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सरल कुमार

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15 Jun 2010
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सच्चा प्यार -भाग पंद्रह ( ईश्वर से शिकायत प्रेम को लेकर )

अभी प्यार की कविताओ की कड़ी में ये आज पंद्रहवी कविता हैं । आशा हैं आपको पसंद आएगी । इसमें थोडा ईश्वर से शिकायत भरी बाते हैं , जो शायद वो सहन कर ले । भाव में तारतम्यता के लिए चौदहवी कविता का लिंक देने की जरुरत नहीं क्योंकि वो exact पहली पोस्ट में हैं ,आप
 
Virender Rawal
Jun 16 2010 06:14 AM
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प्यार पर कविता - भाग चौदह

भूमिका की आवशयकता नहीं हैं क्योंकि आप पिछले भागो में पढ़ सकते हैं ।तेरहवी कविता का लिंक नीचे हैं ।http://saralkumar.blogspot.com/2010/06/blog-post_06.htmlचोदहवी कविताउसे मेरी आँखों में गहराई नज़र आती थी ,वो मेरी बातो की सच्चाई समझ जाती थीउसे पाने का अहसास
 
Virender Rawal
Jun 12 2010 06:33 PM
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ब्लॉग को लोकप्रिय बनाने की महत्वाकांक्षा ( हास्य व्यंग्य )

सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक्षा के शिकार हो गए की उनका ब्लॉग भी पोपुलर हो जाये तो सबसे पहले नैतिकता को टाटा कर दिया गया क्योंकि प्रतिभा उसमे थी नहीं और उसका सरल मन
 
Virender Rawal
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राष्ट्र प्रेम को समर्पित मेरी एक और कविता

मेरे लिया तो प्रेम ईश्वर, राष्ट्र, समाज और मित्र सबमे हैं . प्रेम का हर भाव मुझे ईश्वर की देन लगता हैं क्योंकि हमारे व्यक्तिगत प्रेम में तो स्वार्थ भरा होता हैं . आज कुछ ईश्वर प्रेम ने राष्ट्र को समर्पित ये कविता लिखने को उत्साहित किया . शुरू में थोडा
 
Virender Rawal
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प्यार पर कविता -भाग तेरह

अभी प्रेम भाव के ऊपर रची ये कविता आपके श्री चरणों में समर्पित हैं । बस बैठे बैठे बन गयी कुछ सच हैं कुछ कल्पना । पहली वाली कड़ीयो को भी जोड़ कर पढ़ सकते हैं । ब्लॉग पाठक लिंक भी कविता के आखिरी में पढ़ सकते हैं ।प्यार में तो जीने के अब ना सहारे ही रह गए नदी
 
Virender Rawal
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प्रेम कविता - ( भाग बारह ) (इश्वर से शिकायत भरी )

आजकल कई बार ईश्वर से बहस हो जाती हैं । जीतना तो खैर उसने ही हैं , क्योंकि मेरे पास उसके जितने ताकतवर संत और ज्ञानी नहीं हैं । पूरी दुनिया उसके समर्थन में खड़ी हैं और मैं कुछ गिने चुने दुखी लोगो की तरफ से प्रतिनिधि बना हुआ हूँ । पर फिर भी कोई बात नहीं ,
 
Virender Rawal
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राष्ट्र और समाज को समर्पित मेरी एक कविता

इस बार मैं मेरे ईश्वर प्रेमी साधको से माफ़ी चाहूँगा क्योंकि ये कविता भक्ति या प्रेम के ऊपर नहीं हैं । कुछ आदतवश भाव आ सकता हैं पर मैंने उस भाव को रोकने कि बड़ी कोशिश कि हैं । देश ओर समाज में जो आजकल हो रहा हैं । उससे कुछ बाते अच्छी हैं कुछ हौसला तोड़ देने
 
Virender Rawal
Jun 02 2010 08:19 PM
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एक कविता वृन्दावन यात्रा के ऊपर

वृन्दावन हो कर आ भी गया , इस बार थोडा क्रेश कोर्स जैसा किया । इतनी जल्दी थी मुझे कि कृष्ण भी कह रहे थे कि नहीं ऐसा आगे नहीं चलेगा । खैर फिर भी भाव में आकर सोचा कि कृष्ण कि चापलूसी में एक कविता लिख डालू । तो इस बार जहाँ नहीं गया था वहां का वर्णन भी कर
 
