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विचारों का दर्पण

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15 Jun 2010
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हम लौट आये ........

देवेश प्रतापविद्यार्थी जीवन में सबसे बड़ा आनंद होता है । पढाई , मौज मस्ती सर पर किसी भी प्रकार का कोई बोझ नहीं .....केवल अपने लक्ष्य को ध्यान में रखना .....जिससे भविष्य सुरक्षित रहे इसके अलावा कोई फ़िक्र नहीं .......ऐसा ही कुछ पल बिता रहे है हम लोग । कॉलेज
 
देवेश प्रताप
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एक जख्म दे जाते है ..........

वो हर रोज एक जख्म दे जाते है। हम उन जख्मों के सहारे जीते जाते है ॥ मुझे कोरा कागज समझ कर अपने दस्तानेब्यां लिखते है । लिखते लिखते जब वो थक जाते है ।कागज कि टुकड़े टुकड़े कर के चले जाते है ॥ मुझे आइना समझ कर वो अपने दुःख दर्द कहते है , आसुंओं कि बारिश को जब
 
देवेश प्रताप
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ये कैसा इन्साफ .....

देवेश प्रतापइज्ज़त किसको प्यारी नहीं होती । हर कोई चाहता है समाज में उसकी एक अलग पहचान हो और इज्ज़त हो । जो कि ये मानव का स्वभाभिक गुण है । आज कल हमारे देश में आनर किलिंग के कई मामले सामने आये है । आनर किलिंग का मतलब अपनी इज्ज़त के लिए अपने ही खून के
 
देवेश प्रताप
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क्या आज भी वो वैसा ही है ......

देवेश प्रताप ए चाँद क्या तू मेरे महबूब का हाल बता देगा । अरसा होगया उसके शहर में मैंने कदम नहीं रखा ।क्या वो वैसा ही है जैसे वर्षों पहले मैंने देखा था ।या फिर इस नाटकीय दुनिया में , उसने भी अपना रूप बदल लिया ॥ए चाँद तू उसकी अदाएं तो रोज देखता होगा । क्या
 
देवेश प्रताप
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खेल के बाद क्या होगा ??

देवेश प्रताप भारत देश की राजधानी दिल्ली कामनवेल्थ खेल के लिए एक दुल्हन की तरह सजाई जा रही है . चारो तरफ जोरो शोरो से काम चल रहा है कही ट्रैफिक समस्या हल करने के लिए फ्लाई ओवर बन रहे है तो कही दिल्ली के में आये लोंगो को कही आने जाने में परेशानी न हो इस के
 
देवेश प्रताप
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कुछ मीठे पल ......

देवेश प्रतापआप सब सबसे पहले माफ़ी चाहूँगा ........जो कि इस बीच व्यस्तता के कारण न कोई पोस्ट लिख पाया और न ही कोई पोस्ट पढ़ पाया । लेकिन अब फ्री हो गया हूँ तो आराम से सारी पोस्टें पढूंगा और अपने विचारों को भी प्रस्तुत करूँगा । चलिए मै अब आप को बताता हूँ के
 
देवेश प्रताप
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जब अपने ही ......

देवेश प्रताप एक ही देश कि मिटटी में जन्में लोग जिसमें से कुछ उस मिट्टी कि सुरक्षा के लिए अपनी जान कि बाजी लगा देते है ..और कुछ अपने ही देश कि मिटटी को बेचना शुरू कर देते है । जैसा कि अभी एक महिला आई यफ यस अधिकारी को भारत कि गुप्त सूचनाओं को पाकिस्तान के
 
देवेश प्रताप
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मोहब्बत .......

देवेश प्रतापमोहब्बत के अहसासों से अधुरा था मै । एक हवा के झोके ने हमें , मोहब्बते दास्ताँ सुनाया॥ अहसासों के सरोवर में मोहब्बत का कमल खिलने लगा ।मै पवन वो नदी बनकर साथ मचलने लगे ॥प्यार कि कस्ती पर हम दोनों सवार होगये ।पतवार फेक कर दुनिया जहाँ से बेपरवाह
 
देवेश प्रताप
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योगनीति से अब राजनीति

विकास पाण्डेय राजनीति की अब ऐसी कोई परिभाषा बची नहीं है,जिसकी बात की जाए.सियासत बाजो ने इसका हर पहलुओं पर चीर हरण किया है.कोई कहता है जीवन के इस अमूल्य समय को दो कौड़ी के राजनीति पर क्यों खराब किया जाए, तो किसी का कथन है कि यह किसका किया धरा है,जब साक्षर
 
देवेश प्रताप
Apr 07 2010 07:30 AM
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मीडिया खड़ी है कटोरा लेके......

