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शब्द-सृजन की ओर...

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17 Jun 2010
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मानवता के दुश्मन

रात का सन्नाटाअचानक चीख पड़ती हैं मौतेंकिसी ने हिन्दुओं को दोषी मानातो किसी ने मुसलमां कोपर किसी ने नहीं सोचा किन तो ये हिंदू थे न मुसलमांबस मानवता के दुश्मन थे।
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मौत

आज मैंने मौत को देखा!अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार
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ये इन्सान

यह कैसा देश हैजहाँ लोग लड़ते हैं मजहब की आड़ मेंनफरत के लिएपर नहीं लड़ता कोई मोहब्बत की खातिर।दूसरों के घरों को जलाकरआग तापने वाले भी हैंपर किसी को खुद के जलतेघर को देखने की फुर्सत नहीं।एक वो भी हैं जो खुद को जलाकरदूसरों को रोशनी देते हैंपर नफरत है उन्हें
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पाठ्यक्रमों से परे पर्यावरण को रोज के व्यवहार से जोड़ने की जरुरत

मानव सभ्यता के आरंभ से ही प्रकृति के आगोश में पला और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति सचेत रहा। पर जैसे-जैसे विकास के सोपानों को मानव पार करता गया, प्रकृति का दोहन व पर्यावरण से खिलवाड़ रोजमर्रा की चीज हो गई. ऐसे में आज समग्र विश्व में पर्यावरण चर्चा व चिंता
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भिखमंगों का ईश्वर

मंदिर के सामनेभिखमंगों की कतारेंएक साथ ही उनके कटोरेऐसे आगे बढ़ जाते हैंमानों सब यंत्रवत होंदस-दस पैसे की बाट जोहते वेमंदिर के सामने होकर भीमंदिर में नहीं जातेक्योंकि वे सिर्फएक ही ईश्वर को जानते हैंजो उनके कटोरे मेंपैसे गिरा देता है।
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अंडमान-निकोबार में रवीद्रनाथ टैगोर 150वीं जयंती समारोह का शुभारम्भ

महान कवि रवीद्रनाथ टैगोर की 150 वीं जन्मशती पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्टब्लेयर में पिछले दिनों वर्ष भर चलने वाले भव्य समारोह का आगाज़ हुआ। अंडमान पीपुल थिएटर एसोसिएशन, आप्टा द्वारा आयोजित इस कवि गुरू नमन का उद्घाटन एम्फी थिएटर के खुले
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टैगोर का शांति निकेतन विश्व धरोहर बनने की ओर

रवीन्द्रनाथ टैगोर के नाम से भला कौन अपरिचित होगा। साहित्यकार-संगीतकार-लेखक-कवि-नाटककार-संस्कृतिकर्मी एवं भारतीय उपमहाद्वीप में साहित्य के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता के अलावा उनकी छवि एक प्रयोगधर्मी और मानवतावादी की भी है. अनेक मामलों में उनकी समझ अपने
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कितने सुंदर हैं गुब्बारे

सरस पायस पर प्रकाशित मेरी बाल कविता कितने सुंदर हैं गुब्बारे का लुत्फ़ आप भी उठाइए। रावेन्द्रकुमार रवि जी ने इसमें कुछेक परिवर्तन कर इसे और भी रोचक बना दिया है... आभार !! लाल-बैंगनी-हरे-गुलाबी,रंग-बिरंगे हैं ये प्यारे।एक नहीं हैं इतने सारे,कितने सुंदर हैं
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लाल गुलाबों का सत्याग्रह-डे

सल्लू मियाँ हमारे लिए सिर्फ दर्जी ही नहीं वरन् अच्छे मित्र भी हैं। उम्र कोई पचपन साल पर बातें ऐसी चुटीली कि जवान भी शर्मा जायें। सल्लू मियाँ की सबसे बड़ी खासियत ‘गाँधी टोपियों‘ को सिलने की है। वे बेसब्री से चुनावी रैलियों और गाँधी जयन्ती का इन्तजार करते
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सात जन्मों तक इनकमिंग फ्री

मोहन बाबू हमारे पड़ोसी ही नहीं अभिन्न मित्र भी हैं। कहने को तो वे सरकारी विभाग में क्लर्क हैं पर सामान्यता क्लर्क की जो इमेज होती है, उससे काफी अलग हैं.... एकदम ईमानदार टाइप के। कभी-कभी तो महीना खत्म होने से पहले ही उधारी की नौबत आ जाती। उनकी बीबी रोज
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मेरी कहानी

कल ही एक मित्र का फोन आया सुना था दिल्ली की कई साहित्यिक पत्रिकाओं मेंउसकी घुसपैठ हैसो आदतन बोल बैठायार मेरी भी एक कहानी कहीं लगवा देवह हँस कर बोलायह तो मेरे बायें हाथ का खेल हैमेरा दिल गदगद हुआऐसे दोस्त को पाकर मैं धन्य हुआअगले ही दिनअपनी एक नई
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बारिश, पकौड़े और चाय...

