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संजय कुमार

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17 Jun 2010
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और बो, महान बन गया ......>>> संजय कुमार

सुबह ८ बजे जैसे ही शुक्लाजी घर से दफ्तर के लिए निकलने को हुए , तभी अचानक एक चमचमाती हुई कार उनके घर के बाहर आकर रुकी , जिसे देखकर शुक्लाजी रुक गए ! तभी उस कार मैं से एक व्यक्ति जो सफ़ेद कुरता-पायजामा पहने हाँथ मैं सोने का ब्रासलेट, और मंहगी घडी, गले मैं
 
संजय कुमार चौरसिया
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इस गरीबी ने कर दिया, सब कुछ तबाह ...>>> संजय कुमार

आज अखबार पड़ते वक़्त एक ऐसी घटना को पड़ा जिसे पढकर दिल सिहर गया ! दिल को धक्का सा लगा, इस तरह की ख़बरें सुनकर !ये क्या हो गया आज के इन्सान को ! आज का कलियुगी इन्सान, जो अपनों के खून से अपनी प्यास बुझा रहा है ! खबर यह थी कि एक पिता ने अपनी पांच मासूम
 
संजय कुमार चौरसिया
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हर घर बहुत कुछ कहता है .... इन्सान का सबसे सच्चा साथी ....>>> संजय कुमार

घर, इन्सान का वह सबसे बड़ा साथी, जो उसके साथ जीवन भर रहता है , और जिसके बिना इन्सान का जीवन अस्तित्वहीन है ! इन्सान के हर सुख-दुःख का साक्षी होता है घर ! इन्सान की बहुत सी यादें एक घर से जुडी रहती है ! फिर चाहे वहां उसका जन्म हुआ हो या मृत्यु , उसका बचपन
 
संजय कुमार चौरसिया
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अपने हिस्से की सारी लड़ाईयां... धीरे-धीरे लड़ते चलो ...>>> संजय कुमार

इन्सान का जीवन बहुत कठिनयियों भरा होता है ! जब तक इस हाड़-मांस बाले शरीर मैं साँस रहती है तब तक इन्सान लड़ता है अपने आप से ! कभी अपने लिए तो कभी अपनों के लिए तो कभी दूसरों के लिए , उम्र भर ! लड़ता है अपनी समस्याओं से, लड़ता है अपने आस-पास होने बाली हर
 
संजय कुमार चौरसिया
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हम धन्यवाद करते हैं, टेलीविजन का ....>>> संजय कुमार

एक छोटा सा बिजली से चलने बाला चलित द्रश्यों का डिब्बा जिसे हम सब टेलीविजन या टी व्ही या दूरदर्शन और बुद्धूबक्से के नाम से जानते हैं ! वह बुद्धुबक्सा जिसमे पूरा ब्रह्माण्ड समाया हुआ है ! एक खटका दबाते ही दुनिया भर की जानकारी और सब कुछ जिसे हम सब पल भर मैं
 
संजय कुमार चौरसिया
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इसमें विश्वाश है, इसमें कुछ खास है.....>>>> संजय कुमार

आज सुबह एक विज्ञापन जब टेलीविजन पर देखा तो हम उस विज्ञापन को देखकर यह समझ नहीं पाए की विज्ञापन इस तरह क्यों दिखाया जा रहा है , आखिर इस विज्ञापन का क्या मतलब है ! और आखिर यह विज्ञापन का हम क्या अर्थ निकालें ! विज्ञापन था किसी सीमेंट कंपनी का ! '' लाल रंग
 
संजय कुमार चौरसिया
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धर्म और आस्था का दिखावा...( लघु- कथा ) ......>>>> संजय कुमार

यह लघु-कथा मैं पहली बार लिख रहा हूँ , इसमें बहुत सी गलतियाँ होंगी, आपसे निवेदन है, आप मेरी गलतियों के बारे मैं बताएं, जिससे मै आगे गलतियों मैं सुधार कर और भी अच्छा लिखने की कोशिश करूं ! कृपया अपनी राय अवश्य दें
 
संजय कुमार चौरसिया
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क्या हैं, हमारी सभ्यता और संस्कृति....>>> संजय कुमार

भारतवर्ष पूरे विश्व मैं जाना जाता है अपनी सभ्यता और संस्कृति के लिए ! वह सभ्यता और संस्कृति जो पिछले सेकड़ों वर्षों से एक परम्परा के रूप मैं हमारे देश मैं चली आ रही है ! यह बात बिलकुल सही है! जिस कारण हम सब अपने आपको भारतीय कहने पर गर्व महसूस करते है !
 