देवेश प्रताप संचार इंसान के जीवन सबसे अहम हिस्सा है । यदि संचार नहीं तो कुछ भी नहीं । यहीं से शुरू होता है मीडिया का रोल । समाज में पल रही समस्या ,अपराध ,तथा कुछ अचम्भित करने वाले तथ्य और कुछ भी नया जो लोगों तक पहुँचाना आवयश्क होता अतः यही से होता है
 
देवेश प्रताप
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तेरे शहर में .....

आज नजाने क्यूँ तेरा शहर बेगाना लग रहा है , तेरे शहर के लोग तो पुराने है मै ही इस शहर में नया लग रहा हूँ ॥ आज बहारों ने मेरा स्वागत नहीं किया फिजायें तो वही है , जो मेरे आने कि ख़बर तुझ तक पंहुचा देती थी , जाने क्यूँ आज मै उनके लिए पराया लग रहा हूँ ॥ तेरे
 
देवेश प्रताप
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अर्थ आवर ( सायं 8.30 से 9.30 )

लाखों- करोड़ों लोगों कि जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण [अर्थ आवर] की इस मुहिम में शामिल हो जायेंगे । वैसे अपनी धरती को हरा भरा बनाने के लिए ये आइडिया ग़लत नहीं है,तभी तो 2007 से शुरू हुए इस अभियान में अभी तक छोटे - बड़े देशों को मिलाकर लगभग 90 देश और
 
देवेश प्रताप
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समां और परवाना ......

देवेश प्रताप समां और परवाना एक दूसरे से अपने भावों को व्यक्त करते हुए कहते है ..... समां कहती है जलने दो मुझे अकेले इस विरह में तुम यूँ ने मेरे पास आया करो, परवाना कहता है तुम्हारे इस प्यार पर प्रिय ,मैं मिलने के लिए मचल जाता हूं , समां बिखर जाती हूँ
 
देवेश प्रताप
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महान तो नारी हैं ..........

देवेश प्रतापभारत देश में 'देवी' कही जाने वाली नारी पर सबसे ज़्यादा अत्याचार होता है । ख़ास कर नारी को मात्र एक वस्तु के रूप में देखा जाता है । त्याग करना तो इन्हें विरासत में दिया जाता है ....बचपन में अपने माँ-बाप , भाई के लिए शादी के बाद अपने पती और
 
देवेश प्रताप
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ये शहीदों की जय हिन्द बोली ........

विकास पाण्डेयधन्य है वो माँ जिसके गर्भ से भगत सिंह जैसा साहसी ,वीर देशभक्त पैदा हुआ । गर्व से छाती चौड़ी हो गयी होगी,उस बाप कि जिस पल आज़ादी की भूख में हँसते-हँसते भगत सिंह ,राजगुरु और सुख देव फाँसी के फंदे को चूम लिया था।आज इन्ही लालों की 81 वी बलिदान
 
देवेश प्रताप
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रेल के नन्हे सेवक

देवेश प्रताप बचपन का सफर बहुत सुहाना होता है , कोई गम नहीं कोई बोझ नहीं, न कुछ खोने का डर, न कुछ पाने कि ललक ,ऊपर वाले का भी खेल निराला होता है किसी को इतनी खुशियाँ देता है कि उनकी जिंदगी उन्ही खुशियाँ के बीच कट जाती है। और किसी को इतना दुःख कि उन दुखों
 
देवेश प्रताप
Mar 22 2010 07:29 AM
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परीक्षा या 'आई पी यल' ???????

