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सुराही

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17 May 2010
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ज़िंदगी है, जंग, लढना सीख लो

ज़िंदगी है जंग, लढना सीख लोजी सकोगे गर्चे मरना सीख लोना रुका है, ना रुकेगा कारवाँसाथ दो या धूल बनना सीख लोबेटियों जैसी चली वह जाएँगीहँसके साँसोंसे बिछडना सीख लोलोग मिलकर फिर जुदा हो जाएँगेप्यार तनहाई से करना सीख लोमंज़िलें तो उम्रभर झुलवाएगीराह तुम अपनी
 
मिलिंद / Milind
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होंट चाहें और साग़र हैं मिलें

होंट चाहें और साग़र हैं मिलेंरूह प्यासी और पैकर हैं मिलेंना उछल, ऐ मौज, चंदा देखकरआसमाँसे कब समंदर हैं मिलेंमिन्नतें की, गिडगिडाए, तब मिलेंखूब हमको आज़माकर हैं मिलेंइश्कमें तोहफ़ें मयस्सर हैं मिलेंनाज़, नखरें, और तेवर हैं मिलेंआजकल खिलने से भी डरता है
 
मिलिंद / Milind
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किसी दिन कहीं मेल होगा यकीनन

किसी दिन कहीं मेल होगा यकीननमुहब्बत नहीं सिर्फ़ धोखा यकीनननयी सोच दीवारसे क्या रुकेगीमिलेगा हवा को झरोखा यकीननसुकून-ए-जिगर अब तलक मिल न पायाअभी चेहरे पर है गोषा यकीननबहारोंमें हम सर्द आहों के मारेकिसी संगदिल का है बोसा यकीननखुली नींद क्यों शेषशायी
 
मिलिंद / Milind
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Apr 23 2010 01:03 PM
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सुकून-ए-जिगर को शरारा न कर ले

सुकून-ए-जिगर को शरारा न कर लेकहीं दिल मुहब्बत गवारा न कर ले यह माना हिजाबों में रहते हो लेकिन हरममें ही कोई नज़ारा न कर लेन यूँ छेडकर आग दिलमें लगाओयह आँधी कहीं रुख तुम्हारा न कर लेकई साल के बाद रूठे हैं फिरसेकहीं इश्क़ हमसे दुबारा न कर लेकिसी दिन तो,
 
मिलिंद / Milind
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Apr 07 2010 03:25 PM
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उनको देखा, दिल मचलकर रह गया

उनको देखा, दिल मचलकर रह गया चोट खाई, बन के पत्थर रह गयामिट गये कितने ही ज़ख्मों के निशाँज़ख्म दिल का बनकर नश्तर रह गयाक्या मिला है मुझको आँखें खोलकर ?हर नज़ारा ख्वाब बनकर रह गयाचार आँसू क्या बहाए हुस्ननेहौसला-ए-संग ढहकर रह गयाऐ ग़मों, अब अश्क़ ना माँगा
 
मिलिंद / Milind
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इस कदर नाकामियोंसे प्यार था

इस कदर नाकामियोंसे प्यार था ज़िंदगी की दौडसे इन्क़ार था है पुराना बाढ आने का चलन मेरी गलती है की मैं मँज़धार था भूक़ से बेहाल होकर मर गया लोग कहते हैं कोई खुद्दार था फूल तू, गुलशन गली तेरी मगर लौटकर देखा, जिगरमें खार
 
मिलिंद / Milind
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इसे काट देना ही बेहतर रहेगा

इसे काट देना ही बेहतर रहेगायह रिश्तों का धागा उलझकर रहेगाजवाँ हो गयी है मेरे दिल कि कष्टीग़मों का कहीं तो समंदर रहेगाचली बदहवा, नींद शोलों की टूटीघरोंदा हमारा झुलसकर रहेगासितारें जहाँ टूटकर गिर चुके हैंउन्हीमें कहीं अपना रहबर रहेगाबिगडता है अक्सर ज़रा बनते
 
मिलिंद / Milind
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मरकर सही, दिल को ज़रा आराम आया

मरकर सही, दिल को ज़रा आराम आयाइन्कार भी , उनका, चलो , कुछ काम आया  उनकी गली की ख़ाक भी कहने लगी हैफिरसे मुहल्ले में वही बदनाम आयासो ले ज़रा हम ओढकर चादर कफन कीयारो, अभी उनका कहाँ पैग़ाम आया ?या रब, तुझी को ढूँढने घर से चले थेहरसूँ किसी काफ़िर सनम का
 
मिलिंद / Milind
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जब भी मिली, मिलकर गलें, बोली उदासी

जब भी मिली, मिलकर गलें, बोली उदासी"बिछडे हुए दो दिल मिलें", बोली उदासीअपने वफादारोंमें लिख लो नाम मेराक्यों हममें तुममें फासलें, बोली उदासीअपने भी कुछ अरमान हैं, कुछ ख़्वाब रंगींअपनें भी घर फूले-फलें, बोली उदासीकोई नहीं है हमसफर, साथी हमाराखुशियों के
 
मिलिंद / Milind
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Mar 10 2010 02:39 PM
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कई सदियोंसे बैठे हम खुशी की राह तकतें हैं

कई सदियोंसे बैठे हम खुशी की राह तकतें हैंबिताने को शबेफुरकत ग़मोंके जाम चखतें हैंखुली आँखोंसे हम पूजा किसीकी कर नहीं सकतेंपुराने मंदिरोंके बुत ज़रा टुटेसे लगतें हैंबडा आसान होता है किसीसे प्यार कर लेनाहमें देखो, यही गलती हज़ारों बार करतें हैंतुम्हारी शानमें
 
मिलिंद / Milind
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Feb 22 2010 11:41 AM
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फूल बरसों तक चढाएँ पत्थरोंपर

फूल बरसों तक चढाएँ पत्थरोंपरनाम तब आया हमारा उन लबोंपरप्यास दिल कि कब बुझी है आँसुओंसे ?कम नहीं था वरना पानी आरिज़ोंपरयह दुवा है उम्रभर वह मुस्कुराएजान भी कुरबान ऐसी हसरतोंपरक्या चलन बदला हुआ है मौसमोंका ?क्यों ख़िज़ाँ छाने लगी है कोंपलोंपर ?आँधियोंने फिर
 
मिलिंद / Milind
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Feb 22 2010 11:35 AM
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टुकडे टुकडे हैं जमीनोआसमाँ तनहा

टुकडे टुकडे हैं जमीनोआसमाँ तनहाहर नगरकी हर गलीका हर मकाँ तनहा  बटते बटते बट चुका है आदमी इतनाज़िस्मसे होकर अलहदा आज जाँ तनहाजब सवालेज़िंदगी हैं मुख्तलिफ़ सबकेहर किसे देना पडेगा इम्तहाँ तनहाहमखयालोहमनवा मिलता नहीं सबकोहालेदिल शायर करे अक्सर बयाँ
 
मिलिंद / Milind
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Feb 19 2010 11:02 AM
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ज़रा नज़रें झुकाकर बात करते, बात बन जाती

ज़रा नज़रें झुकाकर बात करते, बात बन जातीन था मुमकिन तो बस दीदार करते, बात बन जातीरिवाज़ोरस्मेदुनिया के बहाने कब तलक दोगे ?कभी दुनिया को भी नाराज़ करते, बात बन जातीज़माने की नज़र दिनरात है हमपर, चलो मानाकभी ख्व्वाबोंको ही गुलज़ार करते, बात बन जातीघनेरे बादलोमें
 
मिलिंद / Milind
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Feb 09 2010 11:41 AM
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बस्तियोंके दीप क्यों बुझने लगे हैं ?

बस्तियोंके दीप क्यों बुझने लगे हैं ?रोशनीसे लोग क्या डरने लगे हैं ? और कुछ जमहूरियत देगी, न देगीख्व्वाब के बाज़ार तो सजने लगे हैंमंज़िलें अपनी जगह कायम हैं लेकिनरास्तें मुडते हुए दिखने लगे हैंरहनुमाओं ने कहाँ लाया हैं हमको ?लोग उलटे पाँव क्यों चलने लगे हैं
 
मिलिंद / Milind
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Jan 31 2010 10:12 AM
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खबर थी कि अपनी अलग राह चुनते

खबर थी कि अपनी अलग राह चुनतेकदम दो कदम तो मगर साथ चलतेनज़र ना चुराओ, तुम्हारी निगाहेंबदल जातीं है इक पलक के झपकतेअभी दाग दामनपर आया नहीं हैचुनरिया रही सर सरकते सरकतेबडी सख्त है जान हम पापियोंकीगुजरती है सदियाँ निकलते निकलतेतुम्हारे महल हो; हमारी हैं
 
मिलिंद / Milind
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Jan 27 2010 08:09 PM
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जवाँ आशिकोंके दिलोंसा शहर है

जवाँ आशिकोंके दिलोंसा नगर हैसुकूँ है कहीं तो कहीं पर गदर हैकहाँ जा रहा हूँ, कहाँ तक सफर है ?कहीं पर है मंज़िल, कहीं रहगुजर हैयहाँ आ गया जो, न फिर लौट पायाबडा बेरहम यह तिलिस्मी नगर हैकिसी रोज साकी करेगा इनायतअभी जाम खाली हमारी नज़र हैजिये जा रहें सब, पिये
 
मिलिंद / Milind
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Jan 22 2010 05:19 AM
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राह चलते हमकदम मिलता नहीं

  राह चलते हमकदम मिलता नहीं चाहनेसे साज़ेदिल छिडता नहींराह जाती हो न चिडियाघर कहींदूर तक इक आदमी दिखता नहींमरघटोंसे है गया-गुज़रा शहरधूम क्या, मातम यहाँ मचता नहींचश्मनम तो सूख जाती है मगरक्या बला है खूनेदिल, थमता नहींएक मुद्दतसे नहीं कोई मिलाऔर
 
मिलिंद / Milind
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Jan 19 2010 08:08 PM
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यात्रा

मिट चुका हैं गाँव निकला था जिसे मैं छोडकरऔर बसना था जहाँ, आबाद वह ना हो सकादूर तक आगे दिखाई दे रही है बस डगररोकभी सकता नहीं मुडती हुई अपनी नज़रलौटभी सकता नहीं अपनी प्रतिज्ञा
 
मिलिंद / Milind
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Jan 19 2010 03:23 PM
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ज़िंदगी के ख्वाब से मैं डर रहा हूँ

ज़िंदगी के ख्वाब से मैं डर रहा हूँमौत के आनेसे पहले मर रहा हूँमौत से डरता रहा हूँ रात-दिन मैंइस तरह, ना जी रहा, ना मर रहा हूँकारवाँ चलता रहा है ज़िंदगी कामैं ज़रा पीछे मगर अक्सर रहा हूँ बंद दिल के द्वार जब से कर चुकी वहमैं तभी से आज तक बेघर रहा हूँवह गयी तो
 
मिलिंद / Milind
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Dec 27 2009 12:09 PM
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दिल टूटने का जैसे दस्तूर होगया है

दिल टूटने का जैसे दस्तूर हो गया हैबरबादियों का किस्सा मशहूर हो गया हैअब जाके साहिलों का मैं दर्द जान पायाकोई करीब आकर फिर दूर हो गया हैकैसे निजात पाऊँ मैं दर्दोरंजोग़मसे ?मेरा रकीब उनका सिंदूर हो गया हैकोई गवाह होता दिल टूटने का, या रबइल्ज़ामेबेवफाई मंजूर
 
मिलिंद / Milind
Dec 19 2009 10:06 AM
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रातभर जल रहा था परवाना

रातभर जल रहा था परवानाक्यों न उजलेगी मेहफ़िलेजाना ?चँद घडियाँ हैं दिल लगाने कीउम्रभरका है दिल को समझानाइश्क़ शामिल है क्या गुनाहोंमें ?क्यों कफ़स़ जैसा है सनमखाना ?आँख तो नम है इक ज़मानेसेबात कल की है, आपने जानासूख जाये ना प्यासमें आँखेंग़मसे भर देना एक
 
मिलिंद / Milind
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Dec 19 2009 09:57 AM
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पँखडी को चूमकर शबनम हवामें खो गयी

पँखडी को चूमकर शबनम हवामें खो गयीलाजसे चटकी कली, खिलकर जवाँ फिर हो गयीगेसुओं की छाँवमें या हिज्रमें रातें कटीदूर दोनो सूरतोमें नींद तो कोसो गयीफिक्र गर होती हमारी, रुक न जाती वह ज़रा ?करवटें बदला किये हम, रात आयी सो गयीआपसे तो नर्मदिल हैं आसमाँकी
 
मिलिंद / Milind
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Dec 14 2009 11:27 AM
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बेरुखी यह आपकी होगी गवारा कब तलक ?

बेरुखी यह आपकी होगी गवारा कब तलक ?हुस्न करता इश्कसे, देखें, किनारा कब तलकहमनवा बन जाइएगा, झूमने मेहफ़िल लगेमैं बजाऊँ साजेदिलका एकतारा कब तलक ?दो हिमाला का पता या फिर पता दो यार कादरबदर फिरता रहूँगा बेसाहारा कब तलक ?छुप न पाये चाँद-तारें शाम के होते जवाँइस
 
मिलिंद / Milind
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Dec 08 2009 03:57 PM
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शिकस्ता साज़ पर गाने लगी है

शिकस्ता साज़ पर गाने लगी हैवह दिल के तार सहलाने लगी हैशबिस्ताँमें कहीं गुलशन खिला याहवाको साँस महकाने लगी है?जो कल तक डस रही थी नागिनोंसीपरेशाँ ज़ुल्फ़ सिरहाने लगी हैजलेंगे दिल, तभी होगा उजालामुहब्बत की घटा छाने लगी हैकिये होंगे हज़ारों कत्ल उसनेतभी तस्वीर
 
मिलिंद / Milind
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क्या हुआ गर आँख उसकी नम नहीं ?

क्या हुआ गर आँख उसकी नम नहीं ?यह पुरानी याद का मौसम नहींदूर तक हो फूल नज़रेयारमेंक्या हुआ गर गुलशनोमें हम नहीं ?उन लबों पर वस्ल की हो सुर्खियाँआशिकोंकी मौत का मातम नहींदर्द उतना दो जिसे मैं सह सकूँआदमी हूँ; देवता, बरहम नहींऔर तोहफ़ा क्या उसे मैं दूँ,
 
मिलिंद / Milind
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Nov 24 2009 08:18 PM
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तुम न आये, न कासिदो-खत तक

तुम न आये, न कासिदो-खत तकदिल तडपता रहा कयामत तकज़ुल्म चुपचाप क्यों सहें हमने ?अब तो मुमकिन नहीं शिकायत तकअज़लसे हुस्नका अलम दिलपरकर चुके दिलजलें बगावत तकज़ुल्म का दौर है अभी जारीबात पहुँची कहाँ इनायत तक ?साथ देना, चलो, नहीं मुमकिनआप करते नहीं हिमायत तकफिर
 
मिलिंद / Milind
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Nov 16 2009 01:03 PM
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वही शाम होगी, वही रात होगी

वही शाम होगी, वही रात होगीवही अजनबीसी मुलाकात होगीअभी स्वप्नभी मैं नहीं देख पायाअभी जागनेकी पुन: बात होगीघडी दो घडी का मिलन है जुदाईमिलें उम्रभर तो अलग बात होगीसमझमें न आए कि पूछू, न पूछूजनाज़ा उठेगा कि बारात होगीअमानत समझकर न लौटाइयेगा'भँवर' दिल दिया है
 
मिलिंद / Milind
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Nov 05 2009 02:32 PM
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बढी बात जब बातही बातमें

बढी बात जब बातही बातमेंहसीं शाम ढलने लगी रातमेंन पर्दा उठाओ, कसम है तुम्हेमिले ना जुनूँ और जज़्बातमेंतमन्ना जवाँ क्यों न होने लगे ?झुकाये नज़र वह मुलाकातमेंकहीं फूल का बस बहाना न होकहीं दिल दिया हो न सौगातमेंसमझ लो है आतिश मुहब्बतजनीअगरचे लगे आग
 
मिलिंद / Milind
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Oct 23 2009 03:55 PM
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आयें हैं सो कुछ दिन गुजार जाते हैं

आयें हैं सो कुछ दिन गुजार जाते हैंलेकर ना जब तक के कहार जाते हैं क्या शानोशौकत पर गुमान करते हो दुनियासे मुफ़लिस ताजदार जाते हैं ना रास्ता अनजाना, न राह मुष्किल हैहर दिन इस दुनियासे हजार जाते हैं जानकरभी के याँ बार बार आना हैजानेवालें क्यों बेकरार जाते
 
मिलिंद / Milind
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Oct 17 2009 12:37 PM
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प्यास बुझा लें, फिर कर लेंगें धरम-करम की बातें

प्यास बुझा लें, फिर कर लेंगें धरम-करम की बातेंजाम ज़रा छलकाकर कर लें, आ, ज़मज़म की बातेंदेख ज़रा, सजधजकर दुनिया फैल रही है बाहेंखूब गले मिल ले उससे तू, छोड अदम की बातेंकल तक हमसे आँख मिलाकर छेड रहा था कोईआज अचानक क्यों परदा, क्यों लाज-शरम की बातें ?मूँद ज़रा
 
मिलिंद / Milind
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क्या बताऊँ किस तरह यह ज़िंदगी जाती रही

क्या बताऊँ किस तरह यह ज़िंदगी जाती रहीहर सुबह के बाद अक्सर शामेगम आती रहीखेलकर दिलसे हमारे दिल वह बहलाती रहीजब भरा दिल, तोडकर दिल, दोस्त कहलाती रही"धूप है तेरा मुकद्दर, प्यार शबनमसे न कर"गुल न माना बात, बगिया लाख़ समझाती रही’ यूँ किसीने लत लगाई दर्द
 
मिलिंद / Milind
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Aug 31 2009 01:01 PM
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चूमना चाहा तुम्हें, ज़ुल्म यह संगीन है

चूमना चाहा तुम्हें, ज़ुल्म यह संगीन हैचूमनेसे गर रहा, हुस्न की तौहीन हैनेकनामी का चलन क्यों सिखाया, वाइज़ों ?दागदारों की यहाँ ज़िंदगी रंगीन है लो, मुकम्मल हो गयी कत्ल़ की तैयारियाँहै भरोसा, प्यार है; साँप है, आस्तीन है अल्विदा, ऐ रहबरों; शुक्रिया, ऐ
 
मिलिंद / Milind
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Aug 19 2009 03:21 PM