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बेतकल्लुफ़

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31 May 2010
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बेलगाम लाल आतंक, सहमी है सरकार!

ये नक्सलवादी नहीं, आतंकवादी हैं। आम आदमियों के हक की जंग लड़ने का दावा करने वाले नक्सली अब आम लोगों का ही खून बहा रहे हैं। नक्सलियों ने ------------पश्चिमी मिदनापुर (पश्चिम बंगाल) में नक्सलियों ने 27 मई को हावड़ा से कुर्ला जा रही ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस को
 
रणविजय
May 31 2010 07:56 PM
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ये किसका है ख़ंज़र?

ये किसका है खंज़र, ये खंज़र से पूछो,ये तेरा नहीं है, ये मेरा नहीं है।ये मुकुल की ग़ज़ल का शेर नहीं, लहूलुहान शहर की हैदराबाद की कराह है। हर शहर की तरह यहां भी ख़ून बहाने वाले खंज़र, ज़ख्म खाने वालों के नहीं थे।दो गुट। एक के हाथ में भगवा छुरा, और दूसरे
 
रणविजय
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किसे धोखा दे रहे हैं हुसैन?

मकबूल फिदा हुसैन को कतर बड़ा रास आ रहा है। वो वहां के गुण गाते नहीं अघा रहे। वो कहते हैं----------मकबूल फिदा हुसैन : मुगालते में हैं या दूसरों को धोखा दे रहे हैं?----------‘कतर में मैं पूरी आज़ादी का लुत्फ़ उठा रहा हूं। अब कतर ही मेरा घर है। यहां मेरी
 
रणविजय
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पाकिस्तान : तख़्तापलट की तैयारी!

पाकिस्तान में जम्हूरियत की जिंदगी ख़तरे में दिख रही है। डर है कि कहीं ये एक बार फिर फौजी बूटों के नीचे कुचल न जाए।-------------- कयानी : कुर्सी की ओर कदम!--------------पाकिस्तानी फौज के मुखिया अशफ़ाक परवेज़ कयानी पिछले कुछ दिनों में काफी मजबूत बनकर उभरे
 
रणविजय
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माला की माया!

भई माला हो तो ऐसी। जितनी चर्चा नेता की, उससे ज्यादा माला की। वाकई ये माला की ही माया है। ...तो क्या हुआ कि मायावती ने हज़ार रुपये के नोटों की माला पहन ली। माना कि ये माला ज़रा भारी भरकम थी, इसे तैयार करने में नोट भी थोड़ा ज्यादा लगे होंगे। लेकिन इस बात को
 
रणविजय
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सियासत की जमीन, विरासत का बिरवा

देश में बहुत पहले सियासत की जमीन पर विरासत का बिरवा रोपा गया था। उस वक्त नन्हा सा दिखने वाले इस पौधे की जड़ों ने जमीन के भीतर ही भीतर तमाम दलों को छूत की बीमारी लगा दी। और अब देश की राजनीतिक व्यवस्था पर वारिसों का ही वर्चस्व नज़र आता है।सियासत की जमीन पर
 
रणविजय
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राज से रेस!

जिसका बयान जितनी बड़ी आग लगाए, वो उतना बड़ा नेता।राजनीतिक गुंडागर्दी की मिसाल बने राज ठाकरे इसी पर अमल करके महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में चचा ठाकरे से आगे निकल गए। अब फूहड़ बयानबाजी में राज से होड़ ले रहे हैं संघ प्रमुख मोहन भागवत। भागवत ने कहा है कि जो
 
रणविजय
Mar 16 2010 05:19 PM
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हारे तो हैरत क्यों?

मठाधीशों ने मार डाला। जी हां, हॉकी की हालत बयान करने के लिए मेरे पास फिलहाल इससे बेहतर अल्फाज़ नहीं हैं।विश्वकप मुकाबले में भारतीय टीम ने अपने पहले मुकाबले में जब पाकिस्तान को पीटा तो एक उम्मीद जगी थी। लेकिन बाद के मुकाबलों में वो दस्तूर के मुताबीक मुंह
 
रणविजय
Mar 16 2010 05:10 PM