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हिन्द केसरी-पत्रिका

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06 Jun 2010
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पसीने की धारा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

कभी मेरे बहते हुए पसीने पर तुम तरस न खाना, यह मेरे इरादे पूरे करने के लिये बह रहा है मीठे जल की तरह, इसकी बदबू तुम्हें तब सुगंध लगेगी जब मकसद समझ जाओगे। सिमट रहा है ज़माना वातानुकुलित कमरे में सूरज की तपती गर्मी से लड़ने पर जिंदगी थक कर आराम से सो जाती,
 
दीपक भारतदीप
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आदर्श की बातें-हिन्दी शायरी

गनीमत है इंसान के पांव सिर्फ जमीन पर चलते हैं, उस पर भी जिस टुकड़े पर जमें हैं उसे अपना अपना कहकर सभी के सीने तनते हैं, हक के नाम पर हर कोई लड़ने को उतारू है। अगर कुदरत ने पंख दिये होता तो आकाश में खड़े होकर हाथों से एक दूसरे पर आग बरसाते, [...]
 
दीपक भारतदीप
Jun 01 2010 08:24 PM
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सच के नाम पर सजा झूठ-हिन्दी शायरी

हिन्दी साहित्य,समाज,मनोरंजन,मस्ती,संदेश,hindi shaitya,sher,shतमाम रस्में निभाकर भी हम क्या पाते हैं, पुराने बयान पर आंखें बंद कर यकीन के साथ यूं ही जिंदगी में चले जाते हैं। इंसानों की सोच पर बंधन डाले हैं सर्वशक्तिमान के संदेश की किताबें लिखने वालों ने
 
दीपक भारतदीप
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इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें

महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा
 
दीपक भारतदीप
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तरक्की और कामयाबी-हिन्दी शायरी

अपनी मदद खुद कर सको, उतना ही आगे जाना। तरक्की और कामयाबी के ख्वाब में यूं न खो जाना।। बिकते हैं सपने बाज़ार में, मु्फ्त का खेल दिखाकर, तरक्की के रास्ते चल, उधार के जाल में न फंस जाना ।। ———– मोहब्बत शादी के अंजाम तक आशिक और माशुका
 
दीपक भारतदीप
May 09 2010 04:47 PM
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चमन में अमन है-हिन्दी व्यंग्य कविता

दहशतगर्द घूम रहे आजाद उनकी गोलियों से सभी तो नहीं मर गये फिर भी जिंदा हैं ढेर सारे लोग इसलिये मान लो चमन में अमन है। खेल के नाम पर चल रहा जुआ जिनकी मर्जी है वही तो खेल रहे हैं बाकी लोग तो बैठे हैं चैन से इसलिये मान लो चमन में अमन है। [...]
 
दीपक भारतदीप
Apr 24 2010 06:16 PM
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असली और नकली जांबाज-हिन्दी शायरी

मैदान पर लड़ते कम किनारे पर खड़े दिखाते दम कागजी जांबाजो के करतब कभी अंजाम पर नहीं पहुंचे पर हर पल उनको अपनी आस्तीने ऊपर करते हमने देखा है। कीर्तिमान बहुत सुनते हैं उनके पर कामयाबी के नाम पर खाली लेखा है। ———- पत्र प्रारूप पर हाशिए पर नाम
 
दीपक भारतदीप
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यकीन करना मुश्किल-हिन्दी व्यंग्य कविता

खबरों से यकीन यूं उठ गया है क्योंकि वह शब्द बदल सामने आती रहीं। कहीं चेहरे बदले तो कहीं चालें पर चरित्र पुराना ही दिखाती रहीं। नतीजे पर नहीं पहुंचा कोई मुद्दा पर खबरें बरसों तक चलती रहीं, कहीं बाप की जगह बेटे का नाम लिखा जाने लगा कहीं बेटियों के नाम भरती
 
दीपक भारतदीप
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नैतिकता की बात-हिन्दी व्यंग्य कविता

आपस में जाम टकराते हुए लोग नैतिकता की बात करने लग जाते हैं, फिर सुनाते हैं अपनी कमाई के नुस्खे जैसे दो नंबर की कमाई एक नंबर की हो सीना फुलाकर उसकी कहानी सुनाते है।। बहुत अच्छा लगता है आदर्श और नैतिकता की बात करते हुए बशर्त है आदमी स्वयं से छिप सकता
 
दीपक भारतदीप
Mar 13 2010 09:19 PM
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कर्जे और किश्तों में जिंदगी-आलेख और कविता (loan and lifr-hindi article and poem)

