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14 May 2010
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कुमाऊनी महिलाओं की पहचान - रगवाली पिछौड़ा

भारतीय महिलाओं के पारंपरिक परिधानों में लहंगा-दुपट्टा (घाघरा-ओढ़नी) विशेष महत्व रखता है, देश के अन्य अंचलों की तरह ही उत्तराखण्ड के विभिन्न अंचलों में यह परंपरागत रूप से महिलाओं द्वारा पहना जाता है। कुमाऊं अंचल में यहां की स्थानीय भाषा में घागरी-पिछोड़ा
 
राजेश जोशी
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गोपाल बाबू गोस्वामी के गीतों में उत्तराखण्ड की क्षेत्रीय एकता का संदेश

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर कलाकार अपनी कला के माध्यम से जनता का मनोरंजन तो करता ही है पर उसके साथ ही वह समाज को कुछ ना कुछ संदेश अवश्य देता है। कुमाऊनी के प्रसिद्ध लोकगायाक गोपाल बाबू गोस्वामी जी एक महान गायक व गीतकार होने के साथ-साथ उत्तराखण्ड के
 
राजेश जोशी
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कुमाऊं अंचल का हैप्पी न्यू इयर - फूलदेयी

उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊं अंचल में हर माह की शुरूवात किसी त्यौहार से ही होती है, पर नये वर्ष का आगमन अपना विशेष महत्व रखता है। नये वर्ष का उत्सव तो शुक्ल पक्ष की प्रथमी(संवत्सर पड़ाव) से प्रारंभ होता है पर चैत्र मास की संक्रान्ति को अर्थात विक्रम संवत के
 
राजेश जोशी
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देवीधुरा का बगवाल मेला

उत्तराखण्ड के कुमाऊं मण्डल के चम्पावत जनपद का देवीधुरा नामक स्थान वाराही देवी के प्राचीन मन्दिर के कारण दूर दूर तक जाना जाता है। इसी वाराही देवी मंदिर के प्रांगण में प्रतिवर्ष रक्षावन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को "बगवाल" मेले का आयोजन किया जाता है।
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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"भिटौली": ऊत्तराखण्ड की एक महत्वपूर्ण सामाजिक परम्परा

"भिटौली" शब्द भेंट से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ स्थानीय भाषा में मिलने से होता है, जहां तक इस त्योहार का समबन्ध है तो इसमें शादीशुदा लड़्की के मायके वाले अपनी बहन/बेटी को उसके ससुराल में जाकर भेंट (यहां पर यह स्थानीय भाषा के अनुसार मिलने और उपहार देने
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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हरेला या हर्याव: उत्तराखंड का एक प्रमुख त्यौहार

हरेला या हर्यावहरेला उत्तराखंड का एक प्रमुख त्यौहार होने के साथ साथ यहां की संस्कृति का एक अभिन्न अंग भी है। इस त्यौहार का सम्बन्ध सामाजिक सोहार्द के साथ साथ कृषि व मौसम से भी है। हरेला, हरियाली अथवा हरकाली हरियाला का समानार्थी है तथा इस पर्व को मुख्यतः
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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जागर - उत्तराखंड में देवताओं के आह्वान का पवित्र अनुष्ठान

सभी जानते हैं कि उत्तराखंड प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, ऐसा माना जाता है कि इस अंचल के कण-कण में देवी देवता निवास करते हैं। उत्तराखण्ड देवाधिदेव महादेव भगवान् शिव का घर (कैलाश पर्वत) भी है और ससुराल (कनखल, हरिद्वार) भी हमारे वेद-पुराणों
 
राजेश जोशी
टैग: जागर
Feb 07 2009 09:25 AM
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कुमाऊँ में पूज्यनीय गोलू देवता या ग्वेलज्यू

उत्तराखंड राज्य का कुमाऊँ अंचल अपनी सुन्दरता तथा सांस्कृतिक विरासत के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है हिंदू धर्म में प्रचलित देवी देवताओं के साथ साथ यहाँ पर स्थानीय देवी देवताओं के पूजन की परम्परा वर्षों से चली आ रही हैस्थानीय देवताओं में ग्वेलज्यु (गोलू
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी के गीतो में पर्यावरण प्रेम व संरक्षण का सन्देश

मित्रो स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी एक महान गायक एवं सन्गीतकार होने के साथ साथ समाज के प्रति बडा जागरुक थे। मैं यहां पर उनके द्वारा गाये और रचित गीतों के माध्यम से उनके पर्यावरण प्रेम के बारे में जानने व समझने का प्रयास करुंगा।गोस्वामी जी को पहाड और पहाड़
 
राजेश जोशी
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Feb 07 2009 09:25 AM
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स्व गोपाल बाबु गोस्वामी जी के सदाबहार सुमधुर गीत

मित्रोंकुमाऊँ में शायद ही कोई ऐसा होगा जो स्व गोपाल बाबु गोस्वामी जी के नाम से अपरिचित हो! गोस्वामी जी के सुमधुर गीतों को सुनकर कौन नही कुमाऊँ की सुरम्य वादियों में खो न जाता हो! लेकिन आजकल स्व गोस्वामीजी के गीतों को मूल रूप में प्राप्त करना बड़ा मुश्किल
 
राजेश जोशी
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Kumauni Culture

Friends Please find the most popular song of UttarakhandBedu pako bar masa...Hosted by eSnips
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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वसन्त पंचमी उल्लास और उमंग का त्यौहार

प्राचीन काल में विद्वानों ने भारत में पूरे वर्ष को छह मौसमों में विभक्त किया था जिसमें वसंत का मौसम लोगों का सबसे मनचाहा मौसम है। यह वह मौसम है जब फूलों पर बहार आ जाती, सरसों के खेत सुनहरे रंग से चमकने लगते समय जौ और गेहूँ की बालियाँ निकलनी शुरु हो जाती
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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कूमाऊं का प्रसिद्ध "घूघुतिया त्यार" यानि मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति का त्यौहार वैसे तो पूरे भारत वर्ष में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है और यही त्यौहार हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम और तरीके से मनाया जाता है। इस त्यौहार को हमारे उत्तराखण्ड में "उत्तरायणी" के नाम से मनाया जाता है तथा गढ़वाल
 
राजेश जोशी
Feb 07 2009 09:25 AM
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खतडु़वा - कूमाऊं में खत्म होती परंपरा

"खतडु़वा" कुमाऊं का एक प्रमुख त्योहार रहा है जो आश्विन मास की प्रथम तिथि या १ गते को (१५ सितम्न्बर के आस पास) मनाया जाता है। खतडु़वा एक प्रकार से पहाड़ों में शीत ऋतु के आरम्भ की घोषणा करता है। इसके नाम के सम्बन्ध में जो भी विवाद हों, पर मुझे इस त्योहार के
 
राजेश जोशी
टैग: कुमाऊ
Feb 07 2009 09:25 AM