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13 May 2010
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धोबी-धोबिन क बतकही..(क्रियात्मक गीत)

गँवई तलइया में बस्तर धोवै जात की बेरियाँ धोबी-धोबिनी आपन हियरे क मरम एक दुसरे से बतियाव तारन ! लुगाई गरीबी क रोवना रोव तिया तऽ मनसेधू ओकरा के गवें-गवें ढाढस दे तारन, समझावत-बुझावत बाड़न । इहै आपसी पति-पत्नी संवाद चल रहल बा - धोबिन- रहि-रहि जियरा कचोटै ला
 
हिमांशु । Himanshu
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कइसे बसंत मनाइब हो ..

Photo Source : Webdunia.comसखि आइल मधुऋतु आइल खुशिया छिटाइल होआली कंत न अइलैं तै कइसे बसंत मनाइब हो ॥बैरिनि कुहुँकै कोइलिया कतेक समुझाइब होसखि बगिया निरखि रसवंती पगल होइ जाइब हो ॥जाती की बेरियाँ कह्त गइलैं तोहै ना भुलाइब होरानी रखबै करेजवा की ओट पलकिया
 
हिमांशु । Himanshu
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हिमांशु । Himanshu
Feb 17 2010 06:29 AM
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जय भारत बोला... दुसरका भाग

बाबूजी कऽ एगो कविता प्रस्तुत बा । ई हऽ दुसरी कड़ी । पहिली इहाँ पढ़ीं जा । जइसे-तइसे भोजपुरी लिख के गावै-बजावै वालन से अलग भोजपुरी, साहित्यिक संसकार में पगल भोजपुरी लिखे के हिमायती हउअँ हमार बाबूजी । आपन स्कूल खातिर बहुत लिखलन, ओही डायरी में लिखल कवितन में
 
हिमांशु । Himanshu
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Feb 15 2010 01:25 PM
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जय भारत बोला ...

बाबूजी कऽ एगो कविता प्रस्तुत बा । ई हऽ पहली कड़ी । दूसरी में कविता पूरी होई । जइसे-तइसे भोजपुरी लिख के गावै-बजावै वालन से अलग भोजपुरी, साहित्यिक संसकार में पगल भोजपुरी लिखे के हिमायती हउअँ हमार बाबूजी । आपन स्कूल खातिर बहुत लिखलन, ओही डायरी में लिखल कवितन
 
हिमांशु । Himanshu
टैग: कविता
Feb 14 2010 08:38 AM