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कस्बे का कवि...

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18 Jun 2010
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दोस्तों के बारे में

कौन समझ सका हैदोस्तों कोसिवाय दोस्तों केआवारा छोकरों का एक झुण्डजो बेझिझक घुस जाता हैघरों मेंजैसे हवा के साथघर में भरा जाते हैंपीले पत्तेकोई वक्त नहीं हैउनके आने कासुबह, दोपहर, शाम या रातकभी भी धमक जाते हैंबिना दरवाज़ा खटखटायेबहुत जल्दी में हुएतो सड़क पर
 
मणिमोहन
Jun 18 2010 02:40 PM
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रुपसिंह मिस्त्री

बहुत प्यार और पसीने सेउसने बनाया हैयह शाला भवनउसका नाम भी लिखा हुआ हैसंगमरमर के एक छोटे-से टुकड़े पर -रूपसिंह मिस्त्रीलाल पठार, बासौदासोचता हूँ मैंअगर होता शाहजहाँतो ज़रूर पूछताउस गुस्ताख़ का नामजिसने संगमरमर परखुदवाया हैइस कारीगर का नामसंगीन ज़ुर्म है
 
मणिमोहन
Jun 12 2010 10:26 PM
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गिरगिट

रंग बदल रहा हैगिरगिटपेड़ पर बैठा हुआजबड़ों से ज्यादा खतरनाक हैंउसके रंगहरे पत्तों के बीचएकदम हरियल हो जाता हैजमीन तक आते-आतेएकदम भूरापेट भर चुका है उसकाघर लौट रहा है गिरगिटशाम के पाँच बजे हैं अभीपता नहींकिस रंग मेंप्यार करेगा अपनी मादा कोपता नहीं किस रंग
 
मणिमोहन
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खोटा सिक्का

एक दिन मित्रों ने घोषित कर दियाईश्वर को खोटा सिक्कादूसरे ही दिनदुश्मनों नेउसे बाजार में चला दियाघूमता रहा सिक्का बाज़ार मेंऔर फिर लौटा एक दिनमित्रों के पासबदरंग और घिसा-पिटाएकदम खोटे सिक्के की तरह
 
मणिमोहन
May 21 2010 06:07 PM
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खूबसूरत घर

एक ख़ूबसूरत घर हैघर के सामनेहरा-भरा लॉन हैकुछ दरख़्त हैं आस-पासरंग-बिरंगे फूल हैंक्यारियों में खिले हुए एक ख़ूबसूरत घर हैकमरे की दीवार पर चिपके हुएपोस्टर में इस बार भी दिवाली परसम्हल कर पोतनी होगी दीवारपिछली बार की तरह.
 
मणिमोहन
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बारिश - दो

रेनकोट पहने हुए यह आदमीबारिश को रोकने निकला हैहटाओ इसे सड़क सेबंद कर दो इसेकिसी मकान के भीतरजब तबियत से बरस ले पानीतब खोल देना-दरवाज़े की कुंडी.
 
मणिमोहन
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बारिश - एक

एक दिन बारिश मेंभीगते हुए जानाघर का मतलबघर नहीं होता होगा जिनके पासवे क्या सोचते होंगेबारिश के बारे में.
 
मणिमोहन
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समझौता

रोज़ सुबह आता है दूधवालाऔर पानी मिला दूधजग में डालकर चला जाता हैरोज़ डाँटता हूँ उसेधमकी देता हूँ दूध बंद देने कीमुस्कुराता है दूधवालाऔर रोज़ की तरहसाइकिल की घंटी बजाते हुएआगे निकल जाता हैरोज़ शुरु होता है दिनइस छोटे-सेसमझौते के साथ.
 
मणिमोहन
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यात्रा के दौरान

इस बारपूरे सफर के दौरानमैने एक भी कविता नहीं लिखीएक मासूम ज़िद्दी बच्चे नेछीन ली मुझसेमेरी खिड़की वाली सीटऔर फिर मैंपूरे रास्ते देखता रहाउसकी आँखों मेंनदी, पुल, पहाड़औरभागते हुए पेड़ों के प्रतिबिंब.
 
मणिमोहन
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घर : दो

अपने घर सेमीलों दूरइस अजनबी शहर मेंदस बाई बारह कायह कमराकभी-कभीरेल के डिब्बे मेंतब्दील हो जाता हैआधी रात के बादऔर भागने लगता हैघर की तरफ़.
 
मणिमोहन
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घर : एक

छुट्टियों कासबसे पहला दिनसबसे पहली बससबसे आगे वाली सीटसबसे पहले कहाँसबसे पहले घर.
 
मणिमोहन
May 01 2010 02:48 PM
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घर

चलो छोड़ दिया घरआ गए परदेस मेंअब !यहाँ भी तो तलाशना होगाएक घर.
 
