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लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से.....

http://laddoospeaks.blogspot.com/
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27 Apr 2010
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मुख्य मंत्री नितीश का दूसरा पोस्ट हिन्दी में ..http://nitishspeaks.blogspot.com

बिहार के मुख्य मंत्री नितीश कुमार का दूसरा पोस्ट उनके ब्लॉग पर हिन्दी में आया है.... पहले पोस्ट में अंगरेजी के कारण उनकी काफी छीछालेदर मची थी, खासकर उनके हिन्दी पट्टी के मुख्य मंत्री होने के कारण.... हिन्दी ब्लॉग जगत को उनसे काफी शिकायत भी थी....उनके
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दूध और दही से सीखें जीवन की कड़वी सच्चाई...(लड्डू बोलता है...इंजीनियर के दिल से...)

दूध की महत्ता सभी जानते हैं और दही की भी. लेकिन मैं आज दही के सहारे जीवन की कुछ सच्चाई और मैनेजमेंट एवं नेतृत्व से इसका सम्बन्ध जोड़ रहा हूँ... दूध तो पशु एवं मानव  सभी को नसीब होता है लेकिन दही मनुष्य का एक अद्भुत अविष्कार है. दूध प्राकृतिक रूप में
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नितीश कुमार , बिहार के मुख्यमंत्री के ब्लॉग पर पहले पोस्ट में ही 580 से भी ज्यादा कमेन्ट ..4099 से ज्यादा पाठक लेकिन चिर-परिचित ब्लौगरों का

आज मैंने बिहार के मुख्य-मंत्री श्री नितीश कुमार के ब्लॉग--http://nitishspeaks.blogspot.com पर विजिट किया. पहला पोस्ट ही आया है दिनांक 19 अप्रैल को. पहले ही पोस्ट पर अब तक 580 से ज्यादा कमेन्ट आ चुके हैं. उनके प्रोफाइल पर  4100 से भी ज्यादा लोग विजिट
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मैंने भी लिया ब्लॉगिंग से ब्रेक...लिखना कम..कमेन्ट करना कम...पढ़ना ज्यादा....(लड्डू बोलता है....इंजीनियर के दिल से....)

मैंने अब ब्लॉग पर लिखना और कमेन्ट करना बहुत कम कर दिया है.....  जैसा कि मैंने पहले ही अपने पोस्ट पर इशारा कर दिया था कि भले ही ब्लॉग पर पोस्ट लिखना कम कर दूं , पढ़ना जारी रखूंगा....मैं किसी से कोई  शिकायत नहीं कर रहा हूँ.... बस समझ लिजीये कि
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जब एक हिन्दू माँ अपने बच्चे को नमाज़ के समय मस्जिद भेज देती...भाग-तीन ( समापन)

माँ के अनुसार बच्चों  को नमाजियों के पास भेजना उसका  विश्वास  है....  वह कहती है कि अंधविश्वास तो तब होता जब वह केवल नमाजियों के ऊपर  निर्भर रहती.... या इस तरह के झाड़-फूंक पर निर्भर रहती....वह कहती है कि बच्चो  को नजर नहीं
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जब एक हिन्दू माँ अपने बच्चे को नमाज़ के समय मस्जिद भेज देती...( भाग-दो )

मुझे याद है , मेरी  माँ, जो एक हिन्दू महिला है, शुद्ध शाकाहारी परिवार, शाम के नमाज़ के समय घर के गोद  वाले बच्चों को भी, बड़े बच्चों के साथ मस्जिद भेज देती थी. रोज तो ऐसा नहीं होता  था, किन्तु प्रायः होता था....अजान से माँ को नमाज़
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जब एक हिन्दू माँ अपने बच्चे को नमाज़ के समय मस्जिद भेज देती...( भाग-एक )

मेरे पैतृक घर के  पास , करीब पचास मीटर की दूरी पर एक मस्जिद है...    मेरे घर और मस्जिद के बीच एक स्कूल और एक  मुस्लिम परिवार का घर है  बस.....   बचपन में , खास कर गर्मी के दिनों में हमलोगों  की नींद अजान से ही
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क्या आपने कभी आधी बिल्ली देखी है..?..वो भी जिन्दा...? (..हास्य-कविता..)

