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यथार्थ

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15 Jun 2010
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विश्व रक्त दान दिवस !

                         आज विश्व रक्त दान दिवस है , रक्त जो जीवन का आधार है और इसके निर्माण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है. यदि
 
रेखा श्रीवास्तव
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कुछ ऐसे भी हैं?

             जिन्दगी के मेले में कितने तरह से लोग मिलते हैं और हम सबसे दो चार हो कर या तो उन्हें भूल जाते हैं या फिर ऐसा कुछ घटित हो जाता है कि हम उन्हें भूल ही नहीं पाते हैं बल्कि एक अजीब से
 
रेखा श्रीवास्तव
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ये दर्द न होगा कम !

                          सदियों से बेटियों को हाशिये में रखने वालों के लिए - वे देखे कि एक बेटी की कमी कितनी दर्द देने वाली होती
 
रेखा श्रीवास्तव
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एक और बागवाँ !

               जब बागवाँ फ़िल्म आई तो बहुत पसंद की गयी थी. एक आयु वर्ग ने इसको सराहा और एक ने इसकी आलोचना की. ये तो बात साफ है की किसने सराहा और किससे आलोचित हुई. ऐसे एक बागवां की
 
रेखा श्रीवास्तव
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मेरे सिद्धांत और मेरा करियर !

 मेरे सिद्धांत और मेरा करियर !                         इस विषय पर लिखने के लिए आज डॉ. कुमारेन्द्र की एक पोस्ट से अपनी भी आपबीती लिखने
 
रेखा श्रीवास्तव
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दर्द जो आखिर बह निकला!

आज सुबह जब ऑफिस आई तो एक मेल थी मेरे एकाउंट में और उसमें थी एक कविता - पढ़ा सोचा और आँखें भर आयीं फिर डूबने लगी अतीत में और उतराने लगी वर्तमान में
 
रेखा श्रीवास्तव
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महिला ब्लॉगर्स का सन्देश जलजला जी के नाम!

कोई मिस्टर जलजला एकाध दिन से स्वयम्भू चुनावाधिकारी बनकर.श्रेष्ठ महिला ब्लोगर के लिए, कुछ महिलाओं के नाम प्रस्तावित कर रहें हैं. (उनके द्वारा दिया गया शब्द, उच्चारित करना भी हमें स्वीकार्य नहीं है) पर ये मिस्टर जलजला एक बरसाती बुलबुला से ज्यादा कुछ नहीं
 
रेखा श्रीवास्तव
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आंखन देखी कानन सुनी !

                                ये किस्से सिर्फ लोगों से सुनती आ रही थी कि हमारी पुलिस कितनी भ्रष्ट
 
रेखा श्रीवास्तव
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मेरा मदर'स डे!

                              सबको शुभकामनाएं देते देते मेरी छोटी बेटी का ये तोहफा अपनी माँ के लिए  -
 
रेखा श्रीवास्तव
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माँ तुझे सलाम!

                         शत शत वन्दे है मातु
 
रेखा श्रीवास्तव
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वो एक रिश्ता!

                                    इस जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे बन जाते हैं, जो
 
रेखा श्रीवास्तव
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शायद हम अब कभी न मिलें!

            परसों ही टीवी पर छत्तीसगढ़ में हुए शहीदों पर आ रहे समाचार देख रही थी. एक शहीद ने उस समय अपने घर फ़ोन किया था और कहा कि हमें नक्सलियों ने चारों तरफ से घेर लिया है , चारों तरफ से गोलियां चल रही हैं. फिर फ़ोन कट गया
 
रेखा श्रीवास्तव
टैग: patra aur main
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रेल तंत्र में बनाया - अप्रैल फूल !

                                                      ये
 
रेखा श्रीवास्तव
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अविश्वनीय सच!

                               इस तरह कि कहानियां फिल्मों और टीवी सीरियल में ही देखने को मिलती हैं ,
 
रेखा श्रीवास्तव
टैग: garv aur rishte
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वो अमृत की बूँदें!

                घर के आँगन में एक बच्चे की चहक के लिए परेशान एक दंपत्ति - कितने प्रयास किये, कोई डाक्टर नहीं छोड़ा, कोई मंदिर और मजार नहीं छोड़ी. भाग्य को शायद ये मंजूर न था की उस
 
रेखा श्रीवास्तव
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जो गैरों की खातिर जिए मर मिटे ....................

  जो गैरों की खातिर जिए मर मिटे ....................                                
 
रेखा श्रीवास्तव
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क़ानून को ठेंगा दिखाते ये कारनामे!

                                 देश और समाज कि प्रगति और के लिए सरकार तो बहुत कुछ कर रही है
 
रेखा श्रीवास्तव
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दुरूह जीवन संध्या के पल !

वे स्टेशन की सीढ़ियों पर किनारे से बैठे थे और मैं स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रही थी। पता नहीं क्यों मेरी आँखें उनके चेहरे को पढने लगीं -- बार - बार छलक रहे आंसुओं को पोंछते जा रहे थे और आंसू भी बार बार आ रहे थे। मन में एक जिज्ञासा सी हुई कि क्यों इस
 
रेखा श्रीवास्तव
Feb 11 2010 12:59 PM
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फख्र है बेटियों पर!

बेटे और बेटियों के सवाल पर समाज ने हमेशा है प्रश्नचिन्ह खड़े किये हैं। आज भी मैं और मेरा परिवार गाहे बगाहे इस बात पर कटाक्ष सुनते रहते हैं लेकिन ये यथार्थ है कि मेरे संयुक्त परिवार में दो भाइयों के बीच पांच बेटियां हैं। इनके बड़े होने के पहले कोई कहता
 
रेखा श्रीवास्तव
Feb 05 2010 10:56 AM
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भिक्षाटन सबसे अच्छा व्यवसाय!

हमारी संस्कृति में दान को बहुत ही महत्व दिया गया है और आज भी कितने अवसर आते हैं जब कि दान के लिए हमारे हाथ उठ जाते हैं। शास्त्रों में तो ब्राह्मण को सबसे अधिक सुपात्र बताया गया है - तब वे वन में रहकर अपना जीवन यापन इसी से करते थे। आज भी धार्मिक कृत्य के
 
रेखा श्रीवास्तव
Nov 27 2009 12:18 PM
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बूढा उम्र से नहीं बोझ से !

एक बड़े प्रतिष्ठान में भोज आयोजित किया गया था। प्रतिष्ठान के सभी कर्मचारी उसमें शामिल हुए थे क्योंकि वह काम के दौरान ही आयोजन रखा गया था। उस दिन सारे मालिक मेजबानी में जुटे थे। उनको यह नहीं लग रहा था की ये हमारे यहाँ वेतनभोगी है, बड़े आग्रह के साथ सबको
 
रेखा श्रीवास्तव
Sep 25 2009 01:59 PM
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क्या परिचय दें!

वह मेरी सहेली है, जिसके साथ २२ वर्ष मैंने साथ साथ अगल -बगल बैठ कर गुजरे। अपने सुख-दुःख बांटे। उसे शादी में ही विरासत में ३ माह का पुत्र मिला और उसने उसकी मान बन कर ही उसे नहीं पला बल्कि उसकी मान के परिवार वालों को उनकी बेटी, बहन भी वापस की। मैं सच्चे दिल
 
रेखा श्रीवास्तव
Mar 18 2009 02:15 PM
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पुत्र ऋण !

मैं उनकी नर्स थी, क्योंकि बेटे की पत्नी को ससुर की सेवा में कोई रूचि नहीं थी और बेटे के पास समय नहीं था। इसलिए उन्होंने मुझे रख लिया और मैं सुबह आठ बजे से रात आठ बड़े तक उनकी देखभाल करती थी। वे बहुत गंभीर प्रकृति के व्यक्ति थे। एक दिन उनके बेटे ने मुझे
 
रेखा श्रीवास्तव
Dec 15 2008 01:00 PM
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पहले मेरी माँ है!

आज मेरी माँ ने अंतिम साँस ली, फिर तो सारा घर दौड़ने लगा यह क्या हो गया? वह दादी माँ जिसने हमेशा उसको दुत्कारा था, पास बैठी रोने का नाटक कर रही थी। वह ताई जिसने उसको कभी चैन से रहने नहीं दिया। मेरे सर पर हाथ फिरा रही थी और वह हाथ मुझे हथोडे की तरह लग रहा
 
रेखा श्रीवास्तव
Dec 02 2008 01:27 PM
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भीख नहीं लेंगे!

मैं झाँसी स्टेशन पर उरई आने के लिए बैठी ट्रेन का इन्तजार कर रही थी की करीब आठ और दस वर्ष उम्र के दो बच्चे मेरे पास आए।उनमें से एक बोला - 'मैं आपके पैर दबा दूँ।'मैं कुछ समझी नहीं कि इन बच्चों का इरादा क्या है? मैंने उन्हें मना कर दिया तो थोडी दूर जाकर
 
रेखा श्रीवास्तव
Oct 24 2008 01:45 PM