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29 May 2010
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जहां शराब है, नशा नहीं...

दसदस तारीख को हम नहा-धो के ओल्ड-गोआ की सैर को निकल पड़े. ओल्ड गोआ पुरानी इमारतों से समृद्ध इलाका है. यहां हम सेंट ज़ेवियर चर्च के नाम से मशहूर,बेसिलिका ऑफ़ बॉम जीसस चर्च गये. यह कैथोलिक चर्च भारत में बारोक-वास्तुकला का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है.
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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अपनी बात...

गोवा की अधूरी पोस्ट पर इतनी झिड़कियां (स्नेहसिक्त) मिलीं, कि तुरन्त आगे का वृतांत लिखने बैठ गई.तो शुरु करूं? :)पिछले कई सालों अंगोर के खेतसेhttp://ismatzaidi.blogspot.com/"> इस्मत गोवा आने का आग्रह कर रही थीं और हम हर बार आने का आश्वासन दे रहे थे. लेकिन
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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स्वर्ग सा सुन्दर: गोवा

सोलह मई को अपनी गोवा यात्रा सम्पन्न कर सतना लौटी. लौट तो आई, लेकिन मन वहीं कहीं हरियाली के बीच छूट गया. इतना सुन्दर राज्य. हालांकि मुझे बताने की ज़रूरत नहीं है, सब जानते हैं, गोवा के बारे में. फिर भी कुछ तस्वीरें तो दिखा ही सकती हूं, ज़्यादा बोर नहीं
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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....गांव की कुछ यादें

आज अजय कुमार झा जी की पोस्ट पढ़ रही थी, पढ़ते-पढ़ते अपना गाँव बहुत-बहुत याद आने लगा.हमारा गाँव इसलिए क्योंकि वहां हमारे दादा-परदादा रहे. पुश्तैनी मकान, ज़मीन सब वहीं है. ये अलग बात है, कि हमें गाँव में रहने का मौका केवल छुट्टियों में मिलता था, वो भी तब
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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चित्रकूट के घाट पे भई संतन की भीर.....

-चित्रकूट महिमा अमित कहीं महामुनि गाइ।आए नहाए सरित बर सिय समेत दोउ भाइ।।मंदाकिनी नदी के किनारे पर बसा चित्रकूट धाम भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है। उत्तर-प्रदेश में 38.2 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैला शांत और सुन्दर चित्रकूट प्रकृति और ईश्वर
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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आभार....

होली के अवसर पर आयोजित रंग-बिरंगी परिचर्चा "होली के रंग- किस अपने के संग" में आप सब ने जिस उत्साह से भाग लिया उससे न केवल परिचर्चा सफल रही, वरन आपने मेरा भी मान बढाया है। आभारी हूँ, आपके स्नेह और सौजन्य की, उम्मीद करती हूँ, कि भविष्य में भी इसी प्रकार
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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वो छुप-छुप के लिखना..........

आज अपने बुक-शेल्फ की सफाई कर रही थी, तो एक पुरानी डायरी हाथ आ गई. सन १९८० की डायरी. यानि तीस साल पुरानी डायरी................. पन्ने पलटने लगी तो मेरा बचपन डायरी में से कूद कर बाहर भागा... याद आने लगे लेखन के शुरूआती दिन....हमारे घर में हमेशा से शुद्ध
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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होली के रंग, किस अपने के संग? - रंग-बिरंगी परिचर्चा

होली............इन दो अक्षरों में कितने रंग समाये हैं.......आसमान की तरफ देखो तो लाल, गुलाबी, पीला, नीला, बसंती....रंग ही रंग दिखाई देता है फागुन के महीने में, होली हो न हो. ...किसी ने फागुन कहा और रंग से बिखर जाते हैं. कहा जाता है, कि इस माह में द्वेष
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Mar 01 2010 10:47 PM
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वे सीलोन के दिन, उर्दू सर्विस की रातें......

कुछ दिन हुए, आकाशवाणी रीवा से तनुजा दी का फोन आया कि तुम्हारा फीचर रि- ब्रॉडकास्ट हो रहा है सुन लो. दरअसल एडिटिंग के बाद मैं अपने इस फीचर को सुन ही नहीं पाई थी. पहली बार जब प्रसारित हुआ तब भी नहीं सुन पाई थी. लेकिन हाय री किस्मत!! आज लाईट नहीं थी. और घर
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Feb 17 2010 05:31 PM
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झलकियां

गण्तंत्र दिवस के अवसर पर मेरे विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने भी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये. उसी अवसर की कुछ झलकियां आपके लिये लाई हूं , देखें और कार्यक्रम में शामिल हो जायें.खुले आकाश में लहराता तिरंगा ...... हर वक्त हमें आज़ाद होने का
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Feb 01 2010 11:58 AM
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सारे जहाँ से अच्छा....