बचपन में अपने गली-मोहल्ले की एक छोटी सी लाइब्रेरी में मैंने हास्य व्यंग्य की कविताओं की एक पुस्तक पढ़ी थी...  तब मेरी उम्र कोई छः-सात साल की रही होगी... मुझे कवि  का नाम तो याद नहीं है....न ही पुस्तक की याद  है.... हाँ..कविता की कुछ
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नक़ल करके और रट्टा मार कर.... इंसान तो बने नहीं....कोई भगवान कैसे हो पायेगा...?

भगवान राम ने रामायण  नहीं पढ़ा... भगवान कृष्ण ने गीता नहीं पढ़ी.... पैगम्बर मोहम्मद ने क्या  कुरआन  पढ़ कर अल्लाह को पाया..?....क्या जीसस बाइबल पढ़ कर ईसा मसीह बने...?जितने भी धर्म  प्रवर्तक हुए हैं, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरू
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जो नास्तिक हैं केवल वही असली धार्मिक हैं...बाकी सब पाखंडी हैं....

जो व्यक्ति सही अर्थों में धार्मिक है, न तो वह हिंदू हो सकता है, न तो मुसलमान हो सकता है , न ईसाई, न बौद्ध, न जैन, न ही किसी प्रचलित धर्म या संप्रदाय का हो सकता है..... कोई जैसे ही किसी धर्म या संप्रदाय से जुड़ता है  , लोग उसे धार्मिक होने नहीं देते
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साहब की गाड़ी के ड्राइवर ने खुद हो कृष्ण-कन्हैया कहा....और साबित किया...?

सरकारी नौकरी में साहब को गाड़ी मिली रहती है...............सरकारी गाड़ी में सरकारी  ड्राइवर भी होता है...अब चूँकि सरकारी संपत्ति पर सबका अधिकार  होता है,.....अतः गाड़ी के  के ड्राइवर का भी होना स्वाभाविक ही है....इसी अधिकार के तहत गाड़ी से
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सानिया मिर्ज़ा---तुम जहाँ भी रहो खुश रहो..(पुरुषों ने तुम्हारे लिए किया क्या है.?)

सानिया....मिर्ज़ा...तुम पहले एक स्त्री  हो....तुमने एक ऐसे समाज  में जन्म लिया है..जहाँ नारी पुरुष के  हाथ की कठपुतली समझी जाती है...कही-कहीं पैर की  जूती भी....लेकिन खिलाड़ी तुम  खुद बनी...मैदान पर पसीना  तुममे
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आज लड्डू को कवितायेँ पढ़ने का मन कर रहा है...आप लोग कवितायों का लिंक दें मेरे कमेन्ट बौक्स में....

आज मुझे कवितायें ही पढनी है....अचानक मुझे लगा कि आज केवल कवितायेँ ही पढनी चाहिए....मैंने खूब गहरायी  से सोचा....कि ऐसा क्यों लग रहा है....काफी चिंतन-मनन के बाद  मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कवितायेँ दिल से निकलती हैं...और आज मैं केवल दिल से
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लड्डू की दूसरी कक्षा का पहला पोस्ट----धर्म के तोता -रटंत विद्वानों को चुटकुलों की गुरू दक्षिणा ..मूर्ख दिवस पर..

एकविश्व के सभी  धर्मों के एक प्रकांड विद्वान  अपने स्टडी रूम में अकेले बैठे थे....थोड़ी देर  बाद अंदर कमरे से जोर जोर से बहस की आवाज आने लगी....बाहर से एक  शिष्य अंदर आया......देखा कि इंटर –नेशनल गुरू जी  सभी धर्मों (हिंदू,
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ब्लॉगिंग का दो महीना (34 वीं पोस्ट -- 725 पाठक-- 341 कमेंट---10 followers)....गुरू जी, क्या मैं दूसरी कक्षा में जा सकता हूँ ..?

जब मैं  करीब सात-आठ साल की उम्र का था तब मेरे पिताजी ने एक बार मुझसे कहा था-" आदमी को पढ़ना चाहिए". उस समय मेरे दिमाग में दो बातें समझ में आई . पहला यह कि चूँकि वे केवल  चौथी पास थे और बिजनेस में बहुत मेहनत करते थे तो मुझको लगा कि पढ़ने से
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भविष्य में नारियाँ शक्तिशाली होती जायेंगी ......पुरुष कमजोर होते जायेंगे....