संजय कुमार चौरसिया
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बच्चों का जिद्दी होना, अब बन गया खतरा....>>> संजय कुमार

बच्चे भगवान् का रूप होते हैं ! बच्चे कुम्हार की उस मिटटी के समान होते हैं , जिन्हें कुम्हार कोई भी रूप दे सकता है ! बच्चों मैं ज्ञान नहीं होता वह तो अज्ञानी होते हैं ! और दुनिया भर की बातें होती हैं बच्चों को लेकर जो हम सब को करते देखा गया है ! हम सब भी
 
संजय कुमार चौरसिया
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यह देश है धीर और वीर.....गरीबों का... इन गरीबों का क्या कहना.....>>> संजय कुमार

आप सभी ने फिल्म नया दौर का यह गीत जरूर सुना होगा ! ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का, इस देश का यारों क्या कहना, ये देश है दुनिया का गहना ! सच बात इस गीत मैं कही गयी ! वाकई मैं यह देश वीर जवानों का ही है ! वह जवान जो देश की रक्षा मैं अपना
 
संजय कुमार चौरसिया
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संघर्ष, जो कभी खत्म नहीं होता, क्या आपने कभी संघर्ष किया .........>>> संजय कुमार

संघर्ष एक छोटा सा शब्द ! किन्तु इस छोटे से शब्द मैं इन्सान का पूरा जीवन निकल जाता है ! फिर भी यह शब्द या संघर्ष निरंतर चलता रहता है !और कभी ना खत्म होने बाला संघर्ष ! एक बहने बाली नदी के समान जिसे सिर्फ बहना आता है ! संघर्ष भी इन्सान के जीवन मैं कभी नहीं
 
संजय कुमार चौरसिया
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भूंख, कभी ना शांत होने बाली.....>>>>> संजय कुमार

भूंख ! यह जरूरी नहीं की इन्सान को भूंख, सिर्फ पेट की भूंख को पूरा भरने के लिए लगती हो ! रोटी की भूंख तो इन्सान कैसे न कैसे मिटा ही लेता है ! लेकिन एक भूंख ऐसी है ! जिससे इन्सान का पेट कभी भी नहीं भरता , और वह भूंख है सफलता की भूंख ! सफलता पाने की भूंख एक
 
संजय कुमार चौरसिया
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शराब और सिगरेट स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद, हमारे या सरकार के लिए....>>>> संजय कुमार

सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है ! तम्बाखू खाने से केंसर होता है ! धुम्रपान, गुटखा और शराब से शरीर खराब होता है ! यह जानलेवा हैं ! इस नशे से दूर रहिये ! इस तरह के विज्ञापन हमने हर जगह लिखे देखे होंगे ! यह विज्ञापन लिखना उन कम्पनियों को अति
 
संजय कुमार चौरसिया
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आज हर जगह से ठुकराया हुआ हूँ मैं, कहीं बन्दूक ना उठा लूं ....>>>> संजय कुमार

अभिशाप एक ऐसा शब्द जो किसी इन्सान के साथ अगर जुड़ जाए तो उस इन्सान की क्या स्थिति होती है हम यह सब भली-भांति जानते हैं ! फिर अभिशाप कोई भी हो ! अभिशाप चाहे गरीबी का हो या भुखमरी का ! अभिशाप आतंकवाद का, या फिर अभिशाप हो बेरोजगारी का ! यह ऐसे अभिशाप हैं जो
 
संजय कुमार चौरसिया
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आइये मिलते हैं दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी से.....>>>> संजय कुमार

अमेरिका ने अभी हाल ही मैं विश्व के सबसे खूंखार आतंकवादियों की सूची जारी की है ! जिसमे सबसे पहला नाम आया ओसामा बिन लादेन का ! अरे भई आना भी था , क्योंकि लादेन ने अमेरिका वासियों का जीना जो मुस्किल कर रखा है ! आये दिन कोई ना कोई वहां धमाकों से सम्बंधित
 
संजय कुमार चौरसिया
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क्या भगवान् भी भूँखा है,...सोना-चांदी, रूपए-पैसे का.....>>>> संजय कुमार

दो दिन पहले खबर सुनी कि कर्नाटक की एक दंपत्ति ने शिर्डी के सांईबाबा मंदिर पर १०० किलो चांदी दान मैं दे दी ! क्योंकि उस दंपत्ति की आस्था साईंबाबा मैं थी ! क्या आस्था का भी कोई मोल होता है ! क्या यही है सच्ची आस्था ! तिरुपति बालाजी पर चढ़ गया ५ करोड़ का
 
संजय कुमार चौरसिया
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कहीं नेताजी की नजर ,इन पर ना पड़ जाये... नहीं तो ......>>> संजय कुमार

हिंदुस्तान के नेताजी का क्या कहना ! एक पहुंचे हुए या विख्यात पुरुष के रूप मैं जाने जाते हैं ! या यूँ कह सकते हैं ! वह व्यक्ति जिसके पास होती है पारखी नजर ! और पहुंचे हुए लोगों की खोज करने बाला ! अरे नहीं समझे अपनी पार्टी के लिए बिख्यात लोगो को ढूढने बाला
 
संजय कुमार चौरसिया
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मैं अन्धविश्वास बेचने आया हूँ, क्या आप खरीदोगे....>>>> संजय कुमार

क्या आप परेशान हैं ! क्या आपको बार-बार नजर लग जाती है ! क्या आपके व्यवसाय मैं घाटा हो रहा है ! या आपका बच्चा पढ़ाई मैं कमजोर है , या आप माँ नहीं बन पा रहीं है ! या फिर आपकी बेटी की शादी नहीं हो रही है , या बार-बार सगाई होकर सम्बन्ध टूट रहा है ! नई गाडी
 
संजय कुमार चौरसिया
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किसने पाया सुकून, दुनिया मैं.....>>>> संजय कुमार

सुकून इन्सान के जीवन का वह पल ! जिसके के लिए इन्सान अपनी पूरी जिंदगी निकाल देता है ! फिर भी इन्सान पूरी उम्र तरसता रहता हैं ! उस एक पल के सुकून के लिए ! सुकून जो होता है सिर्फ क्षणिक भर का और कुछ पलों का ! और यह पल इन्सान के जीवन मैं कब आते हैं ! और कब
 
संजय कुमार चौरसिया
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पचपन और बचपन को जरूरत है, हमारे प्यार और सहारे की.....>>>> संजय कुमार

इन्सान के जीवन मैं दो ऐसे पड़ाव होते हैं ! जहाँ पर इन्सान को सबसे ज्यादा जरूरत होती है अपनों के प्यार, हमदर्दी और सहारे की ! अगर यह सब इन्सान को, इन दोनों उम्र के पड़ाव मैं ना मिले तो इन्सान का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जायेगा ! और इन्सान पूरी तरह टूट
 
संजय कुमार चौरसिया
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किस काम के हैं, आज के ये संगठन....>>>> संजय कुमार

संगठन एक ऐसा शब्द जिसमे झलकती है एकता और शक्ति ! वह एकता और शक्ति ! जो देश मैं हो रहे गलत कामों का विरोध करने के लिए होती है ! ना की स्वयं कुछ गलत करें ! इस देश मैं आज दुनिया भर के संगठन है ! कुछ धर्म के नाम पर कुछ हिंदुत्व के नाम पर! जो कभी भी किसी सही
 
संजय कुमार चौरसिया
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नहीं बनना हमें, दूल्हा-दुल्हन.....(अक्षय-तृतीया )>>>> संजय कुमार

आज है विष्णु के छठवें अवतार भगवान् परशुराम की जयंती! जयंती पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभ-कामनाएं -------------------------------------------------------------------------------------------------आज है अक्षय-तृतीया , हिंदुस्तान मैं शादी-विवाह का एक
 
संजय कुमार चौरसिया
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जाना है दूर....ना की जिंदगी से.......( रोज रोज होते सड़क हादसों से, लें सबक )...>>> संजय कुमार

हर इन्सान के अंदर कुछ ना कुछ आदतें होती हैं ! चाहे वह अच्छीं हों या बुरी ! आदतें तो आदते होती है ! और इनका अच्छा और बुरा प्रभाव भी इन्सान के ऊपर ही पड़ता हैं ! अगर आदतें अच्छी हैं, तो सब कुछ अच्छा होता है ! और अगर गलत हैं तो सब कुछ गलत ! और उसके होते हैं
 
संजय कुमार चौरसिया
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पानी मंहगा सस्ता खून ......>>>>> संजय कुमार

पानी, इन्सान की वह जरूरत है जो इन्सान को उसके जीवन मैं पल पल मैं आवश्यक होता है ! क्योंकि जल ही इन्सान का जीवन जीवन है !' जल बिन सब सून ' ! अगर इस धरा से पानी ख़त्म तो समझो इस पृथ्वी से सब कुछ ख़त्म ! इस पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जायेगा और यह पृथ्वी हो
 
