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कोई दीवाना कहता है - डा. कुमार विश्वास

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07 Jun 2010
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बेशक जमाना पास था - डा कुमार विश्वास

जीवन मे जब तुम थे नही पल भर नही उल्लास था खुद से बहुत मै दूर था,बेशक जमाना पास था.होठो पे मरूथल और दिल मे एक मीठी झील थी आन्खो मे आन्सू से सजी, इक दर्द की कन्दील थी,लेकिन मिलोगी तुम मुझे मुझको अटल बिश्व्वास थाखुद से बहुत मे दूर था,
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उस पगली लड़की के बिन _कुमार विश्वास

अमावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है,जब दर्द की प्याली रातों में गम आंसू के संग होते हैं,जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं,जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं,सब सोते हैं, हम रोते हैं,जब बार-बार दोहराने से सारी यादें चुक जाती हैं,जब
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हंगामा 1 - डा. कुमार विश्वास ( Hangaamaa 1 - Dr. Kumar Vishwas )

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामाहमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामाअभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत कामैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामाकभी कोई जो खुलकर हंस लिया दो पल तो हंगामा कोई ख़्वाबों में आकार बस लिया दो पल तो हंगामा
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ओ मेरे पहले प्यार - डा. कुमार विश्वास ( o mere pahale pyaar )

ओ प्रीत भरे संगीत भरे!ओ मेरे पहले प्यार !मुझे तू याद न आया करओ शक्ति भरे अनुरक्ति भरे!नस नस के पहले ज्वार!मुझे तू याद न आया कर।पावस की प्रथम फुहारों सेजिसने मुझको कुछ बोल दियेमेरे आँसु मुस्कानो कीकीमत पर जिसने तोल दियेजिसने अहसास दिया मुझकोमै अम्बर
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मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगा / कुमार विश्वास (mai to jhaunkaa hoo hawaa kaa - Dr. Kumar Vishvas)

मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगाजागती रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊँगाहो के कदमों पे निछावर फूल ने बुत से कहाख़ाक में मिल के भी मैं खुश्बू बचा ले जाऊँगाकौन सी शै मुझको पहुँचाएगी तेरे शहर तकये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊँगाकोशिशें मुझको मिटाने की
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ये वही पुरानी राहें हैं - डा. कुमार विश्वास (ye vahee puraanee raahe hain)

चेहरे पर चँचल लट उलझी, आँखों मे सपन सुहाने हैंये वही पुरानी राहें हैं, ये दिन भी वही पुराने हैंकुछ तुम भूली कुछ मै भूला मंज़िल फिर से आसान हुईहम मिले अचानक जैसे फिर पहली पहली पहचान हुईआँखों ने पुनः पढी आँखें, न शिकवे हैं न ताने हैंचेहरे पर चँचल लट उलझी,
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धीरे-धीरे चल री पवन - डा. कुमार विश्वास (Dheere-Dheere Chal Ree Pawan)

धीरे-धीरे चल री पवन मन आज है अकेला रेपलकों की नगरी में सुधियों का मेला रे धीरे चलो री आज नाव ना किनारा है नयनो के बरखा में याद का सहारा है धीरे-धीरे निकल मगन-मन, छोड़ सब झमेला रे पलकों की नगरी में सुधियों का मेला रे होनी को रोके कौन, वक्त से बंधे हैं
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सफ़ाई मत देना - डा. कुमार विश्वास (safaai mat denaa )

एक शर्त पर मुझे निमन्त्रण है सुभगे स्वीकारसफ़ाई मत देनाअगर करो झूठा ही चाहे, करना दो पल प्यारसफ़ाई मत देनाअगर दिलाऊं याद, पुरानी मीठी कोई बातदोष मेरा होगाअगर बताऊँ , कैसे झेला प्राणो पर आघातदोष मेरा होगामै खुद पर काबू पाउँगा, तुम करना अधिकारसफ़ाई मत देनाहै
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बादडियो गगरिया भर दे

