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बैसवारी baiswari

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01 Jun 2010
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सड़क पर चलते हुए !

सड़क पर चलते हुए अकसर,सहम जाते हैं हम। बिलकुल बाएँ चलते हुए,'ट्रैफिक' के सारे नियमों को ध्यान में रखते हुए,संभल-संभल कर कदम बढ़ाते हैं,पर, कभी पीछे से,कभी आगे सेइतने पास से गुज़रता है वाहन कोई,कि लगता है कि बस,अभी 'गया' था...देखता हूँ सड़क पर चलते
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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प्रदूषण और हम !

कैसा सुन्दर घर-आँगन था,गली-मोहल्ले सारे, ठंडी-ठंडी हवा सुहानी ,प्यार से हमें दुलारे। फूल महकते वन-उपवन में,अपनी बाँह पसारे पशु -पक्षी चहके फिरते,बुझते मन के अंगारे। पर्यावरण-प्रदूषण जबसे हुआ है इस दुनिया में,घुट-घुट कर सब साँस ले रहे, अपनी-अपनी कुटिया
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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पाती मेरे नाम की !

अचानक बहुत दिनों बाद एक चिट्ठी के रूप में पोस्ट-कार्ड को पाकर जो आनंद मिला,वह कम-से-कम 'इंटरनेटी 'दुनिया की समझ के बाहर है। हमारे एक साथी हैं,जिनसे अब मुलाक़ात भी यदा-कदा होती है,बातचीत मोबाईलवा पे होती रहती है। यह चिट्ठी जो आई , उनके पिताजी की तरफ से आई
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Apr 21 2010 10:48 AM
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तुम हो न सके मेरे !

जिनकी हमें तलाश थी,वो इस तरह मिले,उनसे हुआ जो सामना ,हसरत से ना मिले।ख़्वाब-ओ-ख़याल क्या थे ,मिलने से उनके पहले,फूलों को थे तलाशते ,काँटे मुझे मिले।कल तक रहे जो हमदम, मेरे जनम-जनम के,जनम-जनम की बात क्या,दो पल भी ना मिले।इस ज़िन्दगी में क्या बचा,तनहाइयों
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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पढ़ने की ललक लेकर गए वे !

पिछले तीन-चार दिनों से वे कोमा में थे। हमें किसी बुरी खबर की आशंका थी,और अंततः कल शाम वो ख़बर मिली ,जिसने हमारे 'पंडितजी '(बचऊ पंडितजी) को भौतिक रूप से हमसे अलग कर दिया !क़रीब छः महीनों से वे अपने प्यारे गाँव को छोड़कर चिकित्सकीय इलाज़ के लिए
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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बाबाओं के पीछे क्यों !

आजकल बाबाओं के चर्चे अखबारों ,चैनलों और आम आदमी की ज़ुबान पर खूब हो रहे हैं। मैं यह पूछना चाहता हूँ कि बाबाओं ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया है जिसके लिए लोग उनके पीछे लट्ठ ले के पड़े हैं।भई,आज के बाबा हमारे ही समाज के अंग हैं,इसी से निकले हैं और अगर इसी में
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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महिला आरक्षण-क्रांतिकारी कदम !

यू पी ए सरकार पर जब इस सत्र में मंहगाई को लेकर चौतरफ़ा हमले होने वाले थे ,परिदृश्य एकदम से बदल गया है। सरकार के प्रबंधन में फिर से सोनिया गाँधी का हस्तक्षेप हुआ और एक बहु-प्रतीक्षित माँग को एक दिशा मिल गई। महिला-आरक्षण की माँग नई नहीं है । इसे पेश किये
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
टैग: महिला
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कैसी शिक्षा व्यवस्था ?

देश के सभी बोर्डों में बारहवीं का एक ही पाठ्यक्रम(गणित व विज्ञान) लागू किये जाने की बात तय हुई है,अच्छी खबर है। पर यहाँ मुख्य सवाल यह है कि क्या इतने भर से सारे बच्चों के साथ न्याय हो जायेगा ? हर प्रदेश में हर बोर्ड में,हर स्कूल में और हर अभिभावक की
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Mar 04 2010 05:56 PM
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होरी औ कम्पूटर बाबा !

होरी कै सबका मुबारकबाद !होरी तो हर साल की तरा आई है,मुदा अबकी हम स्वाचा कि होरी अपने कम्पूटर बाबा के साथै मनाइ । एकु दिन पहिलेहेते हम फेसबुक,ट्विटर और ब्लागवा मा धंसि गैन। जहाँ-तहां हम भकुअन कि तरा घूमित रहेन मुदा हमका कउनो रसिया न मिली जहिते हम फागुन की
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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Mar 03 2010 08:35 AM
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होली या ठिठोली !