अंडमान में आज खूब जमकर बारिश हुई। सुना तो था कि यहाँ मूसलाधार बारिश होती है, पर इस बार कुछ ऐसा नहीं दिखा. कभी हलकी-फुलकी बारिश हुई तो बस उतनी ही. सुनामी के बाद अंडमान में भी पर्यावरण में काफी परिवर्तन आया है. पर आज तो दोपहर से शाम तक खूब झमाझम बारिश हुई.
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10 मई 1857 की याद में

आज 10 मई है। इस दिन का भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान है। 1857 में भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम इसी दिन आरंभ हुआ था. 1857 वह वर्ष है, जब भारतीय वीरों ने अपने शौर्य की कलम को रक्त में डुबो कर काल की शिला पर अंकित किया था और ब्रिटिश साम्राज्य को
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माँ के आँसू

आज मदर्स डे है. माँ हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और माँ की वजह से हम आज इस दुनिया में हैं. दुनिया में माँ का एक ऐसा अनूठा रिश्ता है, जो सदैव दिल के करीब होता है. हर छोटी-बड़ी बात हम माँ से शेयर करते हैं. दुनिया के किसी भी कोने में रहें,
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जनसत्ता में 'शब्द सृजन की ओर' ब्लॉग की चर्चा

''शब्द सृजन की ओर'' पर 22 अप्रैल, 2010 को प्रस्तुत पोस्ट प्रलय का इंतजार को प्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक पत्र 'जनसत्ता' ने 8 मई 2010 को अपने सम्पादकीय पृष्ठ पर नियमित स्तम्भ 'समान्तर' में स्थान दिया ... आभार!!(चित्र साभार : प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा)
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67 लाख रुपये में बिका चंद्रमा को निहारने वाला कागज

इतिहास की धरोहरें आने वाली पीढ़ियों के लिए पथ-प्रदर्शक का कार्य करती हैं। हाल ही में चंद्रमा पर सबसे पहले पहुंचने वाला पन्ना जिस पर नील आर्मस्ट्रांग के हस्ताक्षर भी हैं, करीब डेढ़ लाख डालर (करीब 67 लाख रूपये) में नीलाम हुआ। इस पन्ने पर लिखा था- "एक शख्स
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दुनिया भर के मजदूरों एक हो (श्रमिक दिवस)

दुनिया भर के मजदूरों एक होजुल्म और शोषण का मिलकर जवाब दोन जाने कैसे-कैसे नारे और वायदेपर मजदूर एक हों तो कैसेजिसे उन्होंने अपना नेता चुनाबैठ गया है वह सत्ता की पांत मेंअब तो उनकी भाषा भी नहीं समझताफिर मजदूर करे तो करे क्याअब तो उनमें भी वर्ग भेद हो गया
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पुस्तकों के प्रति आकर्षण जरुरी (विश्व पुस्तक दिवस पर)

पढना किसे अच्छा नहीं लगता। बचपन में स्कूल से आरंभ हुई पढाई जीवन के अंत तक चलती है. पर दुर्भाग्यवश आजकल पढ़ने की प्रवृत्ति लोगों में कम होती जा रही है. पुस्तकों से लोग दूर भाग रहे हैं. हर कुछ नेट पर ही खंगालना चाहते हैं. शोध बताते हैं कि इसके चलते लोगों की
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क्या ये प्रलय नहीं है..

आज की यह पोस्ट माँ पर, पर वो माँ जो हर किसी की है। जो सभी को बहुत कुछ देती है, पर कभी कुछ माँगती नहीं। पर हम इसी का नाजायज फायदा उठाते हैं और उसका ही शोषण करने लगते हैं। जी हाँ, यह हमारी धरती माँ है. हमें हर किसी के बारे में सोचने की फुर्सत है, पर धरती
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धरती से मरूभूमि भगाएं (पृथ्वी दिवस पर प्रस्तुति)

सुन्दर-सुन्दर वृक्ष घनेरेसबको सदा बुलातेले लो फल-फूल सुहानेसब कुछ सदा लुटाते। करते हैं जीवन का पोषणनहीं करो तुम इनका शोषणधरती पर होगी हरियालीतो सारे जग की खुशहाली।वृक्ष कहीं न कटने पाएंसंकल्पों के हाथ उठाएंढेर सारे पौधे लगाकरधरती से मरूभूमि भगाएं।
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संबंधों की दुनिया (कविता)

