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सवाल आपका है

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13 Jun 2010
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वाह रे कानून...

पिछले दिनों नेट पर एक खबर पढ़ी तो मन कह उठा वाह रे कानून...सबसे पहले आपको खबर बता दूं, इटली में 27 वर्षीय हंगरियन प्लेबॉय मॉडल ब्रिगिटा बुल्गारी ने एक क्लब में एक शॉ के दौरान 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपने ब्रेस्ट छूने दे दिए...मामले की शिकायत हो गई
 
हितेश व्यास
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क्या होगा चौथा स्तंभ न हो तो?

जरा सोचिए किसी दिन आप नींद से जागे और सामने अखबार न हो...टीवी पर मनोरंजक कार्यक्रम तो दिखाए जा रहे हों... लेकिन उनमें न्यूज चैनल नदारद हो...एक दिन तो चलो जैसे-तैसे गुजर जाएगा..लेकिन अगर ये सिलसिला लगातार जारी रहे तो...!क्या कभी सोचा है...मीडिया की भूमिका
 
Madhu chaurasia, journalist
Jun 12 2010 07:18 AM
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भोपाल तब भी रोया..भोपाल अब भी रो रहा है

आज कल हर खबरिया चैनल भोपाल गैस कांड की परते खोलने में लगा हुआ है....25 साल बाद ही सही चलो एक-एक करके इन सबकी नींद तो खुली...अब एक-एक रहस्य से पर्दा उठ रहा...हम भी एक खबरिया चैनल में काम करते हैं तो हम भी लगे हुए बाल की खाल पटाने में...लेकिन पूरे मामले को
टैग: bhopal-genocide
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35 हजार मौतों की सजा सिर्फ 2 साल

2 और 3 दिसंबर 1984 की वो मध्य रात जिसने पल भर में हजारों लोगों की जिंदगी छीन ली....गैस रिसाव के कारण देखते ही देखते लाशों में तब्दील हो गई थी झीलों की नगरी भोपाल......पूरे भोपाल के अस्पतालों में जितने बिस्तर थे उससे 10 गुना ज्यादा लाशें सड़कों पर पड़ी
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बेशर्मों की जमात..

झारग्राम की वो खौफनाक त्रासदी...चारों तरफ लाशों का ढेर...रोते बिलखते लोग...कभी ना थमने वाले आंसू...दर्द और मौत के उस भयानक मंजर के बारे मे सोच कर ही सिहरन उठ जाती है...लेकिन देश के नेताओं की संवेदनाएं शायद मर चुकी है...शायद मैं गलत हूं...संवेदनाएं
 
हितेश व्यास
टैग: साजिश
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पीएम ने कह कर भी कुछ नहीं कहा

गठबंधन धर्म को निभाते हुए यूपीए सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा किए। बड़े जश्न की तैयारी थी। तमाम व्यवस्थाएं भी हो गई थी। लेकिन मैंगलोर में हुए विमान हादसे ने रंग में भंग कर डाला।  और जश्न मातम में बदल गया।खैर छोड़िए....  अब आते है
टैग: manish
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गुरुजी का क्या होगा!

आखिरकार पिछले 28 दिनों से चल झारखंड का हाई वोल्टेड ड्रामा ...और भाजपा ने अपने सहयोगी गुरुजी को तलाक दिया है...अरे भाई समर्थन वापसी को तलाक तो कह ही सकते हैं...तलाक के पहले भी तो इसीतरह के झगड़े...फिर प्यार और मान मनौव्वल होता है...सौदेबादी भी होती
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कुत्ते के दर्द को समझो

पिछले हफ्ते मैं अल्पप्रवास के लिए अपने घर गया हुआ था.. काफी दिनों बाद मेरी मुलाकात मेरे कुत्ते से हुई....इस कुत्ते को पिछले 8 सालों से हमने पाल रखा है...बहुत दिनों बाद मुझे देखकर मेरा प्यारा कुत्ता तेज-तेज भौंकने लगा....जनाब कुत्ते के भौंकने के भी दो
May 21 2010 05:56 PM
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चिदंबरम के नाम चिट्ठी