संजय कुमार चौरसिया
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अँधा प्यार.... और लुटती इज्जत...>>> संजय कुमार

कहते हैं प्यार तो अँधा होता है ! और यह बात जिसने भी लिखी १०० टका सही लिखी है ! क्योंकि आप तो जानते हैं ! प्यार मैं अँधा आदमी ना तो रिश्ते नाते देखता है ! और ना देखता ऊँच-नीच का का अंतर, प्यार ना समझे किसी भी प्रकार का जाति बंधन ! प्यार ना समझे
 
संजय कुमार चौरसिया
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इस देश मैं एक गद्दार ढूँढने निकलो , कई मिल जायेंगे.....>>>> संजय कुमार

गद्दार एक ऐसा व्यक्ति एक ऐसा नाम जो किसी भी विकसित राष्ट्र को एक ही क्षण मैं तवाह करवा सकता है ! किसी भी राष्ट्र की नींव को अन्दर तक खोखला करने की क्षमता रखता है ! इतनी ताक़त होती है एक गद्दार मैं ! यह हमारे साथ रहकर हमारी जड़ें खोखली करता रहता है ! और
 
संजय कुमार चौरसिया
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माँ तेरा कर्ज हैं मुझ पर....(Mother's-Day).....>>>> संजय कुमार

माँ शब्द एक अक्षर का बस छोटा सा नाम है ! पर इस नाम मैं है पूरा संसार और सब कुछ विद्यमान ! हर यौनी मैं, इन्सान, पशु-पक्षी इन सभी मैं माँ का स्थान सर्वोच्य है ! और तह जिंदगी जब तक इन्सान इस धरा पर है , सर्वोच्य और सबसे ऊंचा रहेगा ! माँ नाम की ताक़त का
 
संजय कुमार चौरसिया
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मेरे लिए हो रहे हैं, आज ये कत्लेआम.....>>>>> संजय कुमार

चाहे त्रेतायुग हो या सतयुग , द्वापरयुग हो या कलियुग , हर युग मैं इन्सान ने इस पृथ्वी पर मेरे लिए दूसरों को कष्ट दिए हैं ! और जब तक मैं रहूंगी आम इन्सान कभी भी सुखी नहीं रह पायेगा ! मुझ पर बैठने बाला एक साधारण इन्सान भी कुछ समय बाद पूरी तरह बदल जाता है !
 
संजय कुमार चौरसिया
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मैं भी हूँ आपके काम का....... मेरे बिना क्या आप....>>> संजय कुमार

मैं कहीं भी आ सकता हूँ , मैं कभी भी आ सकता हूँ , नहीं देखता सुबह, नहीं देखता शाम ! नहीं देखता ख़ुशी और ना ही गम ! ना दिन और ना रात ! ना मैं हिन्दू हूँ और ना ही मुस्लमान , ये जातिधर्म क्या होते हैं ! नहीं बाँध सकता मुझे कोई इन बन्धनों मैं ! अपनों के पास
 
संजय कुमार चौरसिया
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आज मंदिरों मैं, चल रहे जूते चप्पल ......>>> संजय कुमार

मुझे माफ़ करना इस तरह की बात लिखकर मैं किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहता ! बस एक छोटी सी बात है जो मैं आप लोगों से कहना चाह रहा हूँ ! हमारे देश मैं मंदिरों का एक अलग ही महत्व है ! हम अपने मंदिरों को एक उच्च स्थान के रूप मैं जानते हैं !
 
संजय कुमार चौरसिया
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कहाँ है, बो संजीवनी बूटी ......>>> संजय कुमार

संजीवनी बूटी का नाम ध्यान मैं आते ही हमें रामायण की याद आती है ! और ध्यान मैं आता है की, किसतरह बजरंगबली ने युद्ध के दौरान मूर्छित लक्ष्मण के प्राण संजीवनी बूटी द्वारा बचाए थे ! और आज तक हम उस संजीवनी बूटी के महत्व को जानते हैं ! और जान गए आयुर्वेद के
 
संजय कुमार चौरसिया
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मेरे पास नहीं है, साहित्यिक भाषा, फिर भी........ >>>>

यह मेरी ५० बीं पोस्ट हैं ! और इस पर मैं आप सभी ब्लॉग बंधुओं का धन्यवाद करता हूँ , की आप सभी ने मेरे विचार और सन्देश पड़े और उन पर अपनी प्रतिक्रिया दी ! आप सभी ने मेरे लेखन को सराहा इसके लिए मैं आप सभी का आभारी हूँ ! मैंने आज तक कोई साहित्यिक किताब नहीं
 