बादडियो गगरिया भर देबादडियो गगरिया भर देप्यासे तन-मन-जीवन कोइस बार तू तर कर देबादडियो गगरिया भर देअंबर से अमृत बरसेतू बैठ महल मे तरसेप्यासा ही मर जाएगाबाहर तो आजा घर सेइस बार समन्दर अपनाबूँदों के हवाले कर देबादडियो गगरिया भर देसबकी अरदास पता हैरब को सब
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बेशक ज़माना पास था - डा. कुमार विश्वास ( veshak jamaanaa paas thaa )

जीवन मे जब तुम थे नहीं पल भर नहीं उल्लास थाखुद से बहुत मैं दूर था,बेशक ज़माना पास था. होठों पर मरुथल और दिल में एक मीठी झील थी,आँखों में आंसू से सजी, इक दर्द की कंदील थी. लेकिन मिलोगे तुम मुझेमुझको अटल विश्वास थाखुद से बहुत मैं दूर था,
Apr 03 2010 09:14 PM
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तुम गये क्या - डा. कुमार विश्वास ( tum gaye kyaa )

तुम गए क्या, शहर सूना कर गयेदर्द का आकार दूना कर गयेजानता हूँ फिर सुनाओगे मुझे मौलिक कथाएँ शहर भर की सूचनाएँ, उम्र भर की व्यस्तताएँपर जिन्हें अपना बनाकर, भूल जाते हो सदा तुमवे तुम्हारे बिन, तुम्हारी वेदना किसको सुनाएँफिर मेरा जीवन, उदासी का नमूना कर
Apr 03 2010 07:57 PM
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नुमाइश - डा. कुमार विश्वास ( Numaaish )

कल नुमाइश में फिर गीत मेरे बिकेऔर मै कीमते लेकर घर आ गयाकल सलीबों पे फिर प्रीत मेरी चढीऔर आँखों पे स्वर्णिम धुंआ छा गयाकल तुम्हारी सु-सुधि में भरी गन्ध फिरकल तुम्हारे लिये कुछ रचे छन्द फिरमेरी रोती सिसकती सी आवाज़ मेंलोग पाते रहे मौन-आनन्द फिरकल तुम्हारे
Apr 03 2010 07:02 PM
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प्यार नहीं दे पाऊँगा - डा कुमार विश्वास ( pyaar nahee de paaungaa )

ओ कल्पव्रक्ष की सोनजुही!ओ अमलताश की अमलकली!धरती के आतप से जलते..मन पर छाई निर्मल बदली..मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा|तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं |तुम कल्पव्रक्ष का फूल औरमैं धरती का अदना गायकतुम जीवन के उपभोग योग्यमैं नहीं स्वयं अपने
Apr 02 2010 08:17 PM
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मै तुम्हे ढूंढने - कुमार विश्वास ( main tumhe dhoodhne )

मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक गयारोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहातुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गईमंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहाज़िन्दगी के सभी रास्ते एक थेसबकी मंज़िल तुम्हारे चयन तक रहीअप्रकाशित रहे पीर के उपनिषद्मन की गोपन कथाएँ नयन तक रहींप्राण के
Apr 02 2010 12:26 AM
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मन तुम्हारा हो गया - डा. कुमार विश्वास ( man tumhara ho gaya to ho gaya )

 - मन तुम्हारा हो गया तो हो गया.एक तुम थे जो सदा से अर्चना के गीत थे,एक हम थे जो सदा से धार के विपरीत थे.ग्राम्य-स्वर कैसे कठिन आलाप, नियमित साध पाटा,द्वार पर संकल्प के लखकर पराजय कंपकंपाता.क्षीणसा स्वरखो गया तो, खो गया. मन तुम्हारा हो गया तो
Mar 31 2010 08:56 AM
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बाँसुरी चली आओ - डा. कुमार विश्वास ( baansuree chalee aao )

तुम अगर नही आई गीत गा न पाऊँगासाँस साथ छोडेगी, सुर सजा न पाऊँगातान भावना की है शब्द-शब्द दर्पण हैबाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण हैतुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी हैतीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी हैरात की उदासी को याद संग खेला हैकुछ गलत ना कर बैठें मन
Mar 31 2010 08:55 AM