चिदंबरम के नाम चिट्ठी आदरणीय गृह मंत्री जी,नमस्कार....मत्री जी बहुत दिनों से आपको चिट्ठी लिखने का सोच रहा था पर लगा क्या मालूम आप को इस आम आदमी की बातों पर घ्यान देने के समय है कि नहीं..महोदय मैं एक आम आदमी हूं..वो आम आदमी जिसपर कभी सुखे की मार पड़ती है
May 09 2010 05:44 PM
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मौत को दावत!

नक्सल प्रभावित जिलों के वाशिदें खौफ में जी रहे हैं तो बगैर संसाधनों के जवान वैसे इलाकों में बेमौत मरने को मजबूर हैं। नक्सली कभी भी कहीं भी कायराना हरकत को अंजाम देते हैं और हमारे खुफिया तंत्र को नेताओं के इशारों पर उनके प्रतिद्वंदियों की बखिया उधेड़ने से
 
राजीव कुमार
May 08 2010 11:24 PM
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मां होती है एक सी......

परिंदों की अठखेलियांबंदनवार बनाता उनका कलरवसिंदूरी शाम में लौटता झुंडदिवसावसान में घर की तड़पऔर घरौंदे में इंतजार करता कोईजो मुझे ज़िंदगी से भर जाता हैएक मूक पंछीजो मौन में रिश्तों को जीता हैमैने देखा है वो रिश्ता है 'मां' दर्द की सिहरन में मरहम है
 
ज्योति सिंह
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शर्मसार हुई इंसानियत

आज सुबह टीवी पर एक खबर फ्लैश हुई .....जिसे देखने के बाद मुझे ऐसा लगा कि इस खबर ने रायपुर को शर्मसार कर दिया....लेकिन मेरा ऐसा मानना कहां तक सही है ये तो मुझे भी नहीं पता...लेकिन खबर ही ऐसी थी कि मैं सिहर उठी ......जब पता चला कि रायपुर के राजातालाब में 12
 
ज्योति सिंह
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कहां जायेगी परंपरा

बहुत दिनों बाद आखिर लिव-इन-रिलेशन को सही ठहराया गया है...और साथ ही भारतीय संस्कृति को एक चुनौती दे दी गयी है..... कि अब अगर लोग इस तरह के संबंधो में रहेंगे तो फिर भारतीय समाज की परिवार परंपरा का क्या रूप होगा ..... रिश्तों का स्वरूप क्या होगा...सारी
 
ज्योति सिंह
Apr 05 2010 01:03 PM
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कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त

बचपन में मैं फिल्म देखा करता था...कई फिल्मों की कहानी लगभग एक सी हुआ करती थी..एक हीरो होता था..एक हिरोइन होती थी और आधी फिल्म के बाद एक तीसरे किरदार की फिल्म में एंट्री होती थी...ये तीसरा किरदार या तो विलन होता था या कोई ऐसी लड़की जो हिरो हिरोइन के बीच
Apr 03 2010 05:45 PM
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सब महंगा है बस जिंदगी सस्ती है ?

पिछले कुछ दिनों से बार बार कुछ ऐसा होता रहा कि मुझे एक बार ये सोचना पड़ा कि क्या मैं पत्रकार हूं ? औऱ अगर हां तो  इंसान नहीं..मेरे लिए आज सब महंगा है बस जिंदगी सस्ती..न्यूज चैनल के न्यूज रूम में बैठकर हम तरह वक्त लाशों से खेलते हैं... इस पर कई दिनों
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कानून से इतर.......

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवाहपूर्व सेक्स या लिव इन रिलेशनशिप अपराध नहीं और दो वयस्कों के बीच संबंध को रोकने के लिए किसी कानून की व्यवस्था नहीं... मैं भी ये मानती हूं कि सेक्सुअल रिलेशन कंपलीटली किसी का निजी मामला होता है.. लेकिन इसके व्यावहारिक पक्ष
 
प्रज्ञा
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कानून को लगी गोली !