Virender Rawal
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ईश्वर , प्रेम और जिंदगी के ऊपर एक कविता

कल वृन्दावन जाना हैं तो कृष्ण राधे के प्रेम और हमारे अपने जीवन कि जटिलताओ को जोड़कर एक कविता बना ही डाली । जैसा कि स्वाभाविक हैं मेरे जैसे तुच्छ जीव का प्रेम तो इसमें आएगा ही । चलिए आदत से मजबूर भावुक ना हो जाऊ , इसीलिए आपको श्री चरणों में ये कविता का भाव
 
Virender Rawal
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मंगलोर विमान दुर्घटना और सरकार मीडिया मिश्रित संवेदनहीनता

पहले श्री संजय बेंगानी जी का ये लेख पढ़े जिसके बाद मैं ये पोस्ट लिखने को प्रेरित हुआ . मैंने बस उन्ही के मुद्दों में और चीज़े जोड़ी हैंhttp://www.tarakash.com/joglikhi/?p=1724ये भी शुक्र मानिये कि इसमें ज्यादा हिन्दू या ज्यादा मुस्लिम नही मरे नहीं तो शायद
 
Virender Rawal
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रूठी दोस्त को मनाने के लिए एक कविता

दोस्ती ईश्वर का सबसे नजदीक का भाव हैं . मुझे अपने सारे दोस्तों में ईश्वर दीखता हैं इसीलिए उनसे कुछ भी छिपा नहीं सकता। दोस्त इसीलिए भी थोड़े पास होते हैं क्योंकि जो बात कुछ लोग घर में नहीं बता सकते वो दोस्त के सामने दिल खोलकर बता सकते हैं और हर सच्चा
 
Virender Rawal
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कैरियर उत्थान के लिए दृढ उपवास ( हास्य व्यंग्य )

महीनो से सरल कुमार को थोडा जटिल महंगाई दरो ने मारा हुआ था । अब ऐसे मूर्ख टी वी तो देखते नहीं जहाँ शीला दीक्षित जी के सेन्स ऑफ़ ह्यूमर से संचालित बयानों से महंगाई रोकने की बात साबित होती हैं । सरकार के पूरे आंकड़े इनके पास नहीं होते तो ऐसे आलसी और
 
Virender Rawal
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प्यार पर कविता भाग ग्यारह

मुझे पता नहीं वो इन कविताओ का अर्थ समझती भी थी या नहीं , पढ़ती थी भी या नहीं , या सिर्फ मेरा दिल रखने के लिए झूठी बड़ाई " वाह वाह " के रूप में कर देती थी । अगर सच में इनके बीच में छुपे अर्थ उसे समझ में आते तो शायद रातो की नींद उड़ जाती और मुझसे एक एक पंक्ति
 
Virender Rawal
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सरल कुमार का जीवन उत्थान के लिए कड़ा उपवास ( हास्य व्यंग्य )

पिछले कई महीनो से सरल कुमार को थोडा जटिल महंगाई दरो ने मारा हुआ था । अब ऐसे मूर्ख टी वी तो देखते नहीं जहाँ शीला दीक्षित जी के सेन्स ऑफ़ ह्यूमर से संचालित बयानों से महंगाई रोकने की बात साबित होती हैं । सरकार के पूरे आंकड़े इनके पास नहीं होते तो ऐसे आलसी
 
Virender Rawal
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प्रेम कविता ( भाग दस ) राधा जी की कृष्ण को समर्पित कविता

कुछ लोग ज्ञान को बड़ी भारी वस्तु बना देता हैं । असल में तो ज्ञान ही तो चीजों को सरल बना देती हैं । भक्ति और ज्ञान और प्रेम सब एक ही हैं । जब आप परम ज्ञानी हो तो आप पर प्रेम प्रगट होगा , या यूँ कहले की इनमे द्वैत क्यों लाया जाया जब ज्ञान में सब अद्वैत हैं
 
Virender Rawal
May 21 2010 03:52 AM
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हम देसी लोग : हमें हर चीज़ का देर से पता चलता हैं ( कुछ वाकये जीवन से )

टिशू पेपर -एकहम देसी लोगो के साथ यही दिक्कत होती हैं की हमें चीज़े देर से समझ में आती हैं । मेरी जीवन में भी ऐसा सा ही हुआ था दो बार . 1994 में स्कूल के फंक्शन में जब सारा काम निबट गया था तो हम यूँ ही आवारो कुत्तो की तरह "चेकिंग" पर निकले थे . इस टिशु
 