आधुनिक विज्ञान ने जिस तरह से तरक्की की है उससे आने बाले समय में बच्चे के जन्म के लिए पुरुष की आवश्यकता कम होती जायेगी. स्त्री अकेले ही बच्चे को जन्म देने में समर्थ हो जायेंगी....मतलब कि विज्ञान ने पुरुषों को गैर-जरूरी घोषित कर दिया है... सदियों से नारी
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पुरानी विलुप्त होती पहेलियाँ....हो सकता है इन्हें.. आज आप अंतिम बार पढ़ें....

ये पहेलियाँ बहुत पुरानी  हैं.......आप लोगों में से बहुत लोगों ने पढ़ी या सुनी भी नहीं होगी.. हो सकता है कि आज आपको इन्हें पढ़ने का  अंतिम अवसर  मिला हो....आजकल बदलते परिवेश में ये विलुप्त होती जा रही हैं.....मैं आपलोगों के लिए  बचपन
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महिला आरक्षण. और.सीटी प्रकरण के बाद . कुछ नेता सेक्स परिवर्तन..की फ़िराक में ....

महिला आरक्षण के कट्टर  विरोधी  कुछ  नेताओं को जब उनकी बीबियों ने घर के   बाहर का रास्ता दिखाया,.. तो वे ना  घर के  रहे ना  घाट के... उधर संसद में सीटी  प्रकरण से मचे बवाल के बाद.. न केवल सीटी बजाने बाले सांसद नाराज
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धर्म के बारे में लिखने ..एवं ..टिप्पणी करने बाले.. तोता-रटंत.. के बारे में यह पोस्ट ....

जीसस जन्म से क्रिश्चन नहीं ...यहूदी थे.  ....पैगम्बर मोहम्मद जन्म से मुसलमान नहीं थे....भगवान बुद्ध जन्म से बौद्ध नहीं थे.....भगवान महावीर जन्म से जैन नहीं थे......गुरू नानक जन्म से सिक्ख नहीं थे....हिंदू धर्म में भी बहुत सी धाराएं हैं......कई
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आपके पास कैसा दिमाग है ?...जाँचिये एक मिनट में......(लड्डू बोलता है.....इंजीनियर के दिल से.....)

मैं कब पैदा  हुआ ?...याद नहीं...मतलब जन्म के समय दिमाग नहीं रहा होगा....लेकिन जन्म के समय बच्चे रोते हैं....मैं भी रोया था......(ऐसा लोग बताते हैं.)......मतलब जन्म के समय दिल रहा होगा....मैं समझता हूँ कि आपके साथ भी ऐसा ही है....कि जन्म के समय दिल
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यह पोस्ट केवल सफल ब्लॉगर ही पढ़ें...नए ब्लॉगर को यह धरोहर बाद में काम आएगा.....

ब्लॉगिंग को लेकर मेरे मन में बहुत सवाल है. मेरी समझ है कि केवल सफल  लोग ही मेरे सवालों का सही जबाव दे पायेंगे. आलतू-फालतू लोगों से पूछ कर मैं अपना समय और अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं करना चाहता हूँ. मैं यह मानता हूँ कि सफल वही होते हैं जो कठिनाइयों का
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विलुप्त होती... .....नानी-दादी की पहेलियाँ.........परिणाम..... ( लड्डू बोलता है....इंजीनियर के दिल से....)

मेरी नजर में  जिन्होंने भी पिछला और यह पोस्ट पढ़ा...वे सभी विजेता है....पिछले पोस्ट  में मैंने  बचपन में सुनी गयी नानी-दादी की  पहेलियाँ प्रस्तुत की थी. कुछ वर्ष पहले तक ये न केवल मनोरंजन  का माध्यम थीं,  वल्कि ये बच्चों के
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विलुप्त होती... नानी-दादी की बुझौअल, बुझौलिया, पहेलियाँ....बूझो तो जाने.....

मेरा मकसद  पहेली का कोई ब्लाग शुरू करने का नहीं है. कई इलाकों में पहेलियों को बुझौअल या  बुझौलिया भी कहा जाता है. बचपन में सुनी गयी नानी-दादी की ये पहेलियाँ न केवल  मनोरंजन  का माध्यम थीं, वल्कि ये बच्चों के लिए बुद्धि-विकास का जरिया
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विश्व जल दिवस..........नंगा नहायेगा क्या...और निचोड़ेगा क्या ?....