मध्यप्रदेश के शिवपुरी और मुरैना में जो कुछ हुआ उसमे गोली भले ही किसी ने चलाई हो पर लगी इस देश के कानून को ही है.....मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और गडकरी की टीम में महासचिव बनाए गए नरेंद्र तोमर जब यहां पहुंचे तो इनका बंदूक की गोलियों से स्वागत किया
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क्या आपने देखा है ऐसा भारत ?

आपने भारत के बहुत से नक्शे देखे होंगे पर आज मैं आपको जो दिखाने जा रहा हूं वो कभी नहीं देखा होगा....भारतीय रेल की माने तो दिल्ली पाकिस्तान में चला गया है...इतना ही नहीं ग्वालियर गुजरात का हिस्सा है..ये तो कुछ भी नहीं अब वाराणसी उड़ीसा का हिस्सा होगा..औऱ
टैग: नक्शा
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'हेडली' या 'हेडेक' ?

भारत के गुनहगार हेडली ने अमेरिका में आखिरकार सारे गुनाह कबूल कर ही लिए.....12 आरोपों में से 6 भारत में हत्या की कोशिश..धमाके करने की साजिश समेत संगीन आरोप थे...सही मायने में हेडली का कबूलनामा अमेरिका की एक सोची समझी साजिश नजर आती है...इस कबूलनामे के बाद
Mar 19 2010 05:35 PM
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आखिर क्यों ये अत्यचार ?

आज सुबह अचानक टीवी पर मेरी नज़र पड़ी...और मैं ठिठक सी गई....क्योंकि कुछ ऐसा दिखाया जा रहा था कि चाह कर भी मेरी निगाहें न्यूज़ चैनल पर ठहर गई....खबर थी झारखंड से जहां कुछ जगहों पर महिलाओं को डायन बताकर मौत के घाट उतार दिया जाता है.....मेरे ये लिखते और ये
 
ज्योति सिंह
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देश के थ्री इडियट

आज मैं जो लिखने जा रहा हूं शायद उससे आप सहमत न हो..क्यों कि इस लेख में कहीं न कहीं मुझ पर औऱ आप पर भी व्यंग कसा जाएगा....देश में बहुत कुछ चल रहा है...कही बिल पर बवाल ...तो कही मराठी मानुष पर महाभारत..कही नोटो के हार पर हाहाकार तो कही आतंकवाद और महंगाई से
Mar 18 2010 05:19 PM
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मायावती या 'माला' वती ?

ऐसा लगा है कि राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में नोटों की मालाओं का चलन जैसा चल गया है....आज जिस तरह से विरोधियों को मुंह चिढ़ाकर मायावती नेएक बार फिर नोटों की माला पहनी... उसने कई मायनों में सोचने पर मजबूर कर दिया..आज सुबह जब खबरें आना चालू हुई कि मायावती ने
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माया की माला

मायावती की लखनऊ में रैली और रैली में करोड़ों की माला....बीएसपी के हिसाब से इसकी कीमत 11 लाख है...न्यूज चैनल इसे 2 से 3 करोड़ का बता रहे हैं तो मुलायम ने इसकी कीमत 51 करोड़ लगाई है....खैर जो भी हो..पिछले दिनों कई शहरों के IAS अधिकारियों के घर
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आनंदी की मौत से पत्रकारिता आहत

आनंदी..छोटे पर्दे का बड़ा नाम...पिछले दिनों उसकी मौत हो गई...देश के कई घरों की चहेती बहु की मौत से खासकर महिलाओं को सदमा लगा...लेकिन यह सब ड्रामे का हिस्सा था..जो टीआरपी बढ़ाने के स्टंट से बढ़कर कुछ नही था...लेकिन इस खेल में कहीं पत्रकारिता का गला घोंटा
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महिलाओं का फैसला करने वाले ये हैं कौन?