हम तो यारों रंग ते खेली,वी ताने बन्दूक।हमरी ते तो पानी निकरै,औ उनकी ते हूक। ।हमरे रंग मिलावटी ,उनके असली लाल।बच्चे भी अब डर रहे, देख अबीर-गुलाल । ।होली आते ही हुए ,वो तो मालामाल।नकली मावा भले ही ,सबको करे हलाल। ।गुझिया,खुरमा खो गए बचपन के पकवान।फागुन में
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
टैग: कविता
Feb 28 2010 02:23 PM
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चुनावी भविष्यवाणी !

'बाबा' बैसवारी द्वारा बिना किसी राग-द्वेष के चुनावी-भविष्यवाणी प्रस्तुत की जा रही है,यह काफी कुछ सटीक बैठने जा रही है।कांग्रेस ==== 170भाजपा ==== 110तीसरा मोर्चा == 90सपा === 26बसपा === 21अन्य === 6०इस चुनाव में कांग्रेस के लिए 'अंडर-करंट' चल रहा
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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पुस्तक-मेला और पुलिस !

दिल्ली में हो रहे १९ वें विश्व पुस्तक-मेले के आख़िरी दिन मैं अपने-आप को रोक नहीं पाया और वहां अपनी उपस्थिति ऐसे दर्ज़ कराई गोया मेरे गए बिना यह मेला संपन्न ही न होता ! बहर -हाल मैं वहाँ पहुंचा तो अकेले था,पर अपन का नसीब ऐसा है कि हमें झेलने के लिए कोई न
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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आखिर सठिया गए हम !

बीती २६ जनवरी को अपन साठ के हो गए ,इस मायने में कि अपना क़ानून लागू हुए एतने बरस हो गए !पर क्या वह क़ानून जो मोटी-मोटी किताबों और फाइलों में दर्ज है और जिसके लिए बना है,क्या उस तक हम पहुंचा पाए है? जवाब निश्चित ही 'न' में होगा,यदि किसी गैर-सरकारी नुमाइंदे
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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शर्माजी हमें छोड़ गए !

उनकी उम्र लगभग ६८ साल थी और वे मुझसे तकरीबन २५ साल बड़े थे फिर भी हम दुःख ,सुख के साथी थे। प्रेम नाथ शर्माजी का इंतकाल कल २७ दिसंबर को हुआ,पर आज अचानक मुझे तब पता चला जब मैंने उनसे बात करने की कोशिश की,पर फ़ोन स्विच ऑफ था,तो मैं उनके घर की तरफ मुड़ लिया
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 26 2010 06:39 PM
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थप्पड़ मारा ,क्या बुरा किया ?

अभी कुछ रोज़ पहले एक खबर टी वी चैनेलों ने खूब दिखाई कि लखनऊ में डी एम साहेब ने एक 'अदने' से कर्मचारी को थप्पड़ रसीद कर दिया है ! इस खबर को भाई लोग बेकार में ही रबड़ की तरह खींच रहे हैं। अरे भाई ,कहाँ अपने आदरणीय डी एम साहेब और कहाँ वह अदना सा कर्मचारी ? यह
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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Jan 25 2010 09:04 AM
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सर्दी की छुट्टी !

आख़िरकार दिल्ली में बढ़ती ठंड को देखते हुए आठवीं तक के बच्चों को विद्यालय से पूरे हफ़्ते की छुट्टी दे दी गई । लगातार तीन दिनों से शीत-लहर का प्रकोप ज़ारी है, जिससे यह थोड़ी देर से ही सही ,बिलकुल सही कदम है। शीत-लहर की ठिठुरन बड़े-बड़ों को कंपा देती है,तो फिर
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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अब तो फागुन आयो रे !

पिया मिलन का दर्द सताए,अपना कोई मिलने आए,खड़ी द्वार पर जिसे निहारूँ ,अब तो फागुन आयो रे !बासंती मौसम अब आया ,पतझड़ नयी कोंपलें लाया ,मैं प्रियतम पर वारी जाऊँ,अब तो फागुन आयो रे !सरसों फूल रही खेतों में,कोयल कूके है पेड़ों में,लगता है मैं भी कुछ गाऊँ ,अब तो
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
टैग: कविता
Jan 21 2010 08:07 AM
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सिर्फ़ तुम्हारे लिए !