Virender Rawal
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प्यार पर कविता - भाग नौ

हर व्यक्ति के लिए प्यार करना संभव नहीं क्योंकि करना एक बलात प्रक्रिया हैं और प्रेम एक स्वाभाविक । फिर जब लेखक कि भी गहरी मानवीय संवेदना इसमें जुड़ जाती हैं तो एक रचना का निर्माण होता हैं । वो कहते हैं ना कि आपका दुःख भी एक मनोरंजन का स्रोत बन जाता हैं
 
Virender Rawal
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ईश्वर और अल्लाह एक और हम हिन्दू मुस्लिम ब्लॉगर ,,पुनर्जन्म

वैसे मैं इन हिन्दू मुस्लिम बन्दों से थोडा दूर रहता हूँ क्योंकि मेरे जैसा भावुक व्यक्ति हर समय बेमतलब ईश्वर प्रेम को बीच में ले आता हैं । अभी दो तीन हफ्ते से शायद सावरकर जी पर हिन्दू मुस्लिम जगत में पुनर्जन्म को लेकर काफी बहस हो रही हैं । हमेशा की तरह
 
Virender Rawal
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प्यार पर कविता -भाग आठ

इससे पिछली कविता का लिंक हैंhttp://saralkumar.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.htmlआठवी कवितावो कभी मेरे पास तो आये , मेरे लिए बाहे फैलायेमेरी गोद में सर रख कर मुझसे रूठे तो सहीहाथ में मेरा हाथ लेकर मुझे ताने दे तो सहीमैं फिराऊ उसके बालो में हाथ वो रोये
 
Virender Rawal
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प्रेम कविता - भाग सात

अब वैसे इतनी कविता लिखने के बाद किसी भूमिका क़ी जरुरत तो नहीं हैं । बेहतर यही हैं कि जो आप में से कोई इस कडी क़ी कविता पहली बार पढ़ रहे हैं , वो छठा भाग भी नीचे दिए लिंक से पढ़ ले । हर भाग में पिछले भाग का क्रमांक दिया हैं जिससे इस थीम का मूल स्वरुप
 
Virender Rawal
May 09 2010 06:18 AM
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प्रेम को समर्पित कविता ( ईश्वर प्रेम )-भाग छः

अब तक मैंने प्रेम के ऊपर पांच कविताये लिखी हैं । इनको भागो में इसीलिए बना रहा हूँ कि मुझे प्यार पर अगर खुद भी ढूंढना पड़े तो आसानी से लिंक मिलता जाये । विषय क्योंकि मुझसे , ईश्वर से और उस लड़की से प्रेरित हैं इसीलिए ये सांझी थीम रखने के लिए भाग क्रमांक
 
Virender Rawal
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सच्चा प्यार - मेरी पांचवी कविता

इस कड़ी में मेरी ये पांचवी कविता हैं । प्यार आपको ईश्वर से हो सकता हैं । अपने किसी परिवार के सदस्य से या किसी मित्र से हो सकता हैं । मुख्य बात समर्पण और त्याग की हैं । दुःख तो प्यार में हमेशा मिलेगा क्योंकि आप इसमें हमेशा अपने सुख को त्याग देते हो और सारा
 
Virender Rawal
May 01 2010 05:15 AM
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श्री राधा जी का दिव्य प्रेम ( सच्चे प्रेम की परिभाषा )

हम वैसे इस योग्य तो नहीं कि राधा जी के विरह को समझ सके । वो तो शाश्वत परात्पर ब्रह्म क़ी ही चैतन्य शक्ति हैं । पर हम तो ईश्वर के बेटे हैं । इसीलिए बेटे को पिता के बारे में कहने के लिए कोई कागज़ी स्वीकृति कि आवशयकता नहीं होती ।ईश्वर प्रेम या अपने सच्चे
 
Virender Rawal
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मेरी चौथी कविता प्यार की

मेरी इस कड़ी में चौथी कविता हैं , मेरी अपनी सच्ची घटना से सबंधित होने कारण इन चारो कविताओ को श्रृंखला बध पढ़े तो इससे मेरे दुःख को आप ज्यादा मनोरंजक पाएंगे । तीसरी कविता का लिंक भी नीचे दे रहा हूँ , ( उस तीसरी पोस्ट में पहले और दुसरे भाग के भी लिंक हैं ) ,
 