मणिमोहन
May 01 2010 02:46 PM
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रात

दिनउतार फेंका है उसनेअपने कंधों सेरात उतर आई हैमेरी बाँहों में.
 
मणिमोहन
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अस्पताल

परियों की तरहहवा में उड़ रही हैंपरिचारिकाएँदेवताओं की तरहलग रहे हैं चिकित्सकविज्ञान और प्रार्थनास्वर्ग और नर्कनिश्चय और अनिश्चय के बीचझूल रहा हैधरती का यह छोटा-सा टुकड़ा.
 
मणिमोहन
Apr 28 2010 04:22 PM
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सरकारी आदमी

गेहूँ के उस हरे-भरे खेत मेंऐसे खड़े हुए हैंटेलीफोन के खम्भेजैसे अभी सेआ धमके होंकर्ज़ा वसूलनेसरकारी आदमी.
 
मणिमोहन
Apr 21 2010 11:22 AM
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बारिश

मोरों नेपुकारा मेघों कोऔर झमाझमबरसने लगा पानीमेंढक तोबहुत बाद में टर्राये.
 
मणिमोहन
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पतझर

एक-एक करसारे पत्तेझड़ गये हैंएक घोंसलाअब भी चिपका हैपेड़ की छाती से.
 
मणिमोहन
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आईना

आईने मेंकुछ नहीं हैसिवा अपनेआईने केउस तरफसब हैंमाँ-बापभाई-बहनयार-दोस्तऔर प्रेमिकाएँसब.
 
मणिमोहन
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बचपन : दो

एक ज़िद थाबचपनजिसे कोई पूरी न कर सका
 
मणिमोहन
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बचपन : एक

जहाँ-जहाँ भी रहेकिराये के मकानों मेंवहाँ-वहाँ छूटता गयाघर के कबाड़ के साथ-साथकुछ न कुछ महत्वपूर्णकुछ यादें, कुछ लोगकुछ बचपनसब पीछे छूट गयाअब तो सिर्फज़रूरी सामान ही बचा हैघर के मकान में.
 
मणिमोहन
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पता

सुख ने जाते-जातेदुःख कोमेरा पता बता दियागली, मौहल्ला, शहरसाले ने पक्का पता दिया.
 
मणिमोहन
Apr 15 2010 08:44 AM
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कविता

धूप की तरह आओमेरे घर मेंपानी की तरहचू जाओ कहीं से भीहवा की तरहदरवाज़ा खटखटा कर आओपीले पत्तों की तरहभरा जाओ घर मेंसपने की तरह चली आओदबे पाँव नींद मेंदुःख की तरह आओकभी न जाने के लिएया खुशी की तरहधमक जाओ अचानकदिन भर के काम से निबट कररातजिस तरह आती है
 
मणिमोहन
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नाखून : एक

कितने भी सलीके से काटे जायेंनाखूनखूबसूरत नहीं होतेखूबसूरत तो सिर्फचेहरे होते हैंलहुलुहान होने से पहलेऔर कई अर्थों मेंलहुलुहान होने के बाद भी.
 
मणिमोहन
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नाखून : दो

अपने चेहरे सेटपकते खून को पोंछते हुएलोगों नेएक-दूसरे से कहानाखून-बहस का विषय नहीं है.
 
मणिमोहन
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दंगे

घर के भीतरमारा गया विश्वासगली के मोड़ परमारी गई यारीगाँव, कस्बे, शहर, महानगरसब मारे गयेऔर इन सबके साथमारा गया मुल्क.
 
मणिमोहन
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दीवार

एक दिन वे आयेंगेऔर लिख जायेंगेतुम्हारी दीवार परतुम्हारे पड़ौसी की मौत का फरमानदूसरे दिन वे आयेंगेलिख जायेंगेपड़ौसी की दीवार परतुम्हारी मौत का फरमानतीसरे दिनवे फिर आयेंगेऔर लिख जायेंगेशहर की तमाम दीवारों परऐसे ही फरमान-उन्हें सिर्फ तीन दिन चाहिएइस दुनिया
 
मणिमोहन
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कौन जायेगा अगली शताब्दी में...?

सिर्फ प्रेमिकाएँ जायेंगीअगली शताब्दी मेंपत्नियाँ इसी तरफइंतज़ार करेंगीहाथों में रंगीन गुब्बारे लिएकवि जायेंगेअगली शताब्दी मेंबधाई गीत गाते हुएकविता इसी तरफइंतज़ार करेगीविज्ञान जायेगातकनीक जायेगीबड़े-बड़े अधिकारीऔर चिकित्सक जायेंगेबुखार से तपते हुए
 
मणिमोहन
Apr 12 2010 09:02 PM
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दंगे

घर के भीतरमारा गया विश्वासगली के मोड़ परमारी गई यारीगाँव, कस्बे, शहर, महानगरसब मारे गयेऔर इन सबके साथमारा गया मुल्क.
 
मणिमोहन
Apr 12 2010 09:01 PM
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पिता के जूते

बचपन की बात और थीजब पिता के जूतों में पाँव डालकरनचते फिरते थे घर भर मेंदायें पैर का जूता बाएँ में औरबाएँ पैर का दाएँ मेंकितना चिल्लाती थी माँपिता की मार भी खाई कई बारजब एक जूता आँगन मेंऔर दूसरा बैठक में मिलाएक अजीब सा आकर्षण थापिता के जूतों मेंगिरना,
 
मणिमोहन
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रोशनी

इस रोशनी मेंथोड़ा सा हिस्सा उसका भी हैजिसने चाक पर गीली मिट्टी रख करआकार दिया है इस दीपक काइस रोशनी में थोड़ा सा हिस्सा उसका भी हैजिसने उगाया है कपासतुम्हारी बाती के लिएथोड़ा सा हिस्सा उसका भीजिसके पसीने से बना है तेलइस रोशनी मेंथोड़ा सा हिस्साउस अँधेरे
 
मणिमोहन
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जुलूस

कई बरस बाद सड़क पर देखाइतना बड़ा जुलूसवरना इन दिनों तोपरिदृश्य से बाहर हैंऐसे दृश्यजीन्स-टी शर्ट पहने लड़के-लड़कियाँहाथों में पोस्टरअँग्रेज़ी में लिखे हुए नारेहँसते, मुस्कराते, बतियातेपहली बार निकले हैंइस तरह सड़कों परनथुनों से टकराती हैपरफ्यूम और
 
मणिमोहन
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टुकड़ा-टुकड़ा यथार्थ

कितना उबाऊ, नीरस, बेजानऔर बदबूदार हो गया हैसब-कुछजीवन के हर सुंदर दृश्य मेंघुस आया हैखजिया कुत्तों का एक झुंडदुम दबा कर भाग रही हैंअन्तर-आत्माएँशांति की तलाश में-फेशियल करानेनिकला है सौंदर्य बोधथ्रेडिंग के इंतज़ार मेंबैठी है आत्मामंच पर इठलाती
 
मणिमोहन
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बाज़ार : एक

पैर नहीं थकतेआँखें थक जाती हैंइस बाज़ार मेंबच्चे की तरह उँगली पकड़करसाथ चलते हैं सपनेऔर फिर गुम जाते हैंरंग-बिरंगी खुश्बूदार भीड़ मेंमैं सपने तलाशता हूँइस बाज़ार मेंऔर फिर-पैर भी थक जाते हैं.
 
मणिमोहन
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परिभाषाएँ

पहले जैसी नहीं रहींअब परिभाषाएँसरल और सहजसंज्ञा, सर्वनाम की तरहकि किसी ने पूछाऔर झट से बता दीअब तो हथियारों के साये मेंशान से चलती हैं परिभाषाएँपरिभाषा पूछीतो गोली चल जायेगीऔर गोली के बाबत सवाल कियातो परिभाषा बता दी जायेगी.
 
मणिमोहन
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वैवाहिक विज्ञापन

कहानी की तरह होते हैंलड़कियों के वैवाहिक विज्ञापनकहानी की तरहहोते हैं इनमें चरित्ररिटायर्ड बापनौकरी तलाशता भाईप्रतियोगिता की तैयारी करती छोटी बहनपूजा घर में बैठी हुई माँऔर दुबली-पतली साँवली-सीएक उदास नायिकाकहानी की तरहचलती रहती है ज़िंदगीऔर कहानी की तरह
 
मणिमोहन
Mar 09 2010 04:29 PM
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औरतें

धरती के बीचो-बीचरोप दिया हैतुलसी का एक बिरवाऔर परिक्रमा कर रही हैं औरतेंअपनी प्रार्थनाओं मेंकामना कर रही हैंघर की सुख-समृद्धि और शांति कीनिर्जला व्रत कर रही हैंप्रदोष कर रही हैंदिवंगतों के लिएग्यारस कर रही हैंधरती की खुशहाली के लिएरतजगा कर रही हैं
 
मणिमोहन
Mar 08 2010 09:54 PM
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ईश्वर

सबने शामिल कर लिया हैतुम्हेंअपने-अपने ज़ेहाद मेंऔर तुम्हें पता ही नहीं चलायारकैसे अंतर्यामी हो...!
 
मणिमोहन
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कस्बे का कवि....!

मैं मणिमोहन, छोटे से कस्बे गंज बासौदा में रहता हूँ... मूलतः कवि हूँ... हिंदी में कविताएँ लिखता हूँ... हिंदी की कुछ प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के लिए अनुवाद भी पिछले दिनों किया... हाल ही में तीन कविताएँ कोलकाता से निकलने वाली वागार्थ में भी छपी हैं... कस्बे की
 
मणिमोहन