आज गणतंत्र दिवस है. इधर विद्यालय में बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल चल रही थी, और उधर मेरा मन एक बार फिर बचपन की यादों को टटोल रहा था. याद आ रहे थे वे तमाम गणतंत्र दिवस- स्वतंत्रता दिवस जो हमने बचपन में जिए थे............... कैसी उमंग होती
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Jan 26 2010 04:31 PM
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वसंतपंचमी पर विशेष-

वैसे तो महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" का जन्म 21 फरवरी को 1896 में पश्चिमी बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक देशी राज्य में हुआ था, लेकिन उस दिन वसंतपंचमी थी. माँ सरस्वती ने प्रकृति का कैसा अनुपम उपहार दिया साहित्य-जगत को. वसंत पंचमी के अवसर
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Jan 19 2010 10:43 PM
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होई है सोई, जो राम रचि राखा..

छुट्टियाँ बाद में आती हैं , उनके इस्तेमाल का प्लान पहले बनने लगता है. कुछ ऐसा ही इस बार भी क्रिसमस की छुट्टियों के पहले हुआ.शैली ने हैदराबाद बुलाया था, तो मंजू दीदी और वर्षा ने इंदौर. तारा आंटी इलाहाबाद बुला रही थीं तो राजा और शिवेंद्र मुंबई. शमा दीदी ने
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Jan 16 2010 04:14 PM
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एक साल बीत गया.....

आज पिछली पोस्टों को देखते हुए अचानक ही पहली पोस्ट पर गई तो चौंक पड़ी. २ दिसंबर २००८. यानी मुझे ब्लॉग जगत से जुड़े एक साल से भी ज्यादा हो गया!!!! लगता ही नहीं कि एक साल हो गया. नई पोस्ट लिखने, पोस्ट करने और फिर प्रतिक्रियाएं जानने कि चाह में कब दिन
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Dec 25 2009 03:35 PM
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याद न जाये, बीते दिनों की...

कैसी भाग-दौड़ की ज़िन्दगी हो गई है.....|घड़ी के साथ उठना, घड़ी के साथ सोना, घड़ी के साथ आना- घड़ी के साथ जाना........|इंसान न हुआ, घड़ी हो गया। घूमता रहता है, काँटों की तरह। हर वक्त " समय ही नहीं मिलता...", "फुरसत ही नहीं है...." जैसे जुमले मुंह पर सवार रहते
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Dec 14 2009 05:15 PM
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बांधवगढ की सैर और शेर के दर्शन

मई में अचानक ही राजा (डॉ.सुजीत शुक्ल ) का फोन आया, बांधवगढ़ चलना है. मैंने कहा की मई में तो मेरे "ग्रीष्मकालीन भ्रमण कार्यक्रम" तय हैं. रिज़र्वेशन भी हो चुके हैं. राजा बोला " चलो, जून में चलते हैं. लेकिन इसके आगे नहीं. अपने कार्यक्रम १० जून तक समेट लो,
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Nov 06 2009 08:34 PM
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सहेजना रिश्तों का

पिछले दिनों मेरी ननद नीतू, और उनके पतिदेव शिशिर अमेरिका से लौटे। गत चार वर्षो से वेहोनोलुलू में थे। तमाम किस्से वहाँ की संस्कृति, लोग और अन्य मसलों पर खूब-खूब चर्चाएँ हुईं। चर्चा के दौरान ही शिशिर ने बताया कि वहां लोगों का सामान जब पुराना हो जाता है तब
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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Oct 16 2009 12:20 PM
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गुज़रना ईद का....

मेरा बचपन जिस स्थान पर गुज़रा वह मध्य-प्रदेश का एक छोटा लेकिन सुंदर सा क़स्बा है-नौगाँव। कस्बा आबादी के लिहाज़ से लेकिन यह स्थान पूर्व में महत्वपूर्ण छावनी रह चुकी है। आज भी यहाँ पाँच हज़ार के आस-पास आर्मी है और अपने क्लाइमेट के कारण आर्मी अफसरों की
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Oct 16 2009 01:21 AM
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मन न भये दस-बीस.....

बहुत दिन हुए , कुछ लिखा नहीं। असल में किसी चैनल विशेष पर प्रसारित होने वाले "सच का सामना" पर लिखना चाहती थी। लेकिन मैं लिखने का मन बनाऊं तब तक कई ब्लॉग्स पर इस कार्यक्रम के बारे में लिखा जा चुका था। फिर आज के परिवेश से जुड़े किसी अन्य मुद्दे पर लिखना
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Aug 20 2009 02:47 PM
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दूरदर्शन के दिन

तब दूरदर्शन के शुरूआती दिन थे। कुछ बड़े शहरों में ही टी.वी.टॉवर थे, लेकिन दूरदर्शन की ललक सब के मन में.... तब बहुत कम घर थे जहाँ टेलिविज़न था। हमारे घर भी तभी टैक्सला का बड़ा श्वेत-श्याम टीवी आया। कुछ दिखने के नाम पर केवल झिलमिलाहट और बीच-बीच में कभी
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Jun 14 2009 05:10 PM
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राज कर रही है तीन बेटों की माँ?