Virender Rawal
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सरल कुमार का इंग्लिश प्रेम ( हास्य व्यंग्य )

((( यह एक अपनी पुरानी पोस्ट को चेंज करके लिखी हैं ))))) सभी युवा भारतीयों में अपने पढ़ाई के आखिरी सालों में अपनी मातृभाषा से गद्दारी करने की बड़ी भयंकर लाइलाज बीमारी पायी जाती है । इसे कभी सुधारी हुई भाषा में इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स या ग्रुप डिस्कशन या
 
Virender Rawal
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वैराग्य पूर्ण भजन - एक खुद मस्ती बिन और मस्त ............

यह थोडा वैराग्य जगाने वाले भजनों में से एक हैं । इसके मूल लेखक और मूल स्रोत का मुझे अभी पता नहीं हैं । आप में किसी को पता हो तो कृपया मुझे बताये जिससे मैं वो भी यहाँ लिख सकू । ये भजन मैंने बापूजी के सत्संग में सुना हैं । मूल भजन में कई शब्द कठिन हैं ।
 
Virender Rawal
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मेरी तीसरी कविता ( मेरा प्यार रिश्तो का मोहताज़ नहीं )

ये इस कड़ी में मेरी तीसरी कविता हैं । लिख तो पहले ही ली थी । पर तनाव के कारण बहुत सारी दुखी चीज़े इसमें डाल दी थी । पर अब थोडा कम दुःख वाली बनायीं और जो बाते थोड़ी साझी समझ वाली थी वो इसमें डाल दी ।इसके पहले और दुसरे भाग के लिंक ये हैंपहला
 
Virender Rawal
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दैनिक कडिय भाग छः

सानिया कि शादी पर बवालहमारा देश भी इतने मज़ेदार बुद्धू लोगो से भरा हैं कि जो खबर हो उसकी तो मरम्मत करते ही हैं पर साथ में बे जरुरी बातो से पूरे माहौल को हम टी वी सीरियल बना देते हैं । एकता कपूर ने हमारी सही नस पकड़ी और बेमतलब के शादी के झमेले के विकल्प
 
Virender Rawal
टैग: daily news
Apr 03 2010 03:37 PM
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जिंदगी में सब इतना ख़राब लगता हैं कि जीने का मन नहीं करता ।

मेरे पोस्ट ज्यादातर यथार्थ , दुःख और धर्म से जुड़े होते हैं । असल में जीवन में यही सब देखा हैं इसीलिए क्रिकेट ,फ़िल्मी मस्ती , राजनीति में अब मजा नहीं आता हैं । बीस साल ( अभी तीस ) तक कि उम्र तक ही सब देखकर लगा कि दुनिया में कही गड़बड़ हैं । माया मोह समाज
 
Virender Rawal
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कविता प्यार की - भाग दो

इस कड़ी में ये मेरी दूसरी कविता हैं । असल में पहले सोचा कि इन्हें भागो में ब्लॉग में ना डालू पर समरूप होने के कारन कविता कि मौलिकता नष्ट नहीं होती और पढने वाले के विचारो में तादात्मय स्थापित रहता हैं । अब क्योंकि मन में भावुकता ज्यादा हैं तो सोचा प्यार के
 
Virender Rawal
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महापंचायतो के खिलाफ न्यायालय का एक ऐतिहासिक फैसला ( क्या हालात सुधरेगे ?"

कृपया पहले अगर आप हरदीप जी कि ये ब्लॉग पोस्ट पढेंगे तो थोडा पूरक सामग्री भी आपको मिलेगी ।http://hardeeprana.blogspot.com/2010/03/blog-post_31.htmlलेखक की संवेदना गहरी मानवीय संवेदना हैं . हरदीप ने इस पोस्ट में सही विश्लेषण किया जिसमे मुझे कहना पड़ा "
 
Virender Rawal
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दैनिक कडिया भाग पांच ( गुडगाँव विशेष )

गुडगाँव वैसे तो कहने को साइबर सिटी हैं । पर कई जगहों पर इतनी समस्या हैं कि आप का मन बस बिलकुल तौबा कर ले । जमीनों के रेट इतने महंगे हैं की बिना कर्जा लिए एक आम मध्यम वर्गीय मकान नहीं खरीद सकता । यह सारा काम कभी कभी लगता हैं की भ्रष्टाचारो की वैतरणी में
 