महिला आरक्षण बिल के लाइमलाइट में आने के बाद से ही इसपर सियासत गर्म है, साथ ही तरह-तरह के लोगों, संगठनों द्वारा बयानबाज़ी की बयार बह रही है... नया बयान है...शिया धर्म गुरू कल्‍बे जव्‍वाद का... जिन्होंने महिलाओं को अच्‍छे नस्‍ल के बच्‍चे पैदा करने की मशीन
 
प्रज्ञा
Mar 13 2010 08:44 PM
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राहुल की शादी

राहुल महाजन की शादी........कितना सच कितना दिखावा पता नहीं.....या फिर किसी बहुत बेकार सी सब्जी को तड़का लगाकर स्वादिष्ट करने की एक कोशिश क्या मालूम...एक दिन अचानक फुर्सत के पलों में मैं ये सीरियल देखने बैठ गया... कुछ देर तो समझ में नहीं आया कि ये क्या चल
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वक्त हमारा है

चमक उठी सन सत्तावन में, वो तलवार पुरानी थी,बुंदेलों हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी।डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति के तहत उस वक्त झांसी को ब्रिटीश राज्य में मिलाने की साजिस रची जा रही थी। अंग्रेजों ने राज्य का
 
राजीव कुमार
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शक्ति का "बिल"

आपने भी देखा होगा महिला बिल के पारित करने का बवाल...जरूर रोमाचंक ही लगा होगा सबको..लोगों का आक्रोश,चीखना चिल्लाना,गुस्सें में सभापति के सामने इस तरह का आचरण की पढ़े लिखे लोगों को काबू करने के लिए बुलाए गये मार्शल...सब कुछ कितना रोमांचकारी की जिसे देख कर
 
ज्योति सिंह
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भगदड़ः ज़िम्मेदार कौन?

गुरुवार को यूपी प्रतापगढ़ के राम जानकी मंदिर में मची भगदड़ में करीब 63 लोगों ने अपनी जानें गंवा दीं... मरने वालों में केवल महिलाएं और बच्चे थे... भगदड़ में करीब 200 लोग घायल हो गए... मंदिर में कृपालु महाराज का प्रवचन और इसके बाद भंडारे की व्यवस्था थी...
 
प्रज्ञा
Mar 05 2010 09:53 PM
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ममता की ममता

 बजट चाहे आम बजट हो या रेल बजट जनता की बड़ी आस लगी रहती है कि बजट के पिटारे से क्या निकलेगा। इस साल भी 24 तारिख को ममता बनर्जी ने संसद में रेल बजट पेश किया। आम से खास लोग टीवी स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे थे कि ममता अपने पिटारे से क्या खुछ खास निकालने
Feb 25 2010 10:35 PM
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ड्रग्स... ड्रिंक और ड्रामा

राहुल महाजन नाम तो आपने सुना होगा... भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की बिगड़ी हुई औलाद... आजकल एक टीवी प्रोग्राम में स्वंयवर रचा रहे हैं... क्या है ये राहुल महाजन... और कौन है...? ये किसी से छुपा नहीं है... एक अय्याश किस्म का रईसज़ादा... जिसने अपने
Feb 25 2010 10:18 PM
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ममता Vs सचिन

बजट का सीज़न है, दिन निकला.. सबको इंतज़ार था.. आज ममता बनर्जी रेल बजट पेश करने जा रही थीं। उम्मीद थी कि कुछ नया होगा। जुलाई 2009 में जब बंगाल शेरनी ने बजट पेश किया तो काफ़ी कुछ नया था, बजट में कुछ नया रहा होगा या नहीं, लेकिन जिस तरह उन्होंने पूर्ववर्ती
Feb 24 2010 08:50 PM
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दुलार मिलेगा या मार ?

