बिखरे  मोती's Image

बिखरे मोती

http://gatika-sangeeta.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
15 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
44
पाठक भेजे
967
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
21.98
पसंद करें
6
नापसंद करें

अनजाने अक्स

कभी कभी तन्हाई में टिक जाती है नज़रकहीं शून्य मेंउतरने लगते हैं अक्स जान - पहचान औरअनजान लोगों के...और मैं घबरा करबंद कर लेती हूँ पलकें
 
संगीता स्वरुप ( गीत )
पसंद करें
6
नापसंद करें

मौन का ताला

जब  भी   चाहा तुमने  दस्तक देना , मेरे  ख्यालों  का  दरवाज़ा  हमेशा तुमको  खुला  मिला  था  आज  मैंने चाहा कि  ज़रा  खटखटा  दूँ  पर वहाँ एक  मौन का  ताला  जड़ा
 
संगीता स्वरुप ( गीत )
पसंद करें
6
नापसंद करें

ऐसा तेरा आना .............

ख़्वाबों में  तेरा आना  और  बिना दस्तक  दिए  चले जाना  सालता  है मुझे  जागी आँखों से गुमसुम सी   कदमों के निशाँ  गिना करती हूँ   . 
 
sangeeta swarup
पसंद करें
6
नापसंद करें

कुछ तो लोग कहेंगे .....

ओढ़ रखी थी  जब तक  खामोशी  लोग तब  पर्त- दर - पर्त  कुरेदा करते थे .... आज  जब  खामोशी ने  तोड़ दिए हैं  मौन के घुँघरू  लोग अब उसे  वाचाल कहते हैं .. .
 
sangeeta swarup
पसंद करें
3
नापसंद करें

सुकूँ

                                                                      
 
sangeeta swarup
पसंद करें
4
नापसंद करें

तल्ख़ जुबां की किरचें

खुद को  समेटते समेटते चुभ गयीं हैं किरचें कुछ तल्ख़  जुबां की , सहलाते हुए  शब्दों का  मरहम भी  अब बेअसर हो मन को लहुलुहान किये  जाता है.. 
 
sangeeta swarup
पसंद करें
6
नापसंद करें

लिबास ख्वाब का

ख्यालों के  रेशमी  धागों से  ख़्वाबों का  पैरहन  बुनते हुए  एक फंदा  छूट  गया  जुबान की तल्ख़  सलाइयों ने  लिबास ख्वाब का  तार - तार कर दिया.
 
sangeeta swarup
पसंद करें
5
नापसंद करें

भटकन ....

ख्वाब - ज्यों  ओस की बूंद  हाथ लगाओ तो  पानी बन जाती है  हकीकत का ताप  देता है सुखा  और हम  ज़िन्दगी के  रेगिस्तान में  भटकते रह जाते हैं .
 
sangeeta swarup
पसंद करें
6
नापसंद करें

यूँ छिटकी चाँदनी

तेरी ख्वाहिशों के  चाँद ने  मेरे मन के  सागर को  ज्यों ही छुआ  लहरों के  उद्दाम वेग से  साहिल पर  बिछी  तपती रेत पर  जैसे  चाँदनी  बरस गयी 
 
sangeeta swarup
पसंद करें
4
नापसंद करें

एक चुप

शोखियाँ   जो बोलीं वो भी  बेबसी ही थी , उदासी भी थी कुछ ज़मीं के  फासलों  से , यूँ तो था नहीं  कोई  दरम्याँ    हमारे, बस एक चुप थी  जो मन को  बहुत सालती थी....
 
