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जो छिपाए ना बने....

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11 Mar 2010
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बहुत बदबख्त बशर तेरा दौरे-जमाँ निकला....

बाद रहज़नी के कुछ यूं सफ़र का समा निकलाफ़िर लूटा के शुकुं जिस्त का कारवां निकला ॥सिवा कत्ल के कोई न थी रज़ा तेरी मगरदर्द से ज्यादा हर दर्द का सामां निकला ॥बिक गया निशात-ए-जि़गर यूं सरे शहरकुछ इस कदर इस बेकद्र का कद्रदां निकला ॥लिखते थे दर्द कि वज़ा न हो
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ओम श्री भ्रष्ट्चारय नमः

हरे नीले नोटों पर तुमने दिया वरदानतुम कुबेर के द्वार हो, तुम रतन धन खानतुम बिन भारतवर्ष में कहीं न गलती दालजय जय भ्रष्टाचार गुरू, जय जय भ्रष्ट कृपाल ॥॥जय भ्रष्टाचार महा महिमा ।जय दुर्नीति जय गुण गरिमा ॥तुम्हरे भजन सरकार को भावेमंत्री-संतरी सब गुण गावे
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पाकिस्तानी को हाकी क्यों मारी..

पाकिस्तानी को हाकी क्यों मारी..लगता है अस्ट्रेलिया की भारत से पिछले जनम की कोई दुश्मनी रही है । पहले क्रिकेट में भारत की बढ़्ती बादशाहत देख कर कंगारुओं को जो मिर्ची लगी वो देखने लायक थी । कभी हरभजन पर चकिंग का आरोप लगा दिया, कभी भारतीय टीम पर नस्लवाद का
Mar 02 2010 09:26 AM
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मियां सचिन, बबुआ अर्जुन के साथ ओपनिंग करने का इरादा है का .....

मियां सचिन, बबुआ अर्जुन के साथ ओपनिंग करने का इरादा है का .....मियां सचिन अब बहुत हुआ भईए, अब बहुत हुआ...अब बस भी करो यार । सारा क्रिकेट खुद खा जाओगे या आनेवाली पीढ़ि के लिए भी कुछ छोडोगे । अब अगर बेटे अर्जुन के साथ ओपनिंग करने का इरादा हो तो अलग बोल दो ।
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कहीं आपको नेटमानिया तो नहीं...

कहीं आपको नेटमानिया तो नहीं...भारत जैसे देश में नेट का प्रयोग अभी विकासशील अवस्था में है फिर भी देश में ऐसे लोगों की तादात बढती जा रही है जिन्हें नेट की लत ने एक नशे का आदि सा बना दिया है । चौंकिए मत यह कोई आम बीमारी तो नहीं पर नेट का निरंतर उपयोग
Feb 24 2010 12:02 PM
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हिंदी, हॉकी और बाघ

हिंदी, हॉकी और बाघयह शीर्षक पढ़ कर आपके मन में एक भाषा, खेल और जीव को एक जगह इकट्ठा करने तुक पर सवाल उठेगा ही...!!! जरा गौर करें, इन तीनों के आगे हम बड़े शान से ‘राष्ट्रीय’ का उपसर्ग लगाते हैं और क्रमश राष्ट्र की वाणी, राष्ट्र का खेल परंपरा की विरासत और
Feb 23 2010 11:11 AM
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पेतेन

पेतेनआठ दस घरों वाले गांव में वारिश में और झंझड में अधढहा मकान जिसकी एक भीत पर बुढ़िया के हाथ से बने गेरू के चित्र अभी भी साफ़ है । तेरह साल पहले बुढ़िया के बड़े बेटे की इसी घर के पास के पीपल के नीचे बिज़ली गिरने से मौत हो गई । रो दहाड़ की चुप्पी के बाद इस
टैग: पेतेन
Feb 17 2010 04:23 PM
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ओ गौरेया.....

ओ गौरेया.....ओ गौरेया.....नहीं सुनी चहचहाहट तुम्हारीइक अरसे सेताक रहे ये नैन झरोखेकुछ सूने और कुछ तरसे सेफुदक फुदक के तुम्हाराहोले से खिड़की पर आनाजीवन का स्वर हर क्षण मेंघोल निड़र नभ में उड़ जाना’धागे तिनके और फुनगियांसपनों सी चुन चुन कर लातीउछलकुद कर इस
Feb 15 2010 10:44 AM
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आज़ विरह की रात..