सम्बन्धों के मकड़जाल से भरी हुई है दुनियाएक सम्बन्ध से नाता टूटातो दूसरे सम्बन्ध जुड़ गयेहर दिन न जाने कितने ही सम्बन्धों से जुड़ते हैं लोगकोई औपचारिकतो कोई अनौपचारिकपर कई सम्बन्धऐसे भी होते हैंजो न चाहते हुये भीजुड़ जाते हैं,क्योंकिउनका नाता कहींमन की
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विचारों का पुंज छोड़ गए डा0 अम्बेडकर ( अम्बेडकर जयंती पर )

आधुनिक भारत के निर्माताओं में डा0 भीमराव अम्बेडकर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है पर स्वयं डा0 अम्बेडकर को इस स्थिति तक पहुँचने के लिये तमाम सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव का सामना करना पड़ा। डा0 अम्बेडकर मात्र एक साधारण व्यक्ति नहीं थे वरन् दार्शनिक, चिंतक,
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अधूरे अहसास और टूटे सपने

जब छोटे थे तब बड़े होने की तमन्ना करते थे। मगर अब पता चला कि अधूरे अहसास और टूटे सपने से अच्छा अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने थे !!
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आतंकवाद : एक विश्वव्यापी समस्या

आतंकवाद समकालीन युग की सर्वाधिक ज्वलंत अन्तर्राष्ट्रीय समस्या है। कोई भी ऐसा देश नहीं है, जो इसकी पीड़ा से न गुजरा हो। भूमण्डलीकरण के दायरे के साथ ही आतंकवाद का भी दायरा बढ़ता गया और आज यह सुरसा के मुँह की तरह विभिन्न रूपों में फैल रहा है। इसमें लिंग
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पाखी को जन्म-दिवस की बधाइयाँ !!

ये देखिये हमारी बिटिया अक्षिता (पाखी) को। पूरे अंडमान (Andaman & Nicobar Islands) के रंग में रंग गई हैं। हर रोज समुद्र का किनारा, पार्क, म्यूजियम, चिड़िया टापू, यहाँ का खूबसूरत परिवेश और जमकर मस्ती। इन्हें बस मौका मिलना चाहिए बीच पर जाने का, फिर क्या।
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जरा याद करो कुर्बानी

आज 23 मार्च को राजगुरु, सुखदेव और शहीद-ए-आजम भगत सिंह की पुण्य तिथि है।ब्रितानिया हुकूमत ने जब शहीद-ए-आजम भगतसिंह को फाँसी के फँदे पर लटकाया तो पूरे देश में आजादी पाने की ख्वाहिश और भी भड़क गई। 23 मार्च 1931 की इस घटना की गूँज देश ही नहीं बल्कि पूरी
Mar 23 2010 12:08 PM
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गौरैया कहाँ से आयेगी

आज दुनिया भर में 20 मार्च 2010 को पहली बार ''विश्व गौरैया दिवस'' मनाया जा मनाया जा रहा है बहुत पहले गौरैया के विलुप्त होने को लेकर एक कविता लिखी थी, आज ''विश्व गौरैया दिवस'' पर प्रस्तुत है- चाय की चुस्कियों के बीच सुबह का अखबार पढ़ रहा थाअचानकनजरें ठिठक
Mar 20 2010 10:13 PM
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दोस्ती करें...

आज भारतीय नव-वर्ष, नव-संवत्सर विक्रमी सम्वत 2067 का आरंभ हो रहा है। इस दिन से बहुत सारी घटनाएँ जुडी हुई हैं. इस रूप में आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है. चैत्री नवरात्रारंभ भी आज से ही है. हर तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ. इन खुशियों के बीच, भाग-दौड़ की जिंदगी में
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सेलुलर जेल की गाथा

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम ने अंग्रेजी सरकार को चैकन्ना कर दिया। व्यापार के बहाने भारत आये अंग्रेजों को भारतीय जनमानस द्वारा यह पहली कड़ी चुनौती थी जिसमें समाज के लगभग सभी वर्ग शामिल थे। जिस अंग्रेजी साम्राज्य के बारे में ब्रिटेन के मजदूर नेता
Mar 14 2010 10:13 PM
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सूचना के अधिकार के अधीन अफसरों की शिक्षा का ब्यौरा

सूचना का अधिकार दिनों-ब-दिन व्यापक होता जा रहा है। एक तरफ जहाँ लोग इसके माध्यम से शिक्षित हो रहे हैं, वहीँ यह समाज को जागरूक भी कर रहा है। हाल ही में मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने आरटीआई के तहत दायर एक आवेदन पर यह फैसला दिया कि कोई सरकारी
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Mar 09 2010 02:10 PM
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अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के 100 वर्ष

