ढाई घर's Image
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नयी प्रविष्टी लिखी
29 Jan 2010
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मेरे अवगुन चित न धरो...

जब, उन्होंने अपने मंत्री मंडल का विस्तार किया । तो विपक्षियों ने कहा कि, ‘‘सभी दागियों-बागियों को वापस बुला लिया है।’’ मुझे बहुत बुरा लगा । वे भी तो कभी सत्ता में रहे हैं। क्या ‘हम्माम’ में, मैं ही कपड़े पहने खड़ा रहूँ ?! वैसे भी, हमारी पार्टी में जो भी
 
Dhaighar
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क्षणिका

बाप सत्यनारायण की कथापढ़ते थेबेटासत्यकथा पढ़ रहे हैंहम"सुनहरे कल की ओर" बढ़ रहे हैं.
 
Dhaighar
Sep 08 2008 08:15 PM
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क्षणिका

कवियह सुनकरखुश होते हैंकिदीवारों के भीकान होते हैं.
 
Dhaighar