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अनजाने अक्स
कभी कभी तन्हाई में टिक जाती है नज़रकहीं शून्य मेंउतरने लगते हैं अक्स जान - पहचान
औरअनजान लोगों के...और मैं घबरा करबंद कर लेती हूँ पलकें
Jun 15 2010 04:16 PM


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