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महामूर्खराज की कलम से

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26 May 2010
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मुझे गर्व है की मैं भारतीय हूँ पर वजह शून्य है।

जी हाँ मैं सत्य कह रहा हूँ आखिर ऐसी क्या वजह हो सकती है की हम अपने भारतीय होने पर गर्वित महसूस करें। अब आप कई उदाहरण देंगे और मुझे मूर्ख साबित करेंगे वैसे मैं तो हूँ ही महामूर्खराज। पर जो कह रहा हूँ सत्य ही कह रहा हूँ। थोड़ी दलील मेरी भी सुन लीजिए। वैसे
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अपने घर की बात छवियों द्वारा

मेरा वर्तमान और पैतृक निवास जिसने मेरा बचपन सींचा    मेरा छोटा सा पुस्तक संग्रह और मेरा लैपटाप   घर के पिछवाड़े मे बसी सब्जियों की बगिया   मेरी कर्मभूमि मेरे खेत-खलियान   मेरी प्यारी गायें मेरे सबसे प्यारे दोस्त फूलों की बगिया
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जलजला जी की आपबीती महामूर्खराज की जुबानी

हाँ मैं छद्मनामधारी जलजला हूँ जिसके नाम का मचा चिट्ठाजगत मे कोहराम है नरों मे श्रेष्ठ कौन की चर्चा से अभिभूत होरचा मैंने नारियों मे श्रेष्ठ कौन का एक नया जूमला परभूल गया था नारी सशक्तिकरण के जुग मेरच गया हूँ नारी विभक्तिकरणका नया एक समीकरण डर रहा था मैं
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यह महामूर्खराज आज व्यथित हो गया, रुक जाओ मित्र विवेकानन्द पाण्डेय

मित्र विवेकानन्द पाण्डेय जी, जीवन एक संघर्ष है ये सभी जानते हैं इसमे नया क्या है। ब्लोगजगत भी एक आभाषी दुनिया है सो ये भी संघर्ष रूपी प्राकृतिक गुणो से ओतप्रोत है। पर हम मानव इतने संवेदनशील होते है के अपनी संवेदनाओं मे बह कर आपने गंभीर लक्ष्यों को
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भारतीय जुगाड़ टेक्नोलॉजी को सलाम

देखिए कैसे कैसे जुगाड़ फैविकोल के जोड़ वाली जुगाड़ू गड्डि   नेता जी की रैली मे चला जुगाड़ लो जी छोटे नाबाब की जुगाड़ नैनो माल ढोने का जुगाड़ू सटाइल बैलगाड़ी से जुगाड़  जुगाड़ हुड़ीबाबा    हुड़ीबाबा हुड़ीबाबा हुड़ीबाबा............. कलात्मक जुगाड़
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ए भारत के लोकतंत्र

हाँ ए भारत के लोकतंत्र चल पड़ा है तू किस राह पर जनता के सेवक ये सफेदपोश अब जनता से सलाम ठुकवाते है, काली कमाई का जश्न मनता उनके यहाँ रोज जिनमे बहती सोमरस की नदियाँ हैं और शबाब से मानती रंगरलियाँ हैं, कबाबों के स्वाद मे उलझती उनकी जिह्वा जनहित जनविकास का
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किताबों भरी संदूकची महामूर्खराज के हाथ लगा साहित्यिक खजाना

गर्मी अपने चरम पर जैसे पहुँचने लगी है। दोपहर के भोजन के भोजन के पश्चात इस गर्मी और थकावट से निजात पाने के लिए अभी लेटा ही था की मेरे नौकर लक्षमी ने आ कर कहा मालिक आज ऊपर वाले स्टोर की सफाई कर रहा था तो एक पुरानी  संदूची मिली है जो  कागजो और
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महामूर्खराज खुश हुआ... यययायाया........ हू

तुम लौट आयी, दूर हुआ हलाहल अंधेरा, रोशनी की  चकाचौंध देख, भाई ये दिल मेरा,  गार्डेन गार्डेन हुआ, विरह पीड़ा तो, थी दिल मे, पर तेरी भी, अपनी मजबूरी थी, प्रकृति के तूफ़ान ने, रोके थे तेरे कदम, पर आठवें दिन तेरा, आ जाना भी, किसी अष्टम अचरज, से ना है
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मुख्यमंत्री जी आप भी ब्लॉगर बन गए वाह भाई वाह!

