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एक पूरा बरस : अधूरा समझौता
तुमने ठीक ही लिखा है-- न आने पायें उदासी के झोंके ,फुहारें दर्द की न पड़ें सुबह-शाम,आँखों में परछाइयाँ बादलों कीथमें केवल, जमें नहीं सावन में .--- यह सब कुछ चाहता हूँ मैं भीपर दोस्त,एक पूरा बरस होता
Jun 13 2010 11:10 AM


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