sangeeta swarup
पसंद करें
4
नापसंद करें

तू मेरा , बाकी तेरा

खुदा  मेरे , तूने  इस कायनात को बड़े करीने से बनाया है ,ज़मीन पर खींच दी हैं  लकीरें इंसान ने ,और फ़लक  तेरे हिस्से आया है ,चल आ  बाँट लें इस कायनात को आज ,ये मेरे मन में आया है ,बस तू रहे
 
sangeeta swarup
पसंद करें
6
नापसंद करें

हकीकत की आंधी

उदासी की गलियां तो जानी पहचानी थीं फिर भी इमामबाड़े की भूलभुलैयाँ की तरह भटक गया है मन थक हार कर आखिर जा बैठा है ख्वाहिशों के दरख्त के नीचे जहाँ चाहतों के पत्ते झड़ झड़ कर गिर रहे हैं. और उड़ते जा रहे हैं निरंतर दिशाहीन से हकीक़त की आंधी
 
sangeeta swarup
पसंद करें
4
नापसंद करें

गमकता जिस्म

जिस्म  , खामोश था पथराया हुआ रूह ने कुछ फूल चढ़ा दिए अश्कों के उस शिला पर जिस्म भीग कर गमकने लगा था  
 
sangeeta swarup
पसंद करें
4
नापसंद करें

जिस्म और रूह

जिस्म की खरोंचों को तो सहला लिया चाँद कीमीठी सी परछाईं  ने.. पर रूह का क्या जो जख्म पा रोती रही बंद आँखों से शब् भर ... .
 
sangeeta swarup
पसंद करें
3
नापसंद करें

खारे ख्वाब

आँख  से  टपका एक  ख्वाब   रुखसार  पर  ढुलक   गया  और   जज़्ब  हो गया  लबों में  आज जाना  कि   ख्वाब   खारे  क्यों  होते हैं  ?  
 
sangeeta swarup
पसंद करें
2
नापसंद करें

बेवफाई

बेचैनियाँ जब हद से गुज़र जाती हैं तो खलिश बन जाती हैं ,बेबसी जब बाँध लगाती है तो चुभन बन जाती है ,वक्त को कब कौन रोक   पाया हैऐ मेरे दोस्त ,जब वक्त साथ न दे तो बेवफाई  बन   जाती है.
 
sangeeta swarup
पसंद करें
3
नापसंद करें

बारिश

बिखरे वजूद के अक्स को समेट लरजती हुई साँसों से घायल से जज़्बात लिए एक छटपटाती सी नज़्म तैर गयी है मेरी सूनी आँखों में , इस बार बारिश नहीं हुई          
 
sangeeta swarup
पसंद करें
2
नापसंद करें

कल्पना का इन्द्रधनुष

कल्पना के इन्द्रधनुष को किसी क्षितिज की दरकार नहीं ये तो उग आते हैं मन के आँगन के किसी कोने में ....
 
sangeeta swarup
पसंद करें
1
नापसंद करें

हुनर

उदासी सी मन पर यूँ ही उतर आई किसी ने कहा कि ये भी एक हुनर है . जो सीख लें हुनर तो बुराई क्या है हर हुनर को सीखने का हौसला होना चाहिए          
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

नमक

समझौतों ने कभी भी मरहम नहीं लगाया मन की दरार पर ये तो वो नमक है जो लोग लगा देते हैं अक्सर जख्म पर ,
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

वजूद

वजूद के टुकड़े क्या बांटेंगी उदास शामें और ग़मज़दा रातें जिसने टुकड़े टुकड़े जोड़ कर ही बनाया हो वजूद अपना .
 
sangeeta swarup
Mar 11 2010 11:20 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ख़्वाबों की कश्ती

ख़्वाबों को कश्ती में डाल कर उतार दिया है इस जहाँ के दरिया में मंझधार से बचे तो बेड़ा पार लगे.
 
sangeeta swarup
Mar 07 2010 02:48 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शबनम .

समंदर छलका जो आँखों का तो, बह आई एक लहर मन के साहिल की तपती रेत पर पड़ गयी हो जैसे शबनम .                  
 
sangeeta swarup
Mar 05 2010 12:17 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आईना

रख दिया है फिर से एक नया आईना मैंने ख़्वाबों के सामने और क्षत -विक्षत से ख्वाब लगें हैं सजने फिर आईने में
 
sangeeta swarup
Feb 27 2010 10:13 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

गुजारिश

टुकड़ा ए दिल सहेज लिया है मैंने तू बस फिरा दे ज़ख्म पर अपनी अंगुली .
 
sangeeta swarup
Feb 21 2010 11:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ख्वाब

ख्वाब बुन दिया है मैंने रेत पर उँगलियों से कि रात भर तेरी खुशबू से महकती रही सहर होते ही देखा मैंने कि मेरी झोली तूने पारिजात से भर दी थी ...      
 
sangeeta swarup
Feb 13 2010 12:14 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नया ख्वाब

मन की अल्हड़ता से फूट पड़ते हैं सोते भी रेगिस्तान में, साहिल पर बैठ रेत में उंगली फिरा एक  ख्वाब नया बुन
 
sangeeta swarup
Feb 07 2010 05:12 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोती

इश्क के पैरों में ना जाने क्यों गम के घुंघरू बंध जाते हैं आँखों में हंसी भी हो तो भी रुखसार पर अश्क के मोती टपक जाते हैं        
 
sangeeta swarup
Feb 05 2010 01:54 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

उम्मीद

उम्मीद के रोशनदान पर लगा दिए हैं पहरे बंद कर पलकों को कान खोल लिए हैं हर आहट पर लगता है कि उम्मीद पूरी हो गयी        
 
sangeeta swarup
टैग: chhoti kavita
Feb 02 2010 09:07 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सौगातें

मैंने महज़ तुझसे प्यार माँगा था मैंने बस तुझसे वफ़ा चाही थी मैंने तेरी ही खुशियों के लिए अपनी झोली फैलाई थी पर तूने भेज दीं हैं सौगातें मेरे हिस्से की जिसमें हैं तेरी नफरत , रुसवाई औ बेवफाई
 
sangeeta swarup
टैग: chhoti kavita
Jan 30 2010 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

लोरी

कागज़ पर उतार अपने जज्बातों को रख लिया है सिराहने जब भी बेचैन हुए लोरी सुना दी
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

पंडोरा बॉक्स

पंडोरा बॉक्स की ही तरह है ये अंखियों की डिब्बी ज़रा खोल दो तो सारे ख्वाब बाहर कूद आते हैं.
 
sangeeta swarup
Jan 27 2010 06:37 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

घुंघरू

ख़ामोशी के घुंघरू भी करते हैं बहुत शोर कभी कभी महफ़िल में भी तन्हाई होती है चारों ओर .
 
sangeeta swarup
Jan 21 2010 03:19 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

चिंगारी

राख के नीचे चिंगारी अभी बाकी है ज़रा प्यार का पंखा झल कर तो देखो
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

यादों की पोटली

यादों की पोटली जब सिरहाने रखी तो विस्मृत सी बातें निकल आयीं उसमें से, और नींद आँखों से कोसों दूर हो गयी.
 
sangeeta swarup
Jan 20 2010 10:53 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ठिठोली

तन्हाई में आज चाँद, चांदनी संग ठिठोली कर रहा था सितारे सब तेरे आंचल में शर्मा कर छुप गए .
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

चमक

हथेलियों ने सहला दिया था आँखों को और समेट लिए थे सारे मोती वापस आ गयी है आँखों में फिर से वो चमक जिसकी रोशनी में तुम नहाया करते थे
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

इंतज़ार

इंतज़ार में तेरे बैठे हैं दो दीप जलाये आस है कि कभी तो तेल ख़तम होने से पहले आए    
 
sangeeta swarup
पसंद करें
0
नापसंद करें

सूखे फूल

ख्वाब यूँ ही दफ़न हो जाते हैं ज़िम्मेदारी की किताबों में परत दर परत.. पन्ने पलटो तो झर जाते हैं सूखे फूल की तरह
 
sangeeta swarup
टैग: chhoti kavita
Jan 12 2010 06:05 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पायदान

दिल के पायदान पे कदम रख तेरे अक्स ने दस्तक दी है अब मुझे आफताब औ महताब भी अज़ीज़ नहीं .            
 
sangeeta swarup