कल अपने कुछ मेहमानों को छोड़ने स्टेशन गई थी। तभी वहाँ मैंने देखा की एक जर्जर बुढ़िया किसी प्रकार अपने पैर घसीटती संकोच सहित भीख मांग रही है। हालाँकि इसमें नया कुछ भी नहीं है। सैकड़ों बुजुर्ग महिलायें इस प्रकार भीख मांग रहीं हैं। लेकिन मेरे लिए नई बात ये
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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Jun 12 2009 12:08 PM
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श्रद्धांजलि......

आज सुबह का अख़बार शोक संदेश बन कर आया जैसे....रंगमंच के पुरोधा हबीब तनवीर का देहांत और साथ में एक सड़क दुर्घटना में तीन दिग्गज कवियों का निधन.......स्तब्ध हूँ ईश्वर की इस इच्छा पर.....याद आरहे हैं हबीब साहब के साथ बिताये वे दिन जब हम भोपाल में आयोजित
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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Jun 09 2009 04:15 PM
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विद्यार्थियों के साथ मज़ाक...

यह मुद्दा है मध्य प्रदेश के शिक्षा-महाविद्यालयों का। वर्ष २००७ में बरकतुल्ला विश्वविद्यालय ने हमेशा की तरह बी.एड की प्रवेश परीक्षा ली पूरा सत्र बीता और परीक्षाओं का समय आ पहुँचा, लेकिन तभी विश्वविद्यालय ने ६३ शिक्षा-महाविद्यालयों की वैधता पर प्रश्न-चिन्ह
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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Jun 01 2009 04:45 PM
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परिवार-दिवस.....!!

तमाम दिवसों को मनाने की परम्परा के तहत आज विश्व परिवार दिवस है। हालांकि भारत में इस प्रकार के दिवसों की उपयोगिता मेरी समझ में नहीं आती क्योंकि हमारे यहाँ परिवार, माँ ,पिता या दोस्तों को भूलने की परम्परा नहीं है। फिर भी जब हम ये दिवस मना ही रहे हैं, तो
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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"माँ" तेरे कितने नाम....

शिशु के शुरूआती शब्द म, या मा जैसे होते हैं, इसीलिए अधिकांश भाषाओँ में "माँ" के लिए प्रयुक्त शब्दों में म की ध्वनि निकलती है। आइये जाने तमाम भाषाओँ में "माँ" को किस-किस तरह से पुकारा जाता है-अफ्रीका- मोइदर, माँ अरब - अमअल्बेनिया- मेमे, नेने, बरिमआयरिश-
 
वन्दना अवस्थी दुबे
May 10 2009 03:16 PM
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क्या कूप-मंडूक हैं हम?

नवम्बर माह की बात है, मेरी परिचित एक सुदर्शना युवती, जो हमेशा ही अपने हर मसलों को मेरे पास लाती रही है, और यथासंभव उसके मसलों को मैंने सुलझाया भी है, लिहाज़ा उसका प्रेम मेरे प्रति कुछ ज़्यादा ही था। एक दिन उसने बताया की वह एक लड़के को पसंद करती है, और उसी
 
वन्दना अवस्थी दुबे
May 05 2009 11:56 AM
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कैसे-कैसे अंध-विश्वास....

मेरे विद्यालय में बच्चों की छुट्टियाँ शुरू हो गई है, लिहाज़ा स्टाफ को यहाँ-वहां की बातें करने का पर्याप्त समय मिलता है। इसी बतरस के दौरान कल एक बड़ी विचित्र सी बात सामने आई । मेरे विद्यालय की ही एक शिक्षिका ने मुझसे एक व्रत ले लेने की बात कही मेरे पूछने पर
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Apr 26 2009 04:06 PM
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ऐसा भी हो रहा है....

मतदान के ठीक एक दिन पहले ही विन्ध्य के एक लोकसभा क्षेत्र में एक प्रत्याशी द्वारा नकली नोट बांटे जाने का सनसनीखेज़ मामला प्रकाश में आया है। एक स्थानीय दैनिक समाचार-पत्र में छपी इस घटना ने उन लोगों के कान खड़े कर दिए हैं, जो पहले ही नकली नोटों की चपेट में
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Apr 22 2009 03:50 PM
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कि उनका देखना देखा न जाए........

चुनाव के रंग अब अपने शबाब पर हैं। आचार संहिता के चलते चुनाव-प्रचार पर तो लगाम है, लेकिन कुछ ऐसे परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं कि उनका ज़िक्र किए बिना चैन कहाँ....फरवरी माह में नगरनिगम सतना ने आम जनता को चेताया था, कि एनिकट में केवल एक हफ्ते का पानी शेष है,
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Apr 14 2009 04:57 PM
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लाचार हैं,शहंशाहे-ग़ज़ल...

शहंशाहे -गज़ल मेंहदी हसन साहब पिछले चार सालों से लकवा ग्रस्त हैं, और अपने बेटों पर आश्रित हैं। चार साल पहले ही वे मुम्बई आए थे इलाज़ के सिलसिले में। अपने पसंदीदा गायक को इस हाल में देख उनके चाहने वालों ने दिल खोल कर मदद की। हसन साहब के बेटों का कहना था कि
 
वन्दना अवस्थी दुबे
Apr 12 2009 05:29 PM