१ जब भी देखता हूँ , कोई साँवली सी सूरत,तुम्हारा ही अक्श उसमें नज़र आता है। २जब भी सामना होता है तुमसे मेरा ,नज़रें झुकाके मुझको, दिल में छुपा लेती हो ? ३जब भी लेता है कोई तुम्हारा नाम,दिल मेरा चुपचाप तस्दीक करता है ! ४मुझे डूबने दो इन झील-सी आँखों
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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Jan 15 2010 08:39 PM
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प्रभाष जोशी- क्रिकेट के लिए जिए.....

बीती रात भारत-आस्ट्रेलिया का पांचवां एक-दिवसीय मैच कई मायनों में न भुला पाने वाला सबक दे गया !सचिन के अतुलनीय पराक्रम के बाद भारत ने सिर्फ़ एक मैच ही नहीं गंवाया बल्कि अपने एक सच्चे सपूत को भी खो दिया जो किसी मैच की हार-जीत से परे बहुत बड़ी क्षति
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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छात्रों में नशाखोरी की बढती प्रवृत्ति !

आज हमारी चिंता का सबसे बड़ा विषय हमारे छात्रों में तेज़ी से बढ़ती नशाखोरी की प्रवृत्ति है।एक शिक्षक,अभिभावक या बतौर नागरिक हम सबकी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि यह और विकराल रूप ले, इसे ख़त्म करने में पहल करनी चाहिए। आज हम किसी भी सरकारी स्कूल के बाहर यह नज़ारा
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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ज़ोर का झटका धीरे से !

 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:37 PM
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रुचिका,राठौर और हमारा तंत्र !

रुचिका के बारे में आज हम सब भूल जाते ,पर एक जागरूक नागरिक का फर्ज़ पूरा करते हुए प्रकाश-परिवार ने वह मिसाल कायम की है, जिसे लोग अपने लोगों के लिए भी करने में घबड़ाते हैं। वह किशोरी एक 'बुरे अंकल' और ज़िम्मेदार ओहदे पर बैठे शख्स की बदनीयती का शिकार हो गई
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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रावन रथी, बिरथ रघुबीरा !

भारतीय जनता पार्टी इन दिनों संक्रमण काल से गुजर रही है। संघ के तथाकथित निर्देशों के तहत 'दुनिया' को दिखाने के लिए कुछ चेहरे इधर से उधर किये गए हैं,पर इससे इसका कायाकल्प हो जायेगा, यह सोचना फ़िज़ूल है। पार्टी के सर्वोपरि नेता आडवाणी जी अपने क्रियाकलाप से
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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छोटे राज्य, बड़ी राजनीति !

हालिया दिनों में देश भर में एक नई ही सनक सवार हुई है। तेलंगाना का मुद्दा भले ही काफी पुराना रहा है,पर जिस तरह से इससे निपटा गया ,वह ख़तरनाक और चिंताजनक है। आंध्र के लोगों को तेलंगाना भले न मिल पाया हो पर कई लोगों को अपनी राजनीति को चमकाने का मौक़ा ज़रूर
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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कोई डॉक्टर है क्या ?

अभी जल्दी में एक ख़बर आई कि अपनी राष्ट्रिय पार्टी ,भाजपा बीमार है,सुनकर बड़ा दुःख हुआ क्योंकि अपने को इस पार्टी से बेहद लगाव है। उसे क्या बीमारी है इस पर बाद में बात करते हैं ,सबसे पहले तो उसकी बीमारी पर हमारी चिंता तो जान लें !अगर एक देशभक्त पार्टी जो
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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अटलजी का संदेश !

बहुत दिनों बाद अटलजी की तरफ़ से कोई ख़बर आई,मन को थोड़ी ठंडक सी पहुँची कि अभी भी देश में ऐसी कोई आवाज़ है जो ख़बर बनती है !अटलजी का यह संदेश महाराष्ट्र व हरियाणा में हो रहे विधानसभा चुनावों के मद्दे-नज़र आया है,पर इसका प्रभाव मतदाताओं पर भी पड़ेगा ,इस बात से
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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जिन्ना,जसवंत और वो !

पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव कब के ख़त्म हो गए पर भारतीय जनता पार्टी का ख़ुमार अभी तक उतर रहा है। जो सिपाही कल तक पार्टी के लिए जी-जान से हुँकार भर रहे थे,वही आज उसका गिरेबाँ पकड़ कर अपना हिसाब माँग रहे हैं। ताजा संकट जिन्ना के बारे में किताब लिखने के बहाने
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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जश्न-ए-आज़ादी,--एक वार्षिक कार्यक्रम !