भैया..आप  मनाइए विश्व जल दिवस....मुझे तो जल दिवस मनाने की कोई जरूरत ही नहीं है.......जल  अगर ज्यादा हो जायेंगे तो मगर भी बढ़ जायेंगे.....अब कौन जल में रहकर मगर से बैर  करे.......मैं तो नंगा हूँ ...मुझे क्या नहाना ?...क्या निचोड़ना ?जल नहीं
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कृष्ण की बांसुरी, ..बिस्मिल्लाह खान की शहनाई..... और जीसस का क्रॉस

आज २१ मार्च को भारत रत्न “ उस्ताद बिस्मिल्लाह खान” की जयन्ती है. लेकिन समाचार-पत्रों तथा न्यूज चैनलों से हमारे उस्ताद करीब-करीब गायब कर दिए गए हैं. यहाँ तक कि वाराणसी , जो उस्त्ताद की कर्म-भूमि रही है, से प्रकाशित “ दैनिक हिदुस्तान “ में एक लाइन का भी
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सास का ओढना बनता है पतोहू का नकपोछना...

इस कहावत का अर्थ है -“ एक पीढ़ी के धरोहर अगली पीढ़ी के लिए बेकार होते  हैं या कहें कि अगली पीढ़ी के लिए वे बहुत ज्यादा मायने नहीं रखते हैं.” सास के लिए जो ओढना बहुत महत्वपूर्ण है, दिल के करीब है, अजीज है....वो पतोहू के लिए नाक पोछने योग्य ही माना
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विश्व गौरैया दिवस-- गौरैया...तुम मत आना....

हे गौरैया....तुम मत आनाआज है विश्व गौरैया दिवस....पर तुम मत आना...भूल कर भी मत आनाबचपन में तुम मेरे घर आती थी...लेकिन अब ..घर..”घर” कहाँ रहा?अब तो मकान हो गया है..तुम आँगन में फुदकती थी...अब आँगन ही नहीं है..तुम चावल के दाने बीनती थी..अब क्या पिज्जा,
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मायावती की माला, अन्धों का हाथी और सुराही में कद्दू ...(व्यंग्य)

मायावती को पहनाए गए माला पर मचे घमासान को देखकर मुझे बचपन में पढ़ी दो कहानियां याद आ गयी. पहली कहानी.. अन्धों का हाथी. दूसरी कहानी..... सुराही में कद्दू.ये कहानियां बहुत सारे लोगों ने पढ़ी होंगी. संक्षेप में, सात अंधे हाथी देखने गए. एक तो हाथी जैसा बड़ा
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मायावती की माला, आधी बिल्ली और इंजीनियर--.........व्यंग्य

मायावती की माला, आधी बिल्ली और इंजीनियर डेढ़ बिल्ली.... डेढ़ चूहे..... डेढ़ दिन.... में खाती है तो पांच बिल्ली पांच चूहे कितने दिन में खायेगी ?--..... सांतवीं क्लास में यही प्रश्न मेरे गणित या मैथ के मास्टर जी ने हमलोगों से पूछा था.शीर्षक देख कर मत
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भारतीय दर्शन और साहित्य के खजाने में हैं मैनेजमेंट के सूत्र....भाग-चार

भारतीय दर्शन और साहित्य के खजाने में  हैं मैनेजमेंट के सूत्र....भाग-चारपहले मैं उन पाठकों का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने पिछले पोस्ट पर अपनी भावनाएं अपने कमेन्ट के माघ्यम से प्रकट कर मेरा उत्साह बढ़ाया है...चौथी कड़ी में फिर लेकर आया हूँ, भारतीय
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भारतीय दर्शन और साहित्य के खजाने में हैं मैनेजमेंट के सूत्र....भाग-तीन

भारतीय दर्शन और साहित्य के खजाने में हैं मैनेजमेंट के सूत्र....भाग-तीन जब भी मैनेजमेंट के बारे में बातें होती है तो पहला नंबर अमेरिका का आता है. प्रबंधन, मैनेजमेंट या पर्सनलिटी डेवेलपमेंट यानि व्यक्तित्व विकास से सम्बंधित जितने भी पुस्तकें प्रसिद्द हैं ,
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हिन्दी साहित्य के खजाने में भरे पड़े हैं मैनेजमेंट के सूत्र....भाग-एक

हिन्दी साहित्य के खजाने में भरे पड़े हैं मैनेजमेंट के सूत्र....भाग-एक पहले विज्ञान फिर इन्जीनियरिंग का छात्र रहा और पिछले २३ बर्षों से सरकारी नौकरी में हूँ. समय के साथ प्रमोशन भी हुये और जिम्मेवारियां भी बढ़ती गयी. इंजीनियर होने के कारण स्वाभाविक रूप से
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महिला दिवस ...हिम्मत से पतवार सम्हालो......