आज अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस है। यह महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के लिए भी उतना ही महत्त्व रखता है, अखिकरकर नारी न हो तो सृजन संभव भी नहीं. कहते हैं हर पुरुष की सफलता के पीछे नारी का हाथ होता है, उसका रूप चाहे जो भी हो. आज का दिन इसलिए भी खास है कि
Mar 08 2010 09:06 AM
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होली : रंगों के साथ राग-द्वेष भी धोने का त्यौहार

पग-पग पर बदले बोली, पग-पग पर बदले भेष, वाले भारतवर्ष में होली का त्यौहार धूम-धाम से विभिन्न रंगों में मनाया जाता है। भारतीय उत्सवों को लोकरस और लोकानंद का मेल कहा गया है। भूमण्डलीकरण और उपभोक्तावाद के बढ़ते दायरों के बीच इस रस और आनंद में डूबा भारतीय
Mar 01 2010 07:01 AM
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विविधता में एकता की प्रतीक : होली

होली को लेकर देश के विभिन्न अंचलों में तमाम मान्यतायें हैं और शायद यही विविधता में एकता की भारतीय संस्कृति का परिचायक भी है। उत्तर पूर्व भारत में होलिका दहन को भगवान कृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना के वध दिवस से जोड़कर पूतना दहन के रूप में मनाया जाता है तो
Feb 28 2010 07:00 AM
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यूँ आरंभ हुआ होलिका-दहन व होली

होली भारतीय समाज का एक प्रमुख त्यौहार है, जिसका लोग बेसब्री के साथ इंतजार करते हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में होली मनाई जाती है। रबी की फसल की कटाई के बाद वसन्त पर्व में मादकता के अनुभवों के बीच मनाया जाने वाला यह पर्व उत्साह और
Feb 26 2010 01:18 PM
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लौट रही है ईस्ट इण्डिया कंपनी

ईस्ट इण्डिया कंपनी के नाम से भला कौन अपरिचित होगा। इसी कंपनी के माध्यम से अंग्रेजों ने भारत को गुलामी के बंधन में जकड़ा था. तब किसी ने नहीं सोचा था कि व्यापार के बहाने भारत आई ईस्ट इण्डिया कंपनी एक दिन ब्रिटिश सरकार की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा
Feb 25 2010 04:45 PM
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100 पोस्ट का सफ़र

''शब्द-सृजन की ओर'' पर 100 पोस्ट का सफ़र पूरा हो चुका है और यह 101वीं पोस्ट है. आप सभी ने समय-समय पर अपनी टिप्पणियों व सुझावों से प्रोत्साहित किया और राह दिखाई. यह आप सभी का स्नेह ही है, जो मुझे प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच भी ब्लॉग पर लिखने को तत्पर करता
Feb 25 2010 04:18 PM
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प्रेम (वेलेंटाइन दिवस पर विशेष)

प्रेम एक भावना हैसमर्पण है, त्याग हैप्रेम एक संयोग हैतो वियोग भी हैकिसने जाना प्रेम का मर्मदूषित कर दिया लोगों नेप्रेम की पवित्र भावना कोकभी उसे वासना से जोड़ातो कभी सिर्फ उसे पाने सेभूल गये वे कि प्यार सिर्फपाना ही नहीं खोना भी हैकृष्ण तो भगवान थेपर वे
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Feb 14 2010 05:40 AM
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खिड़कियाँ

खोल देता हूँ खिड़कियों कोबाहर धूप खिल रही हैचारों तरफ हरी मखमल-सी घासउन पर मोती जैसी ओस की बूँदेंचिड़ियों का कलरव शुरू हो गयाशरीर पर एक शाल डालबाहर चला आता हूँकुछ दूर तक टहलता हूँकितने दिनों बादइस सुबह को जी रहा हूँकितने एकाकी हो गये हैं हमबस अपने ही कामों
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Feb 01 2010 11:49 AM
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अब पोर्टब्लेयर में

प्रिय मित्रों,अब समय है आपसे खुशखबरी शेयर करने का। प्रोन्नति पश्चात् मैंने आज 22 जनवरी, 2010 को अंडमान-निकोबार दीप समूह के निदेशक(डाक) का पदभार संभाल लिया है। वाकई यह एक खूबसूरत जगह है, जहाँ आप प्रकृति के सान्निध्य का पूरा लाभ उठा सकते हैं। समुद्र की
Jan 29 2010 03:49 PM
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अगर आप डाकिया होते

कानपुर में साहित्यकारों-बुद्धिजीवियों द्वारा 17 जनवरी, 2010 (रविवार) को आयोजित विदाई-समारोह के दौरान दैनिक जागरण अख़बार में "भाई साहब" स्तम्भ में कार्टून बनाने वाले अंकुश जी ने मेरा एक कार्टून बनाया और कार्यक्रम के दौरान भेंट किया. इसे आप भी देखें और
Jan 29 2010 03:47 PM