आजकल कर्जे लेकर सामान खरीदने का एक रिवाज चल रहा है। अमीर न होने पर भी वैसा दिखने वालों की चाहत पूरा करना आसान हो गया है। किश्तों पर अपने लक्ष्य की किश्ती चलाना आसान लगता है पर उसे निभाना उतना सहज नहीं रह जाता। एक आम मध्यम या निम्न वर्गीय व्यक्ति के लिये
 
दीपक भारतदीप
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उल्लुओं का क्या होगा-हिन्दी हास्य कवितायें

क्रीम पाउडर से सजे चेहरे सौंदर्य का पर्याय बन गये हैं, भयानक चेहरे भी खूबसूरती की दौड़ में भागने के लिये बनठन गये हैं। ———– न राई थी, न पहाड़ था, न तिल था, न ताड़ था, फिर भी वह ख्वाब बेचकर सौदागरों ने पैसा कमाया। इसतर बड़े ठग ने छोटे
 
दीपक भारतदीप
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छोटे और बड़े साहब-हिन्दी क्षणिकाएँ (boss culture-hindi comic poem)

 दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं। ——————– नयी दुनियां में पुजने का रोग सभी के सिर पर चढ़ा है। कामयाबी का खिताब नीचे से ऊपर जाता
 
दीपक भारतदीप
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अंतर्जाल पर दूसरे की लोकप्रियता का लाभ उठाने के प्रयास-हिन्दी लेख

तीन वर्ष से जारी हमारी निजी ‘चिट्ठाचर्चा’ में पहली बार दो ऐसे शब्दों से सामना हुआ जिनके अर्थ और भाव से हम आज तक परिचित नहीं थे। वह हैं ‘साइबर स्कवैटिंग’ और ‘टाइपो स्क्वैटिंग’। मुश्किल तो यही है कि भाई लोग अंग्रेजी हिज्जे नहीं लिखते जिससे उनका शुद्ध
 
दीपक भारतदीप
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क्रिकेट खेल के साथ दूसरी बातें भी जुड़ी हैं-हिन्दी आलेख

भारत में चलने वाली एक क्लब स्तरीय प्रतियोगिता में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नीलामी में किसी ने नहीं खरीदा तो दोनों देशों में हो हल्ला मच गया है। किसी मनुष्य की नीलामी! बहुत आश्चर्य हो रहा है! यह तो गनीमत है कि इस देश में अधिकतर संख्या अभी भी अशिक्षित और
 
दीपक भारतदीप
Jan 27 2010 07:57 PM
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जब फैशन तनाव बने-हिन्दी आलेख (fashan is tension-hindi article)

अखबार में पढ़ने को मिला कि ब्रिटेन में महिलायें क्रिसमस पर ऊंची ऐड़ी (हाई हील) के जूते पहनने के लिये इंजेक्शन लगवा रही हैं। उससे छह महीने तक ऐड़ी में दर्द नहीं होता-भारतीय महिलायें इस बात पर ध्यान दें कि अंग्रेजी दवाओं के कुछ बुरे प्रभाव ( साईड इफेक्ट्स) भी
 
दीपक भारतदीप
Jan 25 2010 07:40 PM
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योग केवल सांस लेने की क्रिया नहीं है-आलेख (yog aur asan-hindi lekh)

वह योगासन शिक्षक हैं न कि एक संपूर्ण योग गुरु-कम से कम योग के संबंध में उनका से कथन कि ‘योग तो एक सांस लेने की क्रिया  है’ यही समझा में आ सकता है। जिस भारतीय योग को हम जानते हैं उसके आठ भेद हैं-यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्यहार,धारणा,ध्यान
 
दीपक भारतदीप
Jan 13 2010 09:03 PM
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इंटरनेट पर लिखते और देखते बीत गये तीन वर्ष-हिन्दी संपादकीय (hindi editorial three year)

अंतर्जाल पर लिखते हुए तीन वर्ष का समय हो गया। कहना कठिन है कि अपना उद्देश्य कहां तक प्राप्त किया। वैसे ही लिखने को लेकर अपनी सफलता या असफलता का विचार नहीं किया। न ही इस बात पर विचार किया कितने लोगों ने पढ़ा? अलबत्ता अपने जीवन में लिखना शुरु करने से आज तक
 
दीपक भारतदीप
Dec 28 2009 08:01 PM
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शब्दों पर नियंत्रण-हिन्दी व्यंग्य (control of word-hindi satire

एक टीवी चैनल को उसके मनोरंजक कार्यक्रम में अभद्र और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर आखिर नोटिस थमा दिया गया है। हो सकता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ समर्थक इस पर नाराज हों पर यह एक जरूरी कदम है। दरअसल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं होना चाहिये पर
 
