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मेरी अंतराभिव्यक्ति

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07 Jun 2010
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"विश्व पर्यावरण दिवस: छोड़ दी राजनीति मैने तेरे लिये"

पर्यावरण और पर्यावरण दिवस पर बातें और भाषणबाजियां  तो बहुत हो चुकी,अब समय है कुछ करने का और यह एक ऐसा मुद्दा है जहाँ  हम अपनी गलतियों को दूसरों पर थोपकर आगे नहीं बढ़ सकते. तो फिर इंतजार किस बात की.किस एक धक्के का इंतजार है जो सबकुछ बदलने के लिये
Jun 07 2010 06:28 PM
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"असफलता"

पिछले  दिनों  सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ. एक परिणाम जिसके सकारात्मक आने को लेकर मैं बहुत आशान्वित था, वहाँ असफलता हाथ लगी.थोड़ी देर के लिये मैं परेशान हो गया लेकिन ऐसे समय में अक्सर साथ देने वाली लेखनी याद हो आई और मैंने झटपट लेखनी
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"हम किस गली जा रहे हैं"

सच कहिये तो ब्लॉग जगत में छुट्टियों का लेखक और पाठक हूँ. कल परीक्षाएँ समाप्त हुईं तो आज कुछ  नया पढ़ने और लिखने के लिये ब्लॉग जगत में उपस्थित हों गया. पिछले दिनों ढ़ेर सारी बातें जो आपतक पहुँचाने का मन बनाया लेकिन मन में ही दबाकर रख लिया. खैर कोई
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"जाओ जाकर जीतो जग को"

पिछले दिनों चल रही परिक्षाओं ने यह सोचने का ज्यादा मौका ही नहीं दिया की पिछले दो साल से जिन लोगों की हमारे बीच उपस्थिति  हमे बल देती थी,जब हम लोग कॉलेज कैम्पस में नए थे तब जिन लोगों ने हमें पग-पग पर चलना सिखया वो लोग अब कैम्पस में पहले की तरह
May 03 2010 05:18 PM
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"समझें वैसे,हम हैं जैसे"

हाँ तो आज PUT ख़त्म हुआ,और अब सेमेस्टर इग्जाम्स की बारी है. PUT की वजह से मैं अपनी एक नई कविता यहाँ पोस्ट कर पाने में सक्षम न हो सका सो आज यहाँ उसे लेकर उपस्थित
Apr 12 2010 09:23 PM
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"महाप्रयोग: क्या और कैसे?"

पिछले दिनों  दैनिक-Stroke के नाम से प्रितिदीन के खास समाचारों को कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर लगाने कि एक अच्छी शुरुआत की गई. इसके लिये द्वितीय,तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्रों को लेकर बनाई गई पाँच सदस्यीय टीम का एक सदस्य मै भी हूँ. पहले ही दिन पढ़ने
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"लोग आते गये और कारवाँ बनता गया"

वेलेंटाइन डे ढेर सारी हलचल लिये इस बार फिर एक नए रंग में उपस्थित हुआ. हर बार की तरह इस बार भी पक्ष और विपक्ष के ढेर सारी बहसों का साझीदार रहा. इस बार कुछ नया करने का मन बना पक्ष-विपक्ष सबकी एक साथ बैठकर सुनने की योजना बना डाली. योजना तो सही थी लेकिनं
Feb 19 2010 05:12 PM
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"तेरी जय हो, विजय हो"

देर से ही सही समस्त भारत वासियों को गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं.सफ़र के साथ कदमताल करते हुवे आज हम अपना ६१ वाँ गणतंत्र दिवस भी मना चुके. बीते ६१ वर्ष संघर्षों,परेशानियों के साथ-साथ उपलब्धियों के वर्ष भी रहे और हमारे दिलो दिमाग में ढेर सारी
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"नूतन वर्ष मंगलमय हो"

आज सबसे  पहले तो "सब नू लोहड़ी दी लख लख बधाइयाँ". सेमेस्टर exam के वजह से नव वर्ष कि बधाइयाँ  नही दे सका हूँ, जिसके लिये आज उपस्थित हूँ.       "देर    से  दुरुस्त   देने के लिये
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समझे वैसे हम हैं जैसे

हाँ तो आज PUT ख़त्म हुआ,और अब सेमेस्टर इग्जाम्स की बारी है. PUT की वजह से मैं  अपनी एक नई कविता यहाँ पोस्ट कर पाने में सक्षम न हो सका सो आज यहाँ
Jan 13 2010 02:03 PM
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"माँ कौन करेगा तुझसा प्यार"

पिछले मदर्स डे (10 may) को मैंने अपने माँ को कुछ ऐसे याद किया...............................                           "माँ
Jan 13 2010 01:58 PM
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मैंने सोचा:

कविता के लिए:कविता जो रोकती हैअंतरतम के तुफानो को सोखती है,उफानों को ला देती है अनंत से खीचकर एक बिंदू पर जहा होते हैं शांति सपने और विश्वाश शायद अनंत काल तक उकेरा जाता रहेगा आवेगों को अक्षरों में कुछ यू
Dec 08 2009 04:56 PM