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अक़्स-ए-ख़ुशबू हूँ

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31 May 2010
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किन्नरों ने की अलग गणना की मांग

नई दिल्ली, एजेंसी : देश में आजकल जाति आधारित जनगणना का मुद्दा सरगर्म है। इस सबके बीच अपने उत्थान के लिए एक ऐसे वर्ग की अलग से गिनती किए जाने की आवाज भी उठ रही है, जो सदियों से वंचित, उपेक्षित और तिरस्कृत है। पिछले साल नवंबर में चुनाव आयोग से अन्य के रूप
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जनगणना २०११ में किन्नरों को अलग से स्थान दिये जाने की मुहिम में मिली बड़ी सफलता।

दिनांक ०३.०५.२०१० और ०४.०५.२०१० को संस्था सिस्फा-इस्फी को प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार तथा गृहमंत्रालय भारत सरकार से क्रमशः दो पत्र प्राप्त हुए हैं। सर्वविदित है कि ॰संस्था सय्यद शाह फरज़न्द अली एजुकेशनल एण्ड सोशल फाउंडेशन ऑफ इण्डिया॰ के सचिव डॉ० एस०
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इस गणतन्त्र के जन में इनका शुमार क्यों नहीं?

क्योंकि हम ऐसा चाहते हैं।बहुत ईमानदारी के साथ हम महसूस करते हैं, इसकी पुख्ता वजूहात हैं - वो देखने में हमारे जैसे इंसान ही लगते हैं।हमारे जैसा महसूस करते हैंहमारी तरह रोना-हँसना भी जानते हैंहमारी ख़ुशी में शरीक होते हैं अपना पेट पालने के लियेनाचते हैं और
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इस गणतन्त्र के जन में इनका शुमार क्यों नहीं?

क्योंकि हम ऐसा चाहते हैं।बहुत ईमानदारी के साथ हम महसूस करते हैं, इसकी पुख्ता वजूहात हैं - वो देखने में हमारे जैसे इंसान ही लगते हैं।हमारे जैसा महसूस करते हैंहमारी तरह रोना-हँसना भी जानते हैंहमारी ख़ुशी में शरीक होते हैं अपना पेट पालने के लियेनाचते हैं और
Apr 22 2010 06:12 PM
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फज्र की नमाज़ पर महबूब चचा की चाय

पुराने शहर की तंग गलियों के बीच बसा मोहल्ला रोहिली टोला। रूहेला नवाबों के नाम पर रखा गया नाम। जिसकी शान बढ़ाता हुआ बीचो-बीच बना पुराना हवेली नुमा मकान 'बब्बन साहब का फाटक' जो इस मोहल्ले की शान हुआ करता था। नवाबों की नवाबियत की तरह जिसकी भी दीवारें अब
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हिजड़ों का डॉक्टर, जिसने लड़ी मानवता की लड़ाई

उत्तर-प्रदेश के बरेली के एक डाक्टर ने मानवता की एक नयी मिसाल कायम की है। बहुत कम ही लोगों को पता होगा कि उत्तर प्रदेश में बरेली शहर के एक युवक द्वारा बेशुमार मुश्किलों का सामना करके करीब साल भर पहले शुरु की गई मुहिम के चलते ही चुनाव आयोग ने पिछले महीने
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विचित्र या अदभुत

बेमौसम की बरसात, बारह महीने मटर का मिलना। जब चाहो सो जाओ, सुबह चाय, ज़िन्दगी कभी सुस्त ज़रूरत से ज्यादा और कभी बहुत तेज़। बारिश की बूँद का छत के आँगन पर पड़े प्लास्टिक के तिरपाल पर टक-टककर गिरना और तेज़ बारिश तो और तेज़ टप-टप की आवाज़। हमें आवाज़ टप-टप
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न्याज़ वर्सस प्रशाद

इसी वृहस्पतिवार ही की बात है। सुबह यही कोई ग्यारह बजे होंगे। बहुत ध्यान से और संभल-संभलकर मरीज़ देख रहा था। कि इतने में मेरे एक मरीज़ जो काफी लम्बे अरसे से मुझसे इलाज कराते-कराते मेरे अच्छे दोस्त भी हो गये हैं। उनका ओपीडी में प्रवेश हुआ। हाल-चाल पूछने के
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A letter to the president of india-----

SUB:- Separate Gender Identification and specific UID – For Eunuchs.madam,We are running an organization in the name ‘Syed Shah Farzand Ali Educational & Social Foundation of India’, comprising of large community of intellectuals, doctors, national
Apr 05 2010 02:21 PM