दीपक भारतदीप
Dec 22 2009 09:21 PM
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भर्तृहरि नीति शतक-भक्ति को धंधे की तरह न करें (bhakti ko dhandha n samjhen-hindu sandesh)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————————— कि वेदैः स्मृतिभिः पुराणपठनैः शास्त्रेर्महाविस्तजैः स्वर्गग्रामकुटीनिवासफलदैः कर्मक्रियाविभ्रमैः। मुक्त्वैकं भवदुःख भाररचना विध्वंसकालानलं
 
दीपक भारतदीप
Nov 29 2009 10:55 AM
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जमाने की चाहत-हास्य हिंदी कविता

सुनते हैं मरते समय रावण ने राम का नाम जपा इसलिये पुण्य कमाने के साथ स्वर्ग और अमरत्व का वरदान पाया। उसके भक्त भी लेते राम का नाम पुण्य कमाने के वास्ते, हृदय में तो बसा है सभी के सुंदर नारियों को पाने का सपना चाहते सभी मायावी हो महल अपना चलते दौलत के साथ
 
दीपक भारतदीप
Nov 07 2009 12:15 PM
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घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूसरी महिला बोली ‘अरे, घर पर रोना होता है इसलिये मनोरंजन के लिये यहां हम आते हैं पता नहीं तुम जैसे लोग घर का रोना यहां क्यों लाते हैं अब बताओ क्या सास ने
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य नीति-कुविचारी नारी से तो कोई साथ न हो अच्छा (chankya niti-kuvichari nari ka sath

नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि —————————– वरं न राज्यं कुराजराज्यं वरं न मित्रं न कुमित्रमित्रम्। वरं न शिष्यो कुशिष्यशिष्यो वरं न दारा न कुदारदारा।। हिन्दी में भावार्थ-अयोग्य राजा के
 
दीपक भारतदीप
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नए अवतार का जाल-हास्य व्यंग्य कविता (naye avtar ka jaal-hindi hasya kavita

फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के एक नये अवतार से मिलायें। हमारे दोस्त का आयोजन है इसलिये मिलेगा हमें भक्तों में खास दर्जा, दर्शन कर लो, उतारें सर्वशक्तिमान का इस जीवन को देने का
 
दीपक भारतदीप
Sep 25 2009 10:07 PM
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सुख का किश्तों पर मिलना-हास्य कविताएँ (sukh kishton men-hasya kavitaen)

आंधी चलकर फिर रुक जाती है धरती हिलती नहीं भले कांपती नजर आती है। मौसम रोज बदलते हैं उससे तेज भागते हैं, आदमी के इरादे पर सांसें उसकी भी कभी न कभी उखड़ जाती हैं फिर भी जिंदगी वहीं खड़ी रहती है भले अपना घर और दरवाजे बदलती जाती
 
दीपक भारतदीप
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रीटेक-हास्य व्यंग्य (film & cricket ka reteke-hindi vyangya)

वह अभिनेता अब क्रिकेट टीम का प्रबंधक बन गया था। उसकी टीम में एक मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी भी था जो अपनी बल्लेबाजी के लिये प्रसिद्ध था। वह एक मैच में एक छक्के की सहायता से छह रन बनाकर दूसरा छक्का लगाने के चक्कर में सीमारेखा पर कैच आउट हो गया। अभिनेता ने उससे
 
दीपक भारतदीप
Jul 25 2009 09:57 PM
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जिंदादिल-हिंदी शायरी (jindadil-hindi shayri)

कभी कोई आंखें कातर भाव से तुम्हारी तरफ ताकती हैं क्या उन पर रहम खाते हो? उठते नहीं हाथ मांगने के लिये पर उनकी छोटी चाहतें तुम्हारे सामने खड़ी होती हंै क्या उनको पूरा कर पाते हो? उठा रहे हैं बरसों से जो कंधे जमाने का बोझ क्या उनकी पीठ सहलाते हो? कोई थक गया
 
दीपक भारतदीप
Jul 08 2009 04:41 AM
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गलतियाँ, अपराध और लिंगभेद-आलेख

भारतीय समाज की भी बड़ी अजीब हालत है। अच्छाई या बुराई में भी वह जाति, धर्म, लिंग और क्षेत्र के भेद करने से बाज नहीं आता। अनेक तरह के वाद विवादों में तमाम तरह के भेद ढूंढते बुद्धिजीवियों ने शायद उन दो घटनाओं को मिलाने का शायद ही प्रयास किया हो जो सदियों
 
दीपक भारतदीप