देवेश प्रतापमार्च से लेकर अप्रैल तक विद्यालय से लेकर महा विधालय तक परीक्षाओं कि बहार रहती है । साल भर बच्चो द्वारा कि गयी मेहनत का प्रयोग परीक्षाओं में होता है । आई पी यल (इंडियन प्रीमियर लीग ) कि धूम मची है सुबह से लेकर शाम तक लोगों कि जुबान पर आई पी यल
 
देवेश प्रताप
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अस्त हो गया हिंदी साहित्य का मार्कन्डे नाम का सूरज....

हिंदी साहित्य में नई कहानियों के आन्दोलन का बुनियादी लेखक मारकंडे जी अब हमारे बीच नहीं रहे। 1955 में उन्होंने '' हंसा जाई अकेला'' नामक कहानी से हिंदी साहित्य में नई कहानियो को नया रूप दिया। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी इटावा में जन्मे मारकंडे जी के जीवन का
 
देवेश प्रताप
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अपने देश कि कला को बढ़ावा दें ......

मैं जिस बात का ज़िक्र आज कर रही हूँ वो न तो किसी विशेष personality से है और न ही किसी व्यक्ति विशेष से . बस एक ऐसा एहसास जो मुझे अक्सर होता है जब भी मैं किसी के अंदर कोई कला देखती हूँ और उसे अभावों कि ज़िन्दगी जीते हुए देखती हूँ . मैं ‘Sapna jain’, just
 
देवेश प्रताप
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एक नयी शुरुआत ......

आज ''विचारों का दर्पण '' के सदस्यों द्वारा .....एक नए ब्लॉग की शुरुआत की जा रही है http://manoranjankadarpan.blogspot.com/ इस ब्लॉग पर चर्चा होगी मनोरंजन से जुड़े सभी पहलूओं की .......आप सब के आशीर्वाद की ज़ुरूरत है ..........बहुत बहुत धन्यवाद
 
देवेश प्रताप
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ये आंसू ही है.........

देवेश प्रताप आँखों में एक अहसास का जन्म होता पानी की बूंदों जैसा होता है,छलक आती है ये बूंदे जब मन रो पड़ता है, निकल आती है बूंदे ये तब जब खुशियों का मेला होता है , सारे दर्दों को समेट कर एक बूंद बन जाती है , बिखर जाती है ये बूंदे आँखों से विदा होकर ,इन
 
देवेश प्रताप
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हमारा गांव ........

देवेश प्रतापआप सब ने हमारे गाँव के बारें में जानने कि इच्छा जाहिर किया ......ये मेरे सौभाग्य है । .......तो आइये आपको मिलवाते है अपने गाँव से ..........उत्तर प्रदेश में , सई नदी के किनारे बसा प्रतापगढ़ शहर ...........शहर से तकरीबन ३ कम कि दूरी प् बसा
 
देवेश प्रताप
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आप सब बहुत याद आये .....

देवेश प्रताप (ये दृश्य मेरे घर के ठीक सामने का है ) विद्यालय में परीक्षा ख़त्म होने के बाद ५ मार्च को घर (प्रतापगढ़ ) चले गए थे , परीक्षा कि वजह से होली में घर जाना संभव नहीं हो पाया था .......इसलिए जैसे ही परीक्षा ख़त्म हुई .....वैसे घर को चले गए
 
देवेश प्रताप
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रंग दे बसंती नाम से हुआ शराब का रजिस्ट्रेशन

विकास पाण्डेय जी हाँ मै भी ठीक इसी तरह हतप्रभ रह गया था ,जिस क्षण मैंने ये ख़बर सुनी।२३ मार्च 1931 तो आपको निश्चित ही याद होगी,आप सही सोच रहे हैं,इस दिन शहीद भगत सिंह,राज गुरु और सुखदेव को फाँसी दी गयी थी ,इसे हम शहीद दिवस के नाम से भी जानते हैं। करोंड़ो
 
देवेश प्रताप
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मोबाइल ........................... जरा संभल के

Ramesh Maurya भारत ने जिस क्षेत्र में सबसे ज़्यादा तरक्की की है वह है संचार का क्षेत्र। रेडियो , टी वी , पेजर, मोबाइल ये सब संचार क्रांति का ही नतीजा है। आज हामारा भारत दूरसंचार क्षेत्र के लिए सबसे ज़्यादा संभावनाओ वाला बाज़ार है, दुनिया कि बहुत सी कंपनीया
 
देवेश प्रताप
Mar 05 2010 09:53 AM
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काश यही जनसंख्या होती.....

