सहजता से नहीं स्वीकार कर पाते है. हमारे कुछ बुजुर्ग  (सभी नहीं ) हमेशा से नौजवानों को कोसते  नज़र आते है कि जवान अपनी संस्कृति के बारे में कुछ भी नहीं जानते ,अपने
 
Amit Sharma
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इसे निहारिये और प्रकृति कि मन-भावनता को मन में बसाइए - अमित शर्मा

इसे देखिये और अंदाजा लगाइए क्या है ये ??????????????????अजी नहीं साहब ये कोई पानी का झरना नहीं है, यह तो रेत का झरना है!!!!!!!!!!!!!क्या चौंक  गए!!!!!!!! बिलकुल भरोसा नहीं हुआ. पर यह सच है ! रेतीले धोरों के लिए दुनिया भर में मशहूर राजस्थान के
 
Amit Sharma
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हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यतों को भी अपने मन कि सुविधा अनुसार छांटने लगे है

अभी ब्लॉग-जगत में ताज़ा-ताज़ा धर्म युद्ध चल रहा था. कुछ  लोग बड़ी तैयारी से हिन्दू धर्म-ग्रंथों कि अपनी मनमानी से अनर्गल अर्थ-अनर्थ किये जा रहे थे . और ब्लॉग जगत में उनका जायज विरोध भी हो रहा था, काफी संभव है कि ऐसा उन्होंने किसी सुनियोजित भावनापूर्वक
 
Amit Sharma
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श्रीमान जमाल साहब !

श्रीमान जमाल साहब,जैसा की शाह नवाज़ भाई ने कहा था ----यह सब लिखने से बेहतर है, दोनों धर्मों में क्या समानताएं हैं, इस पर रौशनी डालते. शांति और भाईचारे की आज पुरे विश्व को ज़रुरत है."मेरी भी आपसे यही कामना है की हम लोग इस्लाम को जानना चाहते है, हमे अपनी
 
Amit Sharma
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वेदाग्या -- "मा हिंस्यात सर्व भूतानि " (किसी भी प्राणी की हिंसा ना करे)

कैसी अजीब दास्ताँ है यह कहा शुरू कहा खत्म. सिर्फ एक सज्जन की कार्यशैली का अध्यन कीजिये, आपको पूरी की पूरी परंपरा की  मान्यता का दर्शन हो जायेगा . इन सज्जन ने मानव मात्र के कल्याण का बीड़ा उठाते हुए ब्लॉग चालू किया और दुनिया को समझाने के लिए लेखन
 
Amit Sharma
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बताइए जमाल साहब दो पैमानों से कौन नाप रहा है, कौन बैर फैला रहा है ?

जमाल साहब अपना यह कमाल कब तक दिखाते रहेंगे आप ? एक सामान्य सी बात एक शब्द है - "गवाक्ष"  इसका मतलब  किसी से भी पूछो, सब कोई कहेंगे खिड़की, विंडो आदि. क्यों जी साहब गाय की आँख क्यों नहीं कहते. गवाक्ष का मतलब तो गाय की आँख  होता है.अब पहले
 
Amit Sharma
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Amit Sharma

अथातो ब्रह्मजिज्ञासा // १/१/१// ब्रह्मसूत्र ब्रह्म कौन है ? उसका स्वरुप क्या है ? इस विषय पे बड़े बड़े विद्वानों के पसीने छूट जाते है. तो साधारण भोगी जीवो की क्या बिसात जो उस परब्रह्म के स्वरुप का वर्णन कर सके. वेद जिसे नेति नेति कहकर पुकारते है उस
 
Amit Sharma
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एक बंधु को फिर वेद ज्ञान के कारण अपच हो गयी है

एक बंधु को अभी फिर वेद ज्ञान के कारण अपच हो गयी है,और वामन करते फिर रहे है। अरे भाई इस ज्ञान  का उपयोग किसी ज्ञानी व्यक्ति द्वारा ही कराना चाहिए, अन्यथा अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है।मन्त्रों का पाठ शुद्ध होना अनिवार्य है। और फिर उनका शुद्ध अर्थ भी
 
Amit Sharma
Apr 14 2010 09:34 PM
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ओहो जमाल साहब फिर वही अधकचरी बात

ओहो जमाल साहब फिर वही अधकचरी बात-सबसे पहले तो आपको और आप जैसे दुसरे बंधुओं को यह समझना आवश्यक है की "वेद" सिर्फ किसी किताब या मन्त्रों का ही नाम नहीं है. वेद का मतलब है ज्ञान और ज्ञान कभी आधा-अधुरा नहीं होता उसमें जीवन के संपूर्ण व्यवहारों का निरूपण होता
 
Amit Sharma
Apr 14 2010 11:08 AM
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मेरे विचारों पे श्रीमोहम्मदसाहब ने मोहर लगायी

आज रात को मुझे गजब का सपना आया. वैसे तो सपने मुझे कभी कभी ही आते है, और जो आते है उन्हें मैं भूल जाता हूँ . पर यह सपना अभी तक भी स्मृति पटल पे बिलकुल ताजा बना हुआ है. और हो भी क्यों नहीं सपना ही ऐसा था . रात को जब गहरी नींद में था तो क्या देखता हूँ की एक
 
Amit Sharma
Apr 13 2010 03:16 PM
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ऐसा कौन है,जो आपसे अलग है?

अयं निजः परोवेति, गणना लघुचेतसाम्।उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ (यह् अपना है और यह पराया है ऐसी गणना छोटे दिल वाले लोग करते हैं । उदार हृदय वाले लोगों का तो पृथ्वी ही परिवार है।)"वसुधैव कुटुम्बकम" भारतीय चिंतन को स्पष्ट करता है.संपूर्ण विश्व
 
Amit Sharma
Apr 13 2010 10:42 AM
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Amit Sharma

आजकल  हर तरफ धर्म ही धर्म की चर्चा चल रही है, पूरा ब्लॉग जगत धर्ममय हो रहा है. मै भी खुद को इसी रंग में रंगना चाह रहा हूँ . पर डरता हूँ की कहीं अधर्म का रंग ना चढ़ जाए. इसलिए 2 -3 दिन  का ब्रेक भी लिया.काफी समझने की कोशिश की, कई किताबे
 
Amit Sharma
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रिलिजन क्या है ?

मैं एक बात साफ़ कर देना चाहता  हूँ कि ये लेख मै किसी के पक्ष विपक्ष में नहीं लिख रहा हूँ, मुझे ब्लॉग माध्यम लगा अपने मन कि बात कहने का तो मन में जो विचार आते रहतें है उनको संजोने का प्रयास  मात्र है ,अगर किन्ही  बंधुओं को मेरे लेख पसंद ना
 
Amit Sharma
Apr 07 2010 12:05 PM
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क्या हिन्दू धर्म एक पंथ(रिलिजन) है?

जब अंग्रेजी राज की जड़ें भारत में जमने लगी.तब उन्होंने हिन्दु धर्मांतरण की सोची.पर उन्होंने इस बात को समझा  की हिन्दुओ के सीधे धर्मांतरण का विरोध होगा. इसलिए दुसरे प्रभावकारी उपाय सोचे गए. मैकाले-मैक्समुलर की मुखियागिरी में हिन्दुधर्म में तथाकथित
 
Amit Sharma
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परमात्मा की सहमती सिर्फ मानव धर्म में

मार्च के चक्कर में ब्लॉग का चक्कर लगाना नहीं हो पाया. फुर्सत मिलते ही नेट पे आया तो  आप सभी के स्नेह की फुहारें दिमाग को शांति दे गयी.डी.पी.राणाजी,विजयप्रकाश जी,सौरभ आत्रेय जी,नवीन जी त्यागी,जैसे आदरणीय महापुरषों का अमूल्य निर्देशन पाकर निहाल हो
 
Amit Sharma
Apr 03 2010 04:53 PM
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बहता पानी सदा निर्मल

ज्ञान तो अपने आप में हमेशा पूर्ण है, कहीं से नया नहीं पैदा होता और ना ही कभी उसका क्षरण होता है. सिर्फ संस्कृतियों को,मानव जीवन को संचालित करने वाली नीतिया समय समय पे बदलती रही है,बहता पानी ही सदा निर्मल हुआ करता है, जहाँ कहीं भी पानी ठहर जाता है तो उसमे
 
Amit Sharma
Apr 02 2010 06:38 PM
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अपनी आस्था का मंडन ही किसी प्रकार कल्याणकारी कैसे हो सकता है

यस्यप्रणम्य चरणौवरदस्यभक्त्या स्तुत्वाचवाग्भिरमलाभिरतंद्रिताभि:।दीप्तैस्तमासिनुदतेस्वकरैर्विवस्वांतंशंकरं शरणदं शरणं व्रजामि॥ जिन वरदायक भगवान के चरणों में भक्तिपूर्वकप्रणाम करने तथा आलस्य रहित निर्मल वाणी द्वारा जिनकी स्तुति करके सूर्य देव अपनी उद्दीप्त
 
Amit Sharma
Mar 25 2010 06:21 PM
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यह सब मूर्ति पूजा से किस प्रकार भिन्न है

मैं किसी पे आक्षेप नहीं लगा रहा हूँ . सिर्फ इतना जानना चाह रहा हूँ ,की यह सब मूर्ति पूजा से किस प्रकार भिन्न है
 
Amit Sharma
Mar 22 2010 07:20 PM
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इसलिए मुझे हिन्दू धर्मं ईश्वर प्राप्ति के लिए सरल लगता है

क्या आप हिन्दू है ?हाँ क्या सबूत है इसका ? मैं अपने को हिन्दू मानता हूँ .इसके अलावा भी कोई सबूत है आपके पास ? है मै गाय,गायत्री ,गंगा ,वेद  को मानता हूँ .दूसरे धर्मों के प्रति क्या भाव है ?मैं सबका आदर करता हूँ .क्या आप अन्य
 
Amit Sharma
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वेदमाता गायत्री

यह सारी जानकारी निचे लिखे एड्रेस से जमाल साहब की पोस्ट गायत्री को वेदमाता क्यों कहते है ,का जवाब देने के लिए जुटाई गई थी .जमाल साहब का भला हुआ या नहीं उन्हें पता पर हम सभी का भला होता रहे इसलिए यहाँ भी पोस्ट कर रहा
 
Amit Sharma
Mar 21 2010 02:38 PM
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जांके नख अरु जटा विशाला,सोई तापस प्रसिद्द कलिकाला

हिन्दू मन अभी भी उस मानसिकता से नहीं निकल पाया है जब मध्यकाल में उसके देश,धर्म,संस्कृति, सभी को तहस-नहस किया जा रहा था,तत्कालीन समाज इसका प्रतिकार नहीं कर पाया,और अपने को असहाय समझ निराशा के गर्त में डूब रहा था. तब संतो ने भक्ति में नाच -गान
 
Amit Sharma
Mar 20 2010 01:24 PM
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गाली देना सत्कर्म नहीं हो सकता

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुवरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियोयो नः प्रचोदयात ॥उस प्राणस्वरूप,दुःखनाशक, सुखस्वरूप,श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक् देवस्वरूपपरमात्मा को हम अन्तःकरण में धारणकरें । वह परमात्मा हमारी बुद्धि कोसन्मार्ग में प्रेरित करे ।'ओउम् मा प्र गाम थो
 
Amit Sharma
Mar 20 2010 12:12 PM
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बच्चो की तरह से

बच्चे किसे अच्छे नहीं लगते ,उनका बोलना ,खेलना ,लड़ना क्या बताये बस देखते ही रहो ,लड़ाई से याद आया हम दोनों भाई भी बचपन में खेल ही खेल में गुत्थम गुत्था होजाया करते थे . अब भाई साहब लड़ाई तो पहले किसी ने भी शुरू करी हो पर जब पिटने का नंबर आता तो जोर से आवाज
 
Amit Sharma
Mar 20 2010 11:53 AM