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प्रवीणा जोशी

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09 May 2010
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मातृत्‍व दिवस की सभी को शुभकामनाएं

कल न्‍यूजपेपर से पता चला कि कल मदर्स डे है मैंने सोचा सभी लिखेंगे मैं भी लिखूं किसी दिवस विशेष पर मेरी भावनाएं जाने क्‍यों गायब हो जाती हैं अभी लिखने को मेरे पास कुछ भी नहीं पर सोचा आज तो सभी जमकर लिखेंगे सो मैं भी लिखूं जहां तक दिवस विशेष मनाने की बात
 
प्रवीणा जोशी
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कविता

एक कविता कहना चाहती हूं जताना चाहती हूं अपनी कविता से कि कैसे बनती है कविता इतनी माथापच्‍ची के बाद निकली ये कविता जाने कितनों को आएगी ना- 'पसंद' पर खैर एक स्‍वादिष्‍ट कविता की रेसिपी कौन नहीं पढ़ना चाहेगा इस कविता प्रतियोगिता में मेरा दिल कवियित्री की
 
प्रवीणा जोशी
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मैं और मेरी तन्‍हाई

मैं और मेरी तन्‍हाई अकसर बात करते हैं कौन ज्‍यादा तन्‍हा है मैं या मेरी तन्‍हाई जवाब आता है पर बहुत देर से। क्‍योंकि अकसर हम बात करते रहते हैं सवाल यह नहीं है कि पहले जवाब कौन देता है सवाल तो यह भी नहीं है कि देर से जवाब क्‍यों आता है तो फिर सवाल क्‍या
 
प्रवीणा जोशी
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जीवन मेरा महान

सुबह सुबह पतिदेव की आवाज आई ''सुनो तो जी'' मैंने गला फाड़कर कहा ''क्‍याSSS'' वे बोले ''कोई बात नहीं'' सच ! नई बात तो थी नहीं नई तो तब थी जब मैं आई थी नई पतिदेव की आवाज ''सुनो''  सुनकर दौड़ी आती थी मैं हर मुश्किल से मुश्किल काम करती थी मैं उनकी
 
प्रवीणा जोशी
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प्‍यार और स्‍वास्‍थ्‍य

कहीं पढा था इक बार मैंने कि प्‍यार वो फूल है जो गुलाब से भी सुन्‍दर हैप्‍यार वो जज्‍बा है जो खुदा से बढकर हैप्‍यार वो दुआ है जो दवा से ज्‍यादा कारगर हैप्‍यार को लेकर इतनी नेमते पढी थी मैंनेदिल व्‍याकुल था इस अहसास को पाने के लिएसो जनाब, हम भी कर बैठे
 
प्रवीणा जोशी
Mar 29 2010 01:20 AM
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इक सपना

इक सपना सा जगा था आंखों में उमंग का, उल्‍लास का, तरंग कापैदा हुई थी सिरहन मन मस्तिष्‍क में सोचा था यही वो नवजीवन है जिसका मुझे इंतजार था मगर आंधी के झोंके की तरह न जाने कैसे सारा उल्‍लास उमंग तरंग काफूर हो गया अब रह गया
 
प्रवीणा जोशी
Jan 05 2010 03:48 PM
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starting aisy hi ho sakti thi...

Ek house wife ki comp. per starting aisy hi ho sakti thi.pahli post se dusri post ke beech lamba sa time gap.karan to sabhi jante hai .mai yaha apni aap beeti nahi sunana chahti na hi kisi working women se yaha comperision hoga bus aapni life me thoda sa
 
प्रवीणा जोशी