इस ब्लोगजगत का इंद्रजाल वास्तव मे जबरजस्त है हर किसी को अपने मोहपाश मे बांध लेता है शुरुआत मे राजनीतिज्ञ लोग इससे डरते थे पर अब देखिए वे ही इसके साथ जुड़ने लगे हैं, फेहरिस्त मे नए शामिल होने वाले और मेरे प्रिय व आदर्श  और कोई नहीं वरन बिहार के
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सामर्थ्य, सीमा और सवाल

थी तो वो गर्मी की सुबह पर गर्माहट के नितांत अभाव के साथ। अचरज तो था इतना शीतल नमीयुक्त हवाओं का यह सुखद वातावरण आखिर पुरबइया हवा ने अधीरता और छटपटाहट के निर्वात को भर जो दिया था। 5-6 दिन पहले यह वातावरण गर्माहट से ओतप्रोत तो था और पछिया की शुष्कता ने इसे
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पिछले 4 दिन खुशियाँ कम गम ज्यादा

  पिछले 4 दिनों मे जो हुआ शायद मेरे जीवन के सबसे कठिनतम पलों मे था। अपनी आँखों से टुकुर टुकुर सपनों के उन हवाई महलों को ध्वस्त होते देखता रहा। कई बार पहले भी ऐसा हो चुका है पर फर्क सिर्फ इतना है इस बार जाग रहा था और पहले नींद  मे रहता था। 14
Apr 17 2010 07:39 PM
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ब्लॉग कई पर रचना एक

वाह कैसा अदभुत है ब्लोगजगत तेरा यह इंद्रजाल, लड्डू बोलता इंजीनियर के दिल से जहाँ और डॉ॰ जमाल  पढ़ते वेदकुरान, करते  हैं गिरि जी काम की बकवास,  अजी नाइस नाइस की टिप्पणियों के साथ सुमन जी निकालते अपनी भड़ास, पर सतीश सक्सेना जी कहते लाइटली ले
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है दम तो इस महामूर्खराज पर कटु टिप्पणी कर के दिखा...........

वैसे आज सोच रहा था की मैं आज अपने पाठकों का दिल से आदर करूँ । जो अग्रज हैं उन्हें इस महामूर्खराज का सादर चरणस्पर्श। जो बराबर वाले है उन्हें नमस्कार और छोटों को स्नेह। अब आप बोलेंगे भई महामूर्खराज भला ये क्या बात हुई शीर्षक शेर के समान गर्जना और पोस्ट
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महामूर्खराज और 3 ईडीयट्स

अभी कुछ ही दिन पहले इस फिल्म को देखने का अवसर मिला मेरे पाठको ये मत कहिएगा की क्या पुरानी बासी खबर ले आए क्योकि भैया मेरे गाँव मे रहता हूँ जहाँ सिनेमाघर का ही अभाव है नई और ताजा फिल्मे कैसे देखूँ। धन्य है वो पाइरेसी करने वाले जिनकी वजह से हम ग्रामीण थोड़ा
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चिठ्ठा प्रवचन महामूर्खराज की जुबानी

आओ आओ भाई लोगो बाबा महामूर्खराज के चिठ्ठा सत्संग सभा मे आप लोगों का हार्दिक स्वागत है । आज बाबा मूर्खराज ओह क्षमा कीजिएगा बाबा महामूर्खराज आप लोगो को मूर्खतापूर्ण पर रहस्यों से भीगे हुए प्रवचन देंगे आप लोगो से नम्र निवेदन है की कृपया शांति बनाए रखेगें
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एक क्षमा याचना व एक लघु परिचय

  तो शुरुआत क्षमा याचना के साथ करता हूँ । आप कहेंगे की भई यह तो आपका पहला पोस्ट है तो आप माफी क्यों माँग रहे है । कारण यह है की उद्देश्य तो इस छिट्ठे की शुरुआत मूर्ख दिवस के शुभ अवसर पर करना चाहता था पर कुछ  वयस्ताओं की वजह से ऐसा नहीं कर पाया