2
पत्र,पात्र और मित्र...
प्रिय साँझ, बरसों से तुम्हें इसी नाम से पुकारा है..संध्या नाम मेरी दादी का था|इसलिए कभी उस नाम से पुकार ही नहीं पाया|जानती हों क्यों.. क्योंकि ये नाम मैंने कभी प्रेम से सुना ही नहीं था|दादाजी की कडकती रोबदार आवाज़ में जब हमारे घर में ये नाम गूंजता,तो वो
- 11 20 टिप्पणियां [4]
Jun 15 2010 06:05 PM


Shuffle