संजय कुमार चौरसिया
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नंगा, भूँखा, गरीब देश और मर्सिडीज कार.....>>>> संजय कुमार

विश्व की सबसे अधिक आवादी बाला दूसरा देश जिसे हम अपना देश भारत, इंडिया , और हिंदुस्तान के नाम से जानते हैं ! जो हिंदुस्तान अपनी एकता मैं अनेकता , अनेक तरह की भाषाएँ , हजारों बोलियाँ , अनेक कलाओं के लिए पूरे विश्व मैं अपनी विशालता के लिए जाना जाता है ! जब
 
संजय कुमार चौरसिया
May 02 2010 11:57 AM
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क्या होता है मजदूर दिवस.......>>>> संजय कुमार

आज है मजदूर दिवस, महारास्ट्र डे या मई दिवस , जिसे आज हिंदुस्तान मैं मनाया जा रहा है ! पर कौन है जो मजदूर दिवस मना रहा है ! क्या मजदूर , जी नहीं, यह दिवस तो मना रहे हैं हमारे देश के महान खादीधारी नेता ! वह भी वातानुकूलित कमरों मैं बैठकर ! और मजदूर लगा हुआ
 
संजय कुमार चौरसिया
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अगर है आप मैं हिम्मत, तो अपने घर से बाहर निकालकर बताओ .....>>>> संजय कुमार

कहते हैं जब कोई बात इन्सान के दिल मैं घर कर जाती है , तो उस बात को उस इन्सान के अंदर से बड़ी मुस्किल से दूर कर पाते हैं ! और अगर वह बात उसके अंदर से बाहर नहीं निकलती ,तो उसका परिणाम कभी कभी बहुत घातक होता है! और वह कहीं ना कहीं उस इन्सान का अहित ही करती
 
संजय कुमार चौरसिया
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मैं इन्सान किस काम का ....>>> संजय कुमार

मैं इन्सान हूँ , पर हूँ किस काम कामैंने रचे इतिहास , किये कई अविष्कारमै नित नित करता, बड़े -बड़े कामफिर भी आ न सकूँ कभी किसी के कामफिर भी है इस जग मेरा बड़ा नाममै इन्सान हूँ, इन्सान बस नाम कामै इन्सान किस काम का मै..................इन्सान हूँ बस नाम का
 
संजय कुमार चौरसिया
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ना बनने दे, घर का आँगन कोठरियों मैं ......>>>> संजय कुमार

कहते हैं एकता मैं जो शक्ति है ! वह किसी अकेले इन्सान मैं नहीं है ! यह बात बिलकुल सही है ! हमने देखी है एकता की शक्ति, फिर चाहे वह युवा संगठन हो या, या फिर कोई छोटा मोटा संगठन, हम सब इसकी ताक़त को जानते हैं ! मैं यहाँ बात कर रहा हूँ, अपने पारिवारिक संगठन
 
संजय कुमार चौरसिया
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आखिर, मैं एक पिता हूँ .....>>>>>>> संजय कुमार

भारतीय परम्पराओं और संस्कारों मैं माता -पिता का स्थान ईश्वर से भी बढकर माना जाता है ! इसका कारण है कि एक बच्चा जन्म के बाद सबसे पहले अपने माता- पिता को ही जानता है , बाकि सब उसके बाद उसे बताया जाता है ! कहते हैं माँ सबसे ज्यादा समय अपने बच्चों के साथ
 
संजय कुमार चौरसिया
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कहाँ गया बो चना जोरगरम बाला....>>>> संजय कुमार

बचपन मैं हम जब स्कूल जाते थे ! तो स्कूल के बाहर एक बूढी औरत जो बेर और चने बेचा करती थी ! आज भी याद होगा आप सभी को बो औरत जिससे आपने कभी ना कभी बेर और चने खाए होंगे ! आपको याद होगा बो चना जोरगरम बाला जो अपने कंधों पर एक छोटी सी पेटी लटकाकर आपके मोहल्ले
 
संजय कुमार चौरसिया
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ना रखें अपनी ही मौत का सामान अपने ही घर मैं .......>>>> संजय कुमार

कहते हैं अस्त्र -शस्त्र वीरों और योद्धाओं का आभूषण होता है ! जिसे वीर अपनी रक्षा और दुश्मनों को मारने के लिए अपने पास रखते हैं ! अब ना तो वीर वचे हैं, और ना ही योद्धा! पर अस्त्र शस्त्र अब भी जीवित हैं ! पर जैसे जैसे समय गुजरता गया अस्त्र शस्त्र की
 
Sanjay Kumar Chourasia