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17 Jun 2010
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हम भी किस्मत का लिक्खा बदल डालते

तुम जो अपना नजरिया बदल डालते हम भी किस्मत का लिक्खा बदल डालते साथ चलने को तेरे दिल राजी न होता हम साथ चलने का फैसला बदल डालते मौसमों की तुझे खबर भी ना मिलती खौफ से घुटन के हम हवा बदल डालते तुझ सा आता हमे जीने का गर हुनर पता अपने मकां का हम बदल डालते
Jun 13 2010 03:28 PM
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वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह

फिजां भी लगती है तन्हा उदास मेरी तरह क्या इसे भी है किसी की तलाश मेरी तरह चाँद सहरा की वादियों में भटका शब् भर वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह खुद को रखा है सब्ज आंसुओ की बारिश से यूँ तो आता है हिज्र किसे रास मेरी तरह रोज आती है सरे शाम हिचकियाँ
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बाजी तो दिल की तुम भी हारे

हर रोज नए ख्वाब के इशारे ये मुहब्बत के है झूठे सहारे हम न जीते तो क्या हुआ बाजी तो दिल की तुम भी हारे शब का रास्ता पूछने वाले नजाने कैसे अपना दिन गुजारे झूठ है वो जो हम समझते है कर्ज वफा के है तुमने उतारे ( 14/2/2010-अनु) Permalink | Leave a
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सुहानी स्याह रातो में मोहोब्बत नूर बनती है

सुहानी स्याह रातो  में  मोहोब्बत  नूर  बनती है हमारे दिल के आईने में तब  दुनिया  संवरती है वफा के    फूल  मेरी  जिंदगी  में  मुस्कुराए थे उन्हीं की याद में अब तक मेरी हस्ती महकती है कभी तो
Mar 31 2010 06:30 PM
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इश्क दरिया है लोगो को डुबाता ही रहा

बहुत दरिया दिल था वो शख्स छीन कर आँख वो चराग दिखता ही रहा दर्दे दिल आँख से बह कर निकले हाल पे मेरे वो चुपचाप मुस्कुराता ही रहा दिखाया जब भी उसको जख्मे जिगर नोक से काँटों की मरहम वो लगता ही रहा बह गई मै भी तेरी चाहत में 'अनु' इश्क दरिया है लोगो को
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वो शख्स जिसे मेरा कभी होना नहीं है

दिल से मेरे लिपटा वो किसी राज की सूरत वो शख्स जिसे मेरा कभी होना नहीं है इश्को मोहोब्बतों के है किस्से बड़े अजीब पाना भी नहीं है उसे खोना भी नहीं है समझेगा मुझे पागल हर देखने वाला चहरे से कुछ बयान तो होना ही नहीं है हम उनको बुलाने का तकाजा नहीं करते इंकार
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दिल से मेरे लिपटा वो किसी राज की सूरत वो शख्स जिसे मेरा कभी होना नहीं है इश्को मोहोब्बतों के है किस्से बड़े अजीब पाना भी नहीं है उसे खोना भी नहीं है समझेगा मुझे पागल हर देखने वाला चहरे से कुछ बयान तो होना ही नहीं है हम उनको बुलाने का तकाजा नहीं करते इंकार
Mar 25 2010 03:36 PM
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जीत क्या शय है हार कर देखो

अपनी हस्ती उजाड कर देखो गलती ये एक बार कर देखो प्यार के खेल में मेरे दिलबर जीत क्या शय है हार कर देखो हमने एक उम्र काट दी जैसे तुम एक शब् गुजार कर देखो लौट आउंगी फिर से पास तेरे दिल से मुझको पुकार कर देखो फिर बुरा नज़र न आएगा कोई खुद का चेहरा निखार कर
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मन अब भी खोया रहता है

ये बात सपन सी लगती है जब हम भी खुश खुश रहते थे थे पास हमारे तब भी वो जब ख्वाब सुनहरे सजते थे मन खोया खोया रहता था अरमा बेख़ौफ़ मचलते थे है पास हमारे अब भी वो पर तन्हा तन्हा रहते है मन अब भी खोया रहता है पर अरमाँ नहीं मचलते है हम किसको ढूंढा करते है और क्या
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अश्क मुझे करते हैं परेशान बहुत