विकास पाण्डेयकॉलेज का पेपर चलने के कारण इस बार कि होली में हम [मै और देवेश ] घर नहीं जा पाए। होली के एक दिन पहले जब हम यहाँ के अपने दिल्ली वाले घर को जाने लगे। हम लोग दिल्ली नॉएडा के बोर्डर पर रहते हैं जहाँ से हमारा कॉलेज महज १५ मिनट कि दूरी पर है,यहाँ
 
देवेश प्रताप
Mar 03 2010 07:46 PM
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ऐसा विकास किस काम का .......

जब भी बात उठती है सहनशीलता की शर्म हया की तब हम नारी का जिक्र करते हैं, की हमारी भारतीय नारी सहनशीलता शर्म हया की देवी होती है। हमारे देश में नारी को देवी का दर्जा प्राप्त है, हम पूजा करते हैं इनकी। लेकिन जब भी बात उठती है अपने मन के विचारों को प्रकट
 
देवेश प्रताप
Mar 02 2010 08:42 AM
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होली की बहुत बहुत शुभकामनाये

"विचारों का दर्पण" की ओर से आप सभी ब्लोगर्स को होली की बहुतबहुत शुभकामानाये। यह अलग अलग रंगों का त्योहार आप सभी के जीवन में अलग अलग सुख,शांति और खुशियाँ ले कर आये।
 
देवेश प्रताप
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वस्तु का प्रचार या स्त्री का .......

देवेश प्रताप आज आधुनिकता के दौर में , सबसे ज़्यादा क्रांति आई तो वो संचार में , संचार के माध्यम धीरे धीरे अपने पैर पसारते गए जिसमें नई -नई तकनीक शामिल होती गयी । किसी भी ''वस्तु'' के बारें में लोगों तक जानकारी पहुँचाने का कार्य , संचार माध्यमों से शुरू
 
देवेश प्रताप
Feb 27 2010 06:36 PM
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हाँकी का महासंग्राम......

क्रिकेट के छक्के चौके से दूर अब वक़्त आ गया है, हाँकी का । 28 फरवरी 2010 को हाँकी का महासंग्राम शुरू हो जायेगा और जिसके साथ शुरू हो जाएगी एक जंग जिस पर लाखों खेल प्रेमी नजर लगाये बैठे हैं । यह महासंग्राम सिर्फ हाँकी का नहीं है, ये महासंग्राम है, भारतीय
 
देवेश प्रताप
Feb 27 2010 11:37 AM
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मैं और आईना........

देवेश प्रताप एक दिन आईने ने मुझसे पूछा ,तूने प्यार में दर्द कि सिवा पाया ही क्या है।मैंने आइने से हंस कर कहा,कि तुने मेरी सूरत के सिवा देखा ही क्या है ॥आईने ने पलट कर कहा,फिर तेरी आँखों में ये आंसू क्यों टिकता है ।मैंने आईने से मुस्करा कर कहा,उनकी तस्वीर
 
देवेश प्रताप
Feb 25 2010 07:27 AM
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अनंत सफ़र....

१५ नवम्बर १९८९, को शुरू हुआ सचिन का ये अनंत सफ़र कब रुकेगा ये कोई नहीं जानता। इसका जवाब सिर्फ सचिन के ही पास है। कल सुबह ही मैंने अपने पोस्ट में लिखा था कि सचिन महान हैं ,इसका एक और उदाहरण आज उनकी एक और पारी देखने के बाद पता चलता है। आज की पारी ने तो
 
देवेश प्रताप
Feb 25 2010 12:48 AM
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क ख ग घ,,,,

रमेश मौर्या जहां ४ यार मित्र एक साथ बैठ जाएँ वहीं महफिल जम जाती है और फिर जाने क्या क्या बाते चलती हैं। ऐसे ही पिछले हफ्ते हम ५-६ मित्रो कि महफिल बैठी थी। हम सब में से ज़्यादातर ब्लॉग्गिंग में रूचि रखते हैं और ब्लॉग पढ़ते और लिखते हैं। बात शुरू हुए
 
देवेश प्रताप
Feb 24 2010 11:11 AM
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क्रिकेट बड़ा या सचिन...