हमें आज़ादी मिले ६२ साल हो गए और अपनी पीठ भी इसलिए हमने हर साल थपथपाई है। हम सभी इस समय 'राष्ट्र -भक्ति' के खुमार में थोड़ी देर के लिए भले डूब जाते हैं पर यह ऐसी भावना है जो निरंतरता के साथ होनी चाहिए। जिन लोगों ने जिन लोगों के लिए बाहरी ताकतों से संघर्ष
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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आओ आओ प्यार करें !

हाल ही में जबसे दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में समलैंगिकों को कानूनी मान्यता प्रदान की है ,देश भर में एक अलग ही बहस चल पड़ी है। लोकतान्त्रिक देश में किसी विषय पर बहस होना बुरा नहीं है ,पर उस बहस का उद्देश्य ही बिल्कुल बदल जाता है जब यह मात्र
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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मायावती की नौटंकी !

आज की राजनीति में अपनी 'छवि' को चमकाने का सबसे सरल ,सस्ता तरीका है कि पहले से स्थापित किसी महान पुरूष को जी भर के गरिया दो या किसी बने-बनाए नियम के प्रतिकूल बयानबाजी कर दो । मायावती जैसे लोग इसी श्रेणी में आते हैं । इन्होंने अपनी राजनीतिक पारी ही गाँधीजी
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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खुला ख़त आडवाणी जी के नाम !

आदरणीय आडवाणी जी !मैं पहली बार किसी राजनेता और उससे भी ख़ास , भाजपा नेता से इस तरह सरे-आम रूबरू हूँ। अभी कुछ दिन पहले मुझे एक जानकारी मिली कि हालिया दिनों में 'गूगल -सर्च' में आप अव्वल नंबर पर रहे तो लगा कि आख़िर माज़रा क्या है? दर-असल जिस दिन से वह मुआ
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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उत्तर प्रदेश का संदेश !

पन्द्रहवीं लोकसभा के परिणाम आने के साथ ही सभी दलों के द्वारा मंथन-चिंतन शुरू हो चुका है। जनता ने अनपेक्षित रूप से इन चुनावों में जाति - धर्म की राजनीति करने वालों को करारा ज़वाब दिया है ,यह बात और है कि ऐसे दल इससे कुछ सबक लेते हैं या नहीं ?उत्तर प्रदेश
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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जनादेश के निहितार्थ !

राजनीतिक दलों,मीडिया,चुनाव आयोग,व्यवसाय जगत व जनता का लम्बा इंतज़ार बड़ी जल्दी ख़त्म हो गया और पन्द्रहवीं लोकसभा का नया स्वरुप सबके सामने आ गया। कितना नीरस रहा यह चुनाव परिणाम ! न कहीं कोई परिचर्चा,न कोई उलझन या दबाव और न ही किसी के विकल्प को 'खुला' रहने
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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सरकार के लिए जोड़-तोड़ !

नयी लोकसभा का गठन अब अपने अन्तिम चरण में है। जितनी अनिश्चितता और आशंकाएं इस बार के चुनावों में मतदाता के मन में रही हैं,उतनी शायद कभी नहीं रही। यह चुनाव असली मुद्दों से ज़्यादा भड़काऊ भाषणों ,करोड़पति उम्मीदवारों,अशालीन आक्षेपों और अनगिनत प्रधानमंत्री
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:34 PM
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बैसवारी baiswari

आख़िर हमहू तो हुवें के अहिन अउ बैसवारा का बड़ा जुड़ाव है अवधी ते !
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
Jan 14 2010 06:26 PM
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बात अपनों से !

हम २१ वीं सदी में लगातार अपने कदम बढ़ाते जा रहे हैं,पर हमारे नैतिक और शैक्षिक मूल्य निरन्तर पतन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आज समाज में कई कुरीतियों ने जन्म ले लिया है,जिसमें एक प्रमुख रूप से यह है कि हम अपना भौतिक विकास किसी भी कीमत पर करना चाहते हैं।
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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हंटरमैन चला गया !

प्रभाष जोशी दूसरों को ख़बरदार करने वाले और उनको ख़बर देने वाले प्रभाष जोशी अब ख़ुद एक ख़बर बन गए !उनका दुनिया से जाना इसलिए भी खटकता है कि अपने पेशे को महज़ औपचारिकतावश नहीं निभाया वरन अपनी पूरी जान लगाकर उसका मान भी बढ़ाया है। वे मरते दम तक पत्रकारीय
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI