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कसौंधन दर्पण

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29 Apr 2010
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सामाजिक रिशतें

मन में फिर फूल खिलने लगे है,आशाओं के दीप फिर जलने लगें है । आसमान में पहले दिखती थी कालीमा, अब रूपहले इन्‍द्र धनुष से बनने लगें है ।। मुस्‍कान से भी पहले जो करते थे नफरत, दिल खोलकर हँसने लगें है । कटे-कटे से रहना जिनकी थी आदत, अब दौडकर गले मिलने लगें है
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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समाज का गौरव

डॉं राहुल गुप्‍ता स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त करने के बादडॉं राहुल चंद्रभान गुप्ता को Otorhinolaryngology  (ईएनटी सर्जरी) में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है वर्ष 2009 के लिए डी एन बी पुरस्कार भारतीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष माननीय मोंटेक सिंह
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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योगस्थ कुरू कर्माणि

योगस्थ कुरू कर्माणिअर्थात् योग (समत्व) में स्थित होकर कार्य करो ।सफल परारथ है जग माहिं, कर्महीन नर पावत नाहीं ।।रामायण की अपरोक्त पंक्तियॉं हमें बताती है कि वह सब कुछ जिसकी हम इच्छा रखतें है, वह इस स्ष्टि में विधमान है पर उसके लिए हमें सही दिशा में कार्य
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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सफेद फिनायल

आवश्‍यक सामग्री – कटिंग आईल-500 मि.ली., पाईन आईल 500 मि.ली., एम.एल.सी. 200 ग्राम, पानी 20 लीटर, सेन्‍ट मनपसन्‍द जैसे- सेन्‍टोनीला, रोज, मोगरा आदि । उपकरण – 1 डण्‍डा, 1 प्‍लास्टिक की बाल्‍टी, हैण्‍ड ग्‍लोब्‍ज, नाप व बोतलें, प्‍लास्टिक का डब्‍बा । निर्माण
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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वाशिंग पाऊडर

आज के समय में देखा जाए तो हर धर में जब तक परिवार का प्रत्‍येक सदस्‍य जरूरत के मुताबिक आय नही जुटा पाये तो परिवार की आर्थिक व्‍यवस्‍था चरमरा जाये । प्रत्‍येक धरो में वाशिंग पाऊडर, फिनायल, अगरबत्‍ती, मोमबत्‍ती, दियाबत्‍ती, नील, आदि कई प्रकार के
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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स्‍वंय को बनाऍं खुबसूरत

हर व्‍यक्ति चाहता है कि वह दूसरे से अच्‍छा दिखे । किन्‍तु किसी न किसी परेशानी की वजह से वह पिछड जाता है 1 आए दिन देखने में आता है कि हमारे शरीर में छोटी-छोटी बीमारीयों की वजह से हम हताश हो जाते है । अब आपको निराश नही होना है हम आपकी इस परेशानीयों से
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Mar 01 2010 08:30 PM
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मानसिक स्‍वास्‍थ और हमारा सामाजिक दायित्‍व

आज संसार में लोग पंछियों की तरह उडना चाहते है और ग्रहों की तरह चलना चाहते है और इसी दौड में भारतीय संस्‍कृति की सबसे बडी शक्ति संयुक्‍त परिवार में विधटन जंगल में लगी आग की तरह फैल रही है जिसके कारण एकल परिवार की उत्‍पति और कुछ समय बाद सामजस्‍य की समस्‍या
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Mar 01 2010 08:30 PM
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सिर का ताज – काले धने व सुन्‍दर बाल

बाल हमारे सिर का ताज है । अगर अपने शरीर व चेहरे की सुन्‍दरता के अलावा अपने बालो पर भी ध्‍यान देगें तो लोग बरबस ही कह उठेंगें चेहरा तेरा चॉंद, जुल्‍फे धटाओं वाली शाम । इतनी हसीन है तू, तुझको मेरा सलाम । बालों के पोषण के लिए आपके भोजन में प्रोटिन, विटामिन,
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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चर्मरोग

कई बार त्वचा में कई प्रकार के चर्म रोग भी खूबसूरती में दाग के समान होते है ।सफेद दागयह दूधिया सफेद रंग का दाग होता है । इसे ल्यूकोडर्म कहते है इसका इलाज काफी लंबा चलता है इसके इलाज के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प का इस्तेमाल करते है । सोरिएसिससामान्य भाषा में
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Mar 01 2010 08:29 PM
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रूद्राक्ष

रूद्राक्ष का जन्‍म त्रिपुर नाम के एक राक्षस ने ब्रम्‍हा, विष्‍णु और अन्‍य देवताओं को तिरस्‍कृत किया तो इन देवताओं ने भगवान शंकर से सबकी रक्षा करने को कहा । तब समाधिस्‍थ शंकर जी ने अपने नेत्र खोले । नेत्रों से जलबिन्‍दु गिरे और वहीं महारूद्राक्ष के वृक्ष
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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भक्ति ज्ञान सरिता-3

कर ले जग रह सुन्‍दर काम । बुरा न कर काहू को, कर भल, हो भल नाम ।। जग बन्‍धन तजि भज रधुन्‍दन, जय जय लोक ललाम । कोऊ न साथ देहँ तेरा, दूर ते कर परनाम ।। सबहि लोग बस बात बनैहैं, आवे संकट धाम । सत साथी खोजब बहु दुर्लभ, यथा कृष्‍ण बलराम ।। चन्‍द्रभानु, सो रहि
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Feb 21 2010 12:19 PM
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भक्ति ज्ञान सरिता-2

जन लो, सदगुण को आधार । जग रहि सब दिन अवगुन कीन्‍हा, अब तो सोच विचार ।। छोड कुसंगत करि सत्‍संगत, गुन लहु सबहि प्रकार । तहि जानिहों असली ज्ञानी, बुरे कर्म तजि डार ।। चल सुमार्ग लखि लक्ष्‍य आपुना, पथ करि दे उजियार । चन्‍द्रभानु निज किरनन से कर, दूजन को
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Feb 21 2010 12:19 PM
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भक्ति ज्ञान सरिता

मार्ग चलत मोहि मिल गए ज्ञानी । उन प्रभाव ते मम कठोर उर, होगयो पानी पानी ।। ज्ञानी गुरू मम भये, और मै उनको शिष सानी । दीप ज्ञान को मिलो, दियो तेज बड दानी ।। मै, नहिं जानी, फेर हुआ का मम जीवन प्रभु जानी । जीवन बदलो, स्‍वंय बदल गयो, ध्‍यान रही गुरू बानी
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Feb 21 2010 12:19 PM
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शंखनाद शुभ व अनिवार्य

अर्थवेद में शंख बजाने के बारे में निर्देश देते हुए कहा गया है कि शंख अंतरिक्ष, वायु, ज्‍योतिमंडल और सुचर्ण में संयुक्‍त होता है । शंखनाद से शत्रुओं का मनोबल कमजोर होता है । शंख विश्‍व रक्षक और रोग-शोक, अज्ञान और निर्धनता को मिटाकर आयु को बढाने वाला होता
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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Feb 21 2010 12:19 PM
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सूर्य नमस्‍कार क्‍यों..

शास्‍त्रों में प्रतिदिन प्रात:काल सूर्य नमस्‍कार करने की बात कही गई है । इस नियम के पीछे बहुत ही वैज्ञानिक कारण है । सूर्य की किरणों से हमें विटामिन डी प्राप्‍त होता है । हमारी त्‍वचा सूर्य की किरणों के साथ मिलकर विटामिन डी का निर्माण करती है । इसके
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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Feb 21 2010 12:19 PM
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कार्य सिद्धि के लिए करें देव परिक्रमा

मंदिरों में अकसर कई लोगों को परिक्रमा करते देखा जा सकता है । विभिन्‍न पर्वों पर महिलाऍं वट वृक्ष की परिक्रमा करती है । आइए जाने परिक्रमा करने का सही तरीका क्‍या है । अपनी-अपनी आस्‍था के अनुसार देव दर्शन प्रेरणास्‍पद और ऊर्जादायी है । मंदिर का वास्‍तु ही
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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इन्‍हे भी जाने....

अंको का अविष्कार ३०७ ई. पूर्व भारत में हुआ ।शून्य का अविष्कार भारत में ब्रह्मगुप्त ने किया ।अंकगणित का अविष्कार २०० ई. पूर्व भास्कराचार्य ने किया ।बीज गणित का अविष्कार भारत में आर्यभट्ट ने किया ।सर्वप्रथम ग्रहों की गणना आर्यभट्ट ने ४९९ ई. पूर्व में की
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
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Feb 21 2010 12:18 PM
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भक्ति ज्ञान सरिता - 4

करहु कृपा करूणा के सागर । दीन दयाला दु:ख हर्ता, सफल गणों के आगर ।। तुम अनाथ के नाथ, आपहि अब मोहि देऊ । बिन माझी नइया मोरी अटकी, रेत बीच कस खेऊ ।। कृपा सिन्‍धु बाढहु जल लेकर, बिन जल नहि स्‍नेहू । चन्‍द्रभानु चालक जल पावें, दूसर कोई न गेहू ।। धन्‍य भयो
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Feb 21 2010 12:18 PM
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लाल का कमाल

लाल ही लाल ये दुनिया, रे मूसक तु हि बता रे । कौन सा ठौर है ऐसौ, जहॉं नहिं लाल बसा रे ।। फिरते मारे क्‍यों है ? बनती नहिं कोई बात । धन के पिछे भागे क्‍यों है ? सह के हर हालात ।।कहीं किसी के साथ, जनम तक सात दिया रे । लाल ही लाल ये दुनिया, रे मूसक तु हिं
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Feb 21 2010 12:18 PM
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मातृ कृपा

मॉ ममता महान हम जानी । सेवत सहि दु:ख शिशु आपुनो, कबहुँ नाहि उकतानी ।। ऐसो प्रेम देत कौन भला, दीन्‍हों मॉं सहि हानी । कोई बडो न मातृ पूजा से, कह गए अस सब ज्ञानी ।। मातृ ममत्‍व, सुत सुकृन्‍त ते, सदगुन सबही गानी । चन्‍द्रभानु एक सपूत ही, धर उजियारा लानी ।।
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Feb 21 2010 12:17 PM
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कसौंधन दर्पण

भक्ति ज्ञान सरिता का विमोचन भगवान जगन्‍नाथ
 
बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता
Jan 06 2010 02:44 PM