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मुरादाबादी अड्डा

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07 Apr 2010
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तेरी हंसी से हंसती है जिन्दगी

तेरी हंसी से हंसती है जिन्दगी;तेरे रोने से रो जाती है जिन्दगी।अब मेरे टूटे दिल को मरहम की जरूरत नहीं;अब तो हर मोड़ पर चोटें खाती है जींदगी।क्यों करते हो हमारी फ़िक्र मेरे दिलबर;दर-दरपर ठोकरें पाती है जिन्दगी।तेरे साथ बिताये लम्हों के सहारे;हर तन्हा रात को
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
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प्रकृति का नज़ारा

प्रकृति को दिल दे महसूस करो.........
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
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हादसा

रोज होते है,हादसे.शहर में,चोराहो पर, सड़क पर.हो जाता है भयावह माहोल वहां पर.होती है चीख-पुकार हर तरफ.हम भी देखते हैं अक्सर ये मंजर.और चल देते हैं,'बहुत बुरा हुआ ' कहकर .क्योकि हमे है जल्दी अपनी मंजिल पर पहुचने की.हमे नहीं है फुरसत वहां पर मदद करने की.नहीं
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
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गजल

मेरी बर्बादी का वो जशन मनाएंगे,रोयेगा ये दिल, पर हम दुनिया को हसाएंगे।दहल जायेगा दिल उनका,जब दुनिया वाले उन्हेंमेरी मौत का किस्सा सुनाएंगे।हम सुनाएंगे किस्से उनकी बेबफाई के,वो भी किस्से अपनी बेबफाई केसाथ मेरे गुनगुनाएंगे।करेंगे वो याद हमको रह-रहकर,जब
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
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गज़ल

बसायी थी दुनिया प्यार की;वो आज वीरानी हो गयी।चाहा था जिसे जां से ज्यादा ;वो अब वेगानी हो गयी।थी कल तक पागल जो दुनिया के लिए;वो आज दीवानी हो गयी।थी बच्ची जो कल तक;वो शायद शयानी हो गयी।थामा हाथ उसने रकिवों का;उनकी जिन्दगी अब सुहानी हो गयी।करना प्यार की
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
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Mar 05 2010 11:43 AM
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एक हिंदी वेबसाइट

मुरादाबादी अड्डा के प्रिय पाठको मै एक हिंदी वेबसाइट का निर्माण करने जा रहा हूँ। जहाँ पर उन लोगो को मंच मिलेगा जो कुछ लिखते है परन्तु उन्हें पढने बाले कम मिलते हैं। आप भी इस कम मै मेरा साथ दे सकते है। मै आप के सहयोग की कामना करता हूँ।
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Mar 03 2010 05:40 PM
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खान हिट शिवसेना फ्लॉप

शुक्रवार को 'माय नेम इज खान' के रिलीज होते ही शिवसेना बोल्ड हो गयी । शिवसेना की सभी धमकियाँ धरी की धरी रह गयीं। इससे पहले राहुल गाँधी को मुंबई आने की धमकी के बाद भी शिवसेना कुछ नहीं कर पाई थी और अब खान की रिलीजिंग को रोकने की धमकी के बाद फिल्म का
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Feb 15 2010 02:07 PM
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हम पर ये एतबार करो

हम है आप के हम पर ये एतबार करो;ना जाये कहीं और हमे इतना प्यार करो ।हमे चाहिए तुम्हारे साथ चैनो- सुकून ;हमारे दिल को इस तरह न बेकरार करो। अब जाये कहां हम तुम बिन;सितमगर ये सितम हम पर ना बार -बार करो।हमें है आश आज भी की तुम हो हमारे ;अब तुम ही दूर ये हमारा
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
टैग: गजल
Feb 03 2010 07:40 PM
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जिन्दगी मोहताज नहीं मंजिलों की

जिन्दगी मोहताज नहीं मंजिलों की;वक्त हर मंजिल दिखा देता है ।कुछ बिगड़ता नहीं किसी से बिछुड़कर;क्योंकि वक्त सबको जीना सिखा देता है।तूफान मे किस्ती को किनारे भी मिलते हैं;जहाँ मे लोगों को सहारे भी मिलते हैं।दुनिया में सबसे प्यारी है जिन्दगी;कुछ लोग जिन्दगी
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
टैग: गज़ल
Jan 22 2010 10:33 AM
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तन्हाई

नमस्कार दोस्तों मै हाजिर हूँ एक नई रचना के साथ नव वर्ष के बाद सन २०१० की प्रथम रचना मेरे काव्य जीवन की प्रथम रचना है।आज मै अपना मोबाइल नंबर इस रचना के साथ प्रदर्शित कर रहा हूँ कोई अगर मुझ से वार्ता करना चाहे तो वह मुझे ९५२८१९२९२९ या ९८३७५७२९२९ पर कॉल कर
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
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प्यार का बुखार

रात भर यादो का हंसी मंज़र देखा,हुई सुबहे तो वही टूटा हुआ घर देखा,वही खामोशी थी फ़ैली चारो तरफ,वही तकिया वही बिस्तर देखा,वीरानिया ही नज़र उस तरफ,हमने पलट कर जिधर भी देखा,बहारो के इंतज़ार में सो गए थे हम,आँख खुली तो फिर वही पतझर देखा,अजनबी सा लगा कुछ पल अपना
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Dec 22 2009 01:52 PM
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मुरादाबादी अड्डा

नमस्कार दोस्तों !                              आपका ये
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Dec 21 2009 04:15 PM
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गज़ल

रखते नहीं हैं बैर किसी आदमी से हम,फिर भी हैं अपने शहर में एक अजनवी से हम,देखा हैं जलते जबसे गरीबों का आशियाँ, डरते हैं हर चिराग की अब रोशनी से हम, हम बोलते नहीं हैं तो समझे न बेजुबां है, अपने घर की बात, कहें क्यों किसी से हम, तेरी ख़ुशी का आज भी इतना
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
टैग: गज़ल
Oct 29 2009 07:41 PM
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मुरादाबादी अड्डा

सच्चा धर्म तो पापों की जड काटकर मुक्ति का मार्ग प्रदर्शन करता है, पर मिथ्या धर्म में मुक्ति टकों के बल बिकती है.- रस्किन
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Oct 28 2009 06:47 PM
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मुरादाबादी अड्डा

जिसके क्रोध और हर्ष व्यर्थ नहीं जाते, जो आवश्यक कार्यों की स्वयं देखभाल करता है और खजाने की भी स्वयं जानकारी रखता है, उसकी पृथ्वी पर्याप्त धन बाली होती है.
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Oct 28 2009 06:33 PM
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मुरादाबादी अड्डा

नमस्‍कार मित्रोंआपका सब का मुरादाबादी अड़डा में स्‍वागत हैमुरादाबाद से जुड़े लोगों को यहां की नस नस में बसे अड़डा संस्‍कति के बारे में बताने की जरूरत नहीं है वो अपने आप ही इसे सांस के साथ जीते हैं और उसे इस्‍तेमाल करते हैं।
 
अंकुर कुमार 'अश्क'
Oct 27 2009 08:28 PM