क्रिकेट में एक कहावत है कि कोई खिलाड़ी खेल से बड़ा नहीं होता,और जब मैं नज़र घुमा कर देखता हूँ तो बात सच भी नज़र आती है, कि कोई भी खेल से बढकर नहीं है, लेकिन जब मेरी नज़र सचिन पर पड़ती है, तो मैं अपने आप में ही उलझ जाता हूँ कि क्या सच में सचिन बड़ा या खेल तब
 
देवेश प्रताप
Feb 24 2010 09:42 AM
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आधुनिकता हमारे धैर्य छमता को कमजोर कर रही है......

आज हम आधुनिक युग में हैं....जहाँ हर काम मिनटों में हो जाता है, बड़े से बड़े काम के लिए हमारे पास आज कई विकल्प होते हैं। ज्यादा नहीं २० साल पहले चले जाएँ और हम अगर आज के आधुनिक समय कि तुलना उस वक़्त के परिवेश से करे तो हम देखंगे कि किसी भी कार्य को करने
 
देवेश प्रताप
Feb 22 2010 07:21 PM
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देखा देखी पाप, देखा देखी पुण्य

विकास पाण्डेयबात तक़रीबन १६ साल पहले कि है, लेकिन आज भी नयी है । मेरी बूढ़ी आम्मा कहा करती थी कि ''बेटवा अच्छे बच्चो के साथ रहा करो,नेक बच्चो कि संगत करो। अच्छे कि संगत करोगे तो अच्छा बनोगे और बुरे के साथ में निसंदेह बुरा ही'' वो बात अलग है कि कमल के फूल
 
देवेश प्रताप
Feb 22 2010 07:19 AM
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तन्हाई कहती है .....

देवेश प्रतापतन्हाई अपनी व्यथा सुनाते हुए कहती है ......अक्सर वो मुझसे ख़फा रहते है । जाने क्यों मुझसे जुदा रहते है ॥ मैं दामन विछा देती हूँउनकी ख़ुशी के लिएजब उनके जीवन केफूल मुरझा जाते है ॥ मचल जाती हूँउनकी एक हंसी के लिएसहन होता नहीं ,ये देख करजब वो
 
देवेश प्रताप
Feb 20 2010 08:01 AM
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विद्यालय जैसे पवित्र जगह मत फैलाओ भेद भाव ...........

देवेश प्रतापएक समय हुआ करता था । जब गुरुओं से शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुल जाना पड़ता था मोह-माया छोड़ कर भौतिकवाद को त्याग कर शिक्षा प्राप्त किया जाता था , परन्तु समय के अनुसार धीरे धीरे सारे नियम बदलते गए जो की जरूरी भी था , शिक्षा ग्रहण करने के
 
देवेश प्रताप
Feb 19 2010 09:24 AM
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ए सपनों की परी,,,,,,,

देवेश प्रतापए सपनों की परीतू कंहा रहती है ।कभी मेरे बसेरे मेंआया करो ॥बैठेंगे खूब बातें करंगे ।हमें अपने भी किस्से सुनायाकरो ॥सपनों की दुनिया में साथसैर करंगे ।मेरे ख्वाबो को भी सजायाकरो ॥तेरे आने से दुनियां हँसी हो जाती है।मेरी दुनिया में भी फूल
 
देवेश प्रताप
टैग: दिल से
Feb 16 2010 10:23 AM
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गरीबी ने निशाना बनाया अंतर्राष्ट्रीय खिलाडी को

विकास पाण्डेयक़र्ज़ उतारने के लिए शूटर ने बेचा सामानउधार लेकर ''दोहा'' गया और सिल्वर मेडल भी लेकर आया,लेकिन इस बीच वह भीषण क़र्ज़ में डूबता चला गया ,हौसला अब जवाब देने लगा है।आज सुबह जब सोकर कर उठा और बालकनी के पास अख़बार उठाया और स्वभावतः न्यूज़ पेपर पीछे
 
देवेश प्रताप
Feb 15 2010 08:29 AM