Virender Rawal
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एक कविता प्यार को समर्पित ( एक अपने अनुभव पर आधारित कविता )

यह कविता एक सच्चे अनुभव पर आधारित हैंये एक बहुत ही गहरे अनुभव के बाद लिखी हैं। असल में मैं इस दर्द को सहन नहीं कर पाया और टूटकर ये कविता लिख पाया . बस शुरुवात कि दो पंक्तिया मैंने एक ब्लोगेर अम्बरीश जी से ली हैं । आगे की सारी पंक्तिया ( नीले रंग में )
 
Virender Rawal
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हृदय से निकली मेरी काल्पनिक जीवनी ( हास्य व्यंग्य )

हे इश्वर !आप तो दुनिया बनाकर भाग गए । अकेला मरने के लिए मुझे छोड़ दिया । बचपन में स्कूल में पिटाई खाने का डर सताता रहता था पर आप कोई ज्यादा मददगार ना हुए । उस साइंस के पीरियड में डिजिटल घडी की एक एक मिनट को गिनता मैं आखिरी क्षण में घंटी सुनने के लिए तरस
 
Virender Rawal
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सरल कि सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर हैं ( हास्य व्यंग्य )

सारा दिन हर चीज़ में जिस ढोंग के साथ जिंदगी बितायी जाती हैं । सरल जी उसे प्रोफेशनल सोच समझते हैं ।इनकम नहीं हैं पर टैक्स काटा जा रहा हैं । कर्मचारियो में इज्ज़त बचाने के लिहाज़ से कस्टमर केयर लम्बे लम्बे फोन करता हैं कि ये 80 C में कोई नया झोल आया हो तो
 
Virender Rawal
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दैनिक कड़िया भाग चार

टी वी पर एक एड आती हैं कोलगेट पेस्ट कि जिसमे लारा दत्ता पूछती हैं " क्या आपके टूथ पेस्ट में नमक हैं " । मतलब वह यही कहना चाहती हैं कि टूथपेस्ट में नमक जरुरी हैं । अब इसका प्रासंगिक पहलु यह हैं कि चीजों को बेचने में सारी समझ और नैतिकता परे कर देना किसी कि
 
Virender Rawal
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हरि चरणों में अंतिम प्रार्थना ( आर्त भक्त )

हे मेरे इष्टदेव ! हे हरि , हे गुरुदेव! अब इस संसार कि मुझे कोई चाह नहीं । हर तरफ तो तेरे प्रोफेशनल लोगो कि भीड़ हैं जिसे आपसे प्रेम करने में भी मतलब चाहिए। मुझे तो इन्होने मानसिक रोगी ही समझ रखा हैं । और इनकी इस समझ को प्रभु आपने भी तो इतना सहारा दिया
 
Virender Rawal
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जीवन का उद्देश्य और दुनिया में उलझे हम लोग

कभी कभी लगता हैं कि हम इतना जीवन जी लेते हैं पर कोई सार नहीं । और सुबह से शाम तक बस कम में लगे रहो का नारा लेकर मशीन बने रहते हैं । इसमें सबसे बुरा हाल हम कम्पनी कर्मचारिओं का होता हैं । वहां सारी चीज़ें इतनी जटिल होती हैं कि एक बार तो मन करता हैं सारा
 
Virender Rawal
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प्रभु से मन को लेकर प्रार्थना

हे हरि !जब एक हाड़ मास का पिता अपने बच्चो के अपराधो को ना देखकर सिर्फ उन्हें वात्सल्य भाव से गले लगा लेता हैं तो फिर क्यों आप परमपिता होते हुए भी हमारी योग्यता को हिसाब से दर्शन देने को इंतज़ार करवा रहे हैं । हम जैसे हैं प्रभु तेरे हैं। अगर मिटटी से सने
 
Virender Rawal
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इश्वर को पाने के कुछ सरल साधन

इश्वर को पाने के साधन अनंत हैं । बस मुख्य बात ये हैं कि हमारा लक्ष्य इश्वर प्राप्ति हैं या इश्वर से किसी और चीज़ कि प्राप्ति । मैंने जितना अपने बापूजी से सुना और भी दुसरे वन्दनीय संतो से और धार्मिक ग्रंथो से सार सार लिया । उसे संक्षेप में करने कि कोशिश
 
Virender Rawal