महिला दिवस ...हिम्मत से पतवार सम्हालो......यह पोस्ट मैंने कल ही महिला दिवस पर लिख लिया था, किंतु इंटरनेट सिग्नल नहीं मिल पा रहा था तो पोस्ट नहीं हो पाया.. शायद राज्य-सभा में बिल का इंतजार था भागवान को भी और भगवान को भी. महिला शक्ति को बधाई.....महिलाओं को
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ब्लॉगिंग क्या पढ़े-लिखे पशुओं का समूह हो गया है?

ब्लॉगिंग क्या पढ़े-लिखे पशुओं का समूह हो गया है?मैं तो ब्लॉगिंग में यह सोच कर आया था कि यह पढ़े-लिखे लोगों, कलाकारों, बुद्धिजीविओं....का काम है तो यहाँ से नयी-नयी जानकारियां मिलेगी. विचारों का आदान-प्रदान होगा. चूँकि नयी पीढ़ी के ज्यादातर लोग इंटरनेट का
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ड्यूटी जाने का मन नहीं करता है.....

ड्यूटी जाने का मन नहीं  करता है.....जाड़े के दिनों में,गरम-गरम,गुलगुली-गुलगुली सी रजाई  से निकल कर, ड्यूटी जाने का मन नहीं करता,मन करता है, मीठे-मीठे सपने देखने का, बीबी से लिपटकर.सुबह जब तैयार होती है बीबी,मुझे नाश्ता कराने के लिए,तो मन करता
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Mar 02 2010 08:22 PM
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मोहल्ला ब्लॉग

हेमा मालिनी के घर से अस्सी लाख की चड्ढी चोरी.....होली के दिन कोल इंडिया की खबरहेमा मालिनी के घर से अस्सी लाख की चड्ढी चोरी.....होली के दिन कोल इंडिया की खबरआज सुबह से ही खदान में उपयोग किये जाने बाले वॉकी-टॉकी से होली एवं फगुआ के धार्मिक औरआ-धर्मिक गीत,
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हेमा मालिनी के घर से अस्सी लाख की चड्ढी चोरी.....होली के दिन कोल इंडिया की खबर

हेमा मालिनी के घर से अस्सी लाख की चड्ढी चोरी.....होली के दिन कोल इंडिया की खबर आज सुबह से ही खदान में उपयोग किये जाने बाले वॉकी-टॉकी से होली एवं फगुआ के धार्मिक और आ-धर्मिक गीत, भजन, चुटकुले, इत्यादि सुनाये जा रहे हैं . सिंगरौली के दस खदान क्षेत्र, यूपी
Mar 02 2010 05:07 AM
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अभी तो बच्चा केवल मिट्टी खा रहा है..

अभी तो बच्चा केवल मिट्टी खा रहा है...आज जब मैं खदान से अपनी ड्यूटी बजा कर शाम को लौटा तो कोलोनी के बाहर सड़क के किनारे कुछ बच्चे खेल रहे थे. उनमे से एक बच्चा मिट्टी खा रहा था. हमलोग तीन इंजिनियर जीप में थे. मेरे एक साथी ने जीप रोक कर उस बच्चे को टोका -“
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Feb 27 2010 11:25 AM
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कान पकड़िये,काम पर चलिए........

कान पकड़िये,काम पर चलिए......... जब मैं छोटा बच्चा था, माँ कहती है कि बहुत शरारत करता था . कान पकड़ने तथा पकड़ाने से परिचय तब से है. धीरे-धीरे कान पकड़ना एक खेल सा हो गया. फिर आदत बनती गयी . कभी दुसरे का पकड़ता तो कभी अपना. छोटी उम्र में तो यह सब खेल का
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Feb 27 2010 09:32 AM
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INSPECTION—FIRST LETTER OF MAINTENANCE ALPHABET.

INSPECTION—FIRST LETTER OF MAINTENANCE ALPHABET. K M PRASAD, Suptt. Engr.(Excavation), Jayant project, NCL INSPECTION Critical evaluation involving visual examination, measurement, testing, gauging, and comparison of materials , process, place, site,
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Feb 24 2010 09:58 PM