आज़ विरह की रात..आज़ विरह की रातमिलन की बात ना करनाआज़ विरह की रात.....पी मधुर गरल की प्यालीजी भर रोई मतवालीले सुबह उषा की लालीनयन, पलक के साथशयन की बात ना करनाआज़ विरह की रात....तरस तरस सब बुझ गईं प्यासेंबरस गईं नज़रों की आसेंनीरस मन की आह उसासेंजीवन की
Feb 11 2010 09:55 AM
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जीवन

जीवनसुख एक सुनहला पंछीख्वाव उनींदी आंखों कातृष्णा अतृप्त कंठों की......कंटकित राह, अथाह चाह,उस समग्र कीबूंद भर प्यासक्षण भर आसभर लेने को अथाहसागर की वासनालहूसिक्त चेहेरों पर ढांकें मुखोटेछुपाये गरलअदृश्य रगों में......।
टैग: जीवन
Feb 11 2010 09:01 AM
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जो छिपाए ना बने....

माटीसुनहली धूपदरख्तों के साये सेओंस की बूंदों सेकांटों के झुरमुट सेसागर के उन्मन सेदेती है छुअन माटी को.....जीवन में स्वप्न कासपने में जीवन काअस्तित्व बचाने को ।
टैग: माटी
Feb 11 2010 08:53 AM
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जो छिपाए ना बने....

प्रायश्चित एक जुड़वां कन्या भ्रुण गर्भ में मार दी गई । दोनों की रुहें नर्क में पहुंची तो दोनों एक दूसरे को डबकोहीं आंखों से ताकने लगीं । पहली रुह बोली_ जनम लेकर वहां भी नरक देखना था शायद सो यहां ये नरक भोगने भेज दिया गया । दूसरी बोली पिछले जनम के सारे
Feb 10 2010 03:20 PM
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अनबीता अतीत

अनबीता अतीतअर्से बाद तुम्हारा भोर के ख्वाव में आनाबदली भरी सुबह कोगुमसुम कर देता है जानी-पहचानी वही तुम्हारी मुस्कानअनमनी सी आंखों से तिरछी तिरछी हंसी तुम्हारीजो समेटी थी कोई अनकही पीरवर्षों से रूखी बंजर जमीं पर हल्की बरसात के बाद की उमस उनींदी उनींदी सी
Feb 10 2010 03:13 PM
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कोई जूते से ना मारे मेरे दिवाने को

कोई जूते से ना मारे मेरे दिवाने को जूते का मानव सभ्यता से बड़ा गहरा संबंध रहा है । कहते हैं कि किसी जमाने में किसी नाजुक बदन और तुनक मिजाज़ राजा को बागिचे में टहलते हुए कांटा चुभ गया । फिर क्या था उसने सारी पृथ्वी को चमड़े से मढ़ देने का आदेश दिया । अब इतना
Feb 09 2010 02:04 PM
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कहाँ स्लमडॉग हिंदी और कहाँ मिलियनारी अंग्रेजी

कहाँ स्लमडॉग हिंदी और कहाँ मिलियनारी अंग्रेजी हिंदी की हाय हाय बहुत हो गई. हिंदी के टुच्चे यूँ ही हिंदी का हाहाकार मचाते रहेंगे. हिंदी को जहाँ पड़े रहना है उसे वहीँ पड़े रहने दो. 60 साल से वहीँ पड़ी है तो क्या भेंगज हो गया. कुछ साल और पड़ी रहेगी और फिर एक ना
Dec 02 2009 09:15 AM
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गंगाधर मेहेर की दो कविताएँ

गंगाधर मेहेर की दो कविताएँ (स्वभावकवि गंगाधर मेहेर - १८६२ - १९२४) मूल उड़िया से हिन्दी अनुवाद : डॉ. हरेकृष्ण मेहेर अमृतमय मैं तो बिन्दु हूँ अमृत-समुन्दर का, छोड़ समुन्दर अम्बर में ऊपर चला गया था । अब नीचे उतर मिला हूँ अमृत-धारा से ; चल रहा हूँ आगे समुन्दर
Jun 20 2009 11:24 AM
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अपनी भाषा हिन्दी

प्यारे हिन्दी को चाहने वाले भाइयों और बहनों,हिन्दी ब्लॉग के क्षेत्र में यह मेरा नवीन प्रयास है। आज हम हिन्दी भाषियों की और हिन्दी इस उम्मीद से तक रही है कि हम हिन्दी की संतानें हिन्दी को विश्व में उचित स्थान दिलाएंगे। यह हमारा फ़र्ज़ भी बनता है। आज अगर
Jun 17 2009 05:47 PM
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हिंदी है जन-जन की भाषा

हिंदी है जन-जन की भाषा हिंदी है जीवन की भाषा हिंदी है हर मन की आशाहिंदी अपनेपन की भाषा हिंदी बढती ही जायेगीहिंदी जनता को जगाएगीहिंदी को जो लहर आएगी अंग्रेजी फिर कहाँ टिक पायेगीआओ करें हिंदी का पूजनहिंदी सीखे हिंद का हर जन आओ करें अपना तन-मन-धनहिंदी की
टैग: hindi
Jun 16 2009 04:00 PM