तुम ही थे इश्क से अनजान बहुत   वरना इस दिल में थे अरमान बहुत     ज़ब्त ए गम आँख को पत्थर कर दे अश्क  करते हैं  परेशान बहुत   फिर से बह निकली मुहब्बत की हवा   पर वहाँ  जज़्ब हैं  तूफ़ान बहुत   जी तो लेती
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मेरी आँखों में है खुश्क पानी सुनो

उजड़े ख्वाबो की है एक कहानी सुनो है जो हमको तुम्ही को सुनानी सुनो जीत पर अपनी क्यों इतना मगरूर हो हार हमने है खुद अपनी मानी सुनो मुझको मालूम है बाद मरने मेरे याद सबको हमारी है आनी सुनो मुझसे छीनो ना मेरे दुखो को सनम जिंदगी की यही है निशानी सुनो आँख भर आई
Mar 16 2010 11:04 AM
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जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता

फांस ये दिल से निकल जाए तो अच्छा होता जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता     अब तो तनहाइयों की धूप से जलता है बदन प्यार की छांव जो मिल जाए तो अच्छा होता     तमाम शब गुजर गई ग़मों की दरिया में   तीर कश्ती को जो मिल जाए तो अच्छा
Mar 05 2010 05:51 PM
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हमपे करम बहुत हैं उस सितमगार के

ऐ मेरे सनम तेरी महोब्बत में हार के यूँ ही चले जाएगे शबे गम गुजार के है मयकदा वीरान और सागर उदास है जाने से उनके रूठ गए दिन बहार के हम टूट भले जाएँगे शिकवा न करेंगे हमपे करम बहुत हैं उस सितमगार के ख्वाबो के ही आलम में आजाये वो कभी पलकों में पालती रही दिन
Mar 02 2010 08:48 PM
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बिजलियाँ हम पे गिराने कि जरूरत क्या थी

बे सबब अश्क बहाने की जरूरत क्या थी दर्दे दिल सबको दिखाने की जरूरत क्या थी हम तो खुद हार गए आपकी मोहोब्बत में जीत का जश्न मनाने की जरूरत क्या थी गर शिकारी थे तो करते शिकार कोई नया किसी घायल पर निशाने की जरूरत क्या थी इतने नाजुक हैं कि सांसो से पिघल जाते
Feb 25 2010 03:37 PM
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ये क्या किया

मेरी वफा को तार तार किया तुमने क्या रंग इख़्तियार किया कितना अजीम है वो शख्स हमे हमने जिसपे था जांनिसार किया अब तुझसे क्या कहे ऐ दोस्त तेरी आरजू ने हमे बेजार किया नफरत कि जो आग है दिलो में उसने खुद हमे शर्मशार किया तलबगार है फूलो के बहुत मगर काँटों से खुद
Feb 25 2010 11:21 AM
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तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है

तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है गर वो मेरा है तो फासला ये कैसा है तुम न आओगे कभी ये मै जानती हूँ फिर तेरी यादो का काफिला ये कैसा है कभी नाचती थी खुशियाँ मेरे आंगन में अब उदासियों का मरहला ये कैसा है देख लूँ उसको तो दिल को सुकूं आये मुझे जान से प्यारा
Feb 24 2010 05:16 PM
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तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है

तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है गर वो मेरा है तो फासला ये कैसा है तुम न आओगे कभी ये मै जानती हूँ फिर तेरी यादो का काफिला ये कैसा है कभी नाचती थी खुशियाँ मेरे आंगन में अब उदासियों का मरहला ये कैसा है देख लूँ उसको तो दिल को सुकूं आये मुझे जान से प्यारा
Feb 24 2010 05:10 PM
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मै भी पोस्टरस पर हूँ ........

ये पोस्ट मेरी टेस्ट पोस्ट है ...... दिल पर ना लें Permalink | Leave a comment  »
Feb 24 2010 04:44 PM