जिस तरफ जाओ महंगाई को लेकर हाय तौबा मची हुई है और लोगों की नज़रें अब वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी पर टिकी हैं जैसे कि वो कोई चमत्कार करने वाले हैं... उम्मीदें बहुत सी हैं हर बार की तरह... लेकिन एक बात तो साफ है कि आने वाला बजट लोक लुभावन शायद ही हो...
Feb 23 2010 09:49 PM
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चोट से बने जख्म से कहीं मुश्किल है बातों से बने जख्म की पीड़ा को बर्दाश्त करना

दोस्तों माफ कीजिएगा.....मैं कोई लेख नहीं लिख रहा हूं, ये महंगाई के मुद्दे पर प्रज्ञा जी की सोंच पर मेरे भाव हैं। कमेंट के लिए शब्द सीमा तय है..इसलिए मुझे लेख के जरिए अपना कमेंट पोस्ट करना पड़ रहा है।प्रज्ञा जी...महंगाई को लेकर आपकी सकारात्मक सोच की
Feb 22 2010 11:12 PM
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विधायक की आजा नच ले!

लोगों को कहते सुना है कि बिहार की तस्वीर बदल रही है। सीएम नीतीश कुमार और उनके दरबारी बिहार की सूरत बदलने में लगे हुए हैं। लेकिन उसी बिहार की राजधानी में उनके ही विधायक ने जो किया.. उससे उनके सारे किए धरे पर पानी फिरता दिख रहा है। भय और भ्रष्टाचार से
 
राजीव कुमार
टैग: राजीव
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बच्चों के दुश्मन

बहुत दुःख हुआ ये सुनकर कि बिहार के जमुई में हुए नक्सली हमलों में बच्चों का इस्तेमाल किया गया है... कहा जाता है कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं तो क्या हमारा भविष्य ऐसा है? दोष किसका है... व्यवस्था का, माता-पिता का या खुद हमारा... बहुत बड़ा सवाल है ये...
 
प्रज्ञा
Feb 20 2010 08:24 PM
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अंतर्मन

चीखूं, चिल्लाऊं या ख़ामोश रहूं सब एक सा है,निर्दोष न रह पाऊंगा...इस रणभूमि में ।हार और जीत स्वरूप बदल सकते हैं,दामन भी.परन्तु आदि, अन्त और कारक न बदलेगा वही अहम, क्रोध, पश्चाताप मिश्रित ।धर्म अधर्म कौन तौले सारथी कहां ?फिर दुर्योधन की सेना भी नहींसभी
 
Satya Prakash Bajpai
Feb 19 2010 10:53 PM
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अन्नदाता के सवाल

देश में खेती और किसानों ने आजादी के बाद काफी तरक्की की है। आने वाले सालों में खेती के क्षेत्र में और ज्यादा विकास के लिए कोशिशें की जा रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने भी दूसरी हरित क्रांति की ज़रूरत बताई है। खेती और
Feb 19 2010 08:08 PM
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महंगाई बढ़ने के फायदे

अब तक जहां भी देखा, पढ़ा और सुना... हर जगह महंगाई के नुकसान ही गिनाए गए... कितनी भाषणबाज़ी, बंद और सियासत भी हो गई इस पर... लेकिन जिस तरह से हर सिक्के के दो पहलू होते हैं... इसके भी हैं... इसलिए आज मैं फोकस करुंगी इससे होने वाले फायदे पर... जिनपर संभवतः
 
प्रज्ञा
Feb 18 2010 07:04 PM
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आग़ाज़

ब्लॉगिंग का दौर है, माफ़ कीजिएगा... दौर तो सूचनाओं का है। ब्लॉग ज़रिया बने हैं, अपनी बात कहने के। यहां एक समन्वित कोशिश की गई है, सवालों को उठाने की... मुद्दों की पड़ताल करने की। इस कोशिश में साथ है तमाम पत्रकार साथी... उम्मीद है यहां होने वाला हर विमर्श
